भारतीय संविधान: राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति | Polity MCQ | Result Mitra
भारतीय संविधान: राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
Polity MCQ Practice | 10 Questions
भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और उनमें वर्णित राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 85 : संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाना
2. अनुच्छेद 123 : राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी करना
3. अनुच्छेद 201 : राज्य विधायिका के विधेयकों पर राष्ट्रपति की स्वीकृति
उपरोक्त युग्मों में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
व्याख्या:
युग्म 1) गलत है: संसद के सदनों के सत्र को बुलाना, सत्रावसान और लोकसभा का विघटन करना अनुच्छेद 85 के तहत आता है, जबकि संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाने का अधिकार अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दिया गया है।
युग्म 2) सही है: जब संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन का सत्र न चल रहा हो, तब आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की विधायी शक्ति प्राप्त है।
युग्म 3) सही है: जब किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा जाता है, तो उस पर राष्ट्रपति द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया का उल्लेख अनुच्छेद 201 में किया गया है।
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति को यह आपातकालीन शक्ति प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित या सीमित कर सकता है?
व्याख्या:
भारतीय संविधान के तहत विकल्प (d) पूरी तरह सही है क्योंकि अनुच्छेद 359 राष्ट्रपति को यह असाधारण आपातकालीन शक्ति देता है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के प्रभावी रहने के दौरान आदेश जारी करके भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को न्यायालय द्वारा लागू कराने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, जबकि इसके विपरीत अनुच्छेद 102 संसद सदस्यों की अयोग्यता से, अनुच्छेद 108 संयुक्त अधिवेशन से, और अनुच्छेद 201 राज्य के विधेयकों पर राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों से संबंधित है।
राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान में ‘बजट’ शब्द का उल्लेख अनुच्छेद 112 में किया गया है।
2. कोई धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर हीं संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1) गलत है: भारतीय संविधान के पूरे मूल विधिक पाठ में कहीं भी ‘बजट’ शब्द का उल्लेख नहीं मिलता है। इसके स्थान पर संविधान के अनुच्छेद 112 में आधिकारिक रूप से ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ शब्दावली का स्पष्ट उपयोग किया गया है।
कथन 2) गलत है: यद्यपि धन विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य होती है, लेकिन इसे “संसद के किसी भी सदन” में पेश नहीं किया जा सकता है। भारतीय संविधान के विधिक नियमों के अनुसार कोई भी धन विधेयक केवल और केवल लोकसभा (निचले सदन) में ही पुनः स्थापित (पेश) किया जा सकता है, इसे राज्यसभा में कभी भी प्रारंभ नहीं किया जा सकता है।
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) के विभिन्न रूपों और उनकी कानूनी परिभाषाओं के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. लघुकरण: दंड के स्वरूप को बदलकर कम करना
2. परिहार: दंड की प्रकृति बदले बिना केवल अवधि कम करना
3. विराम: किसी दंड के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना
4. प्रविलम्बन: दोषी को क्षमा याचना के लिए कुछ समय देना
उपरोक्त युग्मों में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
व्याख्या:
युग्म 1 सही है: लघुकरण (Commutation) का अर्थ सजा के चरित्र या स्वरूप को बदलकर हल्का करना है, जैसे मृत्युदंड को बदलकर कठोर कारावास में परिवर्तित करना।
युग्म 2 सही है: परिहार (Remission) के अंतर्गत सजा की प्रकृति को बदले बिना केवल उसकी समय अवधि को घटा दिया जाता है, जैसे 2 वर्ष के कठोर कारावास को घटाकर 1 वर्ष का कठोर कारावास करना।
युग्म 3 गलत है: विराम (Respite) का अर्थ किसी दंड के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना नहीं है, बल्कि कैदी की किसी विशेष परिस्थिति (जैसे महिला की गर्भावस्था या शारीरिक अपंगता) के कारण वास्तविक दंड को कम करना है।
युग्म 4 सही है: प्रविलम्बन (Reprieve) का मुख्य उद्देश्य किसी दंड (विशेषकर मृत्युदंड) के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना होता है, ताकि दोषी व्यक्ति को राष्ट्रपति से क्षमा याचना करने का पर्याप्त समय मिल सके।
