HISTORY PYQ 2026

1.प्रारंभिक बौद्ध मूर्ति विद्या में रिक्त स्थान (empty seat) क्या दर्शाता है?

(a) बुद्ध का ध्यान
(b) बुद्ध का प्रथम धर्मोपदेश
(c) बुद्ध का महापरिनिब्बान
(d) बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण

उत्तर: (a)

व्याख्या:

रिक्त आसन (सही): अनिकोनीक (प्रतीक-आधारित) बौद्ध कला में, बुद्ध को कभी भी एक व्यक्ति के रूप में नहीं दिखाया गया था। रिक्त आसन (या खाली सिंहासन) विशेष रूप सेबोधि वृक्ष के नीचेज्ञान प्राप्ति के दौरान बुद्ध के ध्यान का प्रतीक है। यह उस “प्रबुद्ध व्यक्ति” को दर्शाता हैजिसकी उपस्थिति आध्यात्मिक रूप से महसूस की जाती हैलेकिन जिसेभौतिक चित्रण से परेमाना जाता है। यह प्रतीक भरहुत और सांची स्तूपों के बेस-रिलीफ मेंप्रमुखता सेपाया जाता है।

अन्य विकल्पों की व्याख्या

(b) बुद्ध का प्रथम उपदेश: इस घटना, धर्मचक्र प्रवर्तन, को धर्मचक्र (कानून का पहिया) द्वारा दर्शाया जाता है। पहिया बौद्ध सिद्धांत की शुरुआत का प्रतीक है। अक्सर, पहियेको आठ तीलियों केसाथ दिखाया जाता है, जो अष्टांगिक मार्गका प्रतिनिधित्व करतेहैं।

(c) बुद्ध का महापरिनिब्बान: बुद्ध के अंतिम निधन या मृत्युको स्तूप द्वारा दर्शाया जाता है। स्तूप एक अर्धगोलाकार संरचना है जिसमें अवशेष रखेजातेहैं; यह बुद्ध के भौतिक अवशेषों के दफन का प्रतिनिधित्व करता है, जो पुनर्जन्म के चक्र (संसार) से उनकी अंतिम मुक्ति को दर्शाता है।

(d) बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण: सत्य की खोज में महल से उनके “महा प्रस्थान” को बिना सवार के घोड़ेद्वारा दर्शाया जाता है। यह घोड़े, कंठक, का प्रतिनिधित्व करता है, जो राजकुमार सिद्धार्थको राजसी जीवन से दूर लेगया था, जिससे उन्होंने अपनी संपत्ति और परिवार को पीछेछोड़ दिया था।

अतः विकल्प (a) सही उत्तर है।

2. निम्नलिखित नदियों के प्राचीन और आधुनिक नामों के युग्मों में से कौन-सा/कौन-से सही सुमेलित है/हैं?

  1. वितस्ता : चिनाब
  2. असिक्नी : झेलम
  3. परुष्णी : रावी
  4. यव्यावती : ब्यास

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

(a) 1 और 2
(b) 3 और 4
(c) केवल 3
(d) केवल 4

उत्तर: (c)

व्याख्या:

  1. वितस्ता (गलत): प्राचीन नाम वितस्ता का आधुनिक नाम झेलम है (चिनाब नहीं)।
  2. असिक्नी(गलत): प्राचीन नाम असिक्नीका आधुनिक नाम चिनाब है (झेलम नहीं)।
  3. परुष्णी(सही): प्राचीन नाम परुष्णीका आधुनिक नाम रावी नदी है। यह दाशराज्ञ युद्ध (दस राजाओं का युद्ध) के लिए प्रसिद्ध है।
  4. यव्यावती(गलत): प्राचीन नाम यव्यावतीका आधुनिक नाम झोब नदी है। ब्यास नदी का प्राचीन नाम विपाशा है।

अन्य प्रमुख वैदिक नदियाँ:

अन्य प्रमुख वैदिक नदियाँ

वैदिक नाम आधुनिक नाम महत्व

सिंधु इंडस ऋग्वैदिक सभ्यता की मुख्य नदी; “भारत” नाम का आधार
शुतुद्री सतलुज पंजाब क्षेत्र मेंकृषि एवं बसावट का विस्तार
विपाशा ब्यास कृषि विस्तार मेंसहायक नदी
दृषद्वती घग्गर / रक्षी सरस्वती प्रणाली सेजुड़ी वैदिक संस्कृति
कुंभा काबुल उत्तर-पश्चिम भारत/अफगान क्षेत्र का संकेत
क्रुमु कुर्रम सीमावर्ती नदी तंत्र का भाग
गोमती गोमल व्यापार एवं पशुपालन मार्गों में महत्वपूर्ण
सुवास्तु स्वात प्रारंभिक आर्यबसावट क्षेत्र
सरस्वती घग्गर-हकरा प्रणाली ऋग्वेद की सबसे पवित्र एवं प्रमुख नदी

अतः विकल्प (c) सही उत्तर है।

3 .अमरावती स्तूप और उसकी उद्धृत मूर्तिकला (relief sculpture) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

1.यह निचली कृष्णा घाटी मेंस्थित था।
2.भारत में, आकार की दृष्टि से, साँची स्तूप के बाद इसका ही स्थान था।
3. अमरावती मूर्तिकला शैली का परवर्ती दक्षिण भारतीय मूर्तिकला पर गहरा प्रभाव पड़ा, और उसकी रचनाओं (products) को श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया लेजाया गया था।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

व्याख्या:

कथन 1 सही है: अमरावती स्तूप, जिसेमहाचैत्य के रूप मेंभी जाना जाता है, वर्तमान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिलेमेंनिचलीकृष्णा घाटी मेंकृष्णा नदी के दाहिनेतट पर स्थित था। यह सातवाहन और बाद मेंइक्ष्वाकु राजवंशों केसंरक्षण में फला-फूला।

कथन 2 गलत है: यह कहना कि अमरावती स्तूप सांची सेछोटा था, ऐतिहासिक रूप सेगलत है। वास्तव में, अपनेचरम पर, अमरावती स्तूप सांची स्तूप सेबड़ा था (अमरावती का व्यास लगभग 50 मीटर था, जबकि सांची का व्यास लगभग 36.5 मीटर है)। इसलिए, कथन मेंदी गई तुलना गलत है।

कथन 3 सही है: अमरावतीमूर्तिकला शैली(या वेंगी शैली) नेबाद की दक्षिण भारतीय कला, विशेषकर पल्लव और चोल शैलियों पर गहरा प्रभाव डाला। इसका सौंदर्यशास्त्रीय प्रभाव समुद्री व्यापार मार्गों के माध्यम सेव्यापक रूप सेफैला, जिसनेश्रीलंका (विशेष रूप से अनुराधापुरा) और दक्षिण-पूर्व एशिया के थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसेक्षेत्रों मेंप्रारंभिक बौद्ध कलात्मक परंपराओं को आकार दिया।

अतः विकल्प (b) सही उत्तर है।

4. निम्नलिखित में से कर्नाटक संगीत के किस राग का हिन्दुस्तानी संगीत के राग बिलावल से मेल है?

(a) नट भैरवी
(b) कामवर्धिनी
(c) हनुमतोड़ी
(d) धीर शंकराभरणम्

उत्तर: (d)

व्याख्या:

राग बिलावल और धीर शंकराभरणम्: हिंदुस्तानी संगीत मेंराग बिलावल को बुनियादी “शुद्ध थाट” माना जाता है। इसमेंसभी सात सुर अपनेप्राकृतिक या शुद्ध रूप (शुद्ध स्वर: सा, रे, ग, म, प, ध, नि) में लगतेहैं, यानी इसमेंकोई भी कोमल या तीव्र स्वर नहीं होता (यह पाश्चात्य संगीत के ‘C Major Scale’ केसमान है)। कर्नाटक संगीत में इसके बिल्कुल समकक्ष 29वां मेलकर्ताराग है, जिसे धीर शंकराभरणम्कहा जाता है। दोनों की स्वर संरचना पूरी तरह समान होने के कारण यह दोनों राग एक दूसरे के मेल खाते रूप हैं।

