इंटरसेप्शन का अर्थशास्त्र: सस्ती रक्षा तकनीक में निजी क्षेत्र की पहल Economics of Interception: Scaling Low-Cost Private Defense
इंटरसेप्शन का अर्थशास्त्र: सस्ती रक्षा तकनीक में निजी क्षेत्र की पहल
Economics of Interception: Scaling Low-Cost Private Defense
संदर्भ
आधुनिक युद्ध में किसी हथियार की कीमत उसके रेंज, गति या सटीकता जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों ने इस “लागत विषमता” (Cost Asymmetry) को उजागर किया है— जहाँ लगभग $10,000 की लागत वाले एक साधारण ड्रोन को नष्ट करने के लिए रक्षा बलों को सैकड़ों हजारों या लाखों डॉलर मूल्य की इंटरसेप्टर मिसाइल छोड़नी पड़ती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय निजी रक्षा कंपनी IG Defence द्वारा विकसित ‘ज्वाला-MK1’ (Jwala-MK1) नामक एक लागत-प्रभावी शॉर्ट-रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (SRSAM) का परीक्षण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs/Drones) को कम लागत में बेअसर करना है। भारत का काउंटर-UAS बाजार वर्ष 2025 में $315 मिलियन से बढ़कर 2030 तक $1.09 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
UPSC परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 (GS Paper 3)
- आंतरिक सुरक्षा (Internal Security): सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन; सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन खतरे और काउंटर-ड्रोन तकनीक।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology): स्वदेशी तकनीक का विकास, रक्षा प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र की भूमिका और आत्मनिर्भर भारत अभियान।
- अर्थशास्त्र (Economy): रक्षा विनिर्माण और मेक इन इंडिया (Defense Industrial Base)।
प्रश्न
“आधुनिक असममित युद्ध ने सैन्य अभियानों में सुरक्षा की लागत-प्रभावशीलता पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।” इस कथन के आलोक में, भारत के रक्षा क्षेत्र में ड्रोन खतरों से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और चुनौतियों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर का प्रारूप
- भूमिका: असममित युद्ध की परिभाषा और ड्रोन तकनीकों के आगमन से उभरी “लागत विषमता” का संक्षिप्त विवरण।
- मुख्य भाग:
- भाग 1: आधुनिक युद्ध प्रणाली में सुरक्षा की लागत-प्रभावशीलता का महत्व।
- भाग 2: भारत के काउंटर-ड्रोन/मिसाइल विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिका और अवसर।
- भाग 3: निजी रक्षा क्षेत्र के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ (परीक्षण, प्रमाणन, बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक व्यवहार्यता)।
- निष्कर्ष (Conclusion): अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने तथा नीतिगत सहायता के साथ एक संतुलित भविष्यगामी मार्ग का सुझाव।
मॉडल उत्तर
भूमिका
हालिया वैश्विक संघर्षों ने असममित युद्धप्रणाली (Asymmetric Warfare) के एक नए युग को रेखांकित किया है, जहाँ सस्ते एवं सुलभ ड्रोन रणनीतिक बुनियादी ढाँचे और सैन्य परिसंपत्तियों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। इस संदर्भ में, महंगे इंटरसेप्टर के स्थान पर किफायती एवं सटीक रक्षात्मक प्रणालियों का विकास सुरक्षा रणनीतियों का मुख्य आधार बन गया है।
1. लागत विषमता और रक्षा अर्थशास्त्र (Cost Asymmetry in Defense Economics)
- लागत-लाभ का असंतुलन: जब एक किफायती ड्रोन (मूल्य लगभग $10,000) को नष्ट करने के लिए लाखों डॉलर की मिसाइल दागी जाती है, तो रक्षात्मक बल सामरिक रूप से जीत दर्ज करने के बावजूद आर्थिक रूप से नुकसान में रहते हैं।
- सतत सुरक्षा (Sustainable Defense): सैन्य अड्डों, अग्रिम सैनिकों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना (Critical Infrastructure) को लगातार सुरक्षा प्रदान करने के लिए ऐसे इंटरसेप्टर की आवश्यकता है जिनका बार-बार और बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा सके।
