चर्चा में क्यों?
भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच बहुपक्षीय संवाद, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक मंच प्रदान कर रहा है।
ब्रिक्स क्या है और इसकी पृष्ठभूमि
- ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—का एक प्रभावशाली समूह है, जिसमें हाल ही में नए सदस्यों के जुड़ने से इसका दायरा और बढ़ गया है।
- यह प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय और ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण तैयार करने का प्रमुख मंच है।
- भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है और संगठन की दिशा तय करने में हमेशा एक नेतृत्वकारी और संतुलनकारी भूमिका निभाता रहा है।
ब्रिक्स का उद्भव और विकास यात्रा
- गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट (2001): ‘ब्रिक’ (BRIC) संक्षिप्त नाम वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल इकोनॉमिक्स पेपर में गढ़ा गया था, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान था।
- औपचारिक स्थापना (2006): इन चार देशों के बीच राजनीतिक सहयोग के एक मंच के रूप में इसकी औपचारिक स्थापना हुई।
- वैश्विक वित्तीय संकट (2008): यह संकट ब्रिक्स के विकासक्रम में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जिससे आईएमएफ और विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्रभावी भागीदारी की मांग मजबूत हुई और 2009 के पहले येकातेरिनबर्ग शिखर सम्मेलन की नींव पड़ी।
- दक्षिण अफ्रीका का प्रवेश (2010): दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से ब्रिक का विस्तार होकर ब्रिक्स बन गया।
ब्रिक्स की प्रगति और विकास यात्रा
ब्रिक्स की यात्रा केवल आर्थिक मोर्चे तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका विस्तार राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग तक हुआ है:
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): वर्ष 2014 में स्थापित यह बैंक ब्रिक्स की सबसे बड़ी व्यावहारिक सफलता है। यह पश्चिमी नियंत्रण वाले विश्व बैंक और IMF के विकल्प के रूप में उभरते देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं को बिना किसी राजनीतिक शर्त के वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA): यह वित्तीय संकट या भुगतान संतुलन की समस्या के समय सदस्य देशों को अल्पकालिक तरलता सहायता (Liquidity Support) प्रदान करने का एक सुरक्षा जाल है।
- आतंकवाद विरोधी रणनीति: ब्रिक्स ने एक ठोस आतंकवाद विरोधी कार्ययोजना अपनाई है, जो सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी प्रगति है।
ब्रिक्स का विस्तार: बढ़ती पहुँच और पार्टनर देश
- पूर्ण सदस्यों का विस्तार: जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने, तथा जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ।
- सामूहिक प्रतिनिधित्व: सामूहिक रूप से ये सदस्य देश विश्व की 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार के 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- पार्टनर कंट्री फ्रेमवर्क (2025): इसके तहत दस देश—बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हुए, जो साउथ-सउथ सहयोग के अवसरों को मजबूत करते हैं।

ब्रिक्स की अध्यक्षता: क्रमिक व्यवस्था और भारत के पूर्व अनुभव
- अध्यक्षता: संक्षिप्त नाम के अक्षरों के क्रम के अनुसार हर वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक बदलती रहती है।
- 2012 (नई दिल्ली): “वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए ब्रिक्स साझेदारी” थीम। दिल्ली घोषणा-पत्र, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना की संभावना, स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा और कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) की नींव।
- 2016 (गोवा): “उत्तरदायी, समावेशी और सामूहिक समाधान का निर्माण” थीम। एनडीबी के संचालन को मजबूती, नवीकरणीय ऊर्जा, टीबी/एचआईवी नियंत्रण, आतंकवाद के खिलाफ एफएटीएफ मानकों पर जोर और बिम्सटेक आउटरीच शिखर सम्मेलन।
- 2021 (वर्चुअल): “ब्रिक्स@15: निरंतरता, मजबूती और सहमति के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग।” संयुक्त ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्ययोजना, ब्रिक्स डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन, वैक्सीन आरएंडडी केंद्र और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन।
भारत की 2026 की अध्यक्षता
- 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत द्वारा की जा रही है, जो इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का भारत का चौथा अवसर है।
- भारत की अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” है।