अन्य विकल्पों की व्याख्या:

(a) नट भैरवी: यह कर्नाटक संगीत का 20वां मेलकर्ताराग है। यह हिंदुस्तानी संगीत केआसावरीथाट (Natural Minor Scale) केसमतुल्य है, जिसमेंकोमल ग, ध, और नि स्वर लगतेहैं।

(b) कामवर्धिनी: इसे दक्षिण मेंपंतूवराली के नाम सेभी जाना जाता है। यह हिंदुस्तानी संगीत के पूर्वी थाट (विशेष रूप सेराग पूरिया धनाश्री) सेमेल खाता है, जिसमेंकोमल रे, कोमल ध और तीव्र म का प्रयोग होता है।

(c) हनुमतोड़ी: यह कर्नाटक संगीत का 8वां मेलकर्ताराग है। यह हिंदुस्तानी संगीत के भैरवीथाट के बिल्कुल समान है, जिसमें चारों विकृत स्वर—रे, ग, ध, और नि कोमल होतेहैं।

5.बाघ गुफाओं में विद्यमान हल्लिसालस्य चित्र क्या प्रदर्शित करता है?

(a) एक आनंदमय लोकनृत्य
(b) चिंतनशील मुद्रा मेंबुद्ध
(c) कैलाश पर शिव और पार्वती का चित्रण
(d) समुद्रमंथन (समुद्र का मंथन)

उत्तर: (a)

व्याख्या :

हल्लिसालस्य चित्र: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित बाघ की गुफाओं के गुफा संख्या 4 (जिसे’रंग महल’ भीकहा जाता है) और गुफा संख्या 5 को जोड़ने वाले बाहरी बरामदे की दीवार पर यह प्रसिद्ध भित्ति चित्र मौजूद है। ‘हल्लिसालस्य’ शब्द का तात्पर्य एक विशेष प्रकार के आनंद मय सामूहिक लोक नृत्य से है। इस चित्र में महिला नर्तकियों का एक समूह वृत्ताकार घेरेमें एक-दूसरेसे लकड़ी की छोटी डंडियाँटकराकर ताल मिलाते हुए दिखाया गया है(जो आधुनिक डांडिया या गरबा जैसा दिखता है)। इनके साथ अन्य महिला संगीतकार हाथ से बजाने वाला ढोलक (हुडुक्का) और छोटी झांझ (कांस्यताल) बजाती हुई चित्रित हैं। इतिहासकार इसे 5वीं-6ठी शताब्दी ईस्वी के मध्य भारत के जीवंत सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानतेहैं।

अन्य विकल्पों की व्याख्या:

(b) चिंतनशील मुद्रा मेंबुद्ध: यद्यपि बाघ की गुफाएंसंरचनात्मक रूप से प्राचीन बौद्ध विहार (मठ) हैं, लेकिन इनके चित्रों के विषय धार्मिक या ध्यानावस्था के बजाय काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष हैं, जिनमें शाही जुलूस, संगीत और तत्कालीन लोक जीवन को प्रमुखता दी गई है।

(c) कैलाश पर शिव और पार्वतीका चित्रण: यह पौराणिक हिंदू धर्मसेसंबंधित एक लोकप्रिय विषय है। इसका सबसे उत्कृष्ट रूप बाद के काल मेंएलोरा की गुफाओं (विशेषकर गुफा 16 – कैलाशनाथ मंदिर) की रॉक-कट मूर्तियों मेंदेखनेको मिलता है, न कि बौद्ध बाघ गुफाओं में।

(d) समुद्रमंथन (समुद्र का मंथन): वैष्णव पौराणिक कथाओं का यह दृश्य बाद केसंरचनात्मक मंदिरों और गुफा परिसरों (जैसे बादामीया उदयगिरि की गुफाओं) मेंप्रमुखता सेमिलता है, इसका बाघ गुफाओं के धर्मनिरपेक्ष नृत्य चित्रों सेकोई संबंध नहीं है।

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