2. निजी क्षेत्र की उभरती भूमिका और अवसर (Growing Role of the Private Sector)
- स्वदेशी नवाचार: निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियाँ (जैसे IG Defence का ‘ज्वाला-MK1’) कम दूरी की surface-to-air मिसाइल विकसित कर रही हैं, जो विशेष रूप से शत्रुतापूर्ण UAVs को लक्षित करती हैं।
- रक्षा उत्पादन में वृद्धि: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान लगभग ₹42,000 करोड़ (24%) रहा।
- आयात निर्भरता में कमी: सोलर इंडस्ट्रीज, अडानी डिफेंस, L&T, NIBE ग्रुप और परास डिफेंस जैसी निजी कंपनियाँ रॉकेट, लोइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का निर्माण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूती दे रही हैं।
3. निजी क्षेत्र के समक्ष चुनौतियाँ (Challenges Faced by Private Players)
- व्यवसायिक और परिचालन व्यवहार्यता: प्रयोगशाला परीक्षणों के सफल होने के बावजूद, जटिल कमान-और-नियंत्रण (Command and Control) प्रणालियों के साथ एकीकरण और बड़े पैमाने पर विश्वसनीयता साबित करना कठिन प्रक्रिया है।
- उच्च जीवनचक्र लागत (Lifecycle Costs): छोटे निजी निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य पर निरंतर उत्पादन बनाए रखना एक प्रमुख बाधा है।
- पूंजी एवं अनुसंधान बाधाएं: रक्षा R&D में लंबे समय तक उच्च जोखिम वाली पूंजी की आवश्यकता होती है, जहाँ MSME और स्टार्ट-अप्स को धन जुटाने में कठिनाई होती है।
4. आगे की राह
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और सह-विकास: सरकार और निजी रक्षा उद्योगों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि लागत-प्रभावी ‘काउंटर-ड्रोन’ प्रणालियों का स्वदेशी उत्पादन तेज गति से हो सके।
- परीक्षण बुनियादी ढांचे का विकेंद्रीकरण: निजी क्षेत्र के रक्षा स्टार्टअप्स और MSME के लिए परीक्षण स्थलों (Test Facilities) और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुलभ और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए, ताकि नवाचार बाजार तक तेजी से पहुँच सकें।
- दीर्घकालिक वित्तपोषण और रक्षा निधि: छोटे और मध्यम आकार के मिसाइल निर्माताओं के लिए विशेष रियायती ऋण, वेंचर कैपिटल और रक्षा अधिग्रहण निधि (Defense Acquisition Funds) का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि जीवनचक्र और उत्पादन लागत को नियंत्रित रखा जा सके।
- रणनीतिक निर्यात और वैश्विक बाजार: घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ इन किफायती रक्षा प्रणालियों को मित्र देशों को निर्यात करने की नीति अपनाई जानी जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत हो सके।
निष्कर्ष
भारत को अपनी सीमाओं और महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक और किफायती दोनों प्रकार की वायु रक्षा प्रणालियों का एक संतुलित ढांचा तैयार करना होगा। निजी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को बजटीय सहायता, सुव्यवस्थित परीक्षण सुविधाओं और समयबद्ध खरीद नीतियों के माध्यम से सशक्त बनाकर भारत न केवल अपनी आंतरिक सुरक्षा मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भी एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
अभ्यास प्रश्न
- ‘ज्वाला-MK1’ एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों को इंटरसेप्ट करना है।
- आधुनिक युद्ध में “लागत विषमता” उस स्थिति को दर्शाती है जहाँ एक अत्यधिक महंगे हथियार का मुकाबला करने के लिए बहुत कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।
- भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक दर्ज किया गया, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 20% से अधिक रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (B) केवल 3