12 October 2026 Daily Current Affairs MCQ
12 October 2026 Daily Current Affairs MCQ
Daily Practice Questions | UPSC & PCS Preparation
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत (Bail) के वैधानिक प्रावधानों और भारतीय न्यायशास्त्र (Jurisprudence) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- UAPA के कड़े प्रावधानों के तहत, जब तक मुकदमा पूरा नहीं हो जाता और अदालत आरोपी को दोषी नहीं ठहरा देती, तब तक किसी भी परिस्थिति में उच्च न्यायपालिका द्वारा जमानत नहीं दी जा सकती।
- आपराधिक मामलों के सामान्य सिद्धांत “दोषी साबित होने तक निर्दोष” के विपरीत, UAPA के तहत प्रथम दृष्टया आरोप सही प्रतीत होने पर अदालत के लिए जमानत देना वस्तुतः असंभव हो जाता है।
- हिरासत के दौरान आरोपियों की मृत्यु हो जाने या वर्षों तक बिना मुकदमे के जेल में रहने के बावजूद, यूएएपीए के तहत दी जाने वाली जमानत की शर्तें अत्यधिक कठोर और देश के भीतर यात्राओं को प्रतिबंधित करने वाली होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (B) केवल 2 और 3
कथन 1 गलत है: यह कहना तकनीकी रूप से गलत है कि मुकदमा पूरा होने से पहले किसी भी परिस्थिति में जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि विधिक प्रक्रिया अत्यंत कठिन है, लेकिन जब आरोपियों के मौलिक अधिकारों (जैसे त्वरित विचारण/Speedy Trial का अधिकार) का उल्लंघन होता है या बिना मुकदमे के कई वर्ष जेल में बीत जाते हैं, तो सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा आरोपियों (जैसे सिद्दीक कप्पन, खुर्रम परवेज़ और भीमा कोरेगांव के 14 कार्यकर्ताओं) को अंतरिम या नियमित जमानत दी गई है।
कथन 2 सही है: सामान्य आपराधिक कानून का मूल सिद्धांत यह है कि जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, आरोपी को निर्दोष माना जाता है और ‘जमानत एक नियम है और जेल एक अपवाद’। लेकिन UAPA के तहत यह व्यवस्था उलट जाती है। यदि जांच एजेंसी की चार्जशीट और केस डायरी के आधार पर अदालत को प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह प्रतीत होता है कि आरोपी के खिलाफ आरोप सही हैं, तो अधिनियम की धारा 43D(5) के तहत नियमित जमानत देना कानूनी रूप से लगभग असंभव हो जाता है।
कथन 3 सही है: भीमा कोरेगांव और दिल्ली दंगों के मामलों से स्पष्ट है कि लंबे समय तक (5 से 6 वर्ष) बिना विचारण के जेल में रखने के बाद जब उच्च न्यायपालिका आरोपियों को जमानत देती भी है, तो वे शर्तें अत्यंत दमनकारी (Draconian) होती हैं। इनमें कई रिपोर्टिंग शर्तें, देश या शहर से बाहर यात्रा करने पर सख्त प्रतिबंध और पासपोर्ट जमा कराना शामिल होता है, जो उनके सामान्य जीवन को गंभीर रूप से सीमित कर देता है। इसके अलावा, फादर स्टेन स्वामी जैसे मामलों में चिकित्सा सहायता के अभाव में हिरासत के दौरान ही मृत्यु हो जाने की घटनाएं मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ (Self-Sufficiency Mission in Pulses) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक घरेलू दाल उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुँचाना और उत्पादकता को 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है।
- वर्ष 2024-25 की तुलना में, वर्ष 2025-26 में भारत का कुल दाल उत्पादन बढ़ा है और दालों के आयात मूल्य में 30% से अधिक की कमी आई है।
- ‘साथी’ (SATHI) पोर्टल का उपयोग भूमि की जियो-टैगिंग के लिए किया जाता है, जबकि ‘कृषि मैपर’ ऐप बीज आपूर्ति श्रृंखला का स्वचालन संभालता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
कथन 1 सही है: भारत सरकार ने दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹11,440 करोड़ के वित्तीय बजटीय आवंटन के साथ एक छह-वर्षीय योजना (2025-26 से 2030-31) लागू की है. इस योजना के तहत निर्धारित प्रशासनिक लक्ष्यों के अनुसार, वर्ष 2030-31 तक देश के कुल दाल उत्पादन को बढ़ाकर 350 लाख टन के स्तर पर ले जाना है. इसके साथ ही, वैज्ञानिक कृषि और उन्नत बीजों के माध्यम से दालों की राष्ट्रीय औसत पैदावार (Yield) को बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का स्पष्ट वैधानिक लक्ष्य रखा गया है.
