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दरबार मूव की वापसी: प्रभाव एवं चुनौतियाँ (Revival of Darbar Move: Impacts and Challenges)

By Result Mitra •

दरबार मूव की वापसी: प्रभाव एवं चुनौतियाँ | Result Mitra
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दरबार मूव की वापसी: प्रभाव एवं चुनौतियाँ

Revival of Darbar Move: Impacts and Challenges

Date: 21/10/2026  |  Source: The Hindu
संदर्भ

जम्मू और कश्मीर सरकार ने श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन राजधानी) से जम्मू (शीतकालीन राजधानी) के लिए वार्षिक राजधानी स्थानांतरण (‘दरबार मूव’) की प्रथा को पुनः शुरू करने की घोषणा की है। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल प्रशासन द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया था, जिसे नव-निर्वाचित राज्य सरकार द्वारा पुनः बहाल किया जा रहा है। इसके तहत फाइलें और कर्मचारी 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को जम्मू स्थानांतरित होंगे तथा 2 नवंबर से शीतकालीन राजधानी में कामकाज शुरू होगा।

Learning for UPSC Mains
  • शासन एवं नीति निर्माण (GS Paper 2): क्षेत्रीय आकांक्षाओं, सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन की आवश्यकता।
  • वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यय: डिजिटल गवर्नेंस (जैसे e-Office) के दौर में पारंपरिक प्रथाओं की प्रासंगिकता और उनके कारण होने वाले वित्तीय बोझ का मूल्यांकन।
  • संघवाद और क्षेत्रीय एकीकरण: दो भिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों (जम्मू और कश्मीर घाटी) के बीच संवाद और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में प्रशासनिक उपस्थिति की भूमिका।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
Q. “जम्मू और कश्मीर में ‘दरबार मूव’ जैसी शताब्दी पुरानी प्रशासनिक प्रथाओं का पुनरुद्धार क्षेत्रीय एकीकरण और प्रशासनिक दक्षता के बीच एक द्वंद्व को दर्शाता है।” डिजिटल शासन के इस युग में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर का प्रारूप

भूमिका: ‘दरबार मूव’ का ऐतिहासिक परिचय (महाराजा रणबीर सिंह द्वारा 1872 में शुरुआत) और डेटा के साथ इसका हालिया संदर्भ।

मुख्य भाग:

  • क्षेत्रीय एकीकरण और सामाजिक-आर्थिक महत्व (डेटा व उदाहरण सहित):
    • जम्मू और कश्मीर संभाग के बीच सांस्कृतिक संतुलन।
    • स्थानीय अर्थव्यवस्था (पर्यटन, खुदरा व्यापार, आतिथ्य क्षेत्र) को संबल।
  • प्रशासनिक, वित्तीय और तार्किक चुनौतियाँ (डेटा सहित):
    • प्रतिवर्ष होने वाला वित्तीय खर्च (~200 करोड़ रुपये का वार्षिक बोझ)।
    • कार्यबल और समय की हानि (वर्ष में 1-2 महीने का उत्पादकता नुकसान)।
    • e-Office एवं ‘Digital India’ के सिद्धांतों के साथ टकराव।
  • इतिहास और रुझान: डोगरा शासन से लेकर 2021 के e-Governance आदेश तथा 2025-26 की बहाली का घटनाक्रम।
  • आगे की राह: हाइब्रिड मॉडल, डिजिटल सचिवालय और क्षेत्रीय विकेंद्रीकरण।

निष्कर्ष: वित्तीय दक्षता और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच संतुलित दृष्टिकोण पर समापन।

मॉडल उत्तर

भूमिका

‘दरबार मूव’ जम्मू और कश्मीर की 150 साल पुरानी एक अनूठी प्रशासनिक परंपरा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1872 में डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने की थी। इसके अंतर्गत राज्य सचिवालय और प्रमुख सरकारी कार्यालय वर्ष में दो बार (मई से अक्टूबर श्रीनगर तथा नवंबर से अप्रैल जम्मू) स्थानांतरित होते हैं। वर्ष 2021 में डिजिटल गवर्नेंस को अपनाते हुए इसे रोक दिया गया था, लेकिन हाल ही में इसे पुनः बहाल करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन पर एक नई बहस को जन्म देता है।

