19 October 2026 MCQ Practice
19 October 2026 MCQ Practice
Daily Current Affairs & UPSC/PCS Prelims Practice
हाल ही में विकसित ‘कु फरी जामुनिया’ (Kufri Jamuniya) किस्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘कु फरी जामुनिया’ भारतीय कृ षि अनुसंधान परिषद-कें द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) द्वारा विकसित आलू की एक जैव-संवर्धित (Biofortified) रंगीन किस्म है, जिसका गूदा विशिष्ट रूप से बैंगनी रंग का होता है।
2. यह नव-विकसित किस्म पारंपरिक मुख्य फसलों में छिपी भूख की समस्या से निपटने के लिए विटामिन सी, एंथोसायनिन (Antioxidants) और कै रोटीनॉयड के उच्च स्तरों से समृद्ध है।
3. कु फरी नीलकं ठ और कु फरी माणिक भी इसी अनुसंधान पहल के तहत विकसित आलू की अन्य पोषक तत्व-समृद्ध रंगीन किस्में हैं, जो आयरन और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: आलू अनुसंधान के क्षेत्र में शीर्ष संस्थान ICAR-CPRI (कें द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला) ने पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आलू की नवीन रंगीन किस्में विकसित की हैं। ‘कु फरी जामुनिया’ इसी अनुसंधान का परिणाम है। इसका बाहरी हिस्सा और आंतरिक गूदा (Pulp) दोनों ही गहरे बैंगनी रंग के होते हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए एक आकर्षक और अत्यधिक पौष्टिक विकल्प प्रस्तुत करते हैं।
कथन 2 सही है: पर्याप्त कै लोरी (पेट भरने) के बावजूद शरीर में आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी को ‘छिपी भूख’ (Hidden Hunger) कहा जाता है। ‘कु फरी जामुनिया’ मुख्य भोजन के माध्यम से ही इस सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी को पूरा करती है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट एंथोसायनिन (जो इसे बैंगनी रंग देता है), और कै रोटीनॉयड के उच्च स्तर मौजूद हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पोषण में सुधार करते हैं।
कथन 3 सही है: ICAR-CPRI की यह परियोजना के वल एक किस्म तक सीमित नहीं है। संस्था ने रंगीन और जैव-संवर्धित आलू की एक पूरी श्रृंखला तैयार की है, जिसमें कु फरी नीलकं ठ और कु फरी माणिक जैसी अन्य प्रमुख किस्में भी शामिल हैं। ये फसलें न के वल कै लोरी देती हैं बल्कि मिट्टी और भोजन से मानव शरीर में आयरन (लोहा) और जिंक (जस्ता) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) संबंधी संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संवैधानिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत भारतीय संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।
2. संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 के तहत लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का प्रावधान है।
3. समय से पहले भंग होने वाली विधानसभा के लिए मध्यावधि चुनाव के बाद गठित नई सभा के वल मूल चक्र की शेष अवधि तक कार्य करेगी।
उपरोक्त कथनों में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है:
- भारतीय संविधान में अमेरिका की तरह शक्तियों का कठोर पृथक्करण नहीं है, बल्कि एक मजबूत चेक्स एंड बैलेंसेज (नियंत्रण और संतुलन) की व्यवस्था है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने के सवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) और इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) जैसे ऐतिहासिक वादों में यह दृढ़ता से स्थापित किया है कि शक्तियों का पृथक्करण संविधान के मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है, जिसे संसद संशोधन करके भी समाप्त नहीं कर सकती।
- इसके तहत अनुच्छेद 50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने का निर्देश देता है। साथ ही, अनुच्छेद 121/211 (विधायिका में न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा पर रोक) और अनुच्छेद 122/212 (विधायिका की आंतरिक कार्यवाही की न्यायिक जांच पर रोक) इसके संस्थागत विन्यासों को सुदृढ़ करते हैं।
