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CA for Mains

नशीली दवाओं की तस्करी: बड़े सिंडिकेट्स पर प्रहार (Drug Trafficking: Striking Big Syndicates)

By Result Mitra •
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नशीली दवाओं की तस्करी: बड़े सिंडिकेट्स पर प्रहार

Drug Trafficking: Striking Big Syndicates

📅 28/10/2026 📚 UPSC / PCS 📰 Source: The Hindu

संदर्भ

हाल ही में ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत भारत-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ बहु-एजेंसी कार्रवाई की गई है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा वर्ष 2029 तक देश से ड्रग नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ के माध्यम से 100 प्रमुख कार्टेल को ध्वस्त करने और अभियोजन परिणामों में सुधार करने की रणनीति बनाई गई है, हालांकि इस दौरान यह बात सामने आई है कि अक्सर छोटे वाहक पकड़े जाते हैं जबकि मुख्य मास्टरमाइंड (बड़े शार्क्स) कानून की पकड़ से बाहर रह जाते हैं।

यूपीएससी के लिए सीख

  • आंतरिक सुरक्षा: संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच के गहरे संबंधों को समझना और सीमा पार ड्रग तस्करी से उत्पन्न होने वाले सुरक्षा खतरों का विश्लेषण करना।
  • बहु-एजेंसी समन्वय: विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, खुफिया तंत्र तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता।
  • कानूनी और नीतिगत ढांचा: एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम की प्रभावशीलता, विज़न डॉक्यूमेंट्स और मनी ट्रेल (धन के मार्ग) की जाँच के जरिए वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति।
  • सामाजिक प्रभाव: नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का सार्वजनिक स्वास्थ्य, युवाओं और ग्रामीण-शहरी समाज पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव।

मुख्य प्रश्न

Q. “भारत में नशीली दवाओं की तस्करी केवल एक कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सतही स्तर पर वाहकों को पकड़ने के बजाय वित्तीय मार्गों (मनी ट्रेल) को ट्रैक करके मुख्य सरगनाओं को निशाना बनाने की आवश्यकता क्यों है? चर्चा कीजिए।”

उत्तर की रूपरेखा

  • परिचय: नशीली दवाओं की तस्करी के बढ़ते दायरे और भारत की रणनीतिक स्थिति (जैसे- गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्राएंगल के बीच अवस्थिति) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
  • मुख्य भाग:
    • वर्तमान में केवल छोटे वाहकों और कोरियर के पकड़े जाने तथा मुख्य सरगनाओं के बचे रहने की समस्या का विश्लेषण।
    • अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स, सीमा पार गलियारों (भारत-म्यांमार-बांग्लादेश) और मामलों के वित्तीय पहलुओं (मनी ट्रेल) पर प्रहार करने की आवश्यकता।
    • सरकार की हालिया पहलों जैसे ऑपरेशन ट्राइडेंट, विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029) और एनडीपीएस अधिनियम की भूमिका।
    • सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव और सामाजिक लागत (जैसे पंजाब आदि राज्यों के उदाहरण)।
  • निष्कर्ष: बहु-एजेंसी समन्वय, कड़े अभियोजन और प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी के माध्यम से 2029 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समग्र उपायों का सुझाव देते हुए उत्तर का समापन करें।

परिचय

भारत दुनिया के दो प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्रों—’गोल्डन क्रिसेंट’ (पश्चिम में) और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (पूर्व में)—के मध्य स्थित होने के कारण नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। हाल ही में ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ जैसी बहु-एजेंसी कार्रवाइयों और ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल’ के माध्यम से सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जो इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित करता है।

1. भारत में नशीली दवाओं की तस्करी: राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक चुनौती

  • भौगोलिक संवेदनशीलता और सुरक्षा जोखिम: भारत रणनीतिक रूप से ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (स्वर्ण अर्धचंद्राकार) और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (स्वर्ण त्रिभुज) के बीच स्थित है। यह भौगोलिक स्थिति भारत को अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के लिए एक आसान पारगमन (Transit) और उपभोग केंद्र बनाती है।
  • आंतरिक सुरक्षा और नारको-आतंकवाद (Narco-Terrorism): नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार से उत्पन्न राजस्व का उपयोग सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism), उग्रवाद, और वामपंथी उग्रवाद (LWE) की फंडिंग के लिए किया जाता है।
  • सामाजिक-आर्थिक एवं स्वास्थ्य लागत: नशीली दवाओं का दुरुपयोग जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) को नुकसान पहुँचाता है। इसके कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट (Public Health Crisis), अपराध दर में वृद्धि और परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

