1. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसने दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों को शामिल करने के लिए अलग निर्वाचन मंडल की प्रणाली का विस्तार किया।
- इसने भारत परिषद को समाप्त कर दिया और भारतीय रिजर्व बैंक तथा एक संघीय न्यायालय की स्थापना के प्रावधान किए।
- इसने संघीय, प्रांतीय और संयुक्त लोक सेवा आयोगों को मिलाकर एक त्रि-स्तरीय भर्ती प्रणाली का गठन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: इस अधिनियम ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली का काफी विस्तार किया। अलग निर्वाचन मंडल मूल रूप से 1909 में केवल मुसलमानों के लिए शुरू किया गया था और 1919 में इसे सिखों, ईसाइयों और एंग्लो-इंडियनों तक बढ़ाया गया था। 1935 के अधिनियम ने इस राजनीतिक व्यवस्था को दलित वर्गों (अनुसूचित जातियों), महिलाओं और श्रम (श्रमिकों) तक बढ़ा दिया।
- कथन 2 सही है: इसने शासन और अर्थव्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए बड़े संस्थागत बदलाव किए। इसने 15-सदस्यीय भारत परिषद को समाप्त कर दिया, जिसका गठन 1858 में राज्य सचिव की सहायता के लिए किया गया था। इसने देश की मुद्रा और साख को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (1935 में स्थापित) और एक संघीय न्यायालय (1937 में स्थापित) की स्थापना का भी प्रावधान किया, जो बाद में भारत का सर्वोच्च न्यायालय बना।
- कथन 3 सही है: विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर लोक सेवाओं और भर्ती को सुचारू रूप से चलाने के लिए, अधिनियम ने आयोगों के तीन स्तरों की स्थापना की। ये थे केंद्र में संघीय लोक सेवा आयोग, प्रत्येक प्रांत में प्रांतीय लोक सेवा आयोग, और दो या दो से अधिक प्रांतों की आवश्यकताओं को एक साथ पूरा करने के लिए संयुक्त लोक सेवा आयोग।
2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के प्रावधानों के तहत, संविधान सभा को “दोहरी कार्य” सौंपने का तात्पर्य निम्नलिखित में से किससे था?
(a) देश के नागरिक प्रशासन और सैन्य संचालन दोनों को संभालना।
(b) घरेलू शासन और अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रमंडल मामलों दोनों का प्रबंधन करना।
(c) संविधान-निर्माण और सामान्य कानून-निर्माण दोनों कर्तव्यों को पूरा करना।
(d) उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर: (c)
व्याख्या:
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने संविधान सभा को एक पूर्णतः संप्रभु निकाय घोषित किया। जब तक एक नया संविधान तैयार नहीं हो जाता और एक उचित संसद का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा संविधान सभा (जिसका गठन 1946 में हुआ था) को दो अलग-अलग और बड़ी जिम्मेदारियां निभानी थीं।
दोहरी भूमिकाएँ:
1. संविधान-निर्माण कार्य: इसका प्राथमिक कार्य स्वतंत्र भारत के लिए एक स्थायी संविधान का मसौदा तैयार करना, उस पर चर्चा करना और उसे अपनाना था। जब इस उद्देश्य के लिए बैठक होती थी, तो सभा की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे।
2. विधायी कार्य: इसका दूसरा कार्य देश के दैनिक शासन को चलाने के लिए अंतरिम और सामान्य कानून बनाने वाली संसद के रूप में कार्य करना था। जब विधायी निकाय के रूप में बैठक होती थी, तो इसकी अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर करते थे।
निरस्त करने का अधिकार: चूंकि इस अधिनियम ने इस निकाय को पूरी तरह से संप्रभु बना दिया था, इसलिए सभा को ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किसी भी पिछले कानून को निरस्त करने (पूरी तरह समाप्त करने) की कानूनी शक्ति भी मिल गई थी, जिसमें खुद भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 भी शामिल था।
3. भारतीय संविधान के विकासवादी इतिहास और इसके निर्माण की मांग से संबंधित निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाओं पर विचार कीजिए:
| सूची-I | सूची-II |
|---|---|
| A. मोतीलाल नेहरू द्वारा संविधान सभा की प्रत्यक्ष मांग | 1. 1946 |
| B. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पहली बार आधिकारिक मांग | 2. 1924 |
| C. जवाहरलाल नेहरू द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर मांग | 3. 1935 |
| D. कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन | 4. 1938 |
