Polity 2025 PYQ – Daily MCQ
UPSC / PCS Practice Questions
1. लोक प्रशासन के सिद्धांत
श्री एक्स, एक वरिष्ठ अधिकारी, महामारी के दौरान एक महत्वपूर्ण टीकाकरण कार्यक्रम की देखरेख कर रहे थे। उन्होंने पाया कि टीके के वितरण के लिए जिम्मेदार एक निजी सेवा प्रदाता लाभ कमाने के लिए गुणवत्ता से समझौता कर रहा था। निहित स्वार्थों के कारण इस मुद्दे को संभालने के भारी दबाव के बावजूद, उन्होंने अपने करियर के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीखे गए लोक प्रशासन के सिद्धांतों के आधार पर आवाज उठाई। उन्होंने इस मामले की सूचना संबंधित सतर्कता प्राधिकरण को दी और नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए अनुबंध रद्द कर दिया।
लोक प्रशासन के निम्नलिखित सिद्धांतों में से कौन-सा सिद्धांत श्री एक्स के कार्यों द्वारा सबसे सशक्त रूप से प्रदर्शित हुआ?
(a) एस्प्रिट डी कॉर्प्स
(b) इक्विटी
(c) जवाबदेही
(d) प्रतिनिधिमंडल
▶ उत्तर Show करें
उत्तर: (c) जवाबदेही
व्याख्या:
श्री एक्स ने निजी सेवा प्रदाता द्वारा गुणवत्ता से समझौता किए जाने की जानकारी संबंधित सतर्कता प्राधिकरण को दी और नागरिकों के हित में अनुबंध रद्द किया। यह उनके निर्णयों के लिए जनता और संबंधित संस्थागत प्राधिकरण के प्रति उत्तरदायित्व को दर्शाता है।
एस्प्रिट डी कॉर्प्स — संगठन में टीम भावना और सामूहिक भावना से संबंधित है।
इक्विटी — समानता, निष्पक्षता और न्यायपूर्ण व्यवहार पर बल देता है।
जवाबदेही — अधिकारियों द्वारा अपने निर्णयों और कार्यों के लिए उत्तरदायी होना।
प्रतिनिधिमंडल — कार्य या अधिकार को अधीनस्थ स्तर पर सौंपने की प्रक्रिया है।
अतः श्री एक्स के कार्यों में जवाबदेही का सिद्धांत सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
एस्प्रिट डी कॉर्प्स — संगठन में टीम भावना और सामूहिक भावना से संबंधित है।
इक्विटी — समानता, निष्पक्षता और न्यायपूर्ण व्यवहार पर बल देता है।
जवाबदेही — अधिकारियों द्वारा अपने निर्णयों और कार्यों के लिए उत्तरदायी होना।
प्रतिनिधिमंडल — कार्य या अधिकार को अधीनस्थ स्तर पर सौंपने की प्रक्रिया है।
अतः श्री एक्स के कार्यों में जवाबदेही का सिद्धांत सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
2. संघर्ष समाधान एवं हितधारक सहभागिता
एक बहुजातीय जिले में, जहाँ आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऐतिहासिक शिकायतों के कारण अक्सर सामुदायिक तनाव उत्पन्न होता है, सरकार द्वारा एक आदिवासी बस्ती के पास अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा के लिए भूमि आवंटित करने के निर्णय से विवाद और बढ़ गया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप आदिवासी समुदाय ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, उनका दावा है कि यह भूमि पवित्र है और उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, शहरी निवासियों और स्थानीय उद्योगों ने इस परियोजना का समर्थन किया है, उनका कहना है कि ठोस अपशिष्ट की समस्या गंभीर है और उचित निपटान स्थल के अभाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ भी हैं। सड़क अवरोधों, सोशल मीडिया अभियानों और पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों के साथ यह संघर्ष और भी बढ़ गया है।
एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के रूप में, आपको मध्यस्थता के माध्यम से स्थिति को सुलझाने का कार्य सौंपा गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक स्थायी परिणाम प्राप्त हो जो पर्यावरणीय आवश्यकताओं, आदिवासी अधिकारों और शहरी सार्वजनिक स्वास्थ्य को संतुलित करे।
उपरोक्त के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
किसी भी सफल संघर्ष समाधान प्रक्रिया की शुरुआत तकनीकी विकल्पों पर चर्चा करने से पहले विरोध करने वाले आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को स्वीकार करने से होनी चाहिए।
सरकार को शहरी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए परियोजना को बिना देरी किए आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि ये चिंताएं एक छोटे समूह की भावनाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
जनजातीय नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और नगरपालिका प्रतिनिधियों सहित कई हितधारकों के लिए एक संवाद मंच का निर्माण करना, ताकि आपसी समझ विकसित हो सके और तनाव को कम करने में मदद मिल सके।
स्वतंत्र पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (ESIA) का संचालन करना और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की सुविधा के लिए दोनों पक्षों के साथ पारदर्शी रूप से निष्कर्षों को साझा करना।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से समाधान प्रक्रिया में योगदान देगा/देंगे?
