विखंडित विश्व व्यवस्था में BRICS (BRICS in a fragmented world order)
विखंडित विश्व व्यवस्था में BRICS
BRICS in a fragmented world order
1संदर्भ
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, जिसे वैश्विक विविधताओं के बावजूद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार, व्यापार, वित्त, ऊर्जा, जलवायु, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। हालांकि, इस कूटनीतिक सफलता के बावजूद, वैश्विक स्तर पर बहुपक्षवाद के पतन, चीन के बढ़ते प्रभुत्व और BRICS के आंतरिक विरोधाभासों के कारण समूह की वास्तविक प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
Source: The Hindu
2UPSC के लिए सीख
- वैश्विक शासन में सुधार: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसे ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधार तथा वैश्विक दक्षिण (Global South) का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता।
- सामरिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण: भारत द्वारा गुटनिरपेक्षता के बजाय ‘बहु-संरेखण’ और प्रैग्मैटिक कूटनीति का उपयोग करके विभिन्न विरोधी देशों को एक मंच पर लाना।
- चीन का प्रभाव एवं विषमता: BRICS के भीतर चीन की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक ताकत के कारण उत्पन्न शक्ति असंतुलन, जो बहुध्रुवीयता के उद्देश्य को प्रभावित करता है।
- स्थानीय मुद्रा और आर्थिक एकीकरण: पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणालियों (Inter-operable cross-border payment systems) का संवर्धन।
3मुख्य प्रश्न एवं उत्तर का प्रारूप
“एक विखंडित विश्व व्यवस्था में, BRICS बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है; फिर भी, यह आंतरिक विरोधाभासों और चीन के बढ़ते प्रभुत्व जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।” नई दिल्ली घोषणापत्र के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर का प्रारूप
- प्रस्तावना (Introduction): BRICS का संक्षिप्त परिचय, 18वें नई दिल्ली शिखर सम्मेलन का संदर्भ और नई दिल्ली घोषणापत्र की सफलता का उल्लेख करें।
- मुख्य भाग (Body):
- बहुध्रुवीयता और वैश्विक सुधारों में BRICS का योगदान: वैश्वीकरण, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, UNSC और WTO सुधारों का समर्थन।
- BRICS के समक्ष आंतरिक चुनौतियाँ और विरोधाभास: सदस्य देशों की अलग-अलग भू-राजनीतिक प्राथमिकताएँ, आर्थिक एकीकरण की कमी।
- चीन का कारक (The China Factor): चीन का आर्थिक और सैन्य दबदबा, भारत-चीन सीमा तनाव और समूह के भीतर शक्ति का असंतुलन।
- भारत का दृष्टिकोण: बहु-संरेखण, सामरिक स्वायत्तता और वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व।
- निष्कर्ष (Conclusion): व्यावहारिक बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए BRICS की भावी दिशा और प्रासंगिकता का संतुलित समापन।
4मॉडल उत्तर
प्रस्तावना
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में स्वीकृत नई दिल्ली घोषणापत्र ने वैश्विक विभाजन और तनाव के दौर में 11-सदस्यीय समूह के बीच सर्वसम्मति बनाकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता प्रदर्शित की है। यह घोषणापत्र वैश्विक शासन सुधारों, स्थानीय मुद्रा व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय प्रणालियों के न्यायसंगत पुनर्गठन पर जोर देता है।
1. बहुध्रुवीयता और वैश्विक शासन में सुधार
- वैश्विक संस्थानों का पुनर्गठन: BRICS ने ब्रेटन वुड्स संस्थानों (IMF, विश्व बैंक) और संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधारों की मांग की है ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
- वित्तीय और आर्थिक स्वायत्तता: पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणालियों और BRICS आर्थिक भागीदारी रणनीति 2030 का समर्थन किया गया है।
- उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग, कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच और प्रौद्योगिकी साझाकरण पर बल दिया गया है।
2. BRICS के समक्ष आंतरिक विरोधाभास एवं चुनौतियाँ
- सुदृढ़ आर्थिक एकीकरण का अभाव: व्यापार के अवसरों के बावजूद, BRICS एक एकीकृत आर्थिक ब्लॉक बनने में विफल रहा है जो पश्चिमी प्रभुत्व का प्रभावी विकल्प बन सके।
- व्यावहारिक गठबंधन (Coalition of the Willing): वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में दीर्घकालिक गठबंधन के स्थान पर तदर्थ (Ad-hoc) और हित-आधारित सहयोग अधिक हावी हो रहा है।
- विविध राष्ट्रीय हित: समूह के नए और पुराने सदस्यों के बीच सुरक्षा और विदेश नीति के संदर्भ में अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं।
3. चीन का कारक और शक्ति असंतुलन
- आर्थिक विषमता: पिछले दो दशकों में चीन का आर्थिक और राजनीतिक दबदबा समूह के अन्य सदस्यों से काफी आगे निकल चुका है, जिससे BRICS के भीतर गंभीर असंतुलन उत्पन्न हुआ है।
- भारत-चीन संबंध: यद्यपि सीमा पर बड़े टकराव नहीं हुए हैं, फिर भी भारत और चीन के बीच रणनीतिक तनाव और अविश्वास BRICS की एकजुटता को प्रभावित करता है।
आंतरिक विरोधाभास और चुनौतियाँ
- चीन का अत्यधिक आर्थिक प्रभुत्व: BRICS के भीतर चीन की आर्थिक ताकत अन्य सभी सदस्यों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे समूह के भीतर गहरा असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।
- व्यावहारिक गठबंधन और नीतियों में भिन्नता: दीर्घकालिक मजबूत गठबंधनों के स्थान पर तदर्थ (Ad-hoc) और हित-आधारित सहयोग अधिक हावी हो रहा है। विश्लेषक चार्ल्स किंडलबरगर के सिद्धांतों के अनुसार, सुसंगत नेतृत्व और एकीकरण के बिना समूह की प्रभावशीलता सीमित हो सकती है।
- भारत-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा: भले ही 2020 (गलवान) के बाद से कूटनीतिक प्रयासों से शांति बनी हुई है, लेकिन भारत और चीन के बीच रणनीतिक अविश्वास BRICS की एकजुटता को प्रभावित करता है।
निष्कर्ष
BRICS की सफलता केवल घोषणापत्रों तक सीमित न रहकर इसके आर्थिक सुधारों को व्यावहारिक रूप देने पर निर्भर करती है। एक विखंडित विश्व में, BRICS तब तक एक संतुलित और प्रभावी मंच बना रह सकता है जब तक यह केवल एक देश के प्रभुत्व का साधन बनने के बजाय बहुध्रुवीयता, आपसी सम्मान और वैश्विक दक्षिण के न्यायसंगत विकास को प्राथमिकता देता रहेगा।
5अभ्यास प्रश्न (MCQ)
Q. BRICS (ब्रिक्स) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान स्वीकृत ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने और अंतर-संचालनीय सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया है।
- BRICS समूह का गठन मूल रूप से वर्ष 2009 में येकातेरिनबर्ग (रूस) में आयोजित शिखर सम्मेलन के साथ शुरू हुआ था।
- नई दिल्ली घोषणापत्र केवल आर्थिक मामलों तक सीमित था और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) या जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों को शामिल नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) केवल 1 और 2
यह उत्तर दिए गए स्रोत दस्तावेज़ के अनुसार है।
हमारी Free Classes देखें!
हमारी Free Classes देखने के लिए अभी Result Mitra YouTube Channel को Subscribe करें!
Subscribe Now