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) A-2, B-3, C-4, D-1
(b) A-3, B-2, C-1, D-4
(c) A-2, B-4, C-3, D-1
(d) A-4, B-3, C-2, D-1
उत्तर: (a)
व्याख्या:
भारतीय संविधान सभा के ऐतिहासिक गठन की मांग और उसके क्रमिक कालानुक्रम का सही मिलान इस प्रकार है:
- ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1924 में पंडित मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सामने अधिकार पत्र प्रस्तुत करते हुए भारत के लिए एक स्वतंत्र संविधान सभा के गठन की प्रत्यक्ष मांग रखी थी।
- हालांकि वर्ष 1934 में पहली बार वामपंथी नेता एम.एन. रॉय ने व्यक्तिगत रूप से संविधान सभा का विचार दिया था, परंतु वर्ष 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने आधिकारिक और औपचारिक तौर पर पहली बार देश के लिए एक निर्वाचित संविधान सभा की मांग को अपने प्रस्ताव में शामिल किया था।
- कांग्रेस की ओर से वर्ष 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह स्पष्ट घोषणा की थी कि स्वतंत्र भारत का संविधान बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के, केवल वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित संविधान सभा द्वारा ही बनाया जाएगा।
- द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गए कैबिनेट मिशन (1946) के विस्तृत प्रस्तावों के तहत ही अंततः नवंबर 1946 में भारत की संविधान सभा का वास्तविक और वैधानिक गठन संपन्न हुआ था।
4. यह किसका कथन है: “केवल संविधान सभा ही देश के लिए एक ऐसा स्वदेशी संविधान तैयार कर सकती है जो वास्तव में और पूरी तरह से जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता हो”?
(a) जवाहरलाल नेहरू
(b) महात्मा गांधी
(c) डॉ. बी.आर. अंबेडकर
(d) एम.एन. रॉय
उत्तर: (b)
व्याख्या:
“केवल संविधान सभा ही देश के लिए एक ऐसा स्वदेशी संविधान तैयार कर सकती है जो वास्तव में और पूरी तरह से जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता हो” यह विशिष्ट उद्धरण महात्मा गांधी का है। उन्होंने 19 नवंबर 1939 को अपने साप्ताहिक समाचार पत्र हरिजन में प्रकाशित “द ओनली वे” (एकमात्र रास्ता) नामक एक लेख में यह बात लिखी थी।
- शुरुआत में, गांधी जी इस बात को लेकर थोड़े संशय में थे जब जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार कांग्रेस के प्रस्तावों में संविधान सभा की मांग को आगे बढ़ाया था। हालाँकि, बदलते राजनीतिक हालातों ने उन्हें इसका एक मजबूत समर्थक बना दिया।
- गांधी जी पूरी तरह आश्वस्त हो गए थे कि जनता द्वारा चुनी गई सभा ही इसका एकमात्र वास्तविक समाधान है। उनका तर्क था कि बाहर से भारत पर थोपा गया कोई भी शासन ढांचा विफल हो जाएगा। उनका दृढ़ विश्वास था कि केवल एक स्वदेशी और स्वयं निर्मित संस्था ही नागरिकों की लोकतांत्रिक पसंद को प्रदर्शित कर सकती है तथा आंतरिक सांप्रदायिक मतभेदों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा सकती है।
5. 1942 के क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसने युद्ध की समाप्ति के बाद पूर्ण डोमिनियन स्टेटस (अधिराज्य का दर्जा) के साथ एक भारतीय संघ की स्थापना का वादा किया था।
- इसने एक संविधान सभा का प्रस्ताव रखा जिसके सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा नामांकित किए जाने थे।
- इसने भारतीय संघ में शामिल होने के अनिच्छुक किसी भी प्रांत को अपने स्वयं के संविधान के साथ एक अलग संघ बनाने का अधिकार दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: ब्रिटिश सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध के लिए भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने के लिए मार्च 1942 में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा था। इस मिशन ने युद्ध समाप्त होने के तुरंत बाद भारत को अधिराज्य का दर्जा (डोमिनियन स्टेटस) देने का वादा किया था, जिससे उसे ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के भीतर स्वशासन का अधिकार मिल जाता।
- कथन 2 गलत है: मिशन ने यह प्रस्ताव नहीं दिया था कि प्रांतीय विधानसभा के सदस्य नामांकित किए जाएं। इसके बजाय, इसने एक मिश्रित संरचना की रूपरेखा तैयार की थी जिसके तहत संविधान सभा के सदस्यों को प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चुना जाना था और रियासतों के शासकों द्वारा नामांकित किया जाना था।
