1. प्रारंभिक ऐतिहासिक तमिलकम में राजा और उसके राजवंश के निम्नलिखित युग्मों में से कौन सा/से सही ढंग से मेल नहीं खाता/खाती है?
- Senguttuvan : Chera
- उदियांजेरल : चोला
- Nedunjeliyan : Pandya
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
(A) 1 और 2
(B) केवल 2
(C) 1 और 3
(D) केवल 3
उत्तर: (B) केवल 2
व्याख्या:
युग्म 1 (Senguttuvan : Chera) – सही सुमेलित है:
चेरन सेंगट्टुवन (जिन्हें ‘लाल चेर’ भी कहा जाता है) संगम काल के दौरान चेर राजवंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। वे पत्तिनी संप्रदाय (आदर्श पत्नी के रूप में कण्णगी की पूजा) की स्थापना के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसका जीवंत वर्णन प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य शिल्प्पादिकारम में मिलता है।
युग्म 2 (उदियांजेरल : चोला) – गलत सुमेलित है:
उदियांजेरल (उदियन चेरलॉथन) चेर राजवंश से संबंधित हैं, न कि चोल राजवंश से। उन्हें चेर राजवंश का पहला ऐतिहासिक शासक माना जाता है। संगम कविताओं के अनुसार, वे कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान पांडव और कौरव दोनों सेनाओं को भोजन कराने के लिए प्रसिद्ध हैं।
युग्म 3 (Nedunjeliyan : Pandya) – सही सुमेलित है:
नेदुनजेलियन पाण्ड्य राजवंश के एक शक्तिशाली योद्धा राजा थे। उन्होंने तलैयालंगानम के ऐतिहासिक युद्ध को जीतने के लिए अत्यधिक प्रसिद्धि प्राप्त की, जहाँ उन्होंने अकेले ही चेर, चोल और पांच अन्य छोटे सरदारों के संयुक्त गठबंधन को हराया था।
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. पाली ग्रंथों में सिक्कों के पहले निश्चित संदर्भ मिलते हैं, जैसेकि कहपना, निक्खा, कंसा और ककनिका ।
II. पाली ग्रंथों से प्राप्त साहित्यिक प्रमाणों की पुष्टि कई स्थलों से प्राप्त पंच-चिह्नित सिक्कों के पुरातात्विक प्रमाणों से होती है, जिनमें से अधिकांश चांदी के बने होते हैं।
उपरोक्त कथन निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं?
- शहरी जीवन का उदय
- मुद्रा अर्थव्यवस्था में परिवर्तन
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या :
छठी शताब्दी ईसा पूर्व (महाजनपद काल) के दौरान भारतीय उपउपमहाद्वीप में आए आर्थिक और सामाजिक बदलावों से संबंधित है।
मुद्रा अर्थव्यवस्था में परिवर्तन (कथन से जुड़ाव): प्राचीन भारत में इस कालखंड से पहले व्यापार मुख्य रूप से वस्तु-विनिमय (Barter System) या गायों/सोने के ढेलों के अनौपचारिक माध्यम से होता था। पालि बौद्ध ग्रंथों में पहली बार ‘कहपना’ (कार्षापण), ‘निक्खा’, ‘कंसा’ और ‘ककनिका’ जैसे मानकीकृत सिक्कों के निश्चित नाम मिलते हैं। पुरातात्विक खुदाई में मिले आहत सिक्के (Punch-marked coins), जो ज्यादातर चाँदी के बने हैं, इन ग्रंथों की बात को सच साबित करते हैं। यह सीधे तौर पर मुद्रा अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाता है।
शहरी जीवन का उदय (कथन से जुड़ाव): सिक्कों के आने से व्यापार बहुत आसान हो गया। व्यापारियों के लिए लंबी दूरी की यात्राएँ करना और राजाओं के लिए कर (Tax) वसूलना सुगम हो गया। इसी आर्थिक प्रगति के कारण गंगा घाटी में बड़े-बड़े व्यापारिक केंद्रों और शहरों का विकास हुआ, जिसे इतिहास में ‘द्वितीय नगरीकरण’ कहा जाता है। इसलिए, सिक्कों का यह साक्ष्य शहरी जीवन के उदय की प्रक्रिया से भी मजबूती से जुड़ा हुआ है।
चूँकि दोनों ही बिंदु सिक्कों के प्रचलन के प्रत्यक्ष परिणाम और कारण थे, इसलिए सही उत्तर 1 और 2 दोनों होगा।
3. ऋग्वैदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. कुओं से सिंचाई के कारण कृषि बाढ़ के मैदानों और नदी के किनारों पर स्थित पट्टियों से दूर वर्तमान पंजाब और हरियाणा के मैदानी क्षेत्रों तक फैल सकी, जहाँ भूमिगत जल स्तर सतह के काफी करीब था।
II. कुओं से पानी निकालने के लिए पशुशक्ति का प्रयोग किया जाता था।
निम्नलिखित में से कौन सी जानकारी उपरोक्त कथनों का समर्थन करती है?