कथन 2 सही है: आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पिछले वर्ष की तुलना में भारत की दलहन अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार दर्ज हुआ है:
- उत्पादन में वृद्धि: देश का कुल दाल उत्पादन वर्ष 2024-25 के 256.83 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 274.09 लाख टन (तृतीय अग्रिम अनुमान) तक पहुँच गया.
- आयात में भारी गिरावट: भारत की विदेशी निर्भरता में कमी आई है। दालों का कुल आयात मूल्य वर्ष 2024-25 के 46,427.60 करोड़ रुपये से 31.52% घटकर वर्ष 2025-26 में 31,793.59 करोड़ रुपये रह गया है. चूंकि 31.52% की यह गिरावट 30% से अधिक है, इसलिए यह कथन तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह सही है.
कथन 3 गलत है:
- ‘साथी’ (SATHI) पोर्टल का वास्तविक कार्य: इसका पूरा नाम ‘सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंट्री’ है। इसका काम बीज के पूरे जीवन चक्र (उत्पादन, प्रमाणीकरण और बिक्री) की निगरानी करना और बीज आपूर्ति श्रृंखला का स्वचालन (Automation) करना है, न कि भूमि की जियो-टैगिंग।
- ‘कृषि मैपर’ (Krishi Mapper) ऐप का वास्तविक कार्य: इस एप्लिकेशन का मुख्य कार्य भूमि की जियो-टैगिंग (Geo-tagging), फसलों की जियो-फेंसिंग और खेतों के वास्तविक क्लस्टर पर भौगोलिक रूप से नज़र रखना है।
अक्टूबर 2026 में अपनी पहली वर्षगांठ मना रही ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ (PM-DDKY) के नीतिगत उद्देश्यों और इसके प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस योजना के तहत देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों की पहचान तीन मुख्य पैमानों: कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए कम संस्थागत ऋण मिलने के आधार पर की गई है।
- योजना के त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के तहत जिला स्तर पर इसकी कमान जिला कलेक्टर/डीएम के पास होती है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर गठित ‘राष्ट्रीय कार्यकारी समिति’ की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री करते हैं।
- जिला एक्शन प्लान (DAP) के तहत प्रगति की विनियामक निगरानी कुल 121 संकेतकों के माध्यम से नीति आयोग के पीएम-डीडीकेवाई डैशबोर्ड द्वारा वास्तविक समय में की जाती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (C) सभी तीनों कथन
कथन 1 सही है: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) को मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के कृषि कायाकल्प के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके तहत चयनित 100 आकांक्षी कृषि जिलों की पहचान के लिए तीन अत्यंत विशिष्ट तकनीकी और आर्थिक मापदंड तय किए गए थे: कम उत्पादकता (Low Productivity), कम फसल सघनता (Low Cropping Intensity) और खेती के लिए कम ऋण मिलना (Low Credit Flow). साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि देश के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिला इस परिवर्तनकारी योजना का हिस्सा बने.
