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कारण (R): जब ऊर्जा एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर पर स्थानांतरित होती है, तो '10% नियम' के अनुसार हर स्तर पर ऊर्जा की भारी हानि होती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कथन (A) सही है। पारिस्थितिकी में संख्या और जैव-भार के पिरामिड कुछ विशेष परिस्थितियों में उल्टे हो सकते हैं (जैसे एक बड़े पेड़ पर आश्रित कई छोटे कीट या समुद्र में अल्पजीवी फाइटोप्लांकटन और बड़ी मछलियाँ), लेकिन ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा ही रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि उत्पादक (पेड़-पौधे) सौर ऊर्जा का उपयोग करके सबसे अधिक ऊर्जा संचित करते हैं, और जैसे-जैसे हम ऊपरी पोषण स्तरों (शाकाहारी, मांसाहारी) की ओर बढ़ते हैं, उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है।
कारण (R) सही है। लिंडमैन के '10 प्रतिशत नियम' के अनुसार, प्रत्येक पोषण स्तर पर उपलब्ध कुल ऊर्जा का केवल 10% ही अगले स्तर को प्राप्त होता है। शेष 90% ऊर्जा श्वसन, पाचन और ऊष्मा के रूप में वातावरण में नष्ट हो जाती है।
अंतर्संबंध : कारण (R) स्पष्ट रूप से वह वैज्ञानिक आधार बताता है कि क्यों ऊर्जा का पिरामिड कभी उल्टा नहीं हो सकता। चूंकि ऊष्मागतिकी के नियमों के अनुसार हर अगले स्तर पर ऊर्जा अनिवार्य रूप से कम ही होगी (कारण R), इसलिए पिरामिड का आधार हमेशा चौड़ा और शीर्ष हमेशा संकीर्ण (कथन A) रहेगा। अतः कारण (R), कथन (A) की एकदम सही व्याख्या करता है।
A. वियना कन्वेंशन (1985) — 1. प्रवासी पक्षी और वन्यजीव
B. बॉन कन्वेंशन (1979) — 2. ओजोन परत का संरक्षण
C. CITES (1973) — 3. खतरनाक रसायनों के व्यापार में पूर्वसूचित सहमति (PIC)
D. रोटर्डम कन्वेंशन (1998) — 4. लुप्तप्राय प्रजातियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. वियना कन्वेंशन (1985): यह ओजोन परत के संरक्षण के लिए दुनिया की पहली बड़ी संधि थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संधि खुद हानिकारक पदार्थों को प्रतिबंधित नहीं करती थी, बल्कि इसने भविष्य में आने वाले 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' (1987) के लिए एक कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार किया था। यह "ओजोन क्षरण" की समस्या को वैश्विक स्तर पर स्वीकार करने वाला पहला कदम था।
B. बॉन कन्वेंशन (1979): इसे औपचारिक रूप से 'प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन' (CMS) के रूप में जाना जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में एकमात्र ऐसी संधि है जो उन जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों के संरक्षण पर केंद्रित है जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं। भारत इसका सदस्य है और यहाँ होने वाला 'COP-13' (गांधीनगर, 2020) इसी संधि से संबंधित था।
C. CITES (1973): इसका पूरा नाम 'वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन' है। इसे वाशिंगटन कन्वेंशन भी कहते हैं। यह संधि यह सुनिश्चित करती है कि जंगली जानवरों और पौधों के नमूनों का व्यापार उनके अस्तित्व के लिए खतरा न बने। इसमें प्रजातियों को तीन अलग-अलग श्रेणियों (Appendix I, II और III) में बांटकर उन पर प्रतिबंध या नियंत्रण लगाया जाता है।
D. रोटर्डम कन्वेंशन (1998): यह संधि खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण 'पूर्वसूचित सहमति' (Prior Informed Consent - PIC) प्रक्रिया है। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई देश किसी दूसरे देश को कोई खतरनाक रसायन या कीटनाशक निर्यात कर रहा है, तो प्राप्तकर्ता देश को पहले उसकी जानकारी और सहमति देनी होगी, ताकि वे अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा कर सकें।
