शहरी बाढ़ और आपदा तैयारी
Urban Flooding and Disaster Preparedness: The Monsoon Test
संदर्भ
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा होने की भविष्यवाणी के साथ ही वर्ष के अंत तक ‘अल नीनो’ (El Nino) के मजबूत होने की संभावना जताई गई है, जिससे पूर्वोत्तर मानसून की दस्तक चेन्नई के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।
नवंबर और दिसंबर के महीने ऐतिहासिक रूप से चेन्नई में अत्यधिक वर्षा और अनिश्चितता का पर्याय रहे हैं। हालांकि द्रविड़ सरकारों ने बार-बार बाढ़ के संकट से निपटने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन शहर की तेजी से बढ़ती आबादी और अनियोजित शहरीकरण ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) के बाढ़-संवेदनशील स्थानों में 2015 के लगभग 900 से सुधार हुआ है, फिर भी वर्षा के पैटर्न और मानसून-रोधी उपायों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
विभिन्न नागरिक निकायों, मेट्रो रेल, और जल संसाधन विभागों के बीच परामर्श और तालमेल की कमी के कारण मानसून पूर्व की तैयारियों और नालियों की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) के कार्यों में लगातार देरी और बाधाएं सामने आ रही हैं।
इसके अलावा, पल्लिकरणाई, पेरुम्बक्कम, और मडिपक्कम जैसी प्रमुख आर्द्रभूमि तथा चैनलों पर अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण ने प्राकृतिक जल निकासी और प्राकृतिक स्पंज तंत्र को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी का निकास अवरुद्ध हो जाता है और शहर जलमग्न हो जाता है।
यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए इससे सीख
शहरी नियोजन और जलवायु लचीलापन:
पारंपरिक ऐतिहासिक औसतों के बजाय चरम वर्षा की घटनाओं को ध्यान में रखने वाली वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई तूफानी जल निकासी प्रणालियों की तत्काल आवश्यकता है।
बहु-एजेंसी समन्वय:
पूर्व-आपदा योजना के दौरान नौकरशाही की बाधाओं और नागरिक निकायों, मेट्रो रेल तथा जल संसाधन विभागों के बीच परामर्श की कमी को दूर करना अनिवार्य है।
आर्द्रभूमि का संरक्षण:
प्राकृतिक जल निकायों, टैंकों और बाढ़ के मैदानों (जैसे पल्लिकरणाई और पेरुम्बक्कम) का संरक्षण करना आवश्यक है, जो प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करते हैं और शहरी बाढ़ को रोकते हैं।
सामुदायिक जुड़ाव:
स्थानीय आपदा तैयारी और निगरानी में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय नागरिकों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
Q.
भारतीय महानगरों में अनियोजित शहरीकरण और पारिस्थितिक क्षरण किस प्रकार शहरी बाढ़ के संकट को तीव्र करते हैं? चेन्नई के संदर्भ में जलवायु-लचीली शहरी जल निकासी और जल निकाय प्रबंधन के लिए सुधारात्मक उपाय सुझाएं।
उत्तर प्रारूप (Answer Format)
परिचय (Introduction):
शहरी बाढ़ को परिभाषित करें और इसके बढ़ते प्रभावों को रेखांकित करें।
मुख्य भाग (Body):
शहरी बाढ़ के प्रमुख कारणों की उप-हेडिंग के साथ बिंदुवार चर्चा।
प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges)।
केस स्टडी (Case Study) का संदर्भ।
आगे की राह / सुधारात्मक उपाय (Way Ahead)।
निष्कर्ष (Conclusion):
दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों के साथ समापन।
परिचय (Introduction)
शहरी बाढ़ समकालीन भारत में तीव्र और अनियोजित शहरीकरण, कंक्रीट के अत्यधिक विस्तार तथा जलवायु परिवर्तन जनित चरम मौसमी घटनाओं का एक गंभीर परिणाम है, जो महानगरों के जनजीवन और आजीविका को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है।
मुख्य भाग (Body)
1. शहरी बाढ़ के प्रमुख कारण
