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UPSC PYQ 2022 (History) | Result Mitra

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UPSC PYQ 2022 (History) | Result Mitra
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UPSC PYQ 2022 (History)

प्राचीन एवं मध्यकालीन भारतीय इतिहास — Previous Year Questions

प्रश्न 1

निम्नलिखित युग्मों पर विचार करें:

1. धौली — ओडिशा
2. एर्रागुडी — आंध्र प्रदेश
3. जौगाड़ा — मध्य प्रदेश
4. कलसी — कर्नाटक

ऊपर दिए गए कितने जोड़े सही ढंग से मेल खाते हैं?

(a) केवल एक जोड़ी
(b) केवल दो जोड़े
(c) केवल तीन जोड़े
(d) सभी चार जोड़े
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (b) केवल दो जोड़े
  • युग्म 1 — सही: धौली ओडिशा के खुर्दा/भुवनेश्वर जिले में दया नदी के तट पर स्थित है। यह वही स्थान माना जाता है जहाँ कलिंग युद्ध हुआ था। यहाँ अशोक के पृथक कलिंग शिलालेख (Separate Kalinga Edicts) मिले हैं, जिनमें प्रसिद्ध कथन है: “सभी मनुष्य मेरी संतान हैं।”
  • युग्म 2 — सही: एर्रागुडी (येर्रागुडी) आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में स्थित है। यह स्थल इस मायने में अद्वितीय है कि यहाँ अशोक के १४ बृहद शिलालेख और लघु शिलालेख दोनों मिले हैं। इसकी लिपि ब्राह्मी है जो दाएं से बाएं (Boustrophedon शैली) भी लिखी गई है।
  • युग्म 3 — गलत: जौगाड़ा मध्य प्रदेश में नहीं, बल्कि ओडिशा के गंजाम जिले में स्थित है। धौली की तरह जौगाड़ा में भी अशोक के पृथक कलिंग शिलालेख स्थित हैं।
  • युग्म 4 — गलत: कलसी कर्नाटक में नहीं, बल्कि उत्तराखंड के देहरादून जिले में यमुना और टोंस नदी के संगम के पास स्थित है। यहाँ अशोक के १४ बृहद शिलालेख पाए गए हैं।
अशोक के प्रमुख शिलालेख स्थल

उत्तर/पश्चिम

कलसी (उत्तराखंड)

शाहबाज़गढ़ी (पाकिस्तान)

मानसेहरा (पाकिस्तान)

पूर्व/दक्षिण

धौली (ओडिशा)

जौगाड़ा (ओडिशा)

एर्रागुडी (आंध्र प्रदेश)

प्रश्न 2

प्राचीन दक्षिण भारत में संगम साहित्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) संगम कविताओं में भौतिक संस्कृति का कोई संदर्भ नहीं है।
(b) संगम कवियों को वर्ण के सामाजिक वर्गीकरण की जानकारी थी।
(c) संगम कविताओं में योद्धा नैतिकता का कोई संदर्भ नहीं है।
(d) संगम साहित्य में जादुई शक्तियों को तर्कहीन बताया गया है।
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (b) संगम कवियों को वर्ण के सामाजिक वर्गीकरण की जानकारी थी।
  • विकल्प (a) गलत है: संगम साहित्य में तत्कालीन भौतिक संस्कृति, कृषि तकनीक, धान की खेती, विदेशी व्यापार (विशेषकर रोम के साथ यवन व्यापार), बंदरगाहों (जैसे पुहार/कावेरीपट्टनम) और बुनाई उद्योग का विस्तृत वर्णन मिलता है।
  • विकल्प (b) सही है: संगम काल के कवियों को उत्तर भारतीय ‘वर्ण व्यवस्था’ और ब्राह्मणवादी परंपराओं की जानकारी थी। साहित्य में अंतणर (ब्राह्मण), अरासर (शासक), वैसियर (व्यापारी) और वेल्लाल (कृषक) जैसे वर्गों का उल्लेख मिलता है, यद्यपि तमिल समाज में कठोर जाति व्यवस्था के बजाय सामाजिक स्तर विविक्त (फ्लूइड) था।
  • विकल्प (c) गलत है: संगम साहित्य, विशेष रूप से ‘पुरम’ कविताएँ, पूरी तरह से वीरगाथा, योद्धा नैतिकता (Heroic Ethos), राजाओं की उदारता, युद्ध के नियमों और युद्ध भूमि में वीरगति प्राप्त करने वाले योद्धाओं के लिए स्थापित ‘नडुकल’ (वीरकल/वीर प्रस्तर) पर आधारित हैं।
  • विकल्प (d) गलत है: संगम काल के समाज में अलौकिक शक्तियों, शकुन-अपशकुन, आत्माओं तथा जादुई शक्तियों (जैसे अणंगु) पर गहरा विश्वास था, इसे तर्कहीन मानकर नकारा नहीं गया था।
प्रश्न 3

निज़ामुद्दीन पानीपति द्वारा ‘योगवसिष्ठ’ का फारसी में अनुवाद किस मुगल सम्राट के शासनकाल में किया गया था?