- ऋग्वेद में पानी निकालने के लिए अश्व चक्र (पत्थर का पहिया) और अहवा (लकड़ी की बाल्टियाँ) के उपयोग के प्रमाण मिलते हैं।
- ऋग्वेद में परशु/कुलिश (कुल्हाड़ी) और दत्र/श्रेणी (हंसिया) जैसे औजारों के उपयोग का उल्लेख है।
- ऋग्वेद से पहले भी भूमि जोतने और गाड़ियाँ खींचने के लिए बैल के उपयोग का इतिहास मिलता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें।
[A] केवल 1 और 2
[B] 1, 2 और 3
[C] केवल 1 और 3
[D] केवल 3
सही उत्तर: [C] केवल 1 और 3
व्याख्या :
बिंदु 1 (समर्थन करता है- सही): ऋग्वेद में उल्लिखित ‘अश्व चक्र’ (पत्थर का पहिया या चरखी) और ‘अहावा’ (पानी निकालने वाली लकड़ी की बाल्टियाँ) सीधे तौर पर कुओं से पानी निकालने की तकनीक को प्रमाणित करते हैं। यह जानकारी मूल कथन I का समर्थन करती है कि नदी के बाढ़ वाले क्षेत्रों से दूर जाकर भी कुओं के माध्यम से सिंचाई संभव थी।
बिंदु 2 (समर्थन नहीं करता – गलत): ऋग्वेद में परशु/कुलिश (कुल्हाड़ी) और दत्र/श्रेणी (हंसिया) जैसे औजारों का उल्लेख निश्चित रूप से मिलता है, लेकिन ये उपकरण सामान्य कृषि (फसल कटाई) और वन-सफाई गतिविधियों को दर्शाते हैं। ये कुओं से सिंचाई करने या पशुओं द्वारा पानी खींचने के संबंध में कोई प्रमाण नहीं देते हैं। इसलिए, यह दी गई जानकारी मूल कथनों का समर्थन नहीं करती।
बिंदु 3 (समर्थन करता है- सही): ऋग्वैदिक काल से पहले (हड़प्पा काल में) और ऋग्वैदिक काल के दौरान भी खेतों को जोतने और गाड़ियों को खींचने के लिए बैलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता था। चूंकि समाज में पशुशक्ति का ऐसा उपयोग पहले से स्थापित था, इसलिए यह इस बात का मजबूत संकेत (समर्थन) देता है कि कुओं से पानी खींचने के लिए भी पशुपक्षियों/पशु शक्ति का उपयोग किया जा सकता था (कथन II का समर्थन)।
अतः, केवल बिंदु 1 और 3 ही मूल कथनों का सीधा समर्थन करते हैं, जिससे सही विकल्प [C] है।
4. भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली का सबसे पहला पुरालेखीय उपयोग गुजरात के मनकानी शिलालेखों (595-596 ईस्वी) में पाया जाता है।
II. नौवीं शताब्दी में, भारत भर के शिलालेखों में स्थान-मान सामान्य हो गए।
III. दक्षिण-पूर्व एशिया में सातवीं शताब्दी के शुरुआती दौर के संस्कृत शिलालेखों में स्थान-मान पाए गए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1 और 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (D) 1, 2 और 3
व्याख्या :
यह प्रश्न भारत और वैश्विक स्तर पर दशमलव स्थान-मूल्य प्रणाली (Decimal Place-Value System) के ऐतिहासिक और पुरालेखीय विकास से संबंधित है। इसके तीनों ही कथन पूरी तरह सत्य हैं:
कथन I सही है: गणितीय ग्रंथों (जैसे 499 ईस्वी का आर्यभटीय) में स्थान-मान की अवधारणा पहले से मौजूद थी, लेकिन वास्तविक अभिलेखों या शिलालेखों (Epigraphy) में इसका सबसे पहला अकाट्य और स्पष्ट उपयोग गुजरात के मनकानी ताम्रपत्रों (Mankani copper plates) में मिलता है, जो 595-596 ईस्वी के हैं। इसमें तिथियों को दर्शाने के लिए स्थानीय-मान पद्धति का प्रयोग किया गया था।
कथन II सही है: शुरुआत में यह प्रणाली कुछ ही अभिलेखों में और पुरानी पद्धतियों के साथ इस्तेमाल होती थी। लेकिन नौवीं शताब्दी ईस्वी तक आते-आते, यह प्रणाली पूरे भारत के शाही फरमानों और शिलालेखों में एक सामान्य और मानक पद्धति बन गई (जैसे कि ग्वालियर का प्रसिद्ध प्रतिहार शिलालेख, 876 ईस्वी, जिसमें शून्य का भी स्पष्ट प्रतीक है)।