- कथन 3 सही है: इस प्रस्ताव ने एक अत्यंत विवादास्पद शर्त पेश की जिसने प्रांतीय स्वायत्तता को चरम स्तर तक बढ़ा दिया था। इसमें कहा गया था कि यदि कोई प्रांत नए संविधान को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, तो उसे भारतीय संघ से बाहर रहने, अपना अलग संघ बनाने और एक अलग संविधान का मसौदा तैयार करने का पूरा अधिकार होगा। इस प्रावधान ने अप्रत्यक्ष रूप से देश के विभाजन के बीज बो दिए थे।
6. भारत की संविधान सभा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से सभा का चयन किया गया था।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव किए गए थे।
- चुनाव की योजना का निर्धारण कैबिनेट मिशन द्वारा किया गया था।
- सीटों का वर्गीकरण माउंटबैटन योजना के आधार पर किया गया था।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 4
उत्तर: (c)
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: भारत की संविधान सभा का चुनाव वर्ष 1946 में प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था।
- कथन 2 गलत है: इसके चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं हुए थे, बल्कि वर्ष 1935 के अधिनियम के तहत कर, संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सीमित वयस्क आबादी को ही मताधिकार प्राप्त था।
- कथन 3 सही है: संविधान सभा के गठन और उसके चुनाव की संपूर्ण योजना व रूपरेखा का निर्धारण ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गए कैबिनेट मिशन (1946) के प्रस्तावों के आधार पर किया गया था।
- कथन 4 गलत है: सीटों के वर्गीकरण और आवंटन (प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 1 सीट) का मूल आधार कैबिनेट मिशन योजना थी, न कि माउंटबैटन योजना; क्योंकि माउंटबैटन योजना (3 जून 1947) का संबंध मुख्य रूप से देश के विभाजन और स्वतंत्रता विन्यास से था।
7. संविधान सभा के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(i) संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को आयोजित की गई थी।
(ii) इसके पहले स्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।
(iii) मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की पहली बैठक का बहिष्कार किया था।
(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (i) और (iii)
(c) (i) और (ii)
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b)
व्याख्या:
- कथन (i) सही है: संविधान सभा की सबसे पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष (संसद हॉल) में हुई थी।
- कथन (ii) गलत है: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा इसके स्थायी अध्यक्ष नहीं थे। फ्रांसीसी प्रथा का पालन करते हुए, उन्हें केवल अस्थायी (अंतरिम) अध्यक्ष चुना गया था क्योंकि वे सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे। इसके दो दिन बाद, 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सर्वसम्मति से सभा का पहला स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
- कथन (iii) सही है: मुस्लिम लीग ने इस उद्घाटन सत्र का पूरी तरह से बहिष्कार किया था। वे पाकिस्तान के एक अलग संप्रभु राज्य की अपनी मांग पर अड़े हुए थे। इस बहिष्कार के कारण इस ऐतिहासिक पहली बैठक में केवल 211 सदस्यों ने भाग लिया था।
8. भारत की संविधान सभा के गठन और उसकी सदस्य संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ब्रिटिश प्रांतों को आवंटित सीटों का निर्धारण तीन मुख्य समुदायों—मुस्लिम, सिख और सामान्य की जनसंख्या के अनुपात में किया गया था।
- देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन प्रांतीय विधान सभाओं की तर्ज पर अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति द्वारा किया जाना था।
- मुख्य आयुक्त के प्रांतों से कुल चार सदस्यों का चयन संविधान सभा में किया गया था।
- प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत में सीटों का विभाजन आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक कथन
(b) केवल दो कथन
(c) केवल तीन कथन
(d) सभी चारों कथन
उत्तर: (c) केवल तीन कथन
व्याख्या:
कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के गठन और सीटों के आवंटन की प्रक्रिया का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- कथन 1 सही है: ब्रिटिश भारत के प्रांतों को आवंटित की गई सीटों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में तीन प्रमुख समुदायों में विभाजित किया गया था, जो मुस्लिम, सिख और सामान्य (मुस्लिम और सिख को छोड़कर बाकी सभी) थे।
- कथन 2 गलत है: देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं की तरह निर्वाचन द्वारा नहीं होना था। कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार, रियासतों के 93 सदस्यों को वहाँ के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था। इस प्रकार संविधान सभा आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से नामांकित निकाय थी।
- कथन 3 सही है: कुल 389 सीटों में से 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों से आने थे, 93 सदस्य देशी रियासतों से और शेष 4 सदस्य मुख्य आयुक्त के प्रांतों (दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से तय किए गए थे।
- कथन 4 सही है: प्रांतीय असेंबली में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों ने अपने प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत पद्धति के माध्यम से किया था।
9. भारत की संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों और उसके सांगठनिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संविधान सभा की पहली बैठक में कुल 211 सदस्यों ने भाग लिया था।
- सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के कारण डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
- 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष और एच.सी. मुखर्जी को एकमात्र उपाध्यक्ष चुना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली के सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी। मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग को लेकर इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था और देशी रियासतों ने भी शुरुआत में इससे दूरी बनाए रखी थी। इस कारण कुल 389 सदस्यों में से केवल 211 सदस्यों ने ही इस पहली बैठक में हिस्सा लिया था।
- कथन 2 सही है: पहली बैठक के दौरान किसी स्थायी अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ था। वरिष्ठता के सिद्धांत (फ्रांसीसी संसद की परंपरा) का पालन करते हुए सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सर्वसम्मति से संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
- कथन 3 गलत है: 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को निर्विरोध स्थायी अध्यक्ष चुना गया था। यह कथन इसलिए गलत है क्योंकि संविधान सभा के एकमात्र नहीं, बल्कि दो उपाध्यक्ष चुने गए थे। पहले उपाध्यक्ष एच.सी. मुखर्जी थे और बाद में वी.टी. कृष्णमाचारी को सभा का दूसरा उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया था।
10. भारत की संविधान सभा की विभिन्न समितियों और उनके अध्यक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित तालिका पर विचार कीजिए:
| समिति | अध्यक्ष |
|---|---|
| 1) संघ शक्ति समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| 2) संचालन समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| 3) अल्पसंख्यक उप-समिति | एच.सी. मुखर्जी |
| 4) मौलिक अधिकार उप-समिति | जे.बी. कृपलानी |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) केवल तीन युग्म
(d) सभी चारों युग्म
उत्तर: (c) केवल तीन युग्म
व्याख्या:
- युग्म 1 गलत सुमेलित है: संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे, न कि सरदार वल्लभभाई पटेल। सरदार पटेल प्रांतीय संविधान समिति और मौलिक अधिकारों संबंधी मुख्य सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे।
- युग्म 2 सही सुमेलित है: संविधान सभा की कार्यप्रवाह व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए गठित संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
- युग्म 3 सही सुमेलित है: मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय क्षेत्रों संबंधी मुख्य सलाहकार समिति के अंतर्गत गठित ‘अल्पसंख्यक उप-समिति’ के अध्यक्ष एच.सी. मुखर्जी थे।
- युग्म 4 सही सुमेलित है: इसी मुख्य सलाहकार समिति के ही अधीन काम करने वाली ‘मौलिक अधिकार उप-समिति’ के अध्यक्ष आचार्य जे.बी. कृपलानी थे।
