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UPSC PYQ Prelims Art & Culture (2026) | Result Mitra

By Result Mitra •
UPSC PYQ Prelims Art & Culture (2026) | Result Mitra
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UPSC PYQ Prelims Art & Culture (2026)

IAS PCS Institute | बहुविकल्पीय प्रश्न एवं व्याख्या

प्रश्न 1

बाघ गुफाओं में हल्लिसलास्य चित्रकला दर्शाती है:

(a) एक आनंदमय लोक नृत्य।
(b) ध्यान मुद्रा में बुद्ध
(c) कै लाश पर शिव और पार्वती का चित्रण
(d) समुद्रमंथन
उत्तर और व्याख्या देखें

उत्तर: (a)

स्पष्टीकरण:

  • बाघ की गुफाओं में बने भित्तिचित्रों में एक दृश्य गोलाकार नृत्य का है जिसे हल्लिसलास्य कहा जाता है।
  • इस चित्र में महिलाओं का एक समूह एक मुख्य नर्तक या संगीतकार के चारों ओर गोलाकार घेरा बनाकर वाद्ययंत्र बजाते हुए नृत्य कर रहा है।
  • यह चित्र तत्कालीन समाज के लौकिक और उत्सवपूर्ण जीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित करता है।
प्रश्न 2

भारत में स्थान-मान प्रणाली के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत में प्लेस-वैल्यू सिस्टम का सबसे पहला इस्तेमाल गुजरात (AD 595-596) की मंकनी प्लेटों में मिलता है।
  2. नौवीं सदी में, पूरे भारत में शिलालेखों में जगह की वैल्यू आम हो गई।
  3. सातवीं सदी की शुरुआत में दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृ त शिलालेखों में जगह के मान पाए गए हैं।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) के वल 1 और 2
(b) के वल 1 और 3
(c) के वल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

उत्तर: (d)

स्पष्टीकरण:

  • कथन 1 सही है: पुरालेखीय साक्ष्यों के अनुसार, भारत में दशमलव स्थान-मान प्रणाली का सबसे पहला लिखित उपयोग गुजरात के मंकनी ताम्रपत्रों में दर्ज है जो छठी शताब्दी के अंत (595-596 ईस्वी) के हैं।
  • कथन 2 सही है: यह प्रणाली समय के साथ और विकसित हुई तथा नौवीं शताब्दी तक आते-आते भारत के लगभग सभी क्षेत्रों के शिलालेखों में अंकों के स्थान-मान का उपयोग एक सामान्य बात बन चुकी थी।
  • कथन 3 सही है: सांस्कृ तिक और व्यापारिक संपर्कों के कारण यह प्रणाली भारत से बाहर भी फै ली, जिसके परिणामस्वरूप सातवीं शताब्दी की शुरुआत में ही दक्षिण-पूर्व एशिया के संस्कृ त अभिलेखों में भारतीय स्थान-मान अंक देखने को मिलते हैं।
प्रश्न 3

हड़प्पा शहरों में पुरातात्विक खोजों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. घरों में तकली-घुमाव तो बहुत ज़्यादा हैं, लेकिन चरखे नहीं हैं।
  2. वज़न और नाप के स्के ल, ग्रेजुएशन के साथ खोजे गए हैं।
  3. यहां ज़्यादातर घर पक्की ईंटों से बने हैं, जिनके आस-पास काफ़ी बड़े आंगन हैं, जिनमें अपने कु एं, नहाने के प्लेटफॉर्म और बड़े कमरे हैं।

ऊपर दिए गए बयानों से कौन सा नतीजा निकाला जा सकता है?

  1. कथन I से पता चलता है कि कताई घर पर की जाने वाली एक मेहनत वाली एक्टिविटी थी।
  2. स्टेटमेंट II से पता चलता है कि हड़प्पा के लोगों के पास कितना साइंटिफिक ज्ञान था।
  3. स्टेटमेंट III एक कॉमन प्रॉपर्टी सिस्टम के बनने का सुझाव देता है।

नीचे दिए गए कोड का इस्तेमाल करके जवाब चुनें:

(a) के वल 1 और 2
(b) के वल 2 और 3
(c) के वल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

उत्तर: (a)

स्पष्टीकरण:

  • निष्कर्ष 1 सही है: हड़प्पा सभ्यता के लगभग हर घर से बड़ी संख्या में मिट्टी और सीप से बने तकली-घुमाव मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि कपड़ा बुनने के लिए धागा कातना हर घर में हाथ से की जाने वाली एक दैनिक और श्रम-साध्य गतिविधि थी।
  • निष्कर्ष 2 सही है: खुदाई में मिले मापन स्के ल (जिन पर सटीक दूरी के निशान बने हैं) और नगर नियोजन की ज्यामितीय सटीकता यह साबित करती है कि उनके पास उन्नत गणितीय और वैज्ञानिक समझ थी।
  • निष्कर्ष 3 गलत है: घरों के भीतर निजी कु ओं, आंगनों और बड़े कमरों की मौजूदगी निजी आवास और व्यक्तिगत या पारिवारिक स्वामित्व को दर्शाती है, न कि किसी सामूहिक या साझा संपत्ति प्रणाली को।
प्रश्न 4

ऋग्वैदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. कु ओं से सिंचाई की वजह से खेती बाढ़ वाले मैदानों और नदी के किनारों की पट्टियों से दूर, आज के पंजाब और हरियाणा के मैदानों में फै ल सकी, जहाँ ज़मीन के नीचे का पानी का लेवल ज़मीन के काफ़ी करीब था।
  2. कु ओं से पानी निकालने के लिए जानवरों की शक्ति का इस्तेमाल किया गया।

नीचे दी गई जानकारी में से कौन सी जानकारी ऊपर दिए गए बयानों को सपोर्ट करती है?