(a) केवल 1, 3 और 4
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2, 3 और 4
▶ उत्तर Show करें
उत्तर: (a) केवल 1, 3 और 4
व्याख्या:
कथन 1 सही है: संघर्ष समाधान में सबसे पहले संबंधित समुदाय की सांस्कृतिक एवं भावनात्मक चिंताओं को स्वीकार करना आवश्यक है। इससे विश्वास निर्माण और सार्थक संवाद का आधार तैयार होता है।
कथन 2 गलत है: किसी एक समूह की चिंताओं को दूसरे समूह की चिंताओं से अधिक महत्वपूर्ण मानकर परियोजना को तुरंत आगे बढ़ाना निष्पक्ष मध्यस्थता के सिद्धांत के विरुद्ध होगा। सरकारी अधिकारी को सभी हितधारकों के हितों का संतुलन बनाना चाहिए।
कथन 3 सही है: बहु-हितधारक संवाद मंच से आदिवासी समुदाय, स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण विशेषज्ञ और शहरी प्रतिनिधि एक-दूसरे की चिंताओं को समझ सकते हैं तथा सहमति-आधारित समाधान खोज सकते हैं।
कथन 4 सही है: स्वतंत्र एवं पारदर्शी पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (ESIA) निर्णय को तथ्य एवं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित बनाने में सहायता करेगा।
अतः 1, 3 और 4 सही हैं।
कथन 2 गलत है: किसी एक समूह की चिंताओं को दूसरे समूह की चिंताओं से अधिक महत्वपूर्ण मानकर परियोजना को तुरंत आगे बढ़ाना निष्पक्ष मध्यस्थता के सिद्धांत के विरुद्ध होगा। सरकारी अधिकारी को सभी हितधारकों के हितों का संतुलन बनाना चाहिए।
कथन 3 सही है: बहु-हितधारक संवाद मंच से आदिवासी समुदाय, स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण विशेषज्ञ और शहरी प्रतिनिधि एक-दूसरे की चिंताओं को समझ सकते हैं तथा सहमति-आधारित समाधान खोज सकते हैं।
कथन 4 सही है: स्वतंत्र एवं पारदर्शी पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (ESIA) निर्णय को तथ्य एवं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित बनाने में सहायता करेगा।
अतः 1, 3 और 4 सही हैं।
3. पारदर्शिता, नैतिकता एवं प्रशासनिक विवेक
सुश्री एक्स एक प्रमुख शहर के शहरी विकास विभाग में कार्यरत एक मध्यम स्तर की सरकारी अधिकारी हैं। हाल ही में, वे एक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना—एक नए सामुदायिक पार्क—के लिए अनुबंध को मंजूरी देने में शामिल थीं। मंजूरी प्रक्रिया के दौरान, उन्हें एक गोपनीय जानकारी प्राप्त हुई जिसमें बताया गया कि चयनित ठेकेदार का कार्यशैली में गिरावट का इतिहास रहा है और अन्य शहरों में उस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, हालांकि कानूनी तौर पर कुछ भी साबित नहीं हुआ है। विभाग के प्रमुख, श्री वाई ने उन्हें सलाह दी कि वे इस जानकारी को परियोजना समिति या जनता के सामने प्रकट न करें क्योंकि इससे परियोजना में देरी हो सकती है और शहर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, सुश्री एक्स का मानना था कि ऐसी जानकारी को छिपाने से पारदर्शिता और जनविश्वास से समझौता होगा।
निम्नलिखित में से सुश्री एक्स को अब क्या करना चाहिए?
परियोजना समिति और जनता को तुरंत जानकारी दें।
परियोजना की अखंडता को बनाए रखने के लिए ठेकेदार को शॉर्टलिस्ट से हटाने की सिफारिश करें।
एक निगरानी समिति के समक्ष सीमित प्रकटीकरण का प्रस्ताव रखें, जबकि फिलहाल जनता से जानकारी को गोपनीय रखें।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
▶ उत्तर Show करें
उत्तर: (b) केवल 3
व्याख्या:
कथन 1 उचित नहीं है: ठेकेदार के विरुद्ध केवल आरोप हैं और कानूनी रूप से कुछ सिद्ध नहीं हुआ है। इसलिए बिना उचित सत्यापन के संवेदनशील गोपनीय जानकारी को तुरंत जनता के सामने रखना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगी।
कथन 2 भी उचित नहीं है: केवल आरोपों के आधार पर ठेकेदार को सीधे शॉर्टलिस्ट से हटाना निष्पक्षता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। पहले तथ्यों का सत्यापन आवश्यक है।
कथन 3 सही है: निगरानी समिति जैसे उचित संस्थागत तंत्र के समक्ष सीमित प्रकटीकरण करने से मामले की स्वतंत्र समीक्षा हो सकती है, जबकि अप्रमाणित जानकारी को सार्वजनिक करने से बचा जा सकता है।
इस प्रकार, केवल कथन 3 उचित है।
कथन 2 भी उचित नहीं है: केवल आरोपों के आधार पर ठेकेदार को सीधे शॉर्टलिस्ट से हटाना निष्पक्षता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। पहले तथ्यों का सत्यापन आवश्यक है।
कथन 3 सही है: निगरानी समिति जैसे उचित संस्थागत तंत्र के समक्ष सीमित प्रकटीकरण करने से मामले की स्वतंत्र समीक्षा हो सकती है, जबकि अप्रमाणित जानकारी को सार्वजनिक करने से बचा जा सकता है।