कथन 2 सही है: योजना को सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक बेहद मजबूत त्रि-स्तरीय (Three-tier) प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है:
- जिला स्तर: इसकी अध्यक्षता संबंधित जिला कलेक्टर/डीएम करते हैं, जो जिला एक्शन प्लान (DAP) के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं
- राज्य स्तर: राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता में जिला योजनाओं की निगरानी की जाती है
- राष्ट्रीय स्तर: दो विशिष्ट समितियां देखरेख करती हैं, जिसमें नीतिगत और रणनीतिक निर्णयों को संभालने वाली ‘राष्ट्रीय कार्यकारी समिति’ की अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री द्वारा की जाती है, जबकि अनुपालन से जुड़ी ‘राष्ट्रीय निगरानी समिति’ के अध्यक्ष डीए एंड एफडब्ल्यू (DA&FW) के सचिव होते हैं
कथन 3 सही है: योजना की जमीनी प्रगति और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक गहन डेटा-संचालित प्रणाली अपनाई गई है. इसके तहत 11 मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं को आपस में जोड़ा गया है, जिनकी प्रगति पर कुल 121 संकेतकों (जिसमें 74 आउटपुट संकेतक और 47 आउटकम संकेतक शामिल हैं) के जरिए पैनी नजर रखी जाती है. जिलों के मासिक प्रदर्शन की जियो-ट्रैकिंग और रैंकिंग आधिकारिक पीएम-डीडीकेवाई डैशबोर्ड (https://pmddky.niti.gov.in/) के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है, जिसे नीति आयोग द्वारा संचालित किया जाता है
मणिपुर में कुकी (Kuki) और नागा (Naga) समुदायों के बीच भड़की हालिया जातीय हिंसा और प्रशासनिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- हालिया हिंसा की शुरुआत कामजोंग जिले में एक कुकी महिला की हत्या से हुई, जो बाद में कांगपोकपी और उखरुल जैसे अन्य आंतरिक जिलों में भी फैल गई।
- सुरक्षा बलों ने जमीनी स्तर पर उग्रवादी गतिविधियों को विफल करने के लिए भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित कामजोंग जिले में एक बड़े तलाशी अभियान के तहत 27 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) बरामद किए हैं।
- नागा छात्र संगठन ने कुकी उग्रवादी समूहों पर ‘कुकीलैंड’ या अलग केंद्र शासित प्रदेश (UT) की मांग को लेकर हमले करने का आरोप लगाया है, जबकि कुकी संगठनों ने इसके लिए नागा उग्रवादी गुट NSCN (IM) को जिम्मेदार ठहराया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (D) 1, 2 और 3
कथन 1 सही है: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच, 9 अक्टूबर 2026 की रात को नागा-बहुल कामजोंग (Kamjong) जिले के चस्साद कुकी गांव में एक 42 वर्षीय कुकी महिला की अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई हत्या ने ताजा हिंसा को हवा दी। इसके बाद यह सशस्त्र संघर्ष तेजी से फैला और कुकी-बहुल कांगपोकपी (Kangpokpi) तथा नागा-बहुल उखरुल (Ukhrul) जिलों के आंतरिक इलाकों तक पहुँच गया, जिसमें कुल 9 से 11 लोगों की जान चली गई।
कथन 2 सही है: “Security forces unearth 27 IEDs…” के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में उग्रवादियों की रणनीतिक साजिशों और बड़े हमलों को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बलों ने अत्यधिक कड़ा रुख अपनाया है। उग्रवाद-विरोधी अभियानों के तहत सुरक्षा बलों ने कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास एक 8 किलोमीटर लंबे रणनीतिक मार्ग पर गहन तलाशी अभियान चलाकर 27 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) को खोदकर बाहर निकाला और निष्क्रिय कर दिया।
कथन 3 सही है: इस जातीय संघर्ष में दोनों समुदायों के नागरिक और छात्र संगठनों ने एक-दूसरे के सशस्त्र समूहों पर गंभीर विधिक और राजनीतिक आरोप लगाए हैं:
- ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) और भारत सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ (SoO) समझौते के तहत शामिल कुकी उग्रवादियों की कड़ी निंदा की है। उनका आरोप है कि ये समूह एक काल्पनिक ‘कुकीलैंड’ (अलग प्रशासन या केंद्र शासित प्रदेश) के एजेंडे को पूरा करने के लिए नागा गांवों पर सुनियोजित हमले कर रहे हैं।