2. इस सम्मेलन का मुख्य परिणाम 'द फ्यूचर वी वांट' नामक एक राजनीतिक घोषणापत्र था।
3. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को औपचारिक रूप से इसी सम्मेलन में 2030 तक के लिए अपना लिया गया था।
4. यह सम्मेलन 'पृथ्वी शिखर सम्मेलन' की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही कथन का चयन कीजिए:
कथन 1 सही है। 'रियो+20' का आयोजन 1992 के ऐतिहासिक रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन के 20 साल बाद, वर्ष 2012 में किया गया था। इसका आधिकारिक नाम 'संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन' (UNCSD) है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक पर्यावरण नीतियों और सतत विकास की प्रतिबद्धताओं को पुनर्जीवित करना था।
कथन 2 सही है। रियो+20 सम्मेलन के अंत में सदस्य देशों ने 'द फ्यूचर वी वांट' नामक एक गैर-बाध्यकारी दस्तावेज को अपनाया। यह दस्तावेज 'हरित अर्थव्यवस्था' और गरीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित था और इसने भविष्य की वैश्विक नीतियों का आधार तैयार किया।
कथन 3 गलत है। यहाँ ध्यान देना आवश्यक है कि रियो+20 (2012) में SDGs को बनाने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से अपनाया नहीं गया था। सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को औपचारिक रूप से सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में 'एजेंडा 2030' के तहत अपनाया गया था।
कथन 4 गलत है। 'रियो+20' नाम ही इसकी व्याख्या करता है—यह 1992 के सम्मेलन की 20वीं वर्षगांठ (1992+20=2012) के अवसर पर हुआ था। 10वीं वर्षगांठ वाला सम्मेलन (रियो+10) वर्ष 2002 में जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुआ था, जिसे 'विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन' (WSSD) कहा जाता है।
A. SDG 5 — 1. सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
B. SDG 7 — 2. लैंगिक समानता
C. SDG 8 — 3. संधारणीय शहर और समुदाय
D. SDG 11 — 4. सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. SDG 5 : इस लक्ष्य का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव और हिंसा को समाप्त करना है। इसमें नेतृत्व के हर स्तर पर महिलाओं की पूर्ण और प्रभावी भागीदारी, समान अवसर और प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकारों को सुनिश्चित करना शामिल है। यह केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक स्थायी अर्थव्यवस्था के लिए आधारशिला है।
B. SDG 7: यह लक्ष्य सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना शामिल है। भारत का 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' इसी लक्ष्य को प्राप्त करने की एक वैश्विक पहल है।
C. SDG 8: इसका उद्देश्य निरंतर, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोजगार तथा सभी के लिए सम्मानजनक कार्य को बढ़ावा देना है। यह बल देता है कि विकास ऐसा होना चाहिए जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करे और 'जबरन श्रम' या 'बाल श्रम' का उन्मूलन करे।
D. SDG 11: यह लक्ष्य शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ बनाने पर जोर देता है। इसमें झुग्गी-झोपड़ियों के सुधार, सुरक्षित और सस्ती परिवहन प्रणालियों (जैसे मेट्रो), और सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत के संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल हैं। वायु गुणवत्ता और शहरी कचरा प्रबंधन भी इसी लक्ष्य का हिस्सा हैं।
2. फर्न और छत्रक (मशरूम) प्राथमिक अनुक्रमण के शुरुआती चरण में ही विकसित हो जाते हैं क्योंकि उन्हें मृदा की आवश्यकता नहीं होती।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
