Upsc pyq (Science & Tech)

1.आनुवंशिक चिकित्सा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (upsc 2026)

1. आनुवंशिक चिकित्सा रोग के लिए उत्तरदायी दोषपूर्ण जीन को ठीक करने या उसकी कमी को पूरा करने का प्रयास करती है।

2. आनुवंशिक चिकित्सा में आनुवंशिक सामग्री को लक्ष्य कोशिकाओं तक पहुँचाने के लिए निर्मित विषाणुओं तथा लिपिड नैनोकणों का प्रयोग किया जा सकता है।

3. आनुवंशिक चिकित्सा संपूर्ण डीएनए अनुक्रम को बदल देती है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — सही: आनुवंशिक चिकित्सा का उद्देश्य किसी रोग के मूल आनुवंशिक कारण को लक्षित करना होता है। इसमें दोषपूर्ण जीन को ठीक करना, निष्क्रिय जीन की कार्यात्मक प्रति उपलब्ध कराना या किसी जीन की गतिविधि को नियंत्रित करना शामिल हो सकता है।
उदाहरण: कुछ आनुवंशिक रोगों में स्वस्थ जीन की कार्यात्मक प्रति रोगग्रस्त कोशिकाओं तक पहुँचाई जाती है, जिससे कोशिकाएँ आवश्यक प्रोटीन का निर्माण कर सकें।

कथन 2 — सही: आनुवंशिक सामग्री को सीधे कोशिकाओं तक पहुँचाना कठिन होता है, इसलिए इसके लिए विशेष वाहक (वेक्टर) का उपयोग किया जाता है। इंजीनियर्ड विषाणु, जैसे एडेनो-एसोसिएटेड वायरस, तथा लिपिड नैनोकण आनुवंशिक सामग्री को लक्ष्य कोशिकाओं तक पहुँचाने में सहायता कर सकते हैं।

कथन 3 — गलत: आनुवंशिक चिकित्सा का अर्थ पूरे डीएनए अनुक्रम को बदलना नहीं है। सामान्यतः उपचार में किसी विशिष्ट जीन या उसके कार्य को लक्षित किया जाता है। इसमें जीन प्रतिस्थापन, जीन संपादन तथा जीन-नियमन जैसी तकनीकों का प्रयोग हो सकता है।

2.यंत्र अधिगम (मशीन लर्निंग) में प्रयुक्त लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:             (upsc 2026)

1. LLMs निकटस्थ संभावित शब्दों के लिए प्रायिकताएँ निर्दिष्ट करते हैं और तत्पश्चात सर्वोच्च प्रायिकता वाले शब्द को चुनते हैं।

2. LLMs पूर्वानुमान संबंधी त्रुटियों को न्यूनतम करने के लिए गणितीय इष्टतमीकरण के माध्यम से डेटा का संसाधन करते हैं।

3. LLMs निष्पक्ष निर्गम (Unbiased Outputs) उत्पन्न करते हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — सही: LLMs किसी दिए गए संदर्भ के आधार पर अगले संभावित टोकन (शब्द या शब्द का भाग) की संभावनाएँ निर्धारित करते हैं। मॉडल इन संभावनाओं के आधार पर अगला टोकन उत्पन्न करता है। हालांकि, यह हमेशा केवल सर्वोच्च प्रायिकता वाले टोकन को ही नहीं चुनता; तापमान (Temperature), सैंपलिंग जैसी विधियों के कारण अन्य संभावित टोकन भी चुने जा सकते हैं।

कथन 2 — सही: LLMs के प्रशिक्षण में गणितीय इष्टतमीकरण (Mathematical Optimization) का महत्वपूर्ण उपयोग होता है। मॉडल के आंतरिक मापदंडों को इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि वास्तविक और अनुमानित टोकन के बीच की पूर्वानुमान संबंधी त्रुटि (Prediction Error) कम हो। इसके लिए सामान्यतः हानि फलन (Loss Function) तथा ग्रेडिएंट-आधारित अनुकूलन जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

कथन 3 — गलत: LLMs हमेशा निष्पक्ष निर्गम उत्पन्न नहीं करते। प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए गए डेटा में मौजूद सामाजिक, सांस्कृतिक या भाषाई पूर्वाग्रह (Bias) मॉडल के आउटपुट में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए LLMs के निर्गम की निष्पक्षता की कोई पूर्ण गारंटी नहीं होती।

3. स्टेल्थ (Stealth) प्रौद्योगिकी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (upsc 2026)

1. स्टेल्थ वस्तुओं में अति-लघु रडार अनुप्रस्थ-परिच्छेद (Radar Cross-Section) होता है और उन्हें रडार-अवशोषक पदार्थ से विलेपित किया जाता है।

2. विशिष्ट आवृत्तियों का प्रयोग करके स्टेल्थ वस्तुओं का पता लगाया जा सकता है।

3. स्टेल्थ वस्तुओं को मेटा-पदार्थों से विलेपित किया जाता है ताकि विद्युत्-चुंबकीय विकिरण के प्रकीर्णन में वृद्धि की जा सके।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — सही: स्टेल्थ तकनीक का मुख्य उद्देश्य किसी वस्तु की रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को कम करना है, जिससे रडार के लिए उसे पहचानना कठिन हो जाए। इसके लिए वस्तु की आकृति को इस प्रकार बनाया जाता है कि रडार तरंगें स्रोत की ओर कम परावर्तित हों। साथ ही, कुछ स्टेल्थ प्लेटफॉर्म में रडार-अवशोषक पदार्थ (Radar Absorbing Materials—RAM) का उपयोग किया जाता है, जो विद्युत्-चुंबकीय ऊर्जा के एक हिस्से को अवशोषित करते हैं।