कथन 2 गलत है: दिसंबर 2024 में पेश किए गए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 का प्राथमिक विधिक ढांचा के वल लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने तक ही सीमित है। यह प्रस्तावित कानून रणनीतिक रूप से त्रि-स्तरीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के निचले स्तर यानी स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) को अपने मौजूदा दायरे से पूरी तरह बाहर रखता है। अतः स्थानीय निकायों को शामिल करने का दावा तकनीकी रूप से असत्य है।
कथन 3 सही है: देश में एक साथ चुनाव के राष्ट्रीय चक्र की निरंतरता को विधिक रूप से बनाए रखने के लिए इस विधेयक में अनुच्छेद 83 और 172 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत ‘शेष अवधि नियम’ लागू किया गया है। यदि कोई राज्य सरकार गिर जाती है या विधानसभा 5 वर्ष से पहले भंग होती है, तो वहां नए सिरे से मध्यावधि चुनाव तो कराए जाएंगे, लेकिन वह नई निर्वाचित विधायी संस्था पूर्ण 5 वर्ष का कार्यकाल भोगने के बजाय के वल मूल चक्र की बची हुई अवधि के लिए ही अस्तित्व में रहेगी। इससे अगली बार होने वाले आम चुनाव फिर से पूरे देश के साथ एक ही समय पर संरेखित हो सकें गे।
वैश्विक जलवायु नीति और भारत के कार्बन क्रे डिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. भारत का CCTS ढांचा बाध्यकारी लक्ष्यों और दंडात्मक प्रावधानों के साथ वर्तमान में लाइव हो चुका है।
II. वैश्विक संगठन OCCCM सदस्य देशों पर उत्सर्जन में कमी (Mitigation Targets) के विधिक लक्ष्य थोपता है।
III. भारत वर्तमान में ‘ओपन कोएलिशन ऑन कम्प्लायंस कार्बन मार्के ट्स’ (OCCCM) का सदस्य नहीं है।
उपरोक्त कथनों के आधार पर सही विकल्प का चयन कीजिए:
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन I सही है: भारत सरकार ने वर्ष 2023 से प्रस्तावित कार्बन क्रे डिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को व्यावहारिक रूप से लागू कर दिया है। लगभग 500 भारतीय कं पनियों ने इसके तहत पहली अनुपालन रिपोर्ट जमा की है। यह योजना अब बाध्यकारी लक्ष्यों और जुर्मानों (Penalties) के साथ लाइव है, जिसका उद्देश्य भारत के NDC लक्ष्यों और वर्ष 2070 के नेट-जीरो संकल्प को पूरा करना है।
कथन II बिल्कु ल गलत है: OCCCM (ओपन कोएलिशन ऑन कम्प्लायंस कार्बन मार्के ट्स) का उद्देश्य किसी देश पर जबरन कोई उत्सर्जन कटौती लक्ष्य थोपना नहीं है। यह के वल एक सहयोगी मंच है जिसका कार्य विभिन्न देशों के कार्बन बाजारों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability), कार्बन अकाउंटिंग पद्धतियों और ‘मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एंड वेरिफिके शन’ (MRV) प्रणालियों का समन्वय करना है।
कथन III बिल्कु ल सही है: यूरोपीय संघ, चीन और ब्राजील द्वारा फ्लोरेंस में शुरू किए गए इस अंतरराष्ट्रीय कार्बन गठबंधन (OCCCM) से भारत वर्तमान में बाहर (Outside) है। अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि यूरोपीय संघ के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैके निज्म’ (CBAM) जैसे सीमा-पार कार्बन टैक्स (Border Carbon Taxes) से निपटने के लिए भारत को इस नियम-निर्धारण मंच में शामिल होना चाहिए।
सूखा प्रभावित कृ षि क्षेत्रों के विनियामक प्रबंधन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. तेलंगाना सरकार ने एल नीनो (El Niño) के प्रभाव और व्यापक सूखे को देखते हुए कें द्र सरकार से मूल्य समर्थन योजना के तहत प्रमुख फसलों की खरीद पर लागू 25% की सीमा को हटाने का अनुरोध किया है।