2. केवल वाहकों (Carriers) को पकड़ने की सीमाएँ (Limitations of Targeting Street-Level Carriers)

  • सिंडिकेट की कार्यप्रणाली: आपराधिक सिंडिकेट्स निचले स्तर पर गरीब, बेरोजगार या सीमावर्ती आबादी को केवल वाहक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इन्हें पकड़ने से मूल नेटवर्क नष्ट नहीं होता।
  • ‘बड़े सरगनाओं’ की आपराधिक छूट: मुख्य आपूर्तिकर्ता और मास्टरमाइंड अक्सर विदेशी सरजमीं से सुरक्षित रूप से नेटवर्क संचालित करते हैं। उदाहरण के लिए, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट (2021) में 3,000 किग्रा हेरोइन की जब्ती के बाद भी मुख्य विदेशी आपूर्तिकर्ता तक पहुँच संभव नहीं हो सकी है।
  • सिर्फ जब्ती बनाम वास्तविक उपलब्धता: नशीले पदार्थों की जब्ती में वृद्धि यह सुनिश्चित नहीं करती कि बाजार में दवाओं की उपलब्धता या उपभोग में कमी आई है। जब तक आपूर्ति श्रृंखला अक्षम नहीं होती, आपूर्ति बनी रहती है।

3. वित्तीय मार्गों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

  • अवैध वित्तीय प्रवाह: ड्रग व्यापार में मनी लॉन्ड्रिंग, व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग (TBML), और डार्क नेट व क्रिप्टो-करेंसी का व्यापक इस्तेमाल होता है।
  • वित्तीय सिंडिकेट्स का विखंडन: मुख्य लाभार्थियों की पहचान केवल बैंक खातों, बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन ट्रैकिंग से ही संभव है।
  • ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) का अनुप्रयोग: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के बीच तालमेल से नशीले पदार्थों के व्यापार से अर्जित संपत्तियों की जब्ती की जानी चाहिए, जिससे आपराधिक नेटवर्क का आर्थिक आधार समाप्त हो सके।

4. संस्थागत ढांचा और बहु-एजेंसी समन्वय

  • संस्थानीकृत समन्वय तंत्र: ‘नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (NCORD) के माध्यम से केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस, फार्मास्यूटिकल्स विभाग और तटरक्षक बल के बीच रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सुनिश्चित करना।
  • रणनीतिक रोडमैप (2026-2029): सरकार का लक्ष्य लगभग 100 प्रमुख कार्टेल को ध्वस्त करना और अभियोजन दर को बढ़ाना है।
  • तकनीकी और सीमा सुरक्षा उपाय: भारत-म्यांमार और भारत-पाकिस्तान सीमाओं पर स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन-विरोधी तकनीक और तटीय गश्त को मजबूत करना।
  • विसलब्लोअर एवं कार्यकर्ताओं का संरक्षण: नशा विरोधी कार्यकर्ताओं और गवाहों की सुरक्षा के लिए मजबूत ‘गवाह संरक्षण कार्यक्रम’ लागू करना आवश्यक है।

निष्कर्ष

नशीली दवाओं की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल नीतिगत घोषणाओं या तात्कालिक गिरफ्तारियों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने, सीमा सुरक्षा कड़ी करने, कड़े अभियोजन परिणामों को सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ वित्तीय सिंडिकेट्स की जड़ों पर वार करने की दीर्घकालिक और निर्णायक रणनीति अपनानी होगी।

अभ्यास प्रश्न

Q. भारत में नशीली दवाओं की तस्करी और नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ मुख्य रूप से भारत-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ एक बहु-एजेंसी कार्रवाई है।
  2. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत सभी मामलों में सजा और जब्ती के प्रावधान केवल राज्य सरकारों द्वारा लागू किए जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2

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