पश्चिमी घाट संरक्षण: पारिस्थितिक सुरक्षा बनाम स्थानीय आजीविका का द्वंद्व

पश्चिमी घाट संरक्षण: पारिस्थितिक सुरक्षा बनाम स्थानीय आजीविका का द्वंद्व
Date: 26/09.2026

पश्चिमी घाट संरक्षण: पारिस्थितिक सुरक्षा बनाम स्थानीय आजीविका का द्वंद्व

Western Ghats Conservation: The Conflict Between Ecological Security and Local Livelihoods
Source: The Hindu

संदर्भ

कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट एक विकास-समर्थक दृष्टिकोण रखती है जो पश्चिमी घाटों में मानवीय बस्तियों और कुछ आर्थिक गतिविधियों की अनुमति देती है, फिर भी कर्नाटक विधानसभा ने इसकी सिफारिशों को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के विरोध का मुख्य कारण 2012 के उपग्रह डेटा की सटीकता पर संदेह, राजस्व गांवों को पूरी तरह से पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) में शामिल करने के नियम, तथा खनन जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध के चलते विस्थापन और आजीविका का डर है। जहां अन्य राज्य (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु) केंद्र के साथ इस दिशा में समझौते या आंशिक संशोधन की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं कर्नाटक के लिए बिना किसी ठोस विकल्प के इस फ्रेमवर्क को पूरी तरह नकारना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए महत्व

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी): यह विषय पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता हॉटस्पॉट, और विकास बनाम पर्यावरण के संघर्ष को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संघीय ढांचा और प्रशासन: यह केंद्र और राज्यों के बीच पर्यावरणीय नीतियों के क्रियान्वयन, अंतर-राज्यीय समन्वय और विकेंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया के प्रशासनिक पहलुओं को उजागर करता है।
Q."पश्चिमी घाटों का संरक्षण राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा के लिए अनिवार्य है, किंतु यह स्थानीय आजीविका और विकासात्मक आकांक्षाओं की कीमत पर नहीं होना चाहिए।" कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट और कर्नाटक के संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास के इस द्वंद्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर-लेखन का प्रारूप
भूमिका: पश्चिमी घाटों के पारिस्थितिक महत्व और कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के मूल उद्देश्य का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग:
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के विरोध के प्रमुख कारण (जैसे- उपग्रह डेटा की त्रुटियां, राजस्व गांवों का वर्गीकरण और आजीविका का संकट)।
केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कमी तथा राज्यों (विशेषकर कर्नाटक) के समक्ष उत्पन्न चुनौतियाँ।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाने के उपाय।
निष्कर्ष: किसानों और श्रमिकों की आशंकाओं को दूर करते हुए और एक सुविचारित विकल्प प्रस्तुत करके पश्चिमी घाट के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने पर बल दें।

उत्तर

भूमिका

पश्चिमी घाट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जैव-विविधता हॉटस्पॉट में से एक हैं। इनके संरक्षण के लिए गठित कस्तूरीरंगन समिति ने क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी। हालांकि, यह रिपोर्ट पर्यावरण संरक्षण और मानवीय गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है, फिर भी राज्यों के स्तर पर इसके कार्यान्वयन को लेकर गंभीर विरोध देखने को मिला है।

1. पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक आयाम:
पश्चिमी घाट यूनेस्को के वैश्विक जैव-विविधता हॉटस्पॉट में शामिल हैं, जो देश की 30% से अधिक वन और वन्यजीव प्रजातियों का आश्रय स्थल हैं।
इस क्षेत्र में रिपोर्ट के तहत 37% हिस्से को ईएसए (ESA) घोषित करने से दक्षिणी प्रायद्वीप में मानसून की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही चरम मौसम की घटनाओं और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
वनों के संरक्षण से कार्बन सिंक क्षमता मजबूत होती है, जो राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
2. सामाजिक-आर्थिक और तकनीकी आयाम:
डेटा की सीमाएं: रिपोर्ट में वर्ष 2012 के पुराने रिमोट-सेंसिंग और उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया है, जिससे प्राकृतिक और मानव-निर्मित भू-दृश्यों की पहचान में तकनीकी त्रुटियों की आशंका है।
गायों और बस्तियों का समावेश: नियमों के अनुसार यदि किसी राजस्व गांव का कम से कम 20% हिस्सा संवेदनशील है, तो पूरे गांव को ईएसए में शामिल किया जाता है, जिससे कृषि भूमि और बस्तियां सीधे प्रभावित होती हैं।
आजीविका का संकट: खनन, बड़े बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक गतिविधियों पर प्रतिबंध के कारण स्थानीय निवासियों के समक्ष रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
विस्थापन का भय: स्थानीय समुदायों के बीच यह डर व्याप्त है कि इस नीति से उन्हें उनकी पारंपरिक जमीनों से विस्थापित किया जा सकता है, जिसे राजनीतिक स्तर पर भी बल मिलता है।
राजनीतिक और सहकारी संघवाद का आयाम:
राज्यों का भिन्न रुख: जहां एक ओर गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य केंद्र के साथ व्यावहारिक समझौतों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं कर्नाटक विधानसभा ने इस पूरे ढांचे को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है।
आंशिक संशोधन की मांग: केरल अपने पहले से सत्यापित 9,993 वर्ग किमी क्षेत्र को घटाकर 8,805 वर्ग किमी करना चाहता है, जबकि महाराष्ट्र और गोवा ने भी क्रमशः 378 और 21 गांवों को छूट देने की मांग की है।
केंद्र की नीतियां: केंद्र सरकार द्वारा 2024 में राज्यों को अपनी सुविधा के अनुसार राज्य-दर-राज्य ईएसए अधिसूचित करने की छूट दिए जाने से राज्यों पर दबाव बढ़ा है।
वैकल्पिक मानचित्र का अभाव: कर्नाटक द्वारा प्रस्ताव को पूरी तरह नकार तो दिया गया है, परंतु कोई ठोस और सुविचारित वैकल्पिक मानचित्र पेश न करने के कारण प्रशासनिक अनिर्णय की स्थिति बन गई है।
समाधान और आगे की राह:
वैज्ञानिक जमीनी सत्यापन: पुराने उपग्रह डेटा के स्थान पर आधुनिक तकनीक और 'ग्राउंड-थ्रूटिंग' (जमीनी सच्चाई) के आधार पर बस्तियों को ईएसए के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
सहभागी शासन: स्थानीय किसानों, श्रमिकों और ग्राम पंचायतों को विश्वास में लेकर नीतिगत निर्णय किए जाने चाहिए।
हरित मुआवजा (Green Incentives): जिन राज्यों या क्षेत्रों में वनों के संरक्षण के कारण विकास कार्य बाधित होते हैं, उन्हें केंद्र सरकार द्वारा विशेष 'पारिस्थितिक अनुदान' (Ecological Grants) दिया जाना चाहिए।
सतत विकास मॉडल: इको-टूरिज्म और पारंपरिक पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर आजीविका और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
निष्कर्ष

पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास परस्पर विरोधी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। कर्नाटक सरकार और केंद्र को चाहिए कि वे टकराव की स्थिति को छोड़कर किसानों और श्रमिकों की चिंताओं को दूर करें तथा एक व्यावहारिक व समावेशी विकल्प तैयार करें, जिससे पश्चिमी घाट का दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित हो और नागरिकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।

अभ्यास प्रश्न
Q. पश्चिमी घाटों के संरक्षण से संबंधित 'कस्तूरीरंगन समिति' की रिपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
इस रिपोर्ट ने पश्चिमी घाटों में मानवीय कब्जे और आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की संस्तुति की है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि किसी राजस्व गांव का एक निश्चित न्यूनतम प्रतिशत हिस्सा संवेदनशील है, तो पूरे गांव को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में स्थान दिया जा सकता है।
पश्चिमी घाट कुल छह राज्यों के भौगोलिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) केवल 2 और 3

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