MODERN HISTORY

1. 1856 में अवध के ब्रिटिश विलय के तुरंत बाद की नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. तालुकदारों से उनकी जागीरें छीन ली गईं, लेकिन उन्हें अपने हथियार और किले रखने की अनुमति दी गई।
  2. 1856 में एक संक्षिप्त राजस्व बंदोबस्त इस धारणा के साथ किया गया था कि तालुकदार बाहरी लोग थे।
  3. अंग्रेजों का मानना था कि तालुकदारों को हटाकर किसानों से सीधे राजस्व वसूलना बेहतर है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

A) केवल 2 और 3
B) केवल 1 और 3
C) 1, 2 और 3
D) केवल 2

व्याख्या:
  • कथन 1 गलत है: 1856 में अवध के विलय के तुरंत बाद, अंग्रेजों ने पूरे क्षेत्र में पूर्ण निरस्त्रीकरण (disarmament) की नीति लागू की थी। तालुकदारों से न केवल उनकी जागीरें (जमीनें) छीनी गईं, बल्कि उनके हथियार भी जब्त कर लिए गए और उनके किलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। उन्हें हथियार या किले रखने की कोई अनुमति नहीं थी।
  • कथन 2 सही है: अंग्रेजों ने 1856 में “एकमुश्त बंदोबस्त” (Summary Settlement) लागू किया था। यह बंदोबस्त इसी धारणा पर आधारित था कि तालुकदार जमीन के असली मालिक नहीं हैं, बल्कि वे केवल बाहरी लोग (outsiders) और बिचौलिए हैं, जिन्होंने केवल ताकत या धोखे से जमीन पर कब्जा जमाया हुआ था।
  • कथन 3 सही है: ब्रिटिश अधिकारियों का यह मानना था कि तालुकदारों को रास्ते से हटाकर वे सीधे वास्तविक किसानों (cultivators) से राजस्व वसूल सकेंगे। उनका सोचना था कि इससे किसानों का शोषण बंद होगा और ब्रिटिश सरकार की टैक्स से होने वाली कमाई भी बढ़ जाएगी। (हालांकि, हकीकत में इसके बाद टैक्स का बोझ और बढ़ गया और किसान और ज्यादा परेशान हो गए)।

2. निम्नलिखित में से कौन से कारक 1939 में सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन में सहायक थे?
  1. बोस महात्मा गांधी का विश्वास जीतने में असफल रहे।
  2. कांग्रेस का वामपंथी धड़ा एकजुट नहीं था और बोस का समर्थन करने में विफल रहा।
  3. कम्युनिस्टों ने बोस के प्रयासों में उनका समर्थन नहीं किया।
  4. एम.एन. रॉय और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं के समर्थकों ने बोस का समर्थन करने की बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी।

नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:

A) 1, 2 और 3
B) 1, 2 और 4
C) 1, 3 और 4
D) केवल 2 और 4

व्याख्या:
  • कथन 1 सही है: 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी के समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीता। इसके बाद गांधीजी ने इसे अपनी व्यक्तिगत हार बताया। गोविंद वल्लभ पंत द्वारा लाए गए ‘पंत प्रस्ताव’ के कारण बोस के लिए गांधीजी की इच्छा के बिना काम करना असंभव हो गया। वे महात्मा गांधी का विश्वास जीतने में असफल रहे, जिसके कारण उन्होंने अप्रैल 1939 में इस्तीफा दे दिया।
  • कथन 2 सही है: कांग्रेस के भीतर का वामपंथी (Left-wing) धड़ा आंतरिक रूप से विभाजित था। संकट के समय वे सुभाष चंद्र बोस को एक संगठित और अटूट समर्थन देने में पूरी तरह विफल रहे। इसी बिखराव को दूर करने के लिए बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की नींव रखी।
  • कथन 3 गलत है: त्रिपुरी संकट के दौरान भारत के कम्युनिस्टों (CPI) ने शुरू में सुभाष चंद्र बोस के प्रयासों का खुलकर समर्थन किया था और पंत प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था। इसलिए यह कहना गलत है कि उन्होंने बोस का समर्थन नहीं किया।
  • कथन 4 सही है: कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) के जयप्रकाश नारायण और एम.एन. रॉय के समर्थकों जैसे प्रमुख समाजवादी नेताओं का मानना था कि आगामी द्वितीय विश्व युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कांग्रेस की एकजुटता बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसलिए संकट के समय उन्होंने बोस का साथ देने के बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी और तटस्थ रहे।