II. कृ षि संकट से निपटने के लिए राज्य में 22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय कृ षि संस्थानों और विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाएगा।
III. कें द्र सरकार की वर्तमान विनियामक व्यवस्था के तहत, मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के अंतर्गत राज्यों से सभी अधिसूचित फसलों की शत-प्रतिशत खरीद अनिवार्य रूप से की जाती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन I सत्य है: तेलंगाना के 621 मंडलों में से 315 मंडल (लगभग आधे) गंभीर सूखे की चपेट में हैं। एल नीनो (El Niño) के इस प्रभाव के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए तेलंगाना के कृ षि मंत्री ने कें द्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य-मूल्य समर्थन योजना (MSP-PSS) के तहत मक्का, ज्वार और अन्य प्रमुख फसलों की खरीद पर लगी 25% की वर्तमान खरीद सीमा (Procurement Cap) को पूरी तरह हटाने का आग्रह किया है ताकि किसानों का पूरा उत्पाद खरीदा जा सके ।
कथन II सत्य है: कृ षि क्षेत्र को तकनीकी और व्यावहारिक राहत देने के लिए राज्य सरकार 22 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ लागू करने जा रही है। इस अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर के कृ षि संस्थानों और कृ षि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों को सीधे खेतों से जोड़कर फसल पैटर्न में बदलाव और नुकसान नियंत्रण पर सलाह दी जाएगी।
कथन III असत्य है: वर्तमान विनियामक नीति के तहत, मूल्य समर्थन योजना (PSS) के अंतर्गत कें द्र सरकार किसी राज्य में प्रमुख फसलों के कु ल उत्पादन का अधिकतम 25% हिस्सा ही एमएसपी पर खरीदने की अनुमति देती है (जो कि बजटीय और भंडारण सीमाओं के कारण है)। शत-प्रतिशत (100%) खरीद अनिवार्य नहीं है, और इसी 25% की सीमा को हटाने के लिए तेलंगाना सरकार वर्तमान में संघर्ष कर रही है ताकि संकटग्रस्त किसानों को बचाया जा सके ।
कें द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और उसके हालिया प्रशासनिक पुनर्गठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, CISF की तैनाती का प्राथमिक विषय ‘संघ सूची’ की प्रविष्टि 2 के अंतर्गत आता है, जबकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ‘राज्य सूची’ का विषय है।
2. इस पुनर्गठन के तहत, CISF के प्रशासनिक पर्यवेक्षण को भौगोलिक सीमाओं के बजाय पूरी तरह से क्षेत्र-विशिष्ट कार्यात्मक दृष्टिकोण (जैसे- पावर, स्टील, कोल सेक्टर) में बदल दिया गया है।
3. CISF को अंतर्राष्ट्रीय जहाज़ और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा कोड के तहत बंदरगाहों के लिए ‘मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन’ (RSO) नामित किया गया है, जो इसके क्षेत्राधिकार को वैश्विक मानकों से जोड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के तहत ‘कें द्रीय सशस्त्र पुलिस बल’ (CAPF), जिसमें CISF भी शामिल है, संघ सूची की प्रविष्टि 2 (Entry 2 – “Union’s armed forces”) के अंतर्गत आते हैं। इसके विपरीत, ‘लोक व्यवस्था’ और ‘पुलिस’ संविधान की राज्य सूची की क्रमशः प्रविष्टि 1 और 2 के तहत राज्य के अनन्य विषय हैं। CISF की तैनाती राज्यों में कें द्रीय संपत्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए की जाती है, जो संघ के इसी संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से शक्ति प्राप्त करती है।
कथन 2 सही है: CISF का पिछला पर्यवेक्षी ढांचा काफी हद तक भौगोलिक आधार पर व्यवस्थित था। इस ऐतिहासिक ओवरहॉल में, बल के ढांचे को बदलकर पूरी तरह कार्यात्मक दृष्टिकोण पर आधारित कर दिया गया है। जैसे- उत्तरी क्षेत्र को ‘पावर सेक्टर’, पूर्वी क्षेत्र को ‘कोयला सेक्टर’ और कें द्रीय क्षेत्र को ‘स्टील सेक्टर’ में बदल दिया गया है ताकि विशिष्ट औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञता (sector-specific expertise) विकसित की जा सके ।