कथन III सही है: भारत के सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों के माध्यम से यह प्रणाली बहुत जल्दी विदेशों में फैली। कंबोडिया (जैसे 683 ईस्वी का संबोर शिलालेख) और इंडोनेशिया के सातवीं शताब्दी के शुरुआती संस्कृत शिलालेखों में इस भारतीय दशमलव स्थान-मूल्य प्रणाली और शून्य के प्रयोग के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं।
अतः, तीनों कथन ऐतिहासिक रूप से सत्य होने के कारण सही विकल्प D है।
5. हड़प्पा सभ्यता के शहरों में पाए गए पुरातात्विक निष्कर्षों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. घरों में चरखे व्यापक रूप से पाए जाते हैं, लेकिन कताई के पहिये नहीं हैं।
II. मापन यंत्र और मापन उपकरण, जिनमें पूर्ण अंक अंकित हैं, पाए गए हैं।
III. अपेक्षाकृत विशाल आंगनों के चारों ओर बने घर काफी हद तक पक्की ईंटों से निर्मित हैं, जिनमें अपने-अपने कुएं, स्नान के चबूतरे और बड़े कमरे हैं।
उपरोक्त कथनों से निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- कथन 1 से पता चलता है कि कताई घर पर किया जाने वाला एक श्रमसाध्य कार्य था।
- कथन II हड़प्पावासियों के वैज्ञानिक ज्ञान की सीमा को दर्शाता है।
- कथन III एक साझा संपत्ति प्रणाली के उद्भव का सुझाव देता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या :
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) के सामाजिक, तकनीकी और आर्थिक जीवन की समझ पर आधारित है। दिए गए कथनों और निष्कर्षों का तार्किक विश्लेषण इस प्रकार है:
निष्कर्ष 1 (कथन I से जुड़ाव) – सही: हड़प्पा सभ्यता के लगभग हर छोटे-बड़े घरों से मिट्टी (टेराकोटा) और फ़ाइनेस (Faience) से बनी तकली के छल्ले (Spindle-whorls) व्यापक रूप से मिली हैं। चूँकि उस समय तक बड़े कताई पहियों या आधुनिक चरखों का आविष्कार नहीं हुआ था, इसलिए सूत कातने का काम पूरी तरह हाथ से चलने वाली इन तकलियों द्वारा ही किया जाता था। यह साफ दर्शाता है कि कपड़ा बनाने के लिए कताई करना घर पर किया जाने वाला एक बेहद श्रमसाध्य (Laborious) और समय लेने वाला काम था।
निष्कर्ष 2 (कथन II से जुड़ाव) – सही: हड़प्पावासियों की बाट और माप प्रणाली (Weights and Measures) अत्यधिक मानकीकृत और सटीक थी। मोहनजोदड़ो, लोथल और धोलावीरा जैसे स्थलों से हाथी दांत, शंख और तांबे के बने मापन पैमाने (Scales/Rulers) मिले हैं, जिन पर निश्चित और सूक्ष्म उप-विभाजन (पूर्ण अंक) अंकित हैं। यह साक्ष्य सिद्ध करता है कि हड़प्पावासियों के पास ज्यामिति, गणित और सटीक माप का उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान था।
निष्कर्ष 3 (कथन III से जुड़ाव) – गलत: घरों के निर्माण की बनावट, जिसमें एक बड़ा केंद्रीय आंगन होता था और उसके चारों ओर बड़े कमरे, स्वयं के निजी कुएं और निजी स्नान के चबूतरे होते थे, वह सार्वजनिक या साझा संपत्ति प्रणाली को नहीं दर्शाता। इसके विपरीत, प्रत्येक घर में अलग कुआँ और स्नानागार होना निजी घरेलू स्वामित्व (Private Property) और गोपनीयता (Privacy) की मजबूत भावना की ओर इशारा करता है। (साझा या सार्वजनिक संपत्ति का उदाहरण मोहनजोदड़ो का ‘विशाल स्नानागार’ है, न कि निजी घरों के कुएं)।
अतः, केवल निष्कर्ष 1 और 2 तार्किक रूप से सही हैं, जिसके कारण सही विकल्प A है।
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