कोयला और लिग्नाइट देश में ऊर्जा सुरक्षा का मुख्य आधार

चर्चा में क्यों :–

देश में बढ़ती ऊर्जा जरूरत को पूरा करने में कोयला और लिग्नाइट मुख्य आधार रहे हैं, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम भी अपना योगदान देने में पीछे नहीं हैं।लिग्नाइट के उत्पादन में तमिलनाडु मुख्य राज्य रहा है । भारत में नवीनतम आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु देश में लिग्नाइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने 2022-23 में लिग्नाइट से संबंधित आंकड़े जारी किए थे जिनके अनुसार, इसके उत्पादन में तमिलनाडु का हिस्सा सबसे अधिक 49.97% था, इसके बाद गुजरात का 27.37% और राजस्थान का 22.67% था।

एनएलसी इंडिया लिमिटेड, इसका मुख्यालय तमिलनाडु के नेवेली में स्थित है, यह लिग्नाइट के उत्पादन में अधिक योगदान प्रदान करता है।

एनएलसी इंडिया लिमिटेड ( एनएलसी ) :– (पहले इसे नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता था ) यह भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाला एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

भारत में कोयला :–

कोयला एक जीवाश्म ईंधन है यह एक ऐसा जीवाश्म ईंधन है जो सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है यह पृथ्वी के आंतरिक भागों में पाया जाता है इसका निर्माण पेड़ पौधों के जलने से होता है

कोयले को ‘ब्लैक गोल्ड’ के नाम से भी जाना जाता है।

कोयले के उपयोग :– घरेलू ईंधन के रूप में , भारी उद्योगों ने ( लोहा, इस्पात ) भाप इंजन में और बिजली संयंत्रों में ।

⦁ कोयल का वर्तमान में मुख्य उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है जिसे ‘थर्मल पावर’ कहा जाता है।
⦁ चीन, भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया दुनिया के पांच प्रमुख कोयला उत्पादक देश हैं
⦁ देश में प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं

भारत में प्राप्त कोयले की समस्या :–

भारत में प्राप्त कोयले में राख की मात्रा सबसे अधिक होती है देश में प्राप्त कोयले में 35 से 45% राख होती है जबकि विश्व के अन्य भागों में प्राप्त कोयले में राख की मात्रा केवल 15% होती है।
भारत में प्राप्त कोयले की राख में सल्फर की मात्रा लगभग 0.5% होती है

कोयले का वर्गीकरण: – कोयला मुख्य रूप से चार प्रकार का पाया जाता है
एन्थ्रेसाइट, बिटुमिनस, लिग्नाइट और पीट।

एन्थ्रेसाइट :– इस प्रकार के कोयले में कार्बन की मात्रा सबसे अधिक ( 80-95% ) पाई जाती है
भारत में, यह केवल जम्मू और कश्मीर में पाया जाता है।

बिटुमिनस :– कार्बन की मात्रा 60-80% तक होती है
बिटुमिनस कोयला भारत के पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पाया जाता है)।

लिग्नाइट :– कार्बन की मात्रा – 40-55%,
लिग्नाइट में नमी उच्च पाई जाती है
लिग्नाइट कोयला भारत के राजस्थान, लखीमपुर (असम) तथा तमिलनाडु में पाया जाता है)।

पीट :– कार्बन की मात्रा :- 40% तक

भारत में कोयले के महत्वपूर्ण क्षेत्र :–

गोंडवाना कोयला क्षेत्र :– यह क्षेत्र लगभग 250 मिलियन वर्ष पुराना है भारत में प्राप्त होने वाले 98% कोयला भंडार जबकि कुल उत्पादन का 99% कोयल केवल गोंडवाना क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता है।
भारत में बेहतर गुणवत्ता वाला कोयला गोंडवाना क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। इस प्रकार के कोयले की प्राप्ति के मुख्य स्थल इस प्रकार है महानदी (छत्तीसगढ़-ओडिशा), दामोदर (झारखंड-पश्चिम बंगाल), गोदावरी (महाराष्ट्र) और नर्मदा घाटी क्षेत्र है।

टर्शियरी कोयला क्षेत्र (15-60 मिलियन वर्ष पुराना):

इस प्रकार के कोयले में कार्बन की मात्रा अत्यधिक कम पाई जाती है किंतु नमी और सल्फर भरपूर पाई जाती है।
इस प्रकार के कोयला क्षेत्र भारत में अतिरिक्त प्रायद्वीपीय क्षेत्रों तक सीमित है।

स प्रकार के कोयला क्षेत्रों की प्राप्ति पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की हिमालय की तलहटी, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर,असम, मेघालय, नगालैंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केरल आदि क्षेत्रों से होती हैं।

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