कथन 1 सही है। प्राथमिक अनुक्रमण उस स्थान पर होता है जहाँ पहले कभी कोई जीवन नहीं था (जैसे नग्न चट्टान)। लाइकेन और मॉस 'अग्रणी प्रजाति' कहलाते हैं क्योंकि उन्हें विकास के लिए केवल एक स्थिर सतह, समय और स्वच्छ वायु की आवश्यकता होती है। लाइकेन (शैवाल और कवक का सहजीवी रूप) चट्टानों पर उगकर उन्हें अपक्षयित करते हैं, जिससे मिट्टी बनने की प्रक्रिया शुरू होती है।
कथन 2 गलत है। क्योंकि फर्न एक संवहनी पादप है जिसे विकसित होने के लिए नमीयुक्त और उच्च जैविक पदार्थों वाली मृदा की आवश्यकता होती है। इसी तरह, छत्रक (मशरूम) भी मृतोपजीवी कवक है जिसे उगने के लिए मृदा के उप-संस्तर या जैविक भोजन स्रोत की जरूरत होती है। चूंकि प्राथमिक अनुक्रमण के शुरुआती चरण में मृदा का अभाव होता है, इसलिए ये पौधे वहां तुरंत नहीं उग सकते; ये मिट्टी बनने के बाद के चरणों में दिखाई देते हैं।
2. NGT को आवेदनों या अपीलों के दाखिल होने के 6 महीने के भीतर उनका अंतिम निपटान करने का प्रयास करना अनिवार्य है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 से संबंधित सभी मामलों पर निर्णय देने का अधिकार क्षेत्र NGT के पास सुरक्षित है।
4. NGT के पास अपनी स्वयं की सर्किट प्रक्रिया का पालन करने और स्वयं को अधिक सुलभ बनाने की शक्ति है।
नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही कथन का चयन कीजिए:
कथन 1 सही है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के तहत की गई थी। चूंकि इसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा हुई है, इसलिए यह एक सांविधिक निकाय है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के मामलों का प्रभावी और त्वरित निपटान करना है।
कथन 2 सही है। NGT की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्यक्षमता और गति है। अधिनियम में यह स्पष्ट प्रावधान है कि अधिकरण को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके पास आने वाले किसी भी आवेदन या अपील का निपटान वह उसे दाखिल करने के 6 महीने के भीतर कर दे।
कथन 3 गलत है। NGT सात प्रमुख पर्यावरणीय कानूनों (जैसे जल, वायु, पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता अधिनियम आदि) के तहत नागरिक मामलों की सुनवाई करता है। लेकिन, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 को जानबूझकर इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।
कथन 4 सही है। NGT की मुख्य पीठ नई दिल्ली में है और चार क्षेत्रीय पीठें (भोपाल, पुणे, कोलकाता, चेन्नई) हैं। इसके बावजूद, यह अधिक सुलभ होने के लिए 'सर्किट प्रक्रिया' का भी पालन करता है, जिसका अर्थ है कि अधिकरण के सदस्य अन्य शहरों में जाकर भी सुनवाई कर सकते हैं ताकि न्याय आम जनता के करीब पहुँच सके।
संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन (FAO) कुल 21 सतत विकास लक्ष्य संकेतकों के लिए कस्टोडियन एजेंसी है। यह मुख्य रूप से SDG 2 (शून्य भूख), SDG 5 (लैंगिक समानता), SDG 6 (स्वच्छ जल), SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग), SDG 14 (जलीय जीवन) और SDG 15 (भूमि पर जीवन) से संबंधित डेटा की निगरानी करता है। एक कस्टोडियन के रूप में, FAO अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डेटा एकत्र करता है, पद्धतियाँ विकसित करता है और देशों को उनकी सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने में मदद करता है ताकि वैश्विक प्रगति का सटीक आकलन किया जा सके।
अन्य विकल्पों की व्याख्या
विश्व बैंक : यह मुख्य रूप से गरीबी (SDG 1) और असमानता (SDG 10) से जुड़े कुछ आर्थिक संकेतकों की निगरानी करता है, लेकिन इसके पास FAO जितने अधिक संकेतकों का प्रभार नहीं है।
UN सांख्यिकी प्रभाग: यह समग्र SDG डेटाबेस का समन्वय