कथन 3 सही है: CISF के बढ़ते वैश्विक और विशिष्ट जनादेश के तहत इसे International Ship and Port Facility Security (ISPS) Code के अंतर्गत बंदरगाह सुविधाओं के लिए Recognised Security Organisation (RSO) का दर्जा दिया गया है। यह सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समुद्री व्यापार सुरक्षा के अनुरूप मजबूत करने में मदद करता है।
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शिक्षण शुल्क के विनियमन और हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, निजी गैर-सहायता प्राप्त (Self-financing) संस्थानों द्वारा बीच सत्र में फीस बढ़ाना पूर्णतः प्रतिबंधित है, चाहे देश में असाधारण आर्थिक आपातकाल या वैधानिक बदलाव की स्थिति ही क्यों न हो।
2. टी.एम.ए. पाई (T.M.A. Pai Foundation) मामले में स्थापित न्यायिक सिद्धांत के तहत, निजी संस्थानों को ‘अधिशेष निधि’ (Surplus Funds) उत्पन्न करने का अधिकार है, बशर्ते उसका उपयोग मुनाफाखोरी (Profiteering) के लिए न होकर शिक्षा के विकास के लिए हो।
3. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के आंकड़ों के हवाले से न्यायालय ने रेखांकित किया कि सामान्य पाठ्यक्रमों की तुलना में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस में 700% से अधिक की अत्यधिक असमानता मौजूद है।
4. निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना और उनका प्रबंधन करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत एक मौलिक अधिकार है, जिस पर राज्य उचित प्रतिबंध लगा सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बीच सत्र में फीस बढ़ाना (Mid-stream fee hike) आम तौर पर वर्जित है ताकि छात्रों को अपनी वित्तीय देनदारी का पहले से पता हो। हालांकि, यह प्रतिबंध ‘पूर्णतः’ (Absolute) नहीं है। न्यायालय ने अपवाद स्वरूप “अप्रत्यक्ष या असाधारण आर्थिक स्थितियों” (Unforeseeable or extraordinary economic conditions) या “वैधानिक परिवर्तनों” (Statutory changes) के मामले में इसकी अनुमति दी है।
कथन 2 सही है: भारत में निजी शिक्षा विनियमन का आधार T.M.A. Pai Foundation (2002) और P.A. Inamdar (2005) के स रहे हैं। न्यायालय ने हमेशा माना है कि स्व-वित्तपोषित (Self-financing) संस्थानों को संस्थान के रखरखाव और विस्तार के लिए एक ‘उचित अधिशेष’ (Reasonable Surplus) अर्जित करने का अधिकार है, लेकिन वे व्यावसायिक मुनाफाखोरी (Profiteering) या ‘कै पिटेशन फीस’ नहीं वसूल सकते। वर्तमान निर्णय भी इसी संतुलन की बात करता है।
कथन 3 सही है: निर्णय में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने स्पष्ट रूप से NSSO के आंकड़ों का उल्लेख किया कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस सामान्य पाठ्यक्रमों से 711% (यानी 700% से अधिक) ज्यादा है, जो इसे किसी भी परिवार के लिए एक गंभीर वित्तीय प्रतिबद्धता बनाता है।
कथन 4 सही है: सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित फै सलों के अनुसार, किसी शैक्षणिक संस्थान की स्थापना करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत एक ‘पेशा या व्यवसाय’ (Occupation) चलाने के मौलिक अधिकार के अंतर्गत आता है। हालांकि, अनुच्छेद 19(6) के तहत राज्य छात्र कल्याण और शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए फीस-नियामक समितियों (Fee-fixation committees) के माध्यम से इस पर तार्किक प्रतिबंध लगा सकता है।
पूर्वोत्तर भारत में हालिया जातीय तनाव और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) का स्थानांतरण करने की अनन्य और अंतिम शक्ति के वल गृह मंत्रालय के पास होती है, राज्य सरकार के वल निलंबन की सिफारिश कर सकती है।