भारत के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों की क्षमादान शक्तियों के बीच संवैधानिक अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का राष्ट्रपति कोर्ट-मार्शल द्वारा दी गई सजा को क्षमा कर सकता है, लेकिन राज्य का राज्यपाल ऐसा नहीं कर सकता।
2. राष्ट्रपति मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा कर सकता है, जबकि राज्यपाल को मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
सही उत्तर का चयन कीजिए:
व्याख्या
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य अदालतों (Court-Martial) द्वारा दिए गए दंड को क्षमा, कम या निलंबित करने का विशेष अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
कथन 2 सही है: केवल राष्ट्रपति ही मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा कर सकता है। राज्यपाल मृत्युदंड को निलंबित (Suspend), परिहार (Remit) या लघुकरण (Commute) तो कर सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह से अपराधमुक्त (माफ़) नहीं कर सकता।
राष्ट्रपति की विभिन्न वीटो शक्तियों के वर्गीकरण और उनके अर्थ के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| क्र.सं | वीटो का प्रकार | अर्थ |
|---|---|---|
| 1) | आत्यंतिक वीटो | विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजना, जिसे संसद साधारण बहुमत से निरस्त कर सकती है। |
| 2) | निलंबनकारी वीटो | विधेयक पर अपनी सहमति को पूरी तरह सुरक्षित रखना, जिससे विधेयक समाप्त हो जाता है। |
| 3) | विशेषित वीटो | उच्च बहुमत द्वारा वीटो को निरस्त करना, जो भारतीय राष्ट्रपति को प्राप्त नहीं है बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को प्राप्त है। |
उपरोक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
व्याख्या:
युग्म 1) गलत है: आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto) का अर्थ विधेयक को पुनर्विचार के लिए भेजना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ विधेयक पर अपनी सहमति को पूरी तरह सुरक्षित रखना (रोकना) है, जिससे वह विधेयक वहीं समाप्त हो जाता है और कानून नहीं बन पाता है।
युग्म 2) गलत है: निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) का अर्थ सहमति को पूरी तरह रोकना नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है, जिसे संसद दोबारा साधारण बहुमत से पास करके निरस्त कर सकती है।
युग्म 3) सही है: विशेषित वीटो (Qualified Veto) के तहत विधायिका को राष्ट्रपति के वीटो को पलटने के लिए पहले से बड़े यानी उच्च (विशेष) बहुमत की आवश्यकता होती है। यह व्यवस्था अमेरिकी राष्ट्रपति को प्राप्त है, जबकि भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को ऐसी कोई वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है।
भारत के राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों के अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को कोई वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. पॉकेट वीटो के तहत राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चित काल के लिए लंबित रख सकता है।
3. राष्ट्रपति धन विधेयक के मामले में ‘निलंबनकारी वीटो’ का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा यह पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है कि संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को अपनी मंजूरी देनी ही होगी, वे इस पर किसी भी प्रकार की वीटो शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।
कथन 2 सही है: अमेरिकी राष्ट्रपति के विपरीत भारत के राष्ट्रपति के पास पॉकेट वीटो के तहत विधेयक पर निर्णय लेने की कोई संवैधानिक समय सीमा तय नहीं है, जिसके कारण वे किसी भी साधारण विधेयक को अनिश्चित काल के लिए अपने पास लंबित रख सकते हैं।
कथन 3 सही है: भारतीय संविधान के विधिक नियमों के अनुसार राष्ट्रपति धन विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं लौटा सकते हैं (वे इसे या तो अपनी सहमति दे सकते हैं या रोक सकते हैं), इसलिए धन विधेयक पर निलंबनकारी वीटो का प्रयोग वर्जित है।
भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और उनमें वर्णित उपराष्ट्रपति से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| क्र.सं | अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|---|
| 1) | अनुच्छेद 63 | भारत के उपराष्ट्रपति |
| 2) | अनुच्छेद 64 | उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष होंगे |
