चीनी सैनिक व्यवहार के कारण एलएसी पर स्थिति अशांत (Situation Along LAC ‘Disturbed’ Due to PLA Conduct)
चीनी सैनिक व्यवहार के कारण एलएसी पर स्थिति अशांत
Situation Along LAC ‘Disturbed’ Due to PLA Conduct
संदर्भ
हाल ही में भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग (ऊपरी सुबनसिरी) और असाफिला क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमने-सामने (face-offs) की स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर ने अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस बात की पहली आधिकारिक पुष्टि की कि अरुणाचल प्रदेश में जुलाई से कई स्थानों पर चीन की पीएलए के साथ गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से भटकते हैं, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति अशांत (disturbed) हो जाती है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों (जैसे WMCC और कोर कमांडर स्तर की वार्ता) के माध्यम से तनाव को सुलझाने और सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर संपर्क में हैं।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper 2): भारत एवं उसके पड़ोसी देश, भारत के हित पर अन्य देशों की नीतियों का प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय संबंध तथा कूटनीतिक तंत्र।
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (GS Paper 3): सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF जैसे ITBP) की भूमिका और रक्षा आधुनिकीकरण (ड्रोन एवं भूमिगत बुनियादी ढांचा)।
- मुख्य सीख: भारत-चीन सीमा विवाद केवल पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख) तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश) में भी चीन द्वारा सलामी स्लाइसिंग (salami slicing) और अनसुलझे एलएसी धारणाओं का उपयोग करके तनाव पैदा किया जाता है। सीमा पर शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण की प्राथमिक शर्त है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
उत्तर का प्रारूप
- भूमिका: एलएसी के अस्पष्ट परिसीमन और हाल ही में पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश) में सामने आई गश्त संबंधी झड़पों के संदर्भ में उत्तर की शुरुआत।
- मुख्य भाग:
- भाग 1: अरुणाचल प्रदेश में एलएसी से जुड़ी प्रमुख सुरक्षा चुनौतियाँ (धारणाओं का अंतर, चीन की अवसंरचना रणनीति, गश्त पैटर्न में विचलन)।
- भाग 2: सीमा प्रबंधन और सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय (ड्रोन आधुनिकीकरण, शौर्य कमांडो जैसे विशिष्ट बल, भूमिगत शेल्टर/अवसंरचना विकास)।
- भाग 3 (आगे का रास्ता – Way Forward): दीर्घकालिक सीमा प्रबंधन हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण (कूटनीतिक जुड़ाव, इंटेलिजेंस शेयरिंग, सीमावर्ती आबादी का सशक्तिकरण और सैन्य निरोध)।
- निष्कर्ष (Conclusion): भारत-चीन संबंधों की बहाली के लिए सीमा पर शांति एवं शांतिपूर्ण स्थिति की अनिवार्यता पर जोर देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
मॉडल उत्तर
भूमिका
भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का स्पष्ट रूप से सीमांकन न होना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर तनाव का मुख्य कारण रहा है। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग और असाफिला क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) द्वारा दर्ज की गई आमने-सामने की स्थितियां यह दर्शाती हैं कि लद्दाख के साथ-साथ अब पूर्वी क्षेत्र में भी चीन की ओर से गश्त के स्थापित पैटर्न से विचलन की घटनाएं बढ़ रही हैं।
1. अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में सीमा सुरक्षा चुनौतियाँ
- एलएसी की अस्पष्टता और अलग धारणाएं: पूर्वी क्षेत्र में मैकमोहन रेखा को लेकर दोनों देशों की धारणाओं में भिन्नता है। चीनी पीएलए बलों द्वारा भारतीय सीमा के करीब तंबू गाड़ने या गश्त मार्गों से हटने के कारण गश्ती क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
- चीन का अवसंरचनात्मक दबाव (Infrastructure Push): चीन द्वारा सीमा पर ‘शियाओकांग’ (मॉडल सीमावर्ती गांव) का निर्माण और अग्रिम चौकियों तक तीव्र सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाना भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती पेश करता है।
- गश्त पैटर्न में एकतरफा बदलाव: विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीनी बलों द्वारा स्थापित गश्ती व्यवस्था से भटकने के कारण सीमा पर अप्रत्याशित आमने-सामने की स्थितियां निर्मित होती हैं।
- हाई-अल्टीट्यूड युद्धकला की जटिलता: अरुणाचल का दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों वाला भूगोल बलों की त्वरित तैनाती और निगरानी के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है।
2. भारत की सीमा प्रबंधन रणनीति को मजबूत करने के उपाय
- विशिष्ट सीमा सुरक्षा बलों का सुदृढ़ीकरण: आईटीबीपी के ‘शौर्य कमांडो’ जैसे उच्च पर्वतीय युद्धकला में विशेषज्ञता वाले दस्तों को मजबूत करना और सीमा पर केंद्रीय बल की रणनीतिक उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- रक्षा तकनीक एवं ड्रोन आधुनिकीकरण: आधुनिक युद्धनीति को ध्यान में रखते हुए मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs), ड्रोन प्लैटून और एंटी-ड्रोन प्रणालियों की त्वरित तैनाती करना, ताकि सीमावर्ती दूरस्थ क्षेत्रों में 24×7 निगरानी रखी जा सके।
- टिकाऊ एवं भूमिगत बुनियादी ढांचा (Underground Infrastructure): हवाई और तोपखाने के हमलों से सुरक्षा प्रदान करने तथा कठोर मौसम में जवानों के पुनर्वास हेतु ओवरग्राउंड संरचनाओं के साथ-साथ भूमिगत शेल्टरों (Underground Shelters) का निर्माण करना।
3. आगे का रास्ता
- संस्थागत कूटनीतिक जुड़ाव: वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और कोर कमांडर स्तर की बैठकों का निरंतर उपयोग करके सीमा प्रबंधन प्रोटोकॉल को संस्थागत रूप देना और किसी भी प्रकार की गलतफहमी को रोकना।
- अग्रिम क्षेत्रों में सीआई4आई (C4I) क्षमताएं: कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस तंत्र को एकीकृत कर वास्तविक समय (real-time) सिचुएशनल अवेयरनेस हासिल करना।
- वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम का त्वरित क्रियान्वयन: सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं, सड़क नेटवर्क और टूरिज्म का विकास कर स्थानीय निवासियों का पलायन रोकना, ताकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रथम प्रहरी बन सकें।
- विश्वसनीय सैन्य निरोध (Credible Deterrence): ‘ऑपरेशनल रेडिनेस’ के तहत त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (Quick Reaction Teams) और तोपखाने को अग्रिम चौकियों पर तैनात रखना, जिससे चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति को तुरंत विफल किया जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सीमा पर रक्षात्मक तत्परता और ढांचागत आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक व्यापक द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना कठिन है। अंततः, एलएसी पर बेहतर प्रबंधन और स्पष्टता ही दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकती है।
अभ्यास प्रश्न
- सीमा परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) भारत और चीन के बीच सीमा मामलों पर बातचीत के लिए एक कूटनीतिक मंच है।
- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जो प्राथमिक रूप से चीन के साथ लगती सीमा की सुरक्षा में तैनात है।
- तक्सिंग (Taksing) और असाफिला (Asaphila) क्षेत्र, जो हाल ही में एलएसी तनाव के कारण चर्चा में रहे, लद्दाख के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
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