भारतीय चुनावों की चमक और साख को बनाए रखने की आवश्यकता (The need to preserve the shine of Indian elections)
भारतीय चुनावों की चमक और साख को बनाए रखने की आवश्यकता
The Need to Preserve the Shine of Indian Elections
1संदर्भ
हाल के दिनों में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) तथा चुनावी निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और विवाद देखने को मिले हैं। यद्यपि भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में 98 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान में डिजिटल भ्रामक जानकारी (Disinformation), चुनावी वित्तपोषण (Election Financing), दलबदल और संस्थागत विश्वास की कमी जैसी चुनौतियों ने चुनावी प्रणाली की साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
Source: The Hindu
2UPSC के लिए सीख
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper 2 – Polity & Governance)
- भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की संवैधानिक संरचना, शक्तियां और स्वायत्तता (अनुच्छेद 324)।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और उससे जुड़े हालिया कानून (2023 अधिनियम)।
- 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) की सीमाएं और राजनीतिक अवसरवाद।
- चुनावी राजनीति का अपराधीकरण तथा धनबल एवं ‘फ्रीबीज़’ (Freebies) का प्रभाव।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (GS Paper 3 – Internal Security & Cyber Security)
- चुनावों में डीपफेक (Deepfakes), फर्जी खबरों और एआई (AI) आधारित दुष्प्रचार की चुनौतियां।
3मुख्य प्रश्न
“हाल के वर्षों में भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत विश्वास को बनाए रखने में कई नई चुनौतियां उभरी हैं।” इन चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा भारत में चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और साख को सुरक्षित करने हेतु आवश्यक सुधारों का सुझाव दीजिए।
उत्तर का प्रारूप
- प्रस्तावना: लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनावों का महत्व और भारतीय निर्वाचन आयोग की ऐतिहासिक भूमिका (लगभग 25 शब्द)।
- मुख्य भाग:
- संवैधानिक एवं संस्थागत चुनौतियां: नियुक्ति प्रक्रिया, राजनीतिक हस्तक्षेप, मॉडल आचार संहिता (MCC) का प्रवर्तन।
- तकनीकी एवं सूचनात्मक चुनौतियां: डीपफेक, दुष्प्रचार, सोशल मीडिया हेरफेर।
- वित्तीय एवं राजनीतिक चुनौतियां: चुनावों में अत्यधिक धनबल, अपारदर्शी चुनावी फंडिंग, रेवड़ी संस्कृति।
- सुधारात्मक उपाय (Way Forward): विधि आयोग एवं ARC की सिफारिशें, दलबदल कानून में सुधार, चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता।
- निष्कर्ष: लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और ECI में जनविश्वास की पुनर्स्थापना का मार्ग।
4मॉडल उत्तर
प्रस्तावना
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला हैं। अनुच्छेद 324 के तहत गठित भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश में लोकतांत्रिक स्थिरता और सशक्त चुनावी तंत्र के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
मुख्य भाग
1. ECI और चुनावी प्रक्रिया के समक्ष प्रमुख चुनौतियां
संवैधानिक एवं संस्थागत क्षरण
- निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2023 के नए अधिनियम के तहत बनी चयन समिति की संरचना पर निष्पक्षता को लेकर न्यायिक एवं राजनीतिक बहस जारी है।
- आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले निर्णयों पर पक्षपात के आरोप तथा न्यायालयों में बढ़ते मामले इसकी संस्थागत साख को प्रभावित कर रहे हैं।
तकनीकी तथा सूचनात्मक खतरे
- चुनाव प्रचार अब जमीनी दौरों के स्थान पर डिजिटल युद्ध के मैदान में बदल गया है।
- एआई (AI), डीपफेक और सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार (Disinformation) फैलाकर मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
धनबल और अनियंत्रित चुनावी खर्च
- चुनाव सुधारों के बावजूद आधिकारिक व्यय रिपोर्ट वास्तविक चुनावी खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा ही दर्शाती हैं।
- कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण और नकद राशि व उपहारों का वितरण चुनावी निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाता है।
राजनीतिक दलबदल और जनादेश का अनादर
10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) में मौजूद अपवादों और कमियों का लाभ उठाकर जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद आसानी से दल बदलते हैं, जिससे मतदाता के फैसले का अपमान होता है।
2. आवश्यक चुनावी सुधार
नियुक्तियों में पूर्ण पारदर्शी तंत्र
विधि आयोग (255वीं रिपोर्ट) की सिफारिशों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और आयुक्तों की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल कर अधिक संतुलित कॉलेजियम प्रणाली बनाई जानी चाहिए।
चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता
राजनीतिक दलों के चंदे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य द्वारा चुनावी वित्तपोषण (State Funding of Elections) के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
डिजिटल दुष्प्रचार पर नियंत्रण
निर्वाचन आयोग को आईटी अधिनियम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर डीपफेक और त्वरित दुष्प्रचार को रोकने के लिए सख्त तंत्र स्थापित करना होगा।
दलबदल विरोधी कानून का सुदृढ़ीकरण
दलबदल से संबंधित मामलों का निर्णय लेने की शक्ति अध्यक्ष (Speaker) के स्थान पर एक स्वतंत्र प्राधिकारी या स्वयं ECI को सौंपी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
भारत में चुनावों का सफल आयोजन “हम भारत के लोग” की लोकतांत्रिक आस्था की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति है। अतः चुनावी प्रक्रिया में गिरते विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को दलीय हितों से ऊपर उठकर संस्थागत सुधारों को लागू करना होगा।
5प्रमुख चुनौतियाँ — एक नज़र में
- संस्थागत विश्वास: निर्वाचन आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल।
- डिजिटल दुष्प्रचार: डीपफेक, AI और सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास।
- चुनावी वित्तपोषण: वास्तविक चुनावी खर्च का पूरा विवरण सामने न आना और फंडिंग में पारदर्शिता की कमी।
- दलबदल: 10वीं अनुसूची की कमियों से मतदाता के जनादेश के अनादर की आशंका।
- चुनावी निष्पक्षता: मॉडल आचार संहिता का प्रभावी प्रवर्तन और संस्थागत स्वायत्तता बनाए रखने की आवश्यकता।
6आवश्यक चुनावी सुधार
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और संतुलन।
- राजनीतिक दलों के चंदे और चुनावी खर्च का पारदर्शी विवरण।
- डीपफेक और ऑनलाइन दुष्प्रचार की पहचान तथा रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था।
- दलबदल विरोधी कानून के तहत मामलों के निर्णय में निष्पक्षता और समयबद्धता।
- चुनावों में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों द्वारा संस्थागत सुधारों का समर्थन।
7निष्कर्ष
भारतीय चुनावों की साख लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का आधार है। निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता, पारदर्शी चुनावी वित्तपोषण, डिजिटल दुष्प्रचार पर नियंत्रण और दलबदल कानून में सुधार के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
अनुच्छेद 324, ECI की स्वायत्तता, चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता, डीपफेक और 10वीं अनुसूची।
8अभ्यास प्रश्न (MCQ)
Q. भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत में संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पदों के निर्वाचन के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग में निहित है।
- संविधान में निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अर्हताओं (Qualifications) और कार्यकाल का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3
यह उत्तर आपके मूल DOCX में दिए गए उत्तर के अनुसार है।
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