कश्मीर : भारत के लिए यूरेशियाई अवसरों का प्रवेश-द्वार
संदर्भ
भारत के सामने अपनी विशाल युवा आबादी को जनसांख्यिकीय लाभांश में बदलने की चुनौती है। इसके लिए केवल शिक्षा और कौशल ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक अवसरों का विस्तार भी आवश्यक है। इसी संदर्भ में जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक संपर्क भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्राचीन काल से कश्मीर दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, तिब्बत और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच व्यापार, संस्कृति, विचारों और लोगों के आवागमन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। आज इस ऐतिहासिक भूमिका को आधुनिक सड़क, व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संपर्क के माध्यम से पुनर्जीवित करने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
यह विषय निम्नलिखित आयामों से महत्वपूर्ण है—
- · जम्मू-कश्मीर की सामरिक एवं भौगोलिक स्थिति।
- · भारत की मध्य एशिया से संपर्क नीति।
- · युवा आबादी और रोजगार सृजन।
- · व्यापार एवं आर्थिक गलियारों की संभावनाएँ।
- · पर्यटन, कृषि एवं हस्तशिल्प का विकास।
- · भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संपर्क।
- · सुरक्षा एवं संपर्क के बीच संतुलन।
- · हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास।
उत्तर-लेखन का प्रारूप
भूमिका
भूमिका में जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति + ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व + वर्तमान संदर्भ को 2–3 पंक्तियों में जोड़ते हुए बताएं कि यह क्षेत्र भारत के लिए यूरेशिया से संपर्क का संभावित द्वार क्यों है।
मुख्य भाग
बताएं कि कश्मीर प्राचीन काल में मध्य एशिया, तिब्बत और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच व्यापार, संस्कृति एवं विचारों के आदान-प्रदान का केंद्र रहा है।
व्यापार, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, कृषि-बागवानी, हस्तशिल्प तथा युवाओं के रोजगार एवं उद्यमिता पर चर्चा करें।
मध्य एशिया तक पहुंच, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और भारत की संपर्क नीति के संदर्भ में इसके महत्व को स्पष्ट करें।
सुरक्षा, पाकिस्तान-चीन से जुड़े भू-राजनीतिक प्रश्न, कठिन हिमालयी भूगोल, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और अवसंरचना संबंधी चुनौतियाँ लिखें।
चरणबद्ध एवं सुरक्षित संपर्क, स्थानीय कौशल विकास, कूटनीतिक संवाद तथा पर्यावरण-अनुकूल विकास का सुझाव दें।
निष्कर्ष
सुरक्षा और विकास के संतुलन पर जोर देते हुए बताएं कि जम्मू-कश्मीर को केवल संघर्ष के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के दृष्टिकोण से भी देखने की आवश्यकता है।
जम्मू-कश्मीर ऐतिहासिक रूप से दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और तिब्बत के बीच व्यापार एवं सांस्कृतिक संपर्क का क्षेत्र रहा है। आज इसकी भौगोलिक स्थिति को आधुनिक संपर्क, पर्यटन और व्यापार से जोड़कर भारत के यूरेशियाई आर्थिक विस्तार का आधार बनाया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर को केवल सुरक्षा और संघर्ष के दृष्टिकोण से देखने के बजाय कनेक्टिविटी, रोजगार, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के दृष्टिकोण से भी देखना आवश्यक है। 2.36 करोड़ पर्यटकों और विशाल बागवानी अर्थव्यवस्था जैसी मौजूदा क्षमताएँ दिखाती हैं कि क्षेत्र में आर्थिक आधार मौजूद है। सुरक्षा, कूटनीति और पर्यावरणीय स्थिरता के संतुलन के साथ जम्मू-कश्मीर भारत के व्यापक यूरेशियाई आर्थिक जुड़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Q. जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक एवं आधुनिक संपर्क महत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

