UPSC प्रासंगिकता:
- GS II: संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 21, 48A, 51A(g)), राज्य और नागरिकों के कर्तव्य, न्यायिक सक्रियता, शासन ढांचा।
- GS III: पर्यावरण प्रदूषण, औद्योगिक खतरे, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, सतत विकास के सिद्धांत।
चर्चा में क्यों?
बढ़ते वायु प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण के बीच, भारत में स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का स्मॉग (smog), औद्योगिक खतरे और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर्यावरण की उपेक्षा के गंभीर स्वास्थ्य और पारिस्थितिक परिणामों को उजागर करते हैं। कानूनी ढांचे, न्यायिक व्याख्याएं और नियामक हस्तक्षेप तेजी से पर्यावरण संरक्षण को मौलिक अधिकारों और शासन की जिम्मेदारियों के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता दे रहे हैं।
पृष्ठभूमि
स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार न्यायिक व्याख्याओं, विधायी ढांचे और अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों के माध्यम से विकसित हुआ है।
- वायु प्रदूषण: दिल्ली और एनसीआर में वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों, पराली जलाने और निर्माण धूल के कारण अक्सर खतरनाक वायु गुणवत्ता का अनुभव होता है।
- स्वास्थ्य प्रभाव: सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10) और डीजल पार्टिकुलेट मैटर (DPM) फेफड़ों और रक्तप्रवाह में गहराई तक प्रवेश करते हैं, जिससे स्ट्रोक, हृदय और फेफड़ों के रोग होते हैं, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में।
- अल्पकालिक उपाय: वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड स्कूलिंग जैसे सरकारी निर्देश केवल कामचलाऊ समाधान हैं, जो संरचनात्मक शासन सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

संवैधानिक और न्यायिक आधार
- अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): सर्वोच्च न्यायालय ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978), रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटेलमेंट केंद्र बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1985), और एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987) में जीवन के अधिकार की व्याख्या करते हुए इसमें स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को शामिल किया।
- राज्य के नीति निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य:
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण की रक्षा करना और टिकाऊ कृषि सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है।
- अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।
- सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत (Public Trust Doctrine): प्राकृतिक संसाधन राज्य द्वारा जनता के लाभ के लिए ट्रस्ट के रूप में रखे जाते हैं (एम.सी. मेहता बनाम कमल नाथ), जो उनके टिकाऊ और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन अधिकार: एम.के. रंजीतसिंह बनाम भारत संघ (2024) में अनुच्छेद 21 और 14 के तहत प्रतिकूल जलवायु प्रभावों के विरुद्ध अधिकारों को मान्यता दी गई, जो पर्यावरणीय न्याय को समानता और जीवन से जोड़ता है।
पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांत
- पूर्ण दायित्व (Absolute Liability) बनाम कठोर दायित्व (Strict Liability):
- पूर्ण दायित्व: खतरनाक पदार्थों का उपयोग करने वाले उद्योग नुकसान के लिए पूरी तरह उत्तरदायी हैं (ओलियम गैस रिसाव मामला)।
- कठोर दायित्व: बिना किसी दोष के दायित्व, लेकिन इसमें कुछ अपवाद होते हैं।
- निवारक सिद्धांत (Precautionary Principle): वैज्ञानिक अनिश्चितता होने पर भी गंभीर या अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति के खिलाफ निवारक कार्रवाई की जानी चाहिए (वेल्लोर सिटीजन वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ, 1996)।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): प्रदूषण के लिए जिम्मेदार संस्थाएं इसके शमन और बहाली की लागत वहन करेंगी।
नियामक हस्तक्षेप
वायु गुणवत्ता प्रबंधन:
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) में संशोधन किया है:
- गंभीर प्रदूषण (चरण 3 और 4) के दौरान स्कूलों को अनिवार्य रूप से बंद करना।