कथन 2 — सही: स्टेल्थ तकनीक वस्तु को पूरी तरह अदृश्य नहीं बनाती। अलग-अलग रडार आवृत्तियों और प्रणालियों के प्रति स्टेल्थ क्षमता अलग हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में अलग आवृत्ति-बैंड या अन्य सेंसरों का उपयोग करके स्टेल्थ वस्तु का पता लगाने की संभावना बढ़ाई जा सकती है। इसलिए स्टेल्थ का अर्थ पूर्ण अदृश्यता नहीं, बल्कि पहचान एवं ट्रैकिंग की संभावना को कम करना है।

कथन 3 — गलत: स्टेल्थ तकनीक का उद्देश्य विद्युत्-चुंबकीय विकिरण के प्रकीर्णन को बढ़ाना नहीं, बल्कि नियंत्रित/कम करना है, ताकि रडार को लौटने वाला संकेत कमजोर हो। मेटा-पदार्थों का उपयोग विद्युत्-चुंबकीय तरंगों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए अनुसंधान में किया जाता है, लेकिन कथन में दिया गया “प्रकीर्णन में वृद्धि” स्टेल्थ के मूल उद्देश्य के विपरीत है।

4. आधुनिक विमानों में प्रयुक्त ब्लैक बॉक्स के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (upsc 2026)

1. उनमें लाल प्रकाश स्पंद उत्सर्जित करने वाला एक बीकन होता है ताकि उनकी अंतर्जलीय खोज को सुकर बनाया जा सके।

2. वे कॉकपिट वॉइस और फ्लाइट डेटा, दोनों को रिकॉर्ड करते हैं।

3. उनके मेमोरी यूनिटों के निर्माण में या तो जंगरोधी इस्पात (स्टेनलेस स्टील) या टाइटेनियम का उपयोग किया जाता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत: ब्लैक बॉक्स में पानी में दुर्घटना होने की स्थिति में खोज में सहायता के लिए अंडरवाटर लोकेटर बीकन (ULB) लगाया जाता है। यह लाल प्रकाश स्पंद नहीं, बल्कि सामान्यतः अल्ट्रासोनिक/ध्वनिक संकेत उत्पन्न करता है, जिसे पानी के भीतर विशेष उपकरणों द्वारा खोजा जाता है। इसलिए कथन में दिया गया “लाल प्रकाश स्पंद” गलत है।

कथन 2 — सही: आधुनिक विमानों में सामान्यतः दो प्रमुख रिकॉर्डिंग प्रणालियाँ होती हैं—

  • कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR): कॉकपिट में होने वाली आवाजों और संचार को रिकॉर्ड करता है।
  • फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR): विमान की उड़ान से संबंधित विभिन्न आँकड़ों, जैसे ऊँचाई, गति, दिशा आदि को रिकॉर्ड करता है।

इन दोनों से दुर्घटना के कारणों की जाँच में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।

कथन 3 — सही: ब्लैक बॉक्स की मेमोरी यूनिट को अत्यधिक तापमान, आघात और दबाव जैसी कठिन परिस्थितियों में डेटा सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत मजबूत बनाया जाता है। इसके सुरक्षात्मक निर्माण में टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील जैसी मजबूत एवं जंगरोधी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

 

5. ड्रोन झुंडों (Drone Swarms) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (upsc 2026)

1. वे कमांड केंद्र के साथ संचार के लिए टेराहर्ज बैंड आवृत्ति का प्रयोग करते हैं।

2. झुंड में सम्मिलित कोई ड्रोन, झुंड के अन्य ड्रोनों के साथ संचार कर सकता है।

3. ड्रोन झुंड के हमले को रोकने के लिए जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) सामान्यतः प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीक है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3

व्याख्या:

कथन 1 — गलत: ड्रोन झुंडों के बीच संचार के लिए विभिन्न रेडियो फ्रीक्वेंसी, वाई-फाई, सेलुलर नेटवर्क या अन्य वायरलेस संचार प्रणालियों का उपयोग किया जा सकता है। टेराहर्ज बैंड का उपयोग ड्रोन स्वार्म संचार की कोई सामान्य या अनिवार्य विशेषता नहीं है। अतः कथन 1 गलत है।

कथन 2 — सही: ड्रोन स्वार्म की महत्वपूर्ण विशेषता ड्रोन-टू-ड्रोन संचार है। प्रत्येक ड्रोन केवल केंद्रीय कमांड से निर्देश प्राप्त करने के बजाय अन्य ड्रोनों के साथ सूचना साझा कर सकता है। इससे स्वार्म विकेंद्रीकृत समन्वय (Decentralized Coordination) और सामूहिक निर्णय जैसी क्षमताएँ विकसित कर सकता है।

उदाहरण: एक ड्रोन द्वारा किसी बाधा या लक्ष्य की जानकारी प्राप्त करने पर वह सूचना स्वार्म के अन्य ड्रोनों तक पहुँचाई जा सकती है।

कथन 3 — सही: GPS Spoofing में वास्तविक GPS संकेतों के स्थान पर नकली संकेत भेजकर ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम को गलत स्थिति या दिशा का अनुमान लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसलिए ड्रोन के नेविगेशन को बाधित करने के लिए यह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) में प्रयुक्त एक प्रतिरोधी उपाय हो सकता है।

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