इन्हीं सभी परिस्थितियों के कारण, मई 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के भीतर ही सभी वामपंथी और प्रगतिशील तत्वों को एक मंच पर लाने के लिए ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ का गठन किया।


3. निम्नलिखित कथन पर विचार करें:

“समुदाय पर आधारित राजनीतिक गठबंधनों की उत्पत्ति 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों की प्रकृति में ही निहित थी।”

निम्नलिखित में से कौन सा कथन उपरोक्त कथन का समर्थन करता है?

  1. सुधारों ने पृथक निर्वाचक मंडलों के सिद्धांत को बरकरार रखा और उसका विस्तार किया। अलग-अलग निर्वाचक मंडल का उद्देश्य भारतीय राष्ट्रवाद का मुकाबला करना था, जो लगातार मजबूत होता जा रहा था।
  2. वंचित वर्गों ने अलग-अलग निर्वाचक मंडलों में निहित लाभों के इर्द-गिर्द एकजुटता दिखाई।

नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:

A) केवल 1
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) 1, 2 और 3

व्याख्या:
  • कथन 1 सही है और मुख्य कथन का समर्थन करता है: 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों (भारत सरकार अधिनियम, 1919) ने न केवल 1909 में मुस्लिमों को दिए गए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) को जारी रखा, बल्कि इसका विस्तार सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियनों और यूरोपियनों तक कर दिया। इसने संवैधानिक व्यवस्था के भीतर समुदाय-आधारित राजनीति और गठबंधनों को संस्थागत रूप दे दिया।
  • कथन 2 सही है और मुख्य कथन का समर्थन करता है: ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार की यह नीति ‘फूट डालो और राज करो’ (Divide and Rule) का हिस्सा थी। इस विभाजनकारी चुनावी प्रणाली का मुख्य उद्देश्य तेज़ी से बढ़ रहे और मजबूत होते जा रहे भारतीय राष्ट्रवाद को खंडित करना तथा राष्ट्रीय आंदोलन की एकता को कमजोर करना था।
  • कथन 3 सही है और मुख्य कथन का समर्थन करता है: जब ब्रिटिश सरकार ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों को सांप्रदायिक या वर्गीय पहचान से जोड़ दिया, तो विभिन्न अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों/वर्गों ने भी अपने राजनैतिक हितों और लाभों की सुरक्षा के लिए अपनी विशिष्ट सांप्रदायिक और सामाजिक पहचान के इर्द-गिर्द खुद को संगठित करना शुरू कर दिया। इसी सुरक्षा और लाभ की भावना ने भारत में समुदाय-आधारित राजनीतिक गठबंधनों को जन्म दिया।

4. हिल्टन-यंग आयोग (1926) द्वारा निर्धारित कृत्रिम रूप से स्थिर रुपया-पाउंड विनिमय दर को ब्रिटिश सरकार ने निम्नलिखित में से किस कारण से अपनाया था?

A) भारत से भेजे जाने वाले धन के प्रवाह को सुगम बनाना और भारत की साख को बनाए रखना।
B) भारतीय आयातकों को सहायता प्रदान करना
C) भारत से कपास उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करना
D) सोने के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन को रोकना

