UPSC PYQ 2022 (Economy)
RESULT MITRA
UPSC PYQ 2022 (Economy)
अर्थव्यवस्था | Previous Year Questions with Answers & Explanation
UPSC Economy PYQ 2022:
इस अभ्यास में सौर ऊर्जा परियोजनाओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, बैंक बोर्ड ब्यूरो और परिवर्तनीय बॉन्ड से संबंधित प्रश्न शामिल हैं।
प्रश्न 1
सौर ऊर्जा परियोजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- गुजरात में भारत का सबसे बड़ा सौर पार्क है।
- केरल में पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
- गोवा में भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टाइक परियोजना है।
उत्तर: (b) केवल 2
व्याख्या
- कथन 1 गलत है: गुजरात में चारणका सौर पार्क सहित कई बड़ी सौर परियोजनाएँ हैं, लेकिन भारत का प्रसिद्ध भड़ला सौर पार्क राजस्थान में स्थित है। इसकी स्थापित क्षमता लगभग 2,245 मेगावाट है। यह थार मरुस्थल में स्थित होने के कारण उच्च सौर विकिरण का लाभ उठाता है।
- कथन 2 सही है: केरल का कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2015 में पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला विश्व का पहला हवाई अड्डा बना। इसके परिसर में स्थापित सौर संयंत्रों से बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। यह नवीकरणीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग का प्रमुख उदाहरण है।
- कथन 3 गलत है: गोवा भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना के लिए प्रसिद्ध नहीं है। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर जलाशय में विकसित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना प्रमुख उदाहरण है। फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएँ जलाशयों की सतह पर सौर पैनल लगाकर भूमि की आवश्यकता कम करती हैं और कुछ परिस्थितियों में पानी के वाष्पीकरण को भी घटाती हैं।
प्रश्न 2
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति से पूँजी पलायन हो सकता है।
- पूँजी पलायन से मौजूदा बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) वाली फर्मों की ब्याज लागत बढ़ सकती है।
- घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन से ECB से जुड़े मुद्रा जोखिम में कमी आती है।
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या
- कथन 1 सही है: अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब ब्याज दरें बढ़ाता है, तो अमेरिकी सरकारी बॉन्ड और अन्य डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर प्रतिफल अधिक आकर्षक हो सकता है। परिणामस्वरूप विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पूँजी निकालकर अमेरिका में निवेश कर सकते हैं। इसे पूँजी पलायन कहा जाता है। इससे रुपये पर दबाव और घरेलू वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- कथन 2 सही है: पूँजी पलायन के कारण रुपये का मूल्य गिर सकता है तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उधार लेने की लागत बढ़ सकती है। यदि किसी भारतीय कंपनी ने डॉलर में ECB लिया है, तो उसे अधिक रुपये खर्च करके ब्याज और मूलधन चुकाना पड़ सकता है। परिवर्तनीय ब्याज दर वाले ऋणों की ब्याज लागत भी बढ़ सकती है। हालाँकि, पूँजी पलायन अपने आप प्रत्येक ECB की अनुबंधित ब्याज दर नहीं बढ़ाता।
- कथन 3 गलत है: घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन विदेशी मुद्रा में लिए गए ऋण का रुपये में मूल्य बढ़ा देता है। उदाहरण के लिए, यदि डॉलर का मूल्य ₹83 से बढ़कर ₹87 हो जाता है, तो 10 लाख डॉलर के ऋण का रुपये में मूल्य ₹8.3 करोड़ से बढ़कर ₹8.7 करोड़ हो जाएगा। इस प्रकार मुद्रा जोखिम कम नहीं, बल्कि बढ़ता है।
प्रश्न 3
भारत में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित किया जाता है।
- रेटिंग एजेंसी, जिसे आमतौर पर ICRA के नाम से जाना जाता है, एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है।
- ब्रिकवर्क रेटिंग्स एक भारतीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है।
उत्तर: (b) केवल 2 और 3
व्याख्या
- कथन 1 गलत है: भारत में प्रतिभूति बाजार से संबंधित क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का प्रमुख नियामक SEBI है। SEBI के क्रेडिट रेटिंग एजेंसी विनियम, 1999 के अंतर्गत पंजीकरण, प्रकटीकरण, हितों के टकराव से बचाव और नियामकीय अनुपालन जैसी आवश्यकताएँ निर्धारित की गई हैं। RBI बैंकों और वित्तीय संस्थानों के नियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इससे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का प्राथमिक नियमन RBI के अधीन नहीं हो जाता।
- कथन 2 सही है: ICRA का पूरा नाम Investment Information and Credit Rating Agency of India Limited है। यह एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है और भारत की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में शामिल है। यह कंपनियों, ऋण साधनों तथा अन्य वित्तीय दायित्वों की ऋण चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन करती है।
- कथन 3 सही है: Brickwork Ratings भारत में स्थापित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी रही है। यह विभिन्न कंपनियों और ऋण साधनों की साख का आकलन करती है। हालाँकि, इसकी वर्तमान नियामकीय स्थिति को लेकर प्रश्नों में SEBI के नवीनतम आदेशों को देखना आवश्यक है, क्योंकि नियामकीय मान्यता और पंजीकरण की स्थिति बदल सकती है।
प्रश्न 4
बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर BBB के अध्यक्ष होते हैं।
- BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के चयन के लिए अनुशंसा करता है।
- BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रणनीतियाँ विकसित करने और पूँजी जुटाने की योजनाएँ बनाने में सहायता करता है।
उत्तर: (b) केवल 2 और 3
व्याख्या
- कथन 1 गलत है: RBI का गवर्नर बैंक बोर्ड ब्यूरो का पदेन अध्यक्ष नहीं था। BBB की अध्यक्षता अलग से नियुक्त अध्यक्ष द्वारा की जाती थी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नियुक्तियों और प्रशासनिक सुधारों को अधिक पेशेवर तथा पारदर्शी बनाना था।
- कथन 2 सही है: BBB की स्थापना 2016 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष प्रबंधन पदों के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों की पहचान और अनुशंसा करने के उद्देश्य से हुई थी। इससे नियुक्तियों में योग्यता, नेतृत्व क्षमता और पेशेवर अनुभव को महत्त्व देने का प्रयास किया गया।
- कथन 3 सही है: BBB की भूमिका केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं थी। इसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रशासन में सुधार, रणनीतिक विकास, जोखिम प्रबंधन तथा पूँजी जुटाने की योजनाओं पर सलाह देने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इसका उद्देश्य बैंकों की वित्तीय स्थिति और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करना था।
प्रश्न 5
परिवर्तनीय बॉन्ड (Convertible Bonds) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- चूँकि बॉन्ड को इक्विटी में बदलने का विकल्प होता है, इसलिए परिवर्तनीय बॉन्ड कम ब्याज दर का भुगतान करते हैं।
- इक्विटी में परिवर्तित करने का विकल्प बॉन्डधारक को बढ़ती उपभोक्ता कीमतों के अनुरूप कुछ हद तक सूचकांक प्रदान करता है।
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों
व्याख्या
- कथन 1 सही है: परिवर्तनीय बॉन्ड ऐसा ऋण साधन है, जिसे निर्धारित शर्तों के अनुसार जारीकर्ता कंपनी के शेयरों में बदला जा सकता है। निवेशक को भविष्य में शेयर मूल्य बढ़ने से लाभ कमाने का अवसर मिलता है। इस अतिरिक्त लाभ की संभावना के कारण निवेशक सामान्य बॉन्ड की तुलना में कम ब्याज दर स्वीकार कर सकता है। इससे कंपनी के लिए उधार लेना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।
- कथन 2 सही है: पारंपरिक बॉन्ड में ब्याज और मूलधन का भुगतान सामान्यतः निर्धारित शर्तों के अनुसार होता है। मुद्रास्फीति बढ़ने पर इन भुगतानों की वास्तविक क्रय शक्ति घट सकती है। इसके विपरीत, परिवर्तनीय बॉन्ड में शेयरों में रूपांतरण का विकल्प होता है। यदि मुद्रास्फीति के दौरान कंपनी की आय और शेयर मूल्य बढ़ते हैं, तो निवेशक रूपांतरण करके संभावित पूँजीगत लाभ प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार उसे बढ़ती कीमतों के प्रभाव से कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है।
उदाहरण: मान लीजिए कोई कंपनी ₹1,000 का परिवर्तनीय बॉन्ड जारी करती है, जिसे निर्धारित शर्तों के अनुसार शेयरों में बदला जा सकता है। यदि शेयर का बाजार मूल्य बढ़ता है, तो निवेशक रूपांतरण से लाभ कमा सकता है। लेकिन यदि शेयर मूल्य गिरता है, तो यह विकल्प कम लाभकारी हो सकता है।
हमारी Free Classes देखें!
हमारी Free Classes देखने के लिए अभी Result Mitra YouTube Channel को Subscribe करें!
Subscribe Now