प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों का अतिक्रमण:
पल्लिकरणाई और पेरुम्बक्कम जैसी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि तथा प्राकृतिक बाढ़ के मैदानों पर अनियोजित बस्तियों और वाणिज्यिक परिसरों के अतिक्रमण ने शहर की प्राकृतिक जल भंडारण क्षमता को समाप्त कर दिया है।
दोषपूर्ण और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा:
तूफानी पानी की नालियों (Stormwater Drains) में समय पर गाद (Silt) न निकालने और गलत ढलान के कारण पानी के त्वरित निकास में बड़ी बाधा आती है।
शासन और बहु-एजेंसी समन्वय की विफलता:
नगर निगम, मेट्रो रेल और जल संसाधन विभागों के बीच आपसी परामर्श और तालमेल का अभाव रहता है।
2. प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges)
संस्थागत बाधाएँ (Institutional Silos):
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण शमन योजनाओं का क्रियान्वयन खंडित और अप्रभावी हो जाता है।
जलवायु अनिश्चितता (Climate Uncertainty):
अल-नीनो और अनिश्चित वर्षा पैटर्न के चलते अत्यधिक वर्षा की तीव्रता का सटीक अनुमान लगाना कठिन हो गया है।
कंक्रीट जंगल की समस्या:
अभेद्य सतहों (Impermeable Surfaces) के बढ़ने से भूमि का जल अवशोषण कम हो गया है और सतही अपवाह (Surface Runoff) अत्यधिक तीव्र हो गया है।
3. केस स्टडी: चेन्नई मॉडल और सीख (Case Study)
चेन्नई का अनुभव:
वर्ष 2015 और उसके बाद के मानसून सीजन में चेन्नई ने देखा कि कैसे नालियों के अवरुद्ध होने और आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण के कारण लाखों नागरिक प्रभावित हुए। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) द्वारा लगभग 4,100 झीलों और टैंकों के पुनरुद्धार तथा ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन बहु-एजेंसी समन्वय के अभाव के कारण जमीनी स्तर पर चुनौतियाँ बरकरार हैं।
मुख्य सीख:
केवल ढांचागत परियोजनाओं (Infrastructural Projects) से काम नहीं चलेगा, बल्कि पारिस्थितिक पुनरुद्धार (Ecological Restoration) और सामुदायिक निगरानी को भी शामिल करना होगा।
4. आगे की राह / सुधारात्मक उपाय (Way Ahead)
स्पंज सिटी मिशन (Sponge City Mission):
शहरों को ‘स्पंज सिटी’ के रूप में विकसित किया जाए जहाँ पार्क, आर्द्रभूमि और पारगम्य पेवमेंट्स (Permeable Pavements) वर्षाजल को स्वाभाविक रूप से सोख सकें।
एकीकृत बेसिन प्रबंधन (Integrated Basin Management):
नदी बेसिन और वाटरशेड के आधार पर जल निकासी की व्यापक योजना बनाई जाए।
सख्त ज़ोनिंग कानून (Strict Zoning Laws):
आर्द्रभूमि और बाढ़ के मैदानों पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण पर कड़ी रोक लगाई जाए।
समुदाय-आधारित आपदा तैयारी:
स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) को प्रशिक्षित कर उन्हें अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा जाए।
निष्कर्ष (Conclusion)
शहरी बाढ़ से स्थायी रूप से निपटने के लिए प्रतिक्रियावादी (Reactive) दृष्टिकोण को छोड़कर एक दीर्घकालिक, जलवायु-अनुकूल और विकेंद्रीकृत शहरी नियोजन की आवश्यकता है, जिसमें आर्द्रभूमि संरक्षण, जल निकायों की बहाली और पर्यावरण कानूनों का कड़ाई से प्रवर्तन शामिल हो।
अभ्यास प्रश्न
Q.
शहरी बाढ़ के कारणों और शमन रणनीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1.
शहरी आर्द्रभूमि और प्राकृतिक जल भंडारों का अतिक्रमण मानसून के दौरान वर्षाजल के प्राकृतिक भंडारण और क्षीणन को गंभीर रूप से बाधित करता है।
2.
‘स्पंज सिटी’ अवधारणा का उद्देश्य जल निकासी को तेज करने के लिए सभी प्राकृतिक जल निकायों को कंक्रीट चैनलों में बदलना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (a) केवल 1