UPSC PYQ Polity (2026) | Result Mitra
UPSC PYQ Polity (2026)
भारतीय राजव्यवस्था — Previous Year Questions
UPSC PYQ Polity (2026)
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भारत में दिव्यांग लोगों के बारे में इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (b) के वल 2
व्याख्या:
- कथन 1 गलत: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में पारित हुआ था। यह दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों, समान अवसर, गैर-भेदभाव और सरकारी रोजगार में आरक्षण का प्रावधान करता है।
- कथन 2 सही: सुगम्य भारत अभियान (2015) के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं—निर्मित वातावरण, परिवहन व्यवस्था तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी।
- कथन 3 गलत: NDFDC सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
भारत में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
उत्तर: (a) दो कथन सही हैं, जिनमें कथन 2 शामिल है।
व्याख्या:
- कथन 1 गलत: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आता है। पाँचवीं अनुसूची अन्य निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन से संबंधित है।
- कथन 2 सही: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(26) के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन कु छ अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की निर्दिष्ट आय आयकर से मुक्त होती है।
- कथन 3 सही: संविधान का अनुच्छेद 243D पंचायतों में SC/ST के लिए आरक्षण तथा इन आरक्षित सीटों में कम-से-कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
भारतीय संसद में सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
उत्तर: (c) के वल एक कथन सही है।
व्याख्या:
- कथन 1 गलत: अतारांकित प्रश्न का उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है।
- कथन 2 गलत: तारांकित प्रश्न का उत्तर मौखिक रूप में दिया जाता है और इसके बाद संबंधित सदस्य पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं।
- कथन 3 सही: अतारांकित प्रश्न का उत्तर लिखित होने के कारण उस पर सदन में पूरक प्रश्न पूछने की व्यवस्था नहीं होती।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: प्रश्नकाल संसद में कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रमुख संसदीय साधन है।
भारतीय संसद की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
उत्तर: (d) कोई भी कथन सही नहीं है।
व्याख्या
- कथन 1 गलत है: इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यसभा के सभापति द्वारा नहीं, बल्कि लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
- कथन 2 गलत है: इसमें कु ल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से चुने जाते हैं (कथन में संख्या उलट दी गई है)।
- कथन 3 गलत है: कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य बनने के पात्र नहीं होता है (इसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री सहित किसी भी मंत्री के लिए कोई अपवाद नहीं है)।
- कथन 4 गलत है: समिति के सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष नहीं, बल्कि एक वर्ष होता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत जीरो FIR के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
उत्तर: (d) के वल 2
व्याख्या
- कथन 1 गलत है: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के तहत, जीरो FIR के वल संज्ञेय (Cognizable) अपराधों के लिए दर्ज की जा सकती है, भले ही अपराध उस पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार से बाहर हुआ हो। यह गैर-संज्ञेय (Non-cognizable) अपराधों पर लागू नहीं होती है, इसलिए ‘किसी भी अपराध’ शब्द के कारण यह कथन गलत हो जाता है।
- कथन 2 सही है: BNSS की धारा 173(3) के तहत, 3 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 7 वर्ष से कम की सजा वाले संज्ञेय अपराधों के मामलों में, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी (SHO) सक्षम प्राधिकारी (डीएसपी स्तर के अधिकारी) की पूर्व अनुमति से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) शुरू कर सकता है कि मामला प्रथम दृष्टया (prima facie) बनता है या नहीं।
- कथन 3 गलत है: जीरो FIR दर्ज कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जानकारी देना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक है। सूचना मौखिक (Oral), लिखित या इलेक्ट्रॉनिक संचार किसी भी माध्यम से दी जा सकती है। यदि जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती है, तो उसे रिकॉर्ड पर लेने के लिए 3 दिनों के भीतर सूचनाकर्ता के हस्ताक्षर होना आवश्यक है।
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