ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत की रणनीतिक महत्वाकांक्षाएँ (The BRICS Summit and India’s Strategic Ambitions)

Source: The Hindu

संदर्भ(Context):

वर्तमान मेंभारत द्वारा दिल्ली (भारत मंडपम) में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ऐसेसमय मेंहो रहा हैजब वैश्विक संघर्षऔर भू-राजनीतिक चुनौतियाँअपनेचरम पर हैं। 2024 में हुए विस्तार (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होनेके बाद ब्रिक्स का दायरा और पहचान दोनों बदल चुके हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष, अमेरिका के साथ टैरिफ और डॉलर के वर्चस्व को लेकर तनाव जैसी जटिलताओं के बीच भारत की अध्यक्षता वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते कद और उसकी बहुपक्षीय भूमिका को दर्शाती है।

Q.

उत्तर प्रारूप (Answer Format):

1. परिचय (Introduction): ब्रिक्स के वर्तमान विस्तार, भारत की अध्यक्षता और इसके भू-राजनीतिक महत्व का संक्षिप्त परिचय।

2. मुख्य भाग (Body):

➢ ब्रिक्स विस्तार और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका (जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी)।

➢ ब्रिक्स के भीतर आंतरिक चुनौतियाँ(ईरान-इजरायल विवाद, आपसी आम सहमति का अभाव)।

➢ अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन सेजुड़ी भू-राजनीतिक व आर्थिक चुनौतियाँ(डॉलर प्र भुत्व और टैरिफ का मुद्दा)।

➢ भारत के लिए इसके कूटनीतिक लाभ और वैश्विक पटल पर प्रभाव।

3. निष्कर्ष(Conclusion): बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलनकारी भूमिका का सारगर्भित निष्कर्ष।

उत्तर (Answer):

परिचय (Intro):

2026 में भारत को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता मिली है। वर्तमान में11 सदस्यीय BRICS समूह विश्व की लगभग 49.5% आबादी, 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसेसमय मेंजब विश्व मेंसंरक्षणवाद, आपूर्ति-श्रृंखला मेंव्यवधान और अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक तनाव बढ़ रहेहैं, BRICS भारत के लिए अपनी वैश्विक भूमिका और प्रभाव को मजबूत करनेका एक महत्वपूर्ण मंच है। 2023 में दिल्ली मेंG-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के बाद BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए दूसरी बड़ी बहुपक्षीय जिम्मेदारी है। यह अवसर भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने और अपनी वैश्विक कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देनेमेंमदद करेगा।

मुख्य भाग (Body):

 विस्तारित ब्रिक्स और भारत की कूटनीति:

2024 मेंमिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने से ब्रिक्स का दायरा काफी बढ़ गया है। यह समूह औपचारिक रूप से पश्चिमी-विरोधी नहीं है, लेकिन यह जी-7 और पश्चिमी-नेतृत्व वाली नीतियों के एक शक्तिशाली विकल्प और काउंटर-वेरिएंट के रूप में कार्य करता है। भारत के लिए इसकी अध्यक्षता वैश्विक पटल पर अपनी स्थिति को मजबूत करनेका एक सुनहरा अवसर है।

 आंतरिक भू-राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियाँ:

o ब्रिक्स के भीतर सदस्य देशों के अपने आंतरिक संघर्ष हैं। उदाहरण के लिए, ईरान और यूएई के बीच तनाव तथा इजरायल के मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण आम सहमति बनाने में बड़ी बाधा उत्पन्न करतेहैं।

o भारत के पारंपरिक रूप से इजरायल के प्रति रुख और अन्य सदस्यों के विचारों मेंभिन्नता ने आम सहमति के मार्ग को जटिल बनाया है।

 अमेरिकी कारक और आर्थिक दबाव:

सबसे बड़ी चुनौती संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर सेआ रही है, जहाँ अमेरिकी प्रशासन द्वारा ब्रिक्स देशों पर अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करनेकी योजना बनाने और ब्रिक्स के भीतर व्यापार बढ़ाने के नाम पर टैरिफ की धमकी दी जा रही है।

भारत को एक ओर अमेरिकी प्रशासन (विशेषकर व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति के मोर्चेपर) के साथ संबंधों को मजबूत रखना है, तो दूसरी ओर ब्रिक्स मंच पर नेतृत्व भी संभालना है, जिससे अमेरिकी नाराजगी का जोखिम भी बना हुआ है।

 भारत के लिए अवसर:

इन त माम कठिनाइयों के बावजूद, सभी विरोधाभासी विचारों और धाराओं के बीच आम सहमति बनाना भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत है। यह समूह भारत को ऊर्जा उत्पादकों और बड़े उपभोक्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा वैश्विक शासन के भविष्य को आकार देने में केंद्रीय भूमिका निभाने का अवसर देता है।

आगे की राह

भारत — को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए

  1. ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी गठबंधन के बजाय विकास और सहयोग का मंच बनाना।
  2. विवादास्पद सुरक्षा मुद्दों के बजाय स्वास्थ्य, जलवायु, कृषि और डिजिटल तकनीक पर ध्यान देना।
  3. NDB को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना।
  4. स्थानीय मुद्रा व्यापार को धीरे-धीरे बढ़ाना।
  5. चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग का संतुलन रखना।
  6. निजी क्षेत्र, स्टार्टअप, युवाओं और नागरिक समाज को ब्रिक्स से जोड़ना।
  7. घोषणाओं के बजाय मापनीय और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष(Conclusion):

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना और विभिन्न भू-राजनीतिक ध्रुवों के बीच संतुलन साधना भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। एक तरफ जहाँयह समूह आंतरिक असहमतियों और पश्चिमी दबावों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह भारत को ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ बनाए रखतेहुए वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करनेऔर एक न्यायसंगत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था स्थापित करनेका अनूठा मंच प्रदान करता है।

Practicq mcq

Q. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार हाल के वर्षों मेंहुआ है, जिसमेंमिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अ मीरात और इंडोनेशिया जैसेदेश शामिल हुए हैं।
  2. ब्रिक्स स मूह औपचारिक रूप सेएक ‘पश्चिमी-विरोधी’ संगठन के रूप मेंस्थापित किया गया है।
  3. ब्रिक्स वर्तमान मेंदुनिया की आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़ेहिस्सेका प्रतिनिधित्व करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 3

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नोट: Document के page 3 पर MCQ के नीचे एक BRICS Summit infographic/image भी है। मैंने उसके image-based text को ऊपर के extracted text में invent करके नहीं जोड़ा है, क्योंकि user ने text AS IT IS मांगा है और image में पूरा text साफ़/विश्वसनीय रूप से extract नहीं हुआ है।

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