History Daily Practice MCQ | Result Mitra
History Daily Practice MCQ
इतिहास | दैनिक अभ्यास प्रश्न
उत्तर: (B) इलाही बख्श
व्याख्या
मिर्जा इलाही बख्श की भूमिका: 1857 के विद्रोह के दौरान, बहादुर शाह जफर के समधी (रिश्तेदार) मिर्जा इलाही बख्श ने अंग्रेजों के गुप्त एजेंट के रूप में काम किया था। जब ब्रिटिश सेना ने दिल्ली पर फिर से कब्जा करना शुरू किया, तो जफर ने दिल्ली छोड़कर हुमायूं के मकबरे में शरण ले ली थी। इलाही बख्श ने अंग्रेजों को सम्राट के छिपने के ठिकाने की सटीक गुप्त सूचना दी, जिसके कारण कैप्टन विलियम हडसन ने मुगल सम्राट को वहां से गिरफ्तार कर लिया।
1. नेटिव ओपिनियन – विश्वनाथ नारायण मांडलिक
2. इंडिपेंडेंट इंडिया – मोतीलाल नेहरू
3. अल-हिलाल – मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित नहीं है/हैं?
उत्तर: (B) केवल 2
व्याख्या
- युग्म 1 सही सुमेलित है: ‘नेटिव ओपिनियन’ नामक प्रसिद्ध अंग्रेजी समाचार पत्र की शुरुआत वर्ष 1864 में विश्वनाथ नारायण मांडलिक द्वारा की गई थी। इसके माध्यम से भारतीय समाज और राजनीति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता था।
- युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है: ‘इंडिपेंडेंट इंडिया’ (Independent India) साप्ताहिक पत्रिका की शुरुआत वर्ष 1937 में प्रसिद्ध वामपंथी नेता एम. एन. रॉय (मानवेन्द्र नाथ रॉय) द्वारा की गई थी। मोतीलाल नेहरू ने वर्ष 1919 में इलाहाबाद से ‘द इंडिपेंडेंट’ (The Independent) नामक समाचार पत्र की शुरुआत की थी।
- युग्म 3 सही सुमेलित है: ‘अल-हिलाल’ (Al-Hilal) एक अत्यंत प्रसिद्ध उर्दू साप्ताहिक समाचार पत्र था, जिसकी स्थापना वर्ष 1912 में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा की गई थी।
निर्माता (शासक) : मंदिर
1. राजराज चोल प्रथम : बृहदेश्वर मंदिर
2. राजराज चोल द्वितीय : ऐरावतेश्वर मंदिर
3. नरसिंहवर्मन द्वितीय : शोर मंदिर
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
उत्तर: (C) सभी तीन युग्म
व्याख्या
- युग्म 1 सही सुमेलित है: तंजावुर (तमिलनाडु) का प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर (राजराजेश्वरम) चोल राजा राजराज चोल प्रथम द्वारा 11वीं शताब्दी के आरंभ में बनवाया गया था। यह द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और पूरी तरह से ग्रेनाइट से निर्मित है।
- युग्म 2 सही सुमेलित है: दारासुरम (तमिलनाडु) का ऐरावतेश्वर मंदिर चोल सम्राट राजराज चोल द्वितीय द्वारा 12वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और रथ के आकार के संरचनात्मक ऊंचे चबूतरे के लिए प्रसिद्ध है। (तंजावुर और दारासुरम के ये दोनों मंदिर यूनेस्को की ‘महान जीवंत चोल मंदिर’ धरोहर का हिस्सा हैं)।
- युग्म 3 सही सुमेलित है: महाबलीपुरम (तमिलनाडु) का प्रसिद्ध शोर मंदिर (तटीय मंदिर) पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन द्वितीय (जिन्हें ‘राजसिंह’ भी कहा जाता है) द्वारा 8वीं शताब्दी के प्रारंभ में बनवाया गया था। यह पल्लव वास्तुकला की संरचनात्मक मंदिर निर्माण शैली की शुरुआत को दर्शाता है।
1. फीनिक्स सेटलमेंट
2. कोचरब आश्रम
3. सेवाग्राम आश्रम
4. टॉलस्टॉय फार्म
इनका सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?