व्याख्या:
  • विनिमय दर का निर्धारण: हिल्टन-यंग आयोग (भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन, 1926) ने रुपया-स्टर्लिंग विनिमय दर को युद्ध-पूर्व की स्वाभाविक दर (1 शिलिंग 4 पेंस) के स्थान पर कृत्रिम रूप से बढ़ाकर 1 शिलिंग 6 पेंस (1s 6d) तय करने की सिफारिश की थी.
  • ‘होम चार्जेज’ (Home Charges) का बोझ कम करना: ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार भारत से प्रतिवर्ष भारी मात्रा में धन ब्रिटेन भेजती थी, जिसे ‘होम चार्जेज’ या ‘गृह प्रभार’ (जैसे- ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, प्रशासनिक खर्च, और सार्वजनिक ऋण पर ब्याज) कहा जाता था. रुपये का मूल्य कृत्रिम रूप से ऊंचा (Overvalued) रखने से ब्रिटिश सरकार को इन भुगतानों को पाउंड (स्टर्लिंग) में बदलने के लिए कम रुपये खर्च करने पड़ते थे, जिससे औपनिवेशिक बजट संतुलित रहता था.
  • भारत की साख (Creditworthiness) बनाए रखना: लंदन के वित्तीय बाजारों में भारत सरकार आसानी से कर्ज ले सके और उसकी साख बनी रहे, इसके लिए भी ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले रुपये को मजबूत बनाए रखना अंग्रेजों के साम्राज्यवादी हितों के अनुकूल था.
  • भारतीयों द्वारा विरोध क्यों हुआ?: इस कृत्रिम रूप से ऊंची दर के कारण भारतीय उत्पाद (जैसे- कपास और वस्त्र) वैश्विक बाजारों में महंगे हो गए, जिससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ। साथ ही, ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं का भारत में आयात सस्ता हो गया, जिसने भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुंचाया। यही कारण था कि पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास जैसे भारतीय उद्योगपतियों और राष्ट्रवादी नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया था

5. एका आंदोलन और बारडोली सत्याग्रह के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

A) एका आंदोलन को शुरू से अंत तक कांग्रेस का समर्थन और आयोजन प्राप्त था, जबकि बारडोली सत्याग्रह शुरू में कांग्रेस के प्रभाव से स्वतंत्र था और केवल अंतिम चरणों में ही कांग्रेस द्वारा समर्थित हुआ था।

B) एका आंदोलन का नेतृत्व अवध के तालुकदारों ने किया था, जबकि बारडोली सत्याग्रह भूमिहीन मजदूरों का आंदोलन था।

C) बार्डोली सत्याग्रह भू-राजस्व में वृद्धि के खिलाफ एक अभियान था, जबकि एका आंदोलन किराए की अत्यधिक वसूली के खिलाफ एक विरोध था।

D) एका आंदोलन वर्तमान उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मिर्जापुर जिलों में केंद्रित था, जबकि बारडोली सत्याग्रह सौराष्ट्र में हुआ था।

व्याख्या (Explanation):
  • कथन C सही है:
    • बारडोली सत्याग्रह (1928): गुजरात के सूरत जिले के बारडोली तालुका में प्रांतीय सरकार द्वारा भू-राजस्व (Land Revenue) में 22% की अनुचित वृद्धि के खिलाफ चलाया गया एक कर-विरोधी (no-tax) अभियान था। इसका सफल नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया था।
    • एका आंदोलन (1921-1922): अवध (उत्तर प्रदेश) के उत्तरी जिलों में किसानों द्वारा ज़मींदारों और ठेकेदारों द्वारा निर्धारित किराए से 50% से अधिक अत्यधिक किराए की वसूली (High Rents), बेदखली की प्रथा और अवैध उपकरों (cesses) के खिलाफ एक शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन था।
  • अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?:
    • विकल्प A गलत है: एका आंदोलन की शुरुआत शुरुआत में कांग्रेस और खिलाफत नेताओं द्वारा की गई थी, लेकिन जल्द ही इसका नेतृत्व मदारी पासी जैसे निचले तबके के नेताओं के हाथ में चला गया, जिन्होंने अहिंसा के सिद्धांत को छोड़ दिया। इसके बाद कांग्रेस ने खुद को इस आंदोलन से अलग कर लिया। दूसरी ओर, बारडोली सत्याग्रह को शुरू से ही स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मजबूत सांगठनिक समर्थन प्राप्त था।
    • विकल्प B गलत है: एका आंदोलन का नेतृत्व तालुकदारों ने नहीं, बल्कि छोटे किसानों और मदारी पासी जैसे नेताओं ने तालुकदारों और जमींदारों के शोषण के खिलाफ किया था। बारडोली सत्याग्रह मुख्य रूप से ‘पाटीदार’ जैसे भू-स्वामी किसानों का आंदोलन था, न कि भूमिहीन मजदूरों का।
    • विकल्प D गलत है: एका आंदोलन अवध के उत्तरी जिलों जैसे हरदोई, बहराइच, सीतापुर और बाराबंकी में केंद्रित था (न कि वाराणसी और मिर्जापुर में)। बारडोली सत्याग्रह गुजरात के सूरत जिले में हुआ था, सौराष्ट्र में नहीं।

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