पश्चिमी घाट पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट आजीविका के लिए खतरा (Kasturirangan Report on the Western Ghats: A Threat to Livelihoods)

           

Source: The Hindu

संदर्भ (Context)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के प्रस्तावित कार्यान्वयन से 10 जिलों के लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है. इस रिपोर्ट ने कर्नाटक के पश्चिमी घाट के 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (1,449 गांवों को कवर करते हुए) को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के रूप में चिह्नित किया है, जिससे किसानों और निवासियों में व्यापक चिंता पैदा हो गई है.

उत्तर प्रारूप (Answer Format)

प्रस्तावना

पश्चिमी घाट एक वैश्विक जैव-विविधता हॉटस्पॉट और प्रमुख नदियों का उद्गम क्षेत्र है, जहाँ संरक्षण और विकास के बीच संतुलन आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा उत्तर प्रारूप

भूमिका: पश्चिमी घाट का भौगोलिक और पारिस्थितिक महत्व।
मुख्य भाग (बहु-आयामी विश्लेषण):
गाडगिल बनाम कस्तूरीरंगन रिपोर्ट: गाडगिल का संपूर्ण क्षेत्र संरक्षण दृष्टिकोण और कस्तूरीरंगन का 37% क्षेत्र को ESA घोषित करने का व्यावहारिक दृष्टिकोण।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: किसानों और स्थानीय लोगों की आजीविका पर संकट और ‘केरल मॉडल’ की मांग।
NGT और न्यायिक भूमिका: सतत विकास और सावधानी के सिद्धांत के तहत अवैध खनन और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन।

निष्कर्ष: सहभागी संरक्षण और वैज्ञानिक नीतियों का समन्वय।

पश्चिमी घाट भारत का लगभग 1,500 किमी लंबा वैश्विक जैव-विविधता हॉटस्पॉट है, जो छह राज्यों—गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु—में विस्तृत है। यह गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम क्षेत्र होने के साथ-साथ लगभग 5 करोड़ लोगों के जल, कृषि और आजीविका का आधार है। उच्च स्थानिकता, वनों का तीव्र विखंडन, खनन, बांध, पर्यटन तथा भूस्खलन जैसी चुनौतियाँ पश्चिमी घाट के संरक्षण को अनिवार्य बनाती हैं।

गैडगिल और कस्तूरीरंगन रिपोर्टों का तुलनात्मक परीक्षण
आधारमाधव गैडगिल समिति (WGEEP, 2011)कस्तूरीरंगन समिति (HLWG, 2013)
दृष्टिकोणपारिस्थितिकी-केंद्रित और विकेंद्रीकृतसंरक्षण तथा विकास के बीच व्यावहारिक संतुलन
क्षेत्रसंपूर्ण पश्चिमी घाट को ESA; लगभग 64% क्षेत्र को ESZ-1, 2 और 3 में विभाजितलगभग 37%, यानी 59,940–60,000 वर्ग किमी को ESA
प्रशासनपश्चिमी घाट पारिस्थितिकी प्राधिकरण तथा ग्राम-स्तरीय भागीदारीमौजूदा संस्थाओं को मजबूत करना तथा Decision Support and Monitoring Centre
प्रमुख प्रतिबंधESZ-1 में खनन, बड़े बांध, ताप विद्युत तथा अत्यधिक प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कठोर रोकESA में खनन, उत्खनन, बालू खनन, नए ताप विद्युत संयंत्र तथा Red-category उद्योगों पर रोक
स्थानीय आजीविकाग्रामसभा, सामाजिक अंकेक्षण तथा स्थानीय समुदायों की निर्णायक भूमिकाकृषि, बागान तथा आबादी वाले सांस्कृतिक परिदृश्य को सामान्यतः ESA से बाहर रखने का प्रयास