उत्तर: (A) 1-4-2-3
व्याख्या
- फीनिक्स सेटलमेंट (स्थापना: वर्ष 1904): यह महात्मा गांधी द्वारा स्थापित पहला आश्रम था। इसकी स्थापना उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में डरबन के पास जॉन रस्किन की पुस्तक ‘अनटू दिस लास्ट’ के आदर्शों को व्यावहारिक रूप देने के उद्देश्य से की थी।
- टॉलस्टॉय फार्म (स्थापना: वर्ष 1910): यह दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के पास स्थापित गांधी जी का दूसरा प्रमुख आश्रम था। इसका नाम रूसी लेखक और दार्शनिक लियो टॉलस्टॉय के नाम पर रखा गया था और यह दक्षिण अफ्रीका में चल रहे सत्याग्रह आंदोलन का मुख्य मुख्यालय था।
- कोचरब आश्रम (स्थापना: वर्ष 1915): दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद, गांधी जी ने भारत में अपना पहला आश्रम अहमदाबाद के पास कोचरब में स्थापित किया था। बाद में वर्ष 1917 में इसे साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित कर दिया गया, जिसे साबरमती आश्रम के नाम से जाना गया।
- सेवाग्राम आश्रम (स्थापना: वर्ष 1936): यह महात्मा गांधी द्वारा स्थापित अंतिम प्रमुख आश्रम था। इसकी स्थापना उन्होंने महाराष्ट्र के वर्धा जिले के एक गाँव (सेवाग्राम) में की थी, जो उनके जीवन के उत्तरार्ध में स्वतंत्रता संग्राम का एक मुख्य केंद्र बना।
कथन-I: लखनऊ समझौते के माध्यम से कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मुसलमानों के लिए ‘पृथक निर्वाचक मंडल’ की मांग को स्वीकार कर लिया था।
कथन-II: मदन मोहन मालवीय ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए इस समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
उत्तर: (C) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
व्याख्या
- कथन-I सही है: वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसे ‘लखनऊ समझौता’ कहा जाता है। इस समझौते के तहत कांग्रेस ने एक दूरगामी और विवादास्पद नीतिगत निर्णय लेते हुए पहली बार आधिकारिक तौर पर मुसलमानों के लिए ‘पृथक निर्वाचक मंडल’ की मांग को स्वीकार कर लिया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने पहले ही 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों के माध्यम से लागू कर दिया था।
- कथन-II गलत है: कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच इस समझौते को कराने में बाल गंगाधर तिलक और मोहम्मद अली जिन्ना ने सबसे महत्वपूर्ण और अग्रणी भूमिका निभाई थी। इसके विपरीत, मदन मोहन मालवीय इस समझौते के सबसे कड़े आलोचकों में से एक थे। उन्होंने कांग्रेस द्वारा पृथक निर्वाचक मंडल को स्वीकार किए जाने का पुरजोर विरोध किया था और इस समझौते में उनकी कोई सकारात्मक भूमिका नहीं थी।
- 1916 के इस लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी, और इसी अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों धड़ों (नरम दल और गरम दल) का भी 1907 के सूरत विभाजन के बाद पुनर्मिलन हुआ था।
1. लॉर्ड लिटन – वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट और आर्म्स एक्ट
2. लॉर्ड रिपन – इल्बर्ट बिल विवाद और प्रथम नियमित जनगणना
3. लॉर्ड कर्जन – भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम और बंगाल का विभाजन
4. लॉर्ड चेम्सफोर्ड – रॉलेट एक्ट का पारित होना और सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
उत्तर: (A) केवल 4
व्याख्या
- युग्म 1 सही सुमेलित है: लॉर्ड लिटन (1876-1880) के कार्यकाल के दौरान भारतीय भाषाई प्रेस पर कड़ा प्रतिबंध लगाने के लिए वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878) और भारतीयों द्वारा बिना लाइसेंस हथियार रखने को अपराध घोषित करने के लिए आर्म्स एक्ट (1878) पारित किया गया था।
- युग्म 2 सही सुमेलित है: लॉर्ड रिपन (1880-1884) के समय भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई का अधिकार देने वाला विवादित इल्बर्ट बिल (1883) पेश हुआ था। साथ ही, वर्ष 1881 में भारत की प्रथम नियमित (दसकीय) जनगणना भी इन्हीं के कार्यकाल में शुरू हुई थी।
- युग्म 3 सही सुमेलित है: लॉर्ड कर्जन (1899-1905) के कार्यकाल में उच्च शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904) पारित किया गया था और इन्होंने ही 1905 में ऐतिहासिक बंगाल का विभाजन किया था।
- युग्म 4 सही सुमेलित नहीं है: लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921) के समय रॉलेट एक्ट (1919) तो पारित हुआ था, लेकिन सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत (1930) इनके कार्यकाल में नहीं हुई थी। सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी के प्रसिद्ध दांडी मार्च के साथ लॉर्ड इरविन (1926-1931) के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
1. इस चरण के नेताओं का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था।