2. मणिपुर का कामजोंग जिला भारत-म्यांमार की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित है, जहाँ नागा और कु की दोनों समुदायों की मिश्रित आबादी ऐतिहासिक रूप से निवास करती है।
3. संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) का सुरक्षात्मक ढांचा मणिपुर के सभी पहाड़ी जिलों में पूर्ण रूप से लागू है, जो उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की स्वायत्तता देता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 गलत है: यद्यपि IPS अधिकारी ‘अखिल भारतीय सेवा’ (All India Services) का हिस्सा होते हैं, जिनकी कै डर नियंत्रण संस्था कें द्रीय गृह मंत्रालय है, लेकिन राज्य में तैनात IPS अधिकारियों के स्थानांतरण, पदस्थापना (Posting) और प्रशासनिक नियंत्रण का तात्कालिक अधिकार राज्य सरकार (मुख्यमंत्री और गृह विभाग) के पास होता है। मणिपुर सरकार ने स्वयं कामजोंग के SP (थोलू रॉकी) का तबादला कर जय बारंगे को नियुक्त किया।
कथन 2 सही है: भौगोलिक रूप से मणिपुर का कामजोंग जिला म्यांमार के साथ एक लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करता है। पूर्वोत्तर के इस सीमावर्ती क्षेत्र की जनसांख्यिकी संवेदनशील है, जहाँ नागा (जैसे तांगखुल नागा) और कु की समुदाय के गाँव एक-दूसरे के निकट बसे हैं, जिसके कारण यहाँ सीमा पार से होने वाली गतिविधियाँ और आंतरिक जातीय संघर्ष अक्सर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते हैं।
कथन 3 गलत है: संविधान की छठी अनुसूची मणिपुर राज्य में लागू नहीं है। छठी अनुसूची के वल असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (AMTM) के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है। मणिपुर के पहाड़ी जिलों में स्वायत्तता के लिए संविधान के अनुच्छेद 371C के तहत एक विशेष ‘पहाड़ी क्षेत्र समिति’ (Hill Areas Committee) का प्रावधान है, न कि छठी अनुसूची की जिला परिषदों का।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 की रिपोर्ट और महिला श्रम बल भागीदारी दर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2019-20 के बाद से अखिल भारतीय स्तर पर महिला श्रम बल भागीदारी में सुधार की गति शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति वर्ष 1.7 प्रतिशत अंक अधिक दर्ज की गई है।
2. वार्षिक औसत प्रतिशत बिंदु (AAPP) के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला श्रम बल भागीदारी दर में राष्ट्रीय औसत से अधिक की उच्चतम वृद्धि दर्ज की है।
3. देश के सभी कें द्र शासित प्रदेशों (UTs) ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में महिला श्रम बल भागीदारी के सुधार मानक (AAPP) में के वल नकारात्मक प्रवृत्ति प्रदर्शित की है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय स्तर पर महिला श्रम बल भागीदारी में सुधार की गति ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक तीव्र रही है। अखिल भारतीय ग्रामीण AAPP (वार्षिक औसत प्रतिशत बिंदु) शहरी आंकड़े की तुलना में प्रति वर्ष 1.7 प्रतिशत अंक अधिक है (ग्रामीण क्षेत्रों में यह 33% से बढ़कर 45.9% और शहरी क्षेत्रों में 23.3% से बढ़कर 27.7% हुआ है)।
कथन 2 सही है: अरुणाचल प्रदेश दोनों ही क्षेत्रों में अग्रणी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी वृद्धि दर सर्वाधिक (+8.28 प्रतिशत अंक प्रति वर्ष) रही, जो राष्ट्रीय ग्रामीण औसत (2.58) से तीन गुना अधिक है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में भी इसका AAPP अखिल भारतीय शहरी औसत (0.88) से 5.24 अंक अधिक रहकर शीर्ष पर है।
कथन 3 गलत है: दिल्ली और लक्षद्वीप (ग्रामीण व शहरी दोनों) तथा पुडुचेरी और लद्दाख (शहरी) जैसे कें द्र शासित प्रदेशों में नकारात्मक (Negative) वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन ‘सभी’ कें द्र शासित प्रदेशों में गिरावट नहीं हुई है; उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे कें द्र शासित प्रदेशों ने शहरी क्षेत्रों में सकारात्मक सुधार प्रदर्शित किया है और वे इस मानक में अग्रिम पायदानों पर शामिल हैं।