- इसके विपरीत, कुकी संगठनों ने जवाबी आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके समुदाय के निर्दोष नागरिकों को नागालैंड के प्रमुख उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (NSCN-Isak Muivah गुट) द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।
हाल ही में चर्चा में रहे ‘ब्लैक पैंथर’ के वैज्ञानिक वर्गीकरण, भौगोलिक वितरण और संरक्षण स्थिति पर विचार कीजिए:
- ब्लैक पैंथर बड़ी बिल्लियों की कोई स्वतंत्र विशिष्ट प्रजाति नहीं है, बल्कि यह केवल ‘एशियाई चीते’ का एक आनुवंशिक रंग रूप है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट के तहत तेंदुए की इस प्रजाति को ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
- भारत में यह मुख्य रूप से घने, आर्द्र और उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों जैसे पश्चिमी घाट तथा उत्तर-पूर्वी पहाड़ियों के क्षेत्रों में पाया जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (A) केवल एक कथन
कथन 1 गलत है: वैज्ञानिक रूप से ‘ब्लैक पैंथर’ बड़ी बिल्ली परिवार की कोई अलग से पहचानी जाने वाली स्वतंत्र प्रजाति नहीं है, लेकिन यह एशियाई चीते का रूप नहीं है। यह मूल रूप से एशिया और अफ्रीका में पाए जाने वाले तेंदुओं (Panthera pardus) या मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जगुआर (Panthera onca) में होने वाला एक आनुवंशिक रंग रूप (Melanistic variant) है। इन जीवों में ‘मेलानिज़्म’ (Melanism) नामक एक आनुवंशिक स्थिति के कारण त्वचा और बालों में काले रंग के पिगमेंट (Melanin) की अत्यधिक मात्रा बढ़ जाती है, जिससे इनका पूरा शरीर काला दिखाई देता है।
कथन 2 गलत है: चूंकि ब्लैक पैंथर कोई अलग प्रजाति नहीं है, इसलिए इसे समग्र रूप से तेंदुए की प्रजाति के तहत ही ट्रैक किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट द्वारा तेंदुए (Panthera pardus) को ‘संवेदनशील’ (Vulnerable – VU) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, न कि ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) श्रेणी में। भारत में, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत इसे अनुसूची-I (Schedule I) में रखकर सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है।
कथन 3 सही है: आनुवंशिक अनुकूलन के कारण, ब्लैक पैंथर का गहरा काला रंग उन्हें घने, कम धूप वाले और नम सदाबहार जंगलों में छिपने (Camouflage) में भारी मदद करता है। यही कारण है कि भारत में इनका वितरण मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के घने सदाबहार जंगलों (जैसे कर्नाटक का काबिनी वन्यजीव अभयारण्य, डांडेली-अंशी, और केरल का पेरियार व पत्तनमतिट्टा क्षेत्र) तथा उत्तर-पूर्वी भारत और उत्तरी बंगाल के घने वनों में पाया जाता है।
अक्टूबर 2026 में चर्चा में रहे भारत-फ्रांस संयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘तृष्णा’ (TRISHNA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ‘तृष्णा’ मिशन मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल (SARAL) के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा तीसरा उपग्रह है।
- इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य दृश्य लघु तरंग और थर्मल इन्फ्रारेड पृथ्वी अवलोकन के माध्यम से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सतह ऊर्जा बजटिंग करना है।
- इस उपग्रह के तहत डेटा के लिए एक बंद डेटा नीति अपनाई जाएगी, जिसके तहत एकत्रित वैज्ञानिक डेटा केवल भारत और फ्रांस के रक्षा विंग के साथ ही साझा किया जाएगा।
- इस उपग्रह को इसरो के भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (GSLV) द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (B) केवल दो कथन
कथन 1 सही है: अक्टूबर 2026 में यू.आर. राव उपग्रह केंद्र (URSC) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ‘तृष्णा’ (Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment) भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष सहयोग का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह मेघा-ट्रॉपिक्स (Megha-Tropiques) और सरल (SARAL) उपग्रहों की शानदार सफलता के बाद दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा तीसरा उपग्रह है, जिसे अगले 12 से 16 महीनों के भीतर लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है.
