नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन (NavlC) को अनिवार्य बनाएगी सरकार

चर्चा में क्यों :–

केंद्र सरकार के द्वारा पिछले वर्ष निर्णय लिया गया था कि वह नाविक को अनिवार्य बनाएगी अब इसके ऊपर कार्य करना प्रारंभ कर दिया गया है

NavlC, एक स्वतंत्र स्टैंड अलोन नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है।  इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO / इसरो) द्वारा विकसित किया गया है । इसको  सात उपग्रहों के समूह के साथ डिज़ाइन किया गया है।

3 उपग्रह भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit) में और 4 उपग्रह झुकी हुई भू-तुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous orbit) में स्थापित हैं।

  • पहले नाविक को   भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली ( IRNSS) के नाम से जाना जाता था।
  • नाविक  पूरे  भारतीय भूभाग और इसकी सीमाओं से 1,500 किमी (930 मील) तक की दूरी को कवर करती है।
  • पहले नाविक को   भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली ( IRNSS) के नाम से जाना जाता था।

GPS की तुलना में NaviC के लाभ:

 यह अपने स्पेक्ट्रम के दोहरे फ्रीक्वेंसी बैंड के कारण 10 मीटर की बेहतर पोजिशनिंग सटीकता प्रदान करता है। इसके विपरीत, GPS की पोजिशनिंग सटीकता 20 मीटर है।

GPS के विपरीत, NavIC उपग्रह पृथ्वी की सतह से काफी ऊपर हैं। इस कारण हिमालय के पहाड़ों या स्थलीय सतहों पर सिग्नल में कम रुकावटें पैदा होती हैं।

विश्व के अन्य नेविगेशन सिस्टम

अमेरिका का GPS.

रूस का GLONASS.

यूरोपीय संघ का गैलीलियो

चीन का BeiDou।

दो क्षेत्रीय सिस्टम: भारत का NavIC. जापान का QZSS.

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