आंत सुरक्षा प्रणाली में हाल ही में चर्चित ‘RelB-RBP-J’ नेटवर्क के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एकल पृथक लिम्फोइड ऊतक (SILT) आंत की दीवार में स्थित वे संरचनाएं हैं, जो रोगाणुओं के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती हैं।
2. RelB प्रोटीन आंत में सुरक्षात्मक डेंड्रिटिक कोशिकाओं को प्रेरित करता है, जबकि लसीका ग्रंथियों में नियामक टी-कोशिकाओं को दबा देता है।
3. आणविक स्तर पर, RelB अपने समकक्ष RelA प्रोटीन की तुलना में एक अधिक शक्तिशाली जीन एक्टिवेटर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: एकल पृथक लिम्फोइड ऊतक (SILT) आंत की दीवार के भीतर स्थित ऐसी चौकियां हैं जिनमें मौजूद कोशिकाएं यह तय करती हैं कि प्रतिरक्षा प्रणाली आंत के रोगाणुओं के प्रति कितनी आक्रामक प्रतिक्रिया देगी। इसकी अतिसक्रियता से क्रोहन रोग जैसे विकार होते हैं।
कथन 2 सही है: RelB प्रोटीन दोहरा व्यवहार प्रदर्शित करता है। यह एक तरफ आंत में प्रहरी डेंड्रिटिक कोशिकाओं के निर्माण को संचालित करता है, वहीं दूसरी तरफ पास की लसीका ग्रंथियों में प्रतिरक्षा को शांत रखने वाली ‘नियामक टी-कोशिकाओं’ को निष्क्रिय कर आंत की सूजन को बढ़ा देता है।
कथन 3 गलत है: आणविक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के दौरान RelB अपने समकक्ष RelA की तुलना में एक कमजोर एक्टिवेटर है। जब ये दोनों एक ही जीन के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो कमजोर RelB वहां पहुंचकर RelA के मजबूत संके तों को बाधित (Block) कर देता है, जिससे यह कु छ जगहों पर दमनकारी की तरह काम करता है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और उसकी हालिया राजनयिक वार्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंघाई सहयोग संगठन के चार्टर के अनुसार, संगठन के भीतर द्विपक्षीय मुद्दों और सीमा विवादों को हल करना ‘शासनाध्यक्ष परिषद’ का मुख्य वैधानिक दायित्व है।
2. वर्ष 2026 में ताजिकिस्तान (दुशान्बे) में आयोजित संगठन की 25वीं सीएचजी बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री द्वारा किया गया, जबकि 2025 में मॉस्को में आयोजित बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री ने किया था।
3. भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का एक संस्थापक सदस्य देश है, जिसने इसके गठन के समय से ही इसके वित्तीय और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 गलत है: SCO के चार्टर के अनुसार, संगठन मुख्य रूप से बहुपक्षीय सहयोग (व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, कनेक्टिविटी) पर ध्यान कें द्रित करता है। संगठन के भीतर सदस्य देशों के द्विपक्षीय (Bilateral) मुद्दों और विवादों को उठाने की अनुमति नहीं है। अतः यह शासनाध्यक्ष परिषद (CHG) का वैधानिक दायित्व नहीं है।
कथन 2 सही है: 19-20 अक्टूबर 2026 को दुशान्बे (ताजिकिस्तान) में आयोजित 25वीं CHG बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने किया। वहीं, 18 नवंबर 2025 को मॉस्को (रूस) में आयोजित 24वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया था।
कथन 3 गलत है: भारत SCO का संस्थापक सदस्य नहीं है। शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी, जबकि भारत (और पाकिस्तान) को वर्ष 2017 में अस्ताना शिखर सम्मेलन के दौरान इसके पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। यद्यपि भारत वर्तमान में इसके डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप सहयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल होने का तथ्य गलत है।
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