- हालिया संदर्भ
- विश्व ऊर्जा की सांख्यिकीय समीक्षा 2024 के अनुसार, भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा खपत वर्ष 2023 में 39.02 एक्सा जूल थी, जो वैश्विक ऊर्जा खपत का 6.3% है।
- भारत वर्तमान में चीन और USA के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बडा ऊर्जा उपभोक्ता है।
ऊर्जा का महत्व :-
- औद्योगिक एवं घरेलू दोनों स्तर पर निर्बाध ऊर्जा-आपूर्ति भारत जैसी तेजी से बढती अर्थव्यवस्था के लिए सर्वोपरि आवश्यकताओं में से है।
- ऊर्जा आपूर्ति वास्तव में ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित है।
- ऊर्जा सुरक्षा का तात्पर्य है कि किसी देश के पास घरेलू मांग की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा है और बिजली प्रणालियों सहित ऊर्जा की अन्य बुनियादी ढांचा सभी खतरों से सुरक्षित है।
- ऊर्जा-खपत :-
- सांख्यिकी और कार्यान्वयत मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ऊर्जा सांख्यिकी भारत रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत का कुल प्राथमिक ऊर्जा उत्पादन 2022-23 में 19.55 एक्सा जूल था, जबकि इस अवधि के दौरान कुल ऊर्जा खपत 35.16 एक्साजूल था।
नोट :- 1 एक्साजूल 174 मिलियन बैरल तेल के समकक्ष होता है।
- 1 एक्साजूल का तात्पर्य 1012 MW होता है।
- आंकडे के अनुसार भारत में 68% ऊर्जा मांग घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरी की गई, जबकि अन्य बाहरी माध्यम से पूरा हुआ।
- कोयला भारत की प्राथमिक ऊर्जा-आपूर्ति का सबसे बडा स्त्रोत है, जिसका योगदान 2022-23 के दौरान कुल आपूर्ति में 58.12 % था।
- 2023 में 16.75 एक्साजूल ऊर्जा कोयले पर आधारित था, जबकि 21.38 एक्साजूल ऊर्जा की जरूरत के कारण भारत की बाहरी स्त्रोतों पर निर्भर रहना पडा।
तेल और गैस :-
- नीति आयोग के अनुसार, 2023 में 35.44% के साथ तेल एवं गैस भारत में प्राथमिक ऊर्जा-आपूर्ति का दूसरा सबसे बडा स्त्रोत है।
- भारत में, विश्व ऊर्जा-सांख्यिकीय समीक्षा 2024 के अनुसार 2023 में कुल तेल खपत 5.44 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, जबकि कुल घरेलू उत्पादन मात्र 0.73 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।
- इसी प्रकार गैस की खपत 62.6 बिलियन क्यूबिक मीटर था, जबकि प्राकृतिक गैस का उत्पादन मात्र 31.6 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) था।
- आंकडों से स्पष्ट है कि ज्यादातर तेल और गैस विदेशों से मंगाए जाते है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयाता के महत्व को दर्शाता है।
- तेल और गैस अन्य क्षेत्र के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही परिवहन सेवाओं को निर्बाध रूप से चालू रखने के लिये भारत को बडे पैमाने पर पेट्रोलियम आयात करना पडता है।
- खाडी देश : महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता :-
- भारत के तेल एवं प्राकृतिक गैस के कुल आयात में खाडी सहयोग परिषद (GCC) एवं ईरान तथा ईराक लगभग 55-60 % का योगदान देते है।
- वाणिज्य मंत्रालय के वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के अनुसार 2023-24 में भारत के शीर्ष 10 पेट्रोलियम आपूर्तिकर्ता में निम्न देश (स्थान सहित) शामिल है :–
प्रथम – रूस
द्वितीय – ईराक
तीसरे – सऊदी अरब
चौथे – UAE
पांचवे – USA
6 वे – ऑस्ट्रेलिया
7 वे – कतर
8 वे – इंडोनेशिया
9वे – कुवैत
दसवे – नाइजीरिया
- खाडी देश भारत में 1980 के दशक से ही शीर्ष पेट्रोलियम आपूर्तिकर्ता रहे है, जो अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम बाजार में मूल्य-आपूर्ति श्रृंखलाओं में उतार-चढाव के बावजूद विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बने हुए है।
- खाडी देश का निरंतर महत्व :-
- हाल के कुछ वर्षों में कार्बन-उत्सर्जन और अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम बाजार में अस्थिरता को देखते हुए भारत ने ऊर्जा खपत और पेट्रोलियम आयात के स्त्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है।
- अर्थात् भारत ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों, जैसे-पवन ऊर्जा, सौर- ऊर्जा एवं ज्वारीय ऊर्जा पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया है, साथ ही रूस, USA, ऑस्ट्रेलिया एवं नाइजीरिया जैसे देशों से पेट्रोलियम आयात को बढावा दिया है।