गैडगिल रिपोर्ट की प्रमुख शक्ति उसका landscape-level approach था। इसने केवल संरक्षित क्षेत्रों को संरक्षण की इकाई न मानकर पूरे पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षण के दायरे में रखा। ग्रामसभा की सहमति, सामाजिक अंकेक्षण, स्थानीय जैव-संसाधन प्रबंधन तथा क्षेत्र-विशिष्ट प्रतिबंध लोकतांत्रिक पर्यावरणीय शासन को मजबूत कर सकते थे। किंतु लगभग 64% क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध, नए विकास-प्रकल्पों पर व्यापक नियंत्रण तथा राज्य सरकारों और स्थानीय उत्पादकों से पर्याप्त परामर्श का अभाव इसे राजनीतिक रूप से कठिन बनाता था।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट ने रिमोट सेंसिंग, जैव-विविधता, वन-विखंडन तथा जनसंख्या घनत्व के आधार पर अपेक्षाकृत संकीर्ण ESA प्रस्तावित किया। पश्चिमी घाट क्षेत्र का लगभग 60% सांस्कृतिक परिदृश्य और केवल 41% प्राकृतिक परिदृश्य था; इसलिए लगभग 37% प्राकृतिक, अपेक्षाकृत अखंड और जैविक रूप से समृद्ध क्षेत्र को ESA बनाना अधिक व्यावहारिक था। फिर भी, इसकी आलोचना हुई कि उपग्रह-आधारित सीमांकन स्थानीय पारिस्थितिक ज्ञान, छोटे किसानों, आदिवासियों तथा ग्राम-स्तरीय सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से नहीं पकड़ता। ‘प्राकृतिक’ और ‘सांस्कृतिक’ क्षेत्र का विभाजन भी कृत्रिम है, क्योंकि कॉफी, इलायची और मसाला बागान स्वयं जैव-विविधता गलियारों का हिस्सा हो सकते हैं।

NGT ने पर्यावरणीय शासन में सतत विकास, सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत को प्रभावी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक महत्वपूर्ण मामले में NGT ने केरल को गैडगिल रिपोर्ट के अनुरूप पर्यावरणीय मंजूरियाँ देने का निर्देश दिया; सर्वोच्च न्यायालय ने उस आदेश के विरुद्ध राज्य की चुनौती स्वीकार नहीं की। इससे यह सिद्धांत मजबूत हुआ कि पर्यावरणीय मंजूरी केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और संचयी प्रभाव आकलन पर आधारित प्रक्रिया होनी चाहिए।

कस्तूरीरंगन आधारित केंद्रीय निर्देशों में ESA के भीतर खनन, उत्खनन और बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध, मौजूदा खदानों को अधिकतम पाँच वर्षों में चरणबद्ध बंद करना, नए ताप विद्युत संयंत्रों तथा Red-category उद्योगों पर रोक और बड़े निर्माण-प्रकल्पों पर नियंत्रण रखा गया। जलविद्युत परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 30% lean-season ecological flow, परियोजनाओं के बीच कम-से-कम 3 किमी दूरी तथा नदी-बेसिन के 50% से अधिक प्रभावित न होने जैसी शर्तें निर्धारित की गईं।

NGT का योगदान केवल रोक लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। छोटे पत्थर-खदानों के लिए भी पर्यावरणीय मंजूरी, दूरी तथा विस्फोटन संबंधी मानक लागू करने से यह संदेश गया कि ‘लघु खनिज’ भी संचयी रूप से गंभीर पर्यावरणीय क्षति का कारण बन सकते हैं। परंतु न्यायिक सक्रियता की सीमा भी है—न्यायालय स्थानीय रोजगार का वैकल्पिक मॉडल, पुनर्वास और राजकोषीय क्षतिपूर्ति स्वयं विकसित नहीं कर सकता।

संतुलित नीति के लिए गैडगिल की ग्रामसभा-आधारित भागीदारी और कस्तूरीरंगन की वैज्ञानिक, चरणबद्ध तथा जोखिम-आधारित सीमा-निर्धारण को एकीकृत करना आवश्यक है। स्थानीय लोगों का विस्थापन न हो, कृषि और पारंपरिक बागान जारी रहें, लेकिन खनन, अनियंत्रित पर्यटन, बड़े बांध तथा प्रदूषणकारी उद्योगों पर कठोर नियंत्रण हो। इसके साथ Payments for Ecosystem Services, वन-आधारित लघु उद्यम, जैविक कृषि, समुदाय-स्वामित्व वाला इको-टूरिज्म तथा ग्रामसभाओं को सीधे संरक्षण-प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए। 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों की आजीविका संबंधी चुनौती को अंतिम अधिसूचना लंबित होने के आधार पर खारिज किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतिम समाधान न्यायालय से अधिक सहभागी, वैज्ञानिक और पारदर्शी नीति-निर्माण पर निर्भर है।

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Q.पश्चिमी घाट पारिस्थितिक समितियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

1- कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट ने कर्नाटक के पश्चिमी घाट क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में पहचाना है।
2- स्थानीय हितधारकों ने इन प्रतिबंधों के कारण ग्रामीण आजीविका के लिए संभावित खतरों को लेकर चिंता जताई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

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