कथन 2 सही है: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दृश्य लघु तरंग (Visible Shortwave) और थर्मल इन्फ्रारेड पृथ्वी अवलोकन (Thermal Infrared Earth Observation) के माध्यम से वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है. यह उपग्रह पृथ्वी की सतह के तापमान, उत्सर्जन (Emissivity), और बायोफिजिकल व रेडिएशन वेरिएबल्स की हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग करेगा, जिससे सतह ऊर्जा बजटिंग (Surface Energy Budgeting) में मदद मिलेगी. इसके लिए इसरो VNIR-SWIR पेलोड और फ्रांस की CNES थर्मल इन्फ्रारेड (TIR) पेलोड विकसित कर रही है.
कथन 3 गलत है: मिशन की प्रोजेक्ट डायरेक्टर नागालक्ष्मी ए.एम. के अनुसार, इस मिशन के तहत रक्षा या खुफिया प्रतिबंधों के विपरीत एक ओपन डेटा नीति (Open Data Policy) अपनाई जाएगी। इसके तहत उपग्रह द्वारा एकत्रित किए गए सभी वैज्ञानिक डेटा को पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए निर्बाध और पारदर्शी रूप से प्रसारित (Disseminated seamlessly) किया जाएगा, न कि इसे बंद रखा जाएगा।
कथन 4 गलत है: तृष्णा मिशन को इसरो के भारी भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (GSLV) द्वारा नहीं, बल्कि ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन यानी पीएसएलवी (Polar Satellite Launch Vehicle – PSLV) के माध्यम से अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन के कारण उभयचरों में बढ़ते ‘लिंग विपर्यय’ के प्रभावों पर हालिया शोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- एजाइल मेंढकों में टैडपोल अवस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी आनुवंशिक संरचना को बदलकर आनुवंशिक मादाओं (XX) को ऊर्वर नरों में परिवर्तित कर देती है।
- मुक्त प्रकृति (Wild) में स्वतंत्र संभोग के दौरान मादा मेंढक लिंग-विपरीत नरों के साथ ‘स्प्लिट क्लच’ रणनीति अपनाती हैं, जिससे इन नरों की प्रजनन सफलता दर काफी कम हो जाती है।
- लिंग-विपरीत नरों की संतानें अत्यधिक गर्मी और ‘रानावायरस’ के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिसके कारण कंप्यूटर मॉडल के अनुसार बिना इस वायरस के भी मेंढकों की आबादी लगभग 10 वर्ष पहले ही विलुप्त हो जाएगी।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (B) केवल दो कथन
कथन 1 सही है: एजाइल मेंढकों में लिंग का निर्धारण स्तनधारियों की भाँति ही गुणसूत्रों (Chromosomes) द्वारा होता है। जैविक रूप से दो X गुणसूत्र (XX) एक आनुवंशिक मादा का निर्माण करते हैं, जबकि एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) आनुवंशिक नर का निर्माण करते हैं। वैश्विक तापन (Global Warming) के कारण जब पारिस्थितिकी तंत्र का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तो टैडपोल (Tadpole) अवस्था के दौरान यह अत्यधिक ऊष्मा मेंढकों की अंतर्निहित आनुवंशिक रेसिपी को दबा (Override) देती है। इसके परिणामस्वरूप, आनुवंशिक रूप से मादा (XX) होने के बावजूद ये जीव शारीरिक और व्यावहारिक रूप से पूरी तरह सामान्य तथा ऊर्वर (Fertile) नर के रूप में विकसित हो जाते हैं। इसे ही जीवविज्ञान में ‘लिंग विपर्यय’ (Sex Reversal) कहा जाता है।
कथन 2 सही है: हंगरी में एजाइल मेंढकों की जंगली आबादी पर किए गए शोध से पता चलता है कि यद्यपि प्रयोगशाला में ये लिंग-विपरीत नर अंडों को निषेचित करने में सक्षम हैं, लेकिन खुले प्राकृतिक तालाबों में उनकी सफलता बहुत सीमित है। जंगली आबादी में लगभग 20% लिंग-विपरीत नर होने के बावजूद, प्रकृति में मुक्त संभोग के दौरान केवल 4% अंडों के समूह (Egg clutches) ही उनके द्वारा निषेचित पाए गए। इसका कारण यह है कि प्राकृतिक वातावरण में मादा मेंढक आनुवंशिक रूप से वास्तविक नरों को प्राथमिकता देती हैं। लिंग-विपरीत नरों के साथ संभोग करते समय मादाएं ‘स्प्लिट क्लच’ (Split Clutch) रणनीति अपनाती हैं, जिसके तहत वे अपने केवल कुछ ही अंडे देती हैं और शेष अंडों को किसी अधिक उपयुक्त और मजबूत वास्तविक नर के लिए सुरक्षित रख लेती हैं।
