The Looming Crisis of World Unemployment

वैश्विक बेरोजगारी का आसन्न संकट और जनसांख्यिकीय लाभांश
The Looming Crisis of World Unemployment
Source: The Hindu
संदर्भ
विश्व बैंक के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दशक में ग्लोबल साउथ में लगभग 1.2 बिलियन युवा कामकाजी उम्र में प्रवेश करेंगे, जबकि केवल 400 मिलियन नौकरियों के सृजन की संभावना है। इससे लगभग 800 मिलियन नौकरियों का अंतर पैदा हो सकता है।
UPSC GS II/III के लिए महत्वपूर्ण
यह मुद्दा जनसांख्यिकीय लाभांश, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास, विनिर्माण, कौशल विकास और भारत की विकास रणनीति से जुड़ा हुआ है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
प्रश्न:
वैश्विक बेरोजगारी के आसन्न संकट के संदर्भ में भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियों और रोजगार सृजन की संभावनाओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर
1. भूमिका
जनसांख्यिकीय लाभांश किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। विश्व बैंक के अनुसार, अगले दशक में ग्लोबल साउथ में 1.2 बिलियन युवा कामकाजी उम्र में प्रवेश करेंगे, जबकि केवल 400 मिलियन नौकरियों का सृजन होने की संभावना है। इससे लगभग 800 मिलियन नौकरियों का अंतर पैदा हो सकता है।
2. वैश्विक बेरोजगारी के प्रमुख कारण
  • समयपूर्व विरचनात्मकता (Premature Deindustrialization): स्वचालन और उन्नत तकनीकों के कारण विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: कमजोर लॉजिस्टिक्स, उच्च पूंजी लागत और कमजोर संपत्ति अधिकार रोजगार सृजन को प्रभावित करते हैं।
  • कौशल और शिक्षा का अंतर: युवाओं के कौशल और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच अंतर रोजगार प्राप्त करने में बाधा बनता है।
3. भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
  • भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और बड़ी संख्या में युवा श्रम बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।
  • GDP में वृद्धि के बावजूद पर्याप्त रोजगार सृजन एक चुनौती बना हुआ है।
  • महिला श्रम बल भागीदारी दर कम है।
  • कृषि क्षेत्र लगभग आधी आबादी को रोजगार देता है, लेकिन GDP में इसका योगदान लगभग 16% है।
4. रोजगार सृजन के लिए क्षेत्रीय रणनीतियाँ
  • कृषि और एग्री-टेक: कृषि उत्पादकता और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
  • स्वास्थ्य और केयर इकोनॉमी: स्वास्थ्य एवं देखभाल क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है।
  • हरित विनिर्माण: हरित अर्थव्यवस्था और नए विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएँ हैं।
  • पर्यटन: पर्यटन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार पैदा कर सकता है।
5. निष्कर्ष
रोजगार सृजन के लिए भारत को अपनी विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने, कौशल विकास कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने और Ease of Doing Business में सुधार करने की आवश्यकता है। रोजगार पैदा करने वाली मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को आर्थिक विकास में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अभ्यास प्रश्न
Q. हाल ही में चर्चा में रहे 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) और वैश्विक बेरोजगारी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. पारंपरिक रूप से, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) को विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन का प्राथमिक इंजन माना जाता रहा है।

2. समयपूर्व विरचनात्मकता (Premature Deindustrialization) का अर्थ है कि देश पारंपरिक विनिर्माण उद्योगों के माध्यम से पर्याप्त औद्योगिक नौकरियां पैदा किए बिना ही सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

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