नवपाषाण कालीन नक्काशी की प्राप्ति

चर्चा में क्यों :– हाल ही में गोवा के मौक्सी नामक गांव से नवपाषाण कालीन नक्काशी की प्राप्ति हुई है ।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के द्वारा पुष्टि की गई है कि ये नक्काशियां नवपाषाण काल (Neolithic age) की हैं। ASI के द्वारा पुष्टि की गई है कि प्रात नक्काशी में जेबू, बैल और मृग जैसे जीव प्रमुख है

इन चित्रों के साथ ही कुछ पदचिन्हों और कप्यूल्स की आकृतियां भी उकेरी गई जिनकी प्राप्ति यहां से होती हैं।
क्या होते है कप्यूल्स (Cupules) :–;ये मानव द्वारा चट्टानों में निर्मित कप के आकार के अर्धगोलाकार गड्ढे होते हैं।

भारत में भिन्न-भिन्न कालों में प्राप्त शैलचिल

भारत के प्रागैतिहासिक शैलचिल :–

⦁ भारत में इस प्रकार के स्थानों की प्राप्ति मुख्य रूप से भीमबेटका (मध्य प्रदेश) और ज्वालापुरम (आंध्र प्रदेश) से होती है ।

⦁ भारत में प्राप्त सबसे पुराने शैलचित्र उच्च पुरापाषाण काल (Upper Palaeolithic Period) काल के हैं।

⦁ इस काल में चट्टानों पर निर्मित चित्र यष्टि यानी छड़ीनुमा (Stick) मानव आकृतियों के है इनके साथ ही कुछ जानवरो जैसे की बाइसन, हाथी, बाघ जैसे जंगली जीवों के चित्रों को भी उकेरा गया है।

इन चित्रों की विशेषता :–

  1. इन्हे एक रेखा मेंचित्रित किया गया हैं
  2. इन्हे चित्रित करने में हरे व गहरे लाल रंग का प्रयोग किया गया हैं।

मध्यपाषाण काल (Mesolithic Period)

भारत में पाए जाने वाले सबसे अधिक प्राचीन शैल चित्र मध्यपाषाण काल (Mesolithic Period) के ही हैं।

भारत में इस प्रकार के स्थानों की प्राप्ति मुख्य रूप से पचमढ़ी और आदमगढ़ पहाड़ियों (मध्य प्रदेश) से होती है।

इन चित्रों की विशेषता :–

1.इन चित्रो में मानव दृश्यों की प्रधानता पाई जाती है।

2.मनुष्य को समूह में शिकार करते दरसाया गया है।

3.इस समय के मानव को सामुदायिक नृत्य करते हुए चित्रित किया गया है।

  1. इन चित्रों में जानवरों को प्राकृतिक शैली में तो बही मनुष्यों को शैलीगत चित्रित शैली में दर्साया गया है।

नवपाषाण-ताम्रपाषाण काल (Neolithic-Chalcolithic Period)

भारत में इस प्रकार के स्थानों की प्राप्ति मुख्य रूप से चंबल क्षेत्र, दैमाबाद (महाराष्ट्र) है ।

प्राप्त चित्रों की विशेषता:–

1.चित्रों को बनाने में सफेद और लाल रंगों का प्रयोग ।

  1. इस समय के चित्रों में मृदभांडों एवम धातु के उपकरणों को दर्शाया गया है। 3.इस समय के चित्रों में पहले की अपेक्षा जीवंतता और आत्मीयता का अभाव ।

4.इस चित्रों में जानवरों को अधिक वयस्क तथा अधिक प्रभावशाली तो बही पुरुषों को अधिक साहसी दर्शाया गया है।

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India- ASI)

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण संस्‍कृति मंत्रालय के अंतर्गत आता है और इसके ही नियंत्रण में कार्य करता है।

कार्य :–

⦁ यह भारत में स्थित सांस्‍कृतिक विरासतों के पुरातत्त्वीय अनुसंधान तथा संरक्षण के लिये एक प्रमुख सरकारी संगठन है।
⦁ इसका प्रमुख कार्य देश में स्थित राष्‍ट्रीय महत्व के ऐतिहासिक स्‍मारकों तथा पुरातत्त्वीय स्‍थलों तथा अवशेषों का रखरखाव करना और उनकी समय समय पर मरम्मत कराना ।
⦁ भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण पुरावशेष तथा बहुमूल्‍य कलाकृति अधिनियम, 1972 को विनियमित करता है।

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