(a) अकबर
(b) हुमायूँ
(c) शाहजहाँ
(d) औरंगजेब
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (a) अकबर
  • विकल्प (a) सही है: मुगल सम्राट अकबर ने अंतर-धार्मिक समझ और संस्कृत ग्रंथों के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए फतेहपुर सीकरी में एक औपचारिक ‘अनुवाद विभाग’ (मक्तब ख़ाना) की स्थापना की थी।
    • अकबर के आदेश पर निज़ामुद्दीन पानीपति (सूफी विद्वान) ने ‘योगवसिष्ठ’ का फारसी में अनुवाद किया, जिसे जोग-वशिष्ट कहा गया।
    • इसके अलावा, अब्दुल कादिर बदायूंनी और फैजी ने महाभारत (रज़्मनामा), रामायण, और अथर्ववेद का फारसी में अनुवाद किया था।
  • अन्य विकल्प गलत हैं: यद्यपि दारा शिकोह (शाहजहाँ का पुत्र) ने भी बाद में ‘उपनिषदों’ (सर्र-ए-अकबर) और योगवसिष्ठ का फारसी अनुवाद किया था, लेकिन प्रश्न में निर्दिष्ट विद्वान निज़ामुद्दीन पानीपति का अनुवाद कार्य अकबर के शासनकाल से ही संबंधित है।
प्रश्न 4

भारत के प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में रामानुजाचार्य की बैठी हुई मुद्रा में बनी विश्व की दूसरी सबसे ऊँची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी) का उद्घाटन किया। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन रामानुजाचार्य की शिक्षाओं को सही ढंग से दर्शाता है?

(a) मोक्ष का सर्वोत्तम साधन भक्ति था।
(b) वेद शाश्वत, स्वयंभू और पूर्णतः प्रामाणिक हैं।
(c) तार्किक तर्क सर्वोच्च आनंद के लिए आवश्यक साधन थे।
(d) मोक्ष ध्यान के माध्यम से प्राप्त किया जाना था।
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (a) मोक्ष का सर्वोत्तम साधन भक्ति था।
  • विकल्प (a) सही है: आचार्य रामानुजाचार्य (1017–1137 ई.) ने विशिष्टाद्वैत (Qualified Non-dualism) दर्शन का प्रतिपादन किया। उन्होंने सिखाया कि ईश्वर (विष्णु/नारायण) की कृपा प्राप्त करने और संसार से मुक्ति (मोक्ष) पाने का सबसे सुलभ और सर्वोच्च साधन सगुण भक्ति तथा प्रपत्ति (ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्म-समर्पण) है।
  • विकल्प (b) गलत है: यद्यपि वेदों को प्रामाणिक मानना सभी आस्तिक दर्शनों का हिस्सा है, लेकिन यह रामानुजाचार्य के दर्शन का वह विशिष्ट केंद्रीय बिंदु नहीं है जो मोक्ष के मार्ग को परिभाषित करता हो।
  • विकल्प (c) गलत है: शंकराचार्य के केवल ‘ज्ञान मार्ग’ या शुष्क तर्क शास्त्र के विपरीत, रामानुजाचार्य ने कहा कि केवल बुद्धि या तर्क से ईश्वर प्राप्त नहीं हो सकते, बल्कि भक्ति से ही संभव हैं।
  • विकल्प (d) गलत है: केवल अष्टांग योग या कठिन ध्यान साधना के बजाय, रामानुजाचार्य ने समाज के सभी वर्गों (जिनमें शोषित वर्ग भी शामिल थे) के लिए भक्ति के मार्ग को सर्वसुलभ बताया।
प्रश्न 5

प्रधानमंत्री ने वेरावल में सोमनाथ मंदिर के पास स्थित नए सर्किट हाउस का उद्घाटन किया। सोमनाथ मंदिर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

1. सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
2. सोमनाथ मंदिर का वर्णन अल-बिरूनी ने किया था।
3. सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा (वर्तमान मंदिर की स्थापना) राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन द्वारा की गई थी।

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
  • कथन 1 सही है: प्रभास पाटन (वेरावल, गुजरात) में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के १२ पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से पहला (आदि) ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
  • कथन 2 सही है: फारसी यात्री और इतिहासकार अल-बिरूनी (जो महमूद गजनवी के साथ भारत आया था) ने अपनी पुस्तक ‘किताब-उल-हिंद’ में सोमनाथ मंदिर के वैभव, इसकी वास्तुकला और श्रद्धालुओं के विश्वास का सजीव वर्णन किया है।
  • कथन 3 गलत है: स्वतंत्रता के पश्चात लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इस मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू हुआ। 11 मई 1951 को वर्तमान चालुक्य शैली (मालू-गुर्जर शैली) में निर्मित मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी (डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा नहीं)।
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