क्षेत्रीय एकीकरण और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकता

  • क्षेत्रीय संतुलन और शासन तक पहुँच: जम्मू (डोगरा संस्कृति) और कश्मीर (घाटी) की भौगोलिक और सांस्कृतिक भिन्नताओं को देखते हुए यह व्यवस्था दोनों संभागों के नागरिकों के लिए सरकार तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करती है।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति:
    • उदाहरण: शीतकाल के दौरान श्रीनगर से हजारों सरकारी कर्मचारियों के जम्मू स्थानांतरित होने से जम्मू का ‘रघुनाथ बाज़ार’ तथा होटल और खुदरा व्यापार अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।
    • व्यापारिक प्रभाव: जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (JCCI) के अनुमानों के अनुसार, ‘दरबार मूव’ के रुकने से जम्मू के स्थानीय व्यापार और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र के राजस्व में गिरावट दर्ज की गई थी।
    • सामाजिक संवाद: यह व्यवस्था सिविल सेवा अधिकारियों और दोनों क्षेत्रों की जनता के बीच अंतर-क्षेत्रीय तालमेल और विश्वास का निर्माण करती है।

प्रशासनिक, वित्तीय और तार्किक चुनौतियाँ

  • भारी वित्तीय बोझ: विभिन्न प्रशासनिक आकलनों के अनुसार, प्रत्येक स्थानांतरण चक्र में परिवहन, सुरक्षा, अस्थायी आवास और यात्रा भत्तों पर प्रतिवर्ष लगभग ₹200 करोड़ का गैर-विकासात्मक व्यय होता है।
  • कार्य-उत्पादकता में कमी: स्थानांतरण की इस प्रक्रिया के दौरान फाइलों की पैकिंग, परिवहन और पुनर्व्यवस्था में प्रतिवर्ष 4 से 6 सप्ताह का मूल्यवान प्रशासनिक समय नष्ट होता है।

    उदाहरण: आपातकालीन नीतियों और त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में फाइल मूवमेंट के कारण देरी होती है।

  • डिजिटल शासन से टकराव: राष्ट्रीय स्तर पर लागू ‘e-Office’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के तहत जब भौतिक फाइलों की आवश्यकता समाप्त हो चुकी है, तब सैकड़ों ट्रकों में कागजी फाइलों को ले जाना तकनीकी प्रगति के विपरीत प्रतीत होता है।

इतिहास एवं प्रशासनिक रुझान

  • ऐतिहासिक शुरुआत (1872): अत्यधिक सर्दियों से बचने और दोनों संभागों में राजा की प्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज कराने हेतु शुरू किया गया।
  • 2021 का डिजिटल मोड़: वर्ष 2021 में पूरी तरह से e-Office प्रणाली लागू कर भौतिक फाइलों के स्थानांतरण को बंद कर दिया गया था, जिससे वार्षिक वित्तीय बचत हुई।
  • वर्तमान रुझान (2025-26): नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा इसे पुनः शुरू करना यह स्पष्ट करता है कि केवल तकनीकी दक्षता ही काफी नहीं है; लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाएँ और जनभावनाएँ भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं।

आगे की राह

  • हाइब्रिड प्रशासनिक मॉडल (Hybrid Model): भौतिक रूप से फाइलों का स्थानांतरण पूरी तरह बंद कर 100% ‘e-Office’ मॉडल अपनाया जाना चाहिए, जबकि प्रशासनिक प्रमुखता बनाए रखने के लिए केवल न्यूनतम आवश्यक अमले का स्थानांतरण किया जाए।
  • मंत्रियों और अधिकारियों की चक्रीय उपस्थिति (Rotational Presence): मंत्रियों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों (Secretaries) के लिए एक ऐसा शेड्यूल बनाया जा सकता है, जिससे दोनों संभागों में उनकी नियमित और आनुपातिक उपस्थिति बनी रहे।
  • द्वि-क्षेत्रीय सचिवालय (Dual Secretariat Setup): जम्मू और श्रीनगर दोनों स्थानों पर स्थायी रूप से क्रियाशील मिनी-सचिवालय स्थापित किए जाएँ, जो आधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) प्रणाली और डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हों।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था का विविधीकरण: जम्मू की अर्थव्यवस्था को केवल ‘दरबार मूव’ पर निर्भर रखने के बजाय पर्यटन, निवेश और औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के माध्यम से विविधता प्रदान की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

‘दरबार मूव’ का मुद्दा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रीय ताने-बाने से जुड़ा हुआ विषय है। डिजिटल युग में 150 साल पुरानी व्यवस्था को उसके मूल स्वरूप में चलाना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है, लेकिन इसके सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। इसलिए, डिजिटल दक्षता (e-Governance) और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व (Regional Equity) का एक न्यायसंगत संतुलन ही जम्मू और कश्मीर में समावेशी विकास का स्थायी मार्ग प्रशस्त करेगा।

अभ्यास प्रश्न

Q. ‘दरबार मूव’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. यह जम्मू और कश्मीर में ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन राजधानियों के बीच सचिवालय के वार्षिक स्थानांतरण की प्रथा है।

2. इस प्रथा की शुरुआत 19वीं शताब्दी में डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह द्वारा की गई थी।

3. e-Office प्रणाली के लागू होने के बाद इस प्रथा को पूरी तरह से संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) केवल 1 और 2

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