- उत्सर्जन कम करने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव करना। पर्यावरण संरक्षण के लिए CSR:
- सर्वोच्च न्यायालय (दिसंबर 2025) ने फैसला सुनाया कि कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) दायित्वों के अंतर्गत आती है, जिससे कंपनियां आवास बहाली (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड मामला) के लिए धन दे सकती हैं।
चुनौतियां
- कार्यान्वयन अंतराल: उपाय अक्सर प्रशासनिक रूप से प्रतिक्रियाशील होते हैं; सफलता राज्य, केंद्रीय अधिकारियों और निजी संस्थाओं के बीच समन्वय पर निर्भर करती है।
- आवास मानचित्रण और निगरानी: गतिशील प्रजातियों और बिखरे हुए प्रदूषकों के लिए सटीक डेटा की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- संवैधानिक प्रवर्तन: पर्यावरणीय अधिकार अक्सर न्यायिक सक्रियता पर निर्भर करते हैं, उनमें स्पष्ट संवैधानिक मान्यता का अभाव है।
- विकास बनाम पारिस्थितिकी: आर्थिक विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना एक सतत चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
- संवैधानिक संशोधन: राज्य और नागरिकों दोनों को बाध्य करने के लिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को स्पष्ट रूप से मान्यता दी जानी चाहिए।
- नियामक तंत्र को मजबूत करना: रीयल-टाइम निगरानी, GRAP का कड़ाई से प्रवर्तन और औद्योगिक दायित्व ढांचे को लागू करना।
- सतत विकास को बढ़ावा: शहरी नियोजन और औद्योगिक परियोजनाओं में निवारक, प्रदूषक भुगतान और पूर्ण दायित्व सिद्धांतों को एकीकृत करना।
- कॉर्पोरेट क्षेत्र की भागीदारी: बहाली परियोजनाओं और जैव विविधता संरक्षण के लिए CSR और पर्यावरणीय वित्तपोषण का उपयोग करना।
- जनभागीदारी: नीति निर्देशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों के तहत नागरिक कार्रवाई, जागरूकता और अनुपालन को प्रोत्साहित करना।
निष्कर्ष
स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार अनिवार्य रूप से जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ा हुआ है। न्यायिक नवाचारों, नियामक सुधारों और CSR हस्तक्षेपों ने पर्यावरणीय शासन को मजबूत किया है। हालांकि, भारत में सतत विकास और मानवीय व पारिस्थितिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक मान्यता, प्रभावी प्रवर्तन और जनभागीदारी अभी भी आवश्यक है।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Questions)
प्रश्न 1.कणिकीय पदार्थ (Particulate Matter – PM) तथा भारत में वायु प्रदूषण प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- PM10 का अर्थ 10 माइक्रॉन या उससे कम व्यास वाले कणिकीय पदार्थ से है, जो फेफड़ों के भीतर गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं।
- डीज़ल पार्टिकुलेट मैटर (DPM), PM2.5 की एक उप-श्रेणी है और यह बच्चों में भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के अंतर्गत, उच्च प्रदूषण की स्थिति में विद्यालयों को बंद करना और कार्यालयों के समय को चरणबद्ध (staggered) करना, CAQM द्वारा किए गए नवीनतम संशोधनों के अनुसार अनिवार्य है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. 1, 2 और 3
D. केवल 1 और 3
उत्तर: C. 1, 2 और 3
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-से सिद्धांत/डॉक्ट्रिन भारत की पर्यावरणीय न्यायशास्त्र (Environmental Jurisprudence) का हिस्सा हैं?
- पूर्ण दायित्व सिद्धांत (Absolute Liability)
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle)
- सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle)
- लोक न्यास सिद्धांत (Public Trust Doctrine)
सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Question)
प्रश्न. “स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।”
इस कथन के आलोक में भारत में इस अधिकार का समर्थन करने वाले कानूनी, संवैधानिक तथा नीतिगत ढाँचों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। अपने उत्तर में न्यायिक हस्तक्षेपों की भूमिका, सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) एवं प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) जैसे पर्यावरणीय सिद्धांतों, तथा CAQM (Commission for Air Quality Management) और CSR (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) जैसी विनियामक व्यवस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