  1. ऋग्वेद में पानी खींचने के लिए अश्म चक्र (पत्थर का पुली व्हील) और आहवा (लकड़ी की पट्टियां) के इस्तेमाल का सबूत मिलता है।
  2. ऋग्वेद में परशु/कु लिश (कु ल्हाड़ी) और दात्रा/श्रेणी (हंसिया) जैसे औजारों के इस्तेमाल का ज़िक्र किया गया है।
  3. ऋग्वेद से भी पहले ज़मीन जोतने और गाड़ियां खींचने के लिए बैल के इस्तेमाल का इतिहास मिलता है।

नीचे दिए गए कोड का इस्तेमाल करके जवाब चुनें:

(a) के वल 1 और 2
(b) 1. 2 और 3
(c) के वल 1 और 3
(d) के वल 3
उत्तर और व्याख्या देखें

उत्तर: (c)

स्पष्टीकरण:

  • जानकारी 1 सपोर्ट करती है: पत्थर के पुली व्हील (अश्म चक्र) और पानी संचित करने या खींचने वाले पात्र (आहवा) का उल्लेख स्पष्ट करता है कि गहरे कु ओं से पानी निकालने के लिए एक यांत्रिक व्यवस्था मौजूद थी, जिसने नदी तटों से दूर शुष्क मैदानों में भी सिंचाई को संभव बनाया (कथन I का समर्थन)।
  • जानकारी 2 सपोर्ट नहीं करती: कु ल्हाड़ी और हंसिया कृ षि उपकरण तो हैं, लेकिन इनका कु ओं के उपयोग या पानी खींचने की तकनीक से कोई सीधा संबंध नहीं है।
  • जानकारी 3 सपोर्ट करती है: इस काल से पहले से ही खेती और भारी गाड़ियां खींचने के लिए बैलों का व्यापक उपयोग किया जा रहा था। इसी पशु-शक्ति की निरंतरता के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि कु ओं के भारी पुली व्हील को घुमाने या खींचने के लिए भी जानवरों का इस्तेमाल किया जाता था (कथन II का समर्थन)।
प्रश्न 5

निम्नलिखित कथन पर विचार करें:

“प्लीस्टोसीन काल में या तो यमुना कभी सिंधु नदी में मिलती थी, या सतलुज यमुना में मिलती थी और दोनों में से किसी एक की एक बड़ी सहायक नदी गंगा से सिंधु नदी में चली जाती थी या इसका उल्टा होता था।”

इनमें से कौन सा/से ऊपर दिए गए दावे का आधार है/हैं?

  1. ऋग्वेद का नदी-सूक्त
  2. रॉबर्ट ब्रूस फू टे द्वारा सतलुज और यमुना की खोज
  3. सिंधु और गंगा दोनों नदी प्रणालियों में डॉल्फ़िन की एक ही प्रजाति की उपस्थिति

नीचे दिए गए कोड का इस्तेमाल करके जवाब चुनें:

(a) के वल 3
(b) के वल 2
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

उत्तर: (a)

स्पष्टीकरण:

  • कथन 3 सही आधार है: सिंधु नदी और गंगा नदी दोनों के मीठे पानी में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन जैविक रूप से एक ही प्रजाति से संबंधित हैं। चूंकि ये जीव समुद्र के खारे पानी में जीवित नहीं रह सकते, इसलिए दोनों अलग-अलग नदी प्रणालियों में इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि प्रागैतिहासिक प्लीस्टोसीन काल में इन दोनों नदी घाटियों के बीच कोई सीधा जल-संपर्क मार्ग अवश्य मौजूद था, जो बाद में भू-गर्भीय बदलावों के कारण टूट गया।
  • कथन 1 गलत है: नदी-सूक्त ऐतिहासिक काल की भौगोलिक स्थिति का वर्णन करता है, न कि लाखों वर्ष पुराने प्लीस्टोसीन काल के भूवैज्ञानिक विवर्तनिक बदलावों का।
  • कथन 2 गलत है: रॉबर्ट ब्रूस फू टे का मुख्य योगदान भारत में आदिमानव के पाषाण उपकरणों और प्रागैतिहासिक बस्तियों की खोज से जुड़ा है, न कि उत्तर भारत की नदियों के प्राचीन प्रवाह तंत्र के भू-वैज्ञानिक विश्लेषण से।

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