2. इन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विधान परिषदों के विस्तार के लिए ‘प्रार्थना और याचिका’ की पद्धति अपनाई थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या
- कथन 1 सही है: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरण (1885-1905) को ‘उदारवादी चरण’ कहा जाता है। इस दौर के प्रमुख नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का अंग्रेजों की न्यायप्रियता, ईमानदारी और निष्पक्षता में अटूट विश्वास था। उनका मानना था कि अंग्रेज मूल रूप से न्यायप्रिय हैं और यदि भारतीय अपनी वास्तविक समस्याओं को उचित तर्कों के साथ उनके सामने रखेंगे, तो ब्रिटिश सरकार उन्हें अवश्य स्वीकार करेगी।
- कथन 2 सही है: उदारवादी नेताओं की राजनीतिक कार्यपद्धति पूरी तरह से संवैधानिक और शांतिपूर्ण साधनों पर आधारित थी। अपनी मांगों (जैसे प्रशासनिक सुधारों, सिविल सेवा के भारतीयकरण और विधान परिषदों के विस्तार) को सरकार तक पहुँचाने के लिए वे मुख्य रूप से प्रार्थना (प्रेयर), याचिका (पेटीसन) और शांतिपूर्ण सभाओं की पद्धति का उपयोग करते थे। वे वार्षिक अधिवेशनों में प्रस्ताव पारित कर अपने शिष्टमंडलों के माध्यम से उन्हें ब्रिटिश सरकार के पास भेजते थे।
1. इल्बर्ट बिल विवाद
2. वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट
3. बंगाल का विभाजन
4. सूरत अधिवेशन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
उत्तर: (B) 2, 1, 3, 4
व्याख्या
- वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (वर्ष 1878): लॉर्ड लिटन के कार्यकाल के दौरान भारतीय भाषाई समाचार पत्रों पर कड़ा प्रतिबंध लगाने के लिए यह विवादित कानून पारित किया गया था।
- इल्बर्ट बिल विवाद (वर्ष 1883): लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में यह विधेयक लाया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार देना था। ब्रिटिश समुदाय के तीव्र विरोध के कारण यह एक बड़े विवाद में बदल गया था।
- बंगाल का विभाजन (वर्ष 1905): लॉर्ड कर्जन द्वारा प्रशासनिक असुविधा का बहाना बनाकर राष्ट्रीय चेतना को दबाने के उद्देश्य से बंगाल का विभाजन किया गया था, जिसके विरोध में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था।
- सूरत अधिवेशन (वर्ष 1907): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस ऐतिहासिक अधिवेशन में वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस दो धड़ों—नरम दल और गरम दल में विभाजित हो गई थी, जिसे ‘सूरत विभाजन’ के नाम से जाना जाता है।
1. ज़ब्त प्रणाली की शुरुआत
2. मनसबदारी व्यवस्था का औपचारिक प्रारंभ
3. दाग एवं हुलिया प्रथा की शुरुआत
4. दीन-ए-इलाही की घोषणा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
उत्तर: (A) 3, 1, 2, 4
व्याख्या
- दाग एवं हुलिया प्रथा की शुरुआत (वर्ष 1296–1316): अलाउद्दीन खिलजी के कार्यकाल के दौरान सेना में भ्रष्टाचार रोकने, घोड़ों को दागने और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी।
- ज़ब्त प्रणाली की शुरुआत (वर्ष 1570–1571): अकबर के कार्यकाल में उनके राजस्व मंत्री राजा टोडरमल द्वारा भूमि की पैमाइश और फसलों के मूल्यांकन पर आधारित यह उन्नत भू-राजस्व व्यवस्था लागू की गई थी।
- मनसबदारी व्यवस्था का औपचारिक प्रारंभ (वर्ष 1573–1574): अकबर के कार्यकाल में साम्राज्य के प्रशासनिक और सैन्य ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए आधिकारिक रूप से मनसब (पद/रैंक) देने की इस अनूठी प्रणाली की शुरुआत की गई थी।
- दीन-ए-इलाही की घोषणा (वर्ष 1582): अकबर के कार्यकाल में सभी धर्मों के सकारात्मक तत्वों को मिलाकर एक नए नैतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक सद्भाव बढ़ाना था।
1. ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) के घोषणापत्र ‘द फिलासफी ऑफ द बॉम्ब’ का प्रारूप भगवती चरण बोहरा द्वारा तैयार किया गया था।
2. काकोरी कांड के पश्चात क्रांतिकारियों ने व्यक्तिगत आतंकवाद की रणनीति को पूरी तरह त्यागकर सीधे किसान-मजदूरों की क्रांतियों को संचालित करना शुरू कर दिया था।
3. भगत सिंह द्वारा 1926 में स्थापित ‘नौजवान भारत सभा’ को अपने शुरुआती दौर में ही ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (A) केवल 1
व्याख्या
- कथन 1 (सही है): जनवरी 1930 में जारी किए गए प्रसिद्ध क्रांतिकारी घोषणापत्र ‘द फिलासफी ऑफ द बॉम्ब’ (बम का दर्शन) का मसौदा भगवती चरण बोहरा द्वारा ही तैयार किया गया था।
- कथन 2 (गलत है): काकोरी कांड के बाद क्रांतिकारियों का झुकाव मार्क्सवाद की ओर जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत वीरता/कार्रवाइयों की रणनीति को पूरी तरह नहीं त्यागा था (जैसे सांडर्स की हत्या और सेंट्रल असेंबली में बम फेंकना)।
- कथन 3 (गलत है): भगत सिंह द्वारा मार्च 1926 में स्थापित ‘नौजवान भारत सभा’ अपने शुरुआती दिनों में प्रतिबंधित नहीं थी। इस पर ब्रिटिश सरकार द्वारा काफी समय बाद (वर्ष 1929-1930 के दौरान) प्रतिबंध लगाया गया था।
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