इस प्रकार, केवल कथन 3 उचित है।
4. अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'कानून' की परिभाषा
'X' भारत के संविधान के भाग III के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'कानून' शब्द के अर्थ पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 'X' ने समझाया कि भारत के संविधान में 'कानून' शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। इसमें अध्यादेश, आदेश और यहां तक कि नियम एवं विनियम भी शामिल हैं। 'Y' ने बताया कि अनुच्छेद 13 में 'कानून' शब्द में भारत के भू-भाग में कानून का बल रखने वाली प्रथा या रीति-रिवाज भी शामिल हैं, जिससे 'X' सहमत नहीं थे।
उपरोक्त के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही निष्कर्ष का चयन करें:
(a) प्रथा को शामिल न करने के दृष्टिकोण सहित, 'X' विधि की व्याख्या में सही है।
(b) 'Y' का यह मत कि 'कानून' में प्रथा शामिल है, सही नहीं है।
(c) 'X' और 'Y' दोनों के विचार सही हैं।
(d) केवल 'Y' का दृष्टिकोण सही है।
▶ उत्तर Show करें
उत्तर: (d) केवल 'Y' का दृष्टिकोण सही है।
व्याख्या:
संविधान के अनुच्छेद 13(3)(a) में 'कानून' की परिभाषा व्यापक रूप से दी गई है। इसमें अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम, अधिसूचना आदि के साथ-साथ ऐसी प्रथा या रूढ़ि भी शामिल है जिसका भारत के क्षेत्र में कानून का बल हो।
इसलिए:
X का यह कहना कि कानून में अध्यादेश, आदेश, नियम एवं विनियम शामिल हैं — सही है।
लेकिन X का प्रथा/रीति-रिवाज को कानून की परिभाषा से बाहर मानना गलत है।
Y का यह कहना सही है कि ऐसी प्रथा या रूढ़ि, जिसका कानून का बल हो, अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'कानून' में शामिल है।
अतः दिए गए विकल्पों में केवल Y का दृष्टिकोण सही है।
इसलिए:
X का यह कहना कि कानून में अध्यादेश, आदेश, नियम एवं विनियम शामिल हैं — सही है।
लेकिन X का प्रथा/रीति-रिवाज को कानून की परिभाषा से बाहर मानना गलत है।
Y का यह कहना सही है कि ऐसी प्रथा या रूढ़ि, जिसका कानून का बल हो, अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'कानून' में शामिल है।
अतः दिए गए विकल्पों में केवल Y का दृष्टिकोण सही है।
5. भारतीय संविधान के संबंध में कथन
भारत के संविधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
भारत के संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है जो यह निर्दिष्ट करता हो कि भारत के संविधान को आधिकारिक तौर पर 'भारत का संविधान' कहा जाएगा।
भारत के संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है जो यह निर्दिष्ट करता हो कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत सरकार अधिनियम, 1935 निरस्त कर दिए गए हैं।
भारत के संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है जिसमें 26 जनवरी, 1950 को भारत के संविधान के लागू होने की तिथि के रूप में उल्लेख किया गया हो।
उपरोक्त कथनों के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष सही है?
(a) तीनों कथन सही हैं।
(b) कोई सही कथन नहीं है।
(c) कथन 3 को शामिल करने वाले दो सही कथन हैं।
(d) केवल एक ही सही कथन है।
▶ उत्तर Show करें
उत्तर: (b) कोई सही कथन नहीं है।
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: संविधान का अनुच्छेद 393 स्पष्ट रूप से संविधान का नाम “Constitution of India” बताता है। अतः यह कहना गलत है कि संविधान में इसके आधिकारिक नाम का उल्लेख नहीं है।
कथन 2 गलत है: संविधान का अनुच्छेद 395 स्पष्ट रूप से Indian Independence Act, 1947 और Government of India Act, 1935 को निरस्त करता है। इसलिए कथन 2 भी गलत है।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 394 में यह प्रावधान है कि संविधान के शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 को लागू होंगे। इसलिए संविधान में 26 जनवरी, 1950 के लागू होने का उल्लेख है।
अतः तीनों कथन गलत हैं और सही विकल्प है:
उत्तर: (b) कोई सही कथन नहीं है।
कथन 2 गलत है: संविधान का अनुच्छेद 395 स्पष्ट रूप से Indian Independence Act, 1947 और Government of India Act, 1935 को निरस्त करता है। इसलिए कथन 2 भी गलत है।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 394 में यह प्रावधान है कि संविधान के शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 को लागू होंगे। इसलिए संविधान में 26 जनवरी, 1950 के लागू होने का उल्लेख है।
अतः तीनों कथन गलत हैं और सही विकल्प है:
उत्तर: (b) कोई सही कथन नहीं है।