कथन 3 गलत है: तापमान में वृद्धि के साथ-साथ यह घटना उभयचरों के लिए घातक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा रही है। शोधकर्ताओं ने पाया कि लिंग-विपरीत नरों की संतानों को जब कृत्रिम हीटवेव और ‘रानावायरस’ (Ranavirus) के संपर्क में लाया गया, तो उनमें सामान्य नरों की संतानों की तुलना में बहुत अधिक ‘वायरल लोड’ देखा गया। रानावायरस एक अत्यंत घातक रोगजनक है जो एक ही बार में 90% तक टैडपोल आबादी को नष्ट कर सकता है। जब शोधकर्ताओं ने इस डेटा को कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल में डाला, तो निम्नलिखित सांख्यिकीय परिणाम सामने आए:
- रानावायरस के प्रभाव के साथ: मेंढकों की आबादी में गिरावट निर्धारित समय से 10 वर्ष पहले शुरू हुई और उनकी पूर्ण विलुप्ति 9.5 वर्ष पहले हो गई।
- रानावायरस के प्रभाव के बिना: वायरस की अनुपस्थिति में भी आबादी में गिरावट सामान्य से 8 वर्ष पहले शुरू हो गई, लेकिन पूर्ण विलुप्ति केवल 2 वर्ष पहले दर्ज की गई (न कि 10 वर्ष पहले)।
वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2026) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्ले को प्रदान किया गया है।
- उन्हें यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय कानून की रक्षा करने, मानवाधिकारों को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय अपराधों के पीड़ितों के पक्ष में खड़े होने के लिए दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
कथन 1 सही है: नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध और वरिष्ठ न्यायविद नवी पिल्ले को देने की घोषणा की है। उनका जन्म 1941 में डर्बन में एक भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था और उन्होंने रंगभेद (Apartheid) के दौर में नेल्सन मंडेला सहित कई राजनीतिक कैदियों का अदालतों में विधिक बचाव किया था।
कथन 2 सही है: नवी पिल्ले को यह वैश्विक सम्मान अंतर्राष्ट्रीय नियमों की रक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने के उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए दिया गया है । उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और रवांडा के अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान समय में जब वैश्विक महाशक्तियों द्वारा संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया जा रहा है, तब अंतर्राष्ट्रीय कानून को बनाए रखने और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करने में उनके अद्वितीय विधिक ट्रैक रिकॉर्ड को इस पुरस्कार के माध्यम से सम्मानित किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रीक्वालिफाइड घोषित किए गए भारत के स्वदेशी ‘सर्ववैक’ (CERVAVAC) वैक्सीन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ‘सर्ववैक’ सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित भारत का पहला स्वदेशी, जेंडर-न्यूट्रल क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन है, जो एचपीवी प्रकार 6, 11, 16 और 18 को लक्षित करता है।
- भारत के सरकारी राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वर्तमान में केवल इस स्वदेशी वैक्सीन ‘सर्ववैक’ का ही उपयोग किया जा रहा है।
- डब्लूएचओ प्रीक्वालिफिकेशन का तात्पर्य किसी वैक्सीन को वैश्विक स्तर पर वाणिज्यिक बिक्री की अंतिम विनियामक मंजूरी देना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (A) केवल एक कथन
कथन 1 सही है: ‘सर्ववैक’ (CERVAVAC) भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित क्वाड्रिवेलेंट एचपीवी (HPV) वैक्सीन है. यह जेंडर-न्यूट्रल है, जिसका अर्थ है कि इसे भारत में 9 से 26 वर्ष की आयु के लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए लाइसेंस प्राप्त है. यह वैक्सीन एचपीवी के चार सबसे प्रमुख प्रकारों (6, 11, 16 और 18) को लक्षित करता है. इसमें प्रकार 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर के लिए और प्रकार 6 और 11 जननांग के मस्सों (Genital Warts) के लिए जिम्मेदार होते हैं.