- उपरोक्त कारक के बावजूद खाडी देशों का महत्व ऊर्जा आपूर्ति क्षेत्र में बना हुआ है।
- सबसे महत्वपूर्ण कारक खाडी देशों के साथ भारत की भौगोलिक निकटता और स्थापित क्रेता-विक्रेता नेटवर्क है।
- इसके अलावा सऊदी अरब, UAE एवं कतर जैसे देशों द्वारा विशेष कीमतों पर तेल और गैस आपूर्ति करने की उनकी क्षमता और प्रतिबद्धता भी एक निर्णायक कारक है।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता को देखते हुए मजबूत राजनीति एवं आर्थिक संबंध, भू-राजनीतिक कारक एवं परिवहन बुनियादी ढांचा निर्बाध आपूर्ति के लिये आवश्यक घटक है।
- व्यापार एवं निवेश :-
- विश्व के सबसे बडे उपभोक्ताओं में से एक होने के कारण भारत बाजार आकर्षण के केन्द्र हैं, जो खाडी आपूर्तिकर्ताओं के लिये कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के लिये स्थिर और बडा बाजार प्रदान करता है।
- भारत ऊर्जा क्षेत्र में खाडी देशों के लिये महत्वपूर्ण गंतव्य बना हुआ है और यही कारण है कि सऊदी अरामको और अमीरती ADNOC जैसी बडी ऊर्जा निगमों ने भारत में दीर्घकालिक निवेश किये हैं।
- मजबूत, कूटनीति, राजनीतिक एवं आर्थिक संबंधों के कारण खाडी एवं पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के सबसे बडे आर्थिक साझेदारों में शामिल है।
- 2023-24 में भारत के कुल 1.11 ट्रिलियन USD के विदेशी व्यापार में से 208.48 बिलियन USD का व्यापार खाडी और पश्चिमी एशिया क्षेत्र के साथ हुआ, जो विदेशी व्यापार का 18.17% है।
- इसमें से 14.28% का योगदान GCC देशों से आया।
- उपरोक्त महत्व ने खाडी देशों को भारत की “लुक वेस्ट” नीति में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जा रहा है।
- भारतीय प्रवासियों की संख्या, प्रवासियों द्वारा भारत में भेजे जा रहे धन (Remmittance) एवं दो-तरफा भारी निवेश दोनों पक्षों के संबंधों के मजबूत घटक है।
- आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 8.5-9 मिलियन भारतीय GCC देशों मे रहते हैं, जो इस क्षेत्र में सबसे बडे प्रभावी समूह का गठन करते है।
- पिछले कुछ वर्षों से GCC देशों से भारत को प्राप्त होने वाला प्रेषण (Remmittance) भारत द्वारा प्राप्त कुल प्रेषण का 40-45 % है।
- 2023 में GCC देशों से भारत को कुल 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रेषण प्राप्त हुआ।
- UAE (7वें), USA(19वें) एवं कतर (24वें) स्थान पर मार्च 2024 तक भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के शीर्ष 25 स्त्रोतों में शामिल है।
- डद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अनुसार, अप्रैल 2000 से मार्च 2024 तक GCC देशों से कुल 24.09 बिलियन USD का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है।
- GCC बाजार में भारतीय निवेश एवं भागीदारी में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T) , शापूर जी, पालोन जी एवं TATA जैसी कंपनियों ने GCC देशों में निवेश बढाया है।
- वैसे तो 2000 के दशक से ही दोनों पक्षों के रिश्ते मजबूत रहे है, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में विशेषकर सऊदी अरब, UAE और कतर के साथ यह और भी मजबूत हुआ है।
- मजबूत द्विपक्षीय संबंध के कारण भारत की ईरान एवं वेनेजुएला पर प्रतिबंधों, अरब स्प्रिंग के प्रभावों एवं कोविड-महामारी के दौरान चुनौतियों से उबरने में मदद मिली है।
- निष्कर्ष :-
- खाडी देश, जिनके पास दुनिया के सबसे बडे पेट्रोलियम भंडारों में एक मौजूद है और साथ ही जो हाइड्रोकार्बन के सबसे बडे उत्पादकों एवं निर्यातकों में शामिल है, ने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के आधार पर भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- GCC Gulk Co-operation council :-
- रियाद, सऊदी अरब में 1981 में स्थापित,
- सऊदी अरब, UAE कतर, बहरीन, ओमान एवं कुवैत सदस्य
- सभी देश GCC के संस्थापक सदस्य ही हैं।
- सामान्यतः जिन देशों की सीमा Gulk of Persia यानि फारस की खाडी से मिलती है,उन्हें खाडी देश कहा जाता है।
- ईरान और ईराक भी फारस की खाडी से सीमा साझा करते है, लेकिन ये दोनों GCC के सदस्य नहीं हैं।