- यह विषय मौजूदा उपलब्धियों को मजबूत करने, संस्थागत प्रभावशीलता बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को प्रमुखता देने पर केंद्रित है।
ब्रिक्स 2026: मंत्रिस्तरीय बैठकों और पहलों के प्रमुख परिणाम
भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं, जो तीन स्तंभों (राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय, सांस्कृतिक-जनसंपर्क) पर आधारित थीं:
- कृषि एवं स्वास्थ्य: प्राकृतिक व जैविक कृषि के लिए उत्कृष्टता केंद्र, डिजिटल कृषि नेटवर्क, BRICS AGRIN, स्वस्थ जीवनशैली के लिए ब्रिक्स रोडमैप (2026-2029), टीसीआईएम (TCIM) विशेषज्ञ कार्य समूह, और निम्हान्स (NIMHANS) के समन्वय में मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण हब नेटवर्क।
- पर्यावरण एवं ऊर्जा: सतत जीवनशैली को बढ़ावा, स्मार्टग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत व डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र, ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब, क्लाइमेट रेज़िलिएंट अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर सिद्धांत और अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क।
- एमएसएमई, स्टार्टअप और विज्ञान: ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल, एमएसएमई फाइनेंस वर्कप्लान, ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड, और विज्ञान एवं अनुसंधान रिपॉजिटरी।
- लॉजिस्टिक्स, व्यापार और मानक: ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई-चेन सहयोग रूपरेखा, जीवीसी एक्शन प्लान (2026-2030), सीमा शुल्क मामलों में सहयोग समझौता, और मानकीकरण के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन।
- युवा और खेल: ब्रिक्स यूथ कोऑपरेशन फ्रेमवर्क 2026 और खेल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के लिए नए कार्य समूह का गठन।
ब्रिक्स के समक्ष चुनौतियाँ
- आंतरिक विविधता और भू-राजनीतिक अंतर: सदस्य देशों के बीच अलग-अलग रणनीतिक हित और आर्थिक प्राथमिकताएं होना।
- संस्थागत क्रियान्वयन: बड़े समझौतों और घोषणाओं को समय पर जमीन पर उतारने और व्यावहारिक परिणामों में बदलने की चुनौती।
- बाहरी दबाव और आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक असंगठन, व्यापार प्रतिबंध और भू-राजनीतिक तनाव।
- चीन-भारत द्विपक्षीय तनाव: सीमा विवाद और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण ब्रिक्स के भीतर पूर्ण सहमति बनने में कभी-कभी बाधा आती है।
आगे की राह
- व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर: वार्ताओं को आसान व्यापार, मजबूत निवेश प्रवाह और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलना होगा।
- सहमतियों का निर्माण: विविध सदस्य देशों के बीच आम सहमति कायम करते हुए मौजूदा व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता को मजबूत करना आवश्यक है।
- समावेशी वैश्विक वास्तुकला: ब्रिक्स को चीन-केंद्रित या किसी एक एजेंडे से आगे ले जाकर समुद्री सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक क्षमता और वैश्विक संस्थानों में सुधार का व्यापक हिस्सा बनाना चाहिए।
निष्कर्ष
भारत की 2026 की अध्यक्षता यह साबित करती है कि ब्रिक्स का उद्देश्य केवल समूह का दायरा बढ़ाना नहीं, बल्कि विविधता के बीच सहमति कायम करते हुए इसे वैश्विक संस्थानों में सुधार और एक अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए एक रचनात्मक तथा परिणामोन्मुख शक्ति के रूप में सुदृढ़ करना है।
UPSC PYQ
Q. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC Prelims 2016)
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) द्वारा की गई है।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: (B) केवल 2
Q. ‘ब्रिक्स’ (BRICS) के रूप में जाने जाने वाले देशों के समूह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC Prelims 2014)
- ब्रिक्स का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रियो डी जेनेरियो (ब्राजील) में आयोजित किया गया था।
- दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स समूह में शामिल होने वाला अंतिम देश था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: (B) केवल 2
प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
Q. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत वर्ष 2026 में चौथी बार ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
- वर्ष 2026 की अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय ‘सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक संघर्ष और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच, भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता किस प्रकार ग्लोबल साउथ के हितों को साधने और बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