कथन 2 गलत है: 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए भारत के सरकारी राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम में वर्तमान में मर्क (Merck) की ‘गार्डासिल-4’ (Gardasil-4) वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है, न कि स्वदेशी सर्ववैक का. सर्ववैक को डब्लूएचओ प्रीक्वालिफिकेशन मिलने का यह अर्थ नहीं है कि यह स्वचालित रूप से सरकारी कार्यक्रम में शामिल हो जाएगी. राष्ट्रीय कार्यक्रम में वैक्सीन का चयन विनियामक स्थिति, मूल्य और आपूर्ति क्षमता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है.
कथन 3 गलत है: डब्लूएचओ प्रीक्वालिफिकेशन (WHO Prequalification) कोई मार्केटिंग ऑथराइजेशन (विपणन प्राधिकरण) या विनियामक अनुमोदन नहीं होता है. यह केवल यह प्रमाणित करता है कि वैक्सीन डब्लूएचओ के गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है. इसका सबसे बड़ा लाभ संयुक्त राष्ट्र (UN) की एजेंसियों के अंतरराष्ट्रीय खरीद चैनलों तक पहुंच (Access) सुनिश्चित करना है.
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में उप चुनाव आयुक्त (Deputy Election Commissioner) की हालिया नियुक्ति के प्रशासनिक और विधिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राजस्थान कैडर के 2010 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत के निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है।
- उप चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्णतः निर्वाचन आयोग के आंतरिक अधिकार क्षेत्र में आती है, जिसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बिना किसी बाहरी मंत्रालय की मंजूरी के सीधे प्रशासनिक आदेश जारी करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (A) केवल 1
कथन 1 सही है: संजय कुमार की समयपूर्व स्वदेश वापसी (Premature Repatriation) से खाली हुए पद को भरने के लिए राजस्थान कैडर के 2010 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में उप चुनाव आयुक्त (DEC) नियुक्त किया गया है। वे आयोग के महत्वपूर्ण प्रभागों—मतदाता सूची (Electoral Rolls) और आईटी विभाग (IT Division) के कार्य आवंटन को संभालेंगे। उनकी यह नियुक्ति 8 अप्रैल, 2030 तक के निर्धारित कार्यकाल के लिए की गई है।
कथन 2 गलत है: उप चुनाव आयुक्तों (DECs) की नियुक्ति का प्रशासनिक प्रावधान पूरी तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त के स्वतंत्र आंतरिक आदेश पर निर्भर नहीं करता है। ये वरिष्ठ स्तर के अधिकारी केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आते हैं। इसके विनियामक विनिर्देशों के अनुसार, ऐसी नियुक्तियों के प्रस्तावों को पहले कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा संसाधित किया जाता है, और अंतिम विधिक मंजूरी कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet – ACC) द्वारा दी जाती है। मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले इन पदों पर सीधे नियुक्तियां नहीं कर सकते।
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