आतंकवाद का बदलता चेहरा और भारत की आतंकवाद-विरोधी रणनीति (Terror’s Changing Face, India’s Counter-Terror Strategy)

9/11 के आतंकवादी हमलों के 25 वर्षों बाद वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आतंकवाद के स्वरूप में भारी बदलाव आया है। इसके जवाब में भारत ने अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक प्रतिक्रिया को अतीत की ‘निष्क्रियता’ से बदलकर एक ‘सक्रिय और निर्णायक’ काउंटर-टेरर रणनीति मेंढाल लिया है। देश ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को संस्थागत रूप देने के लिए 23 फरवरी 2026 को अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति—’प्रहार’ (PRAHAAR) का अनावरण किया है।

पिछलेढाई दशकों में आतंकवाद ने अपनी पुरानी कड़ियों को तोड़कर एक नया तकनीकी और विकेंद्रीकृत रूप लेलिया है:

 विकेंद्रीकरण और लोन-वुल्फ हमले: ओसामा बिन लादेन (अल-कायदा) या अबू बकर अल-बगदादी (ISIS) जैसे क्रूर नेताओं के नेतृत्व वाले बड़े, पदानुक्रमित आतंकी समूहों की जगह अब छोटे, अधिक स्वायत्त और ‘लोन-वल्फ’ (Lone-wolf) हमलों का चलन बढ़ गया है।

 प्रौद्योगिकी का शस्त्रीकरण: आतंकवादी समूह अब ड्रोन, साइबर क्षमताओं, क्रिप्टोकरेंसी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। ये उभरती प्रौद्योगिकियां अब युद्ध और आतंकवाद के नए हथियार बन चुकी हैं।

 डिजिटल कट्टरपंथ (Digital Radicalisation): डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्सके माध्यम से दूर बैठेयुवाओं का ऑनलाइन ब्रेनवॉश किया जा रहा है, जिससे भौतिक सीमाओं का महत्व कम हुआ है।

ऐतिहासिक रूप सेभारत नेलंबे समय तक इस खतरेका अकेलेसामना किया और रणनीतिक संयम बरता:

 शुरुआती बड़े आघात: भारत में पहला बड़ा आतंकी हमला कश्मीर घाटी सेनहीं बल्कि 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर (तमिलनाडु) मेंलिट्टे(LTTE) द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के रूप में हुआ था। इसके बाद 1993 के मुंबई बम धमाके, 1998 के कोयंबटूर धमाके हुए।

 कमजोरियों का उजागर होना: 1999 मेंइंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 का अपहरण (जिसके बदले खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर को छोड़ना पड़ा) ने भारत की आंतरिक सुरक्षा प्रणालियों की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया था।

परमाणु हथियार संपन्न होनेके कारण पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का खतरा हमेशा बना रहता था। इसी ‘परमाणु ब्लैकमेल’ के कारण भारत नेसंसद हमले(2001) तथा 26/11 मुंबई हमलों (2008) के बाद भी कोई सीधा और निर्णायक सैन्य जवाब नहीं दिया, जिसे वैश्विक स्तर पर निष्क्रिय प्रतिक्रिया माना गया।

2014 के बाद भारत की नीति में एक बड़ा प्रतिमान विस्थापन (Paradigm Shift) आया, जहां भारत ने”आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने” (Zero Tolerance) की नीति अपनाई:

 सर्जिकल स्ट्राइक (2016): 18 सितंबर 2016 को उरी हमलेके जवाब मेंभारतीय सेना ने28-29 सितंबर को पहली बार नियंत्रण रेखा (LoC) के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की और दुश्मन के बुनियादी ढांचे को नष्ट किया।

 बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद, भारतीय वायुसेना (IAF) ने26 फरवरी को पाकिस्तान के अंदर बालाकोट मेंजैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर एयरस्ट्राइक की। यह पहली बार था जब वायुसेना ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग कर आतंकवादी लक्ष्यों को निशाना बनाया।

 ऑपरेशन सिंदूर (2026): रणनीति को और आक्रामक बनाते हुए 6-7 मई 2026 को लॉन्च किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सुरक्षा बलों ने महज 96 घंटों के भीतर पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क (LeT और JeM) के मुख्यालयों और उनकी अग्रिम संपत्तियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

भारत ने अपनी नीति को रक्षात्मक संयम से पूरी तरह हटाकर तीन स्पष्ट सिद्धांतों पर संरेखित किया है:

  1. रणनीतिक संयम की नीति अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
  2. सीमा पार सेप्रायोजित आतंकवाद को अब सामान्य घुसपैठ नहीं बल्कि ‘युद्ध का कृत्य’ (Act of War) माना जाएगा।
  3. पाकिस्तानी परमाणु ब्लैकमेल अब भारत के लिए कोई निवारक (Deterrent) कारक नहीं रहेगा।

इस दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देने के लिए सरकार ने ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नीति लागूकी हैजो “होल-ऑफ-गवर्नमेंट” (संपूर्ण सरकार) और “होल-ऑफ-सोसाइटी” (संपूर्ण समाज) के दृष्टिकोण पर आधारित है।

  •  आंतरिक उन्मूलन: देश के भीतर आतंकी नेटवर्क (विशेषकर कश्मीर और आंतरिक सेल) के बचे हुए अवशेषों को तलाश कर पूरी तरह खत्म करना।
  •  पूर्व-खाली सैन्य कार्रवाई (Pre-emptive Action): LoC या अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार किसी भी संभावित आतंकी खतरेया लॉन्च पैड के खिलाफ खुफिया जानकारी मिलते ही पहले ही हमला (Pre-emptive Strike) कर देना।
  •  वि-कंडीशनिंग/डिराडिकलाइजेशन: युवाओं को मुख्य धारा में वापस लाने और ऑनलाइन कट्टरपंथ के प्रभाव को तोड़ने के लिए देश भर में एक व्यापक और वैज्ञानिक वि-कंडीशनिंग कार्यक्रम चलाना।
  •  वित्तीय नेटवर्क को पंगु बनाना: मित्र देशों, वित्तीय खुफिया इकाइयों (FIU) और FATF के मानदंडों का उपयोग कर आतंकी फंडिंग और हवाला नेटवर्क को पूरी तरह रोकना।

9/11 के पच्चीस साल बाद भी वैश्विक स्तर पर आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह हाइब्रिड और डिजिटल रूपों में अधिक घातक हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (नई दिल्ली) जैसेअंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के प्रति वैश्विक समुदाय के दोहरेमापदंडों की कड़ी आलोचना की है। भारत का यह रुख अब पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट है कि आतंकवाद कभी भी किसी देश की ‘रणनीतिक आस्तियाँ’ (Strategic Assets) नहीं हो सकता और इसका इलाज केवल पूर्ण समूल विनाश ही है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top