| 3) | अनुच्छेद 66 | उपराष्ट्रपति का चुनाव |
| 4) | अनुच्छेद 67 | राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति द्वारा उनके कर्तव्यों का निर्वहन |
उपरोक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
व्याख्या:
युग्म 1) सही है: संविधान के अनुच्छेद 63 के मूल विधिक पाठ में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि “भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा”, जो इस पद की संवैधानिक निरंतरता को दर्शाता है।
युग्म 2) सही है: संविधान के अनुच्छेद 64 के विधिक प्रावधानों के अनुसार भारत का उपराष्ट्रपति आधिकारिक रूप से राज्यसभा का पदेन सभापति या अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होता है और वह अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करता है।
युग्म 3) सही है: उपराष्ट्रपति के निर्वाचन की विधिक प्रक्रिया और उनके निर्वाचक मंडल का विस्तृत विवरण संविधान के अनुच्छेद 66 के अंतर्गत ही निर्धारित किया गया है।
युग्म 4) गलत है: राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, मृत्यु, त्यागपत्र या पदमुक्ति की स्थिति में उपराष्ट्रपति द्वारा उनके कर्तव्यों और कार्यों का निर्वहन करने का प्रावधान अनुच्छेद 65 में दिया गया है, जबकि अनुच्छेद 67 का संबंध केवल उपराष्ट्रपति की पदावधि (कार्यकाल) से है।
भारत के उपराष्ट्रपति के संवैधानिक पद, उनकी शक्तियों और पदमुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
व्याख्या:
उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी विधिक आदेश या औपचारिक महाभियोग की कोई संवैधानिक आवश्यकता नहीं होती है। संविधान के अनुच्छेद 67(ख) के अनुसार, उन्हें हटाने का प्रस्ताव केवल और केवल राज्यसभा द्वारा प्रभावी बहुमत से पारित होना चाहिए, जिस पर लोकसभा की साधारण बहुमत से सहमति अनिवार्य होती है। इस विधायी प्रक्रिया के पूरे होते ही उपराष्ट्रपति स्वतः पदमुक्त हो जाते हैं।
विकल्प (a) सही है: राष्ट्रपति के चुनाव के विपरीत, उपराष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के सदस्यों को भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है। इसमें केवल संसद के सदस्य ही भाग लेते हैं।
विकल्प (b) सही है: संविधान के अनुच्छेद 64 के तहत भारत का उपराष्ट्रपति आधिकारिक रूप से राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और वह अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता है।
विकल्प (c) सही है: अनुच्छेद 67 के मूल विधिक प्रावधानों के अनुसार, उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने (शपथ लेने) की तारीख से पूरे पांच वर्ष की अवधि तक अपना पद धारण करता है।
भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत जब राष्ट्रपति का पद आकस्मिक रूप से खाली होता है और उपराष्ट्रपति उस पद पर कार्य करता है, तो इस प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के राष्ट्रपति का पद त्यागपत्र या मृत्यु के कारण खाली होता है, तो उपराष्ट्रपति शेष बचे हुए पूरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बन जाता है।
2. इस कार्य अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति को पूर्व निर्धारित वेतन और भत्ते मिलते रहते हैं।
3. राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय वह उन सभी शक्तियों, उन्मुक्तियों और विशेषाधिकारों का हकदार होता है जो राष्ट्रपति को प्राप्त हैं।
सही उत्तर का चयन कीजिए:
व्याख्या
कथन 1 गलत है: अमेरिका के विपरीत, भारत में राष्ट्रपति का पद खाली होने पर उपराष्ट्रपति शेष बचे हुए कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति नहीं बनता। वह अनुच्छेद 65 के तहत केवल तब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है जब तक कि नया नियमित राष्ट्रपति (अधिकतम 6 महीने के भीतर) चुनकर नहीं आ जाता।
कथन 2 गलत है: राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति को उसके पूर्व निर्धारित (उपराष्ट्रपति या सभापति वाले) वेतन और भत्ते नहीं मिलते हैं। अनुच्छेद 65(3) के अनुसार, इस दौरान उसे राष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित सभी वेतन, भत्ते और वित्तीय उपलब्धियां प्राप्त होती हैं।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 65(3) के नियमों के तहत जब उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालता है, तो वह उन सभी कार्यपालिका शक्तियों, कानूनी उन्मुक्तियों और विशेषाधिकारों का पूर्ण रूप से हकदार हो जाता है जो वास्तविक राष्ट्रपति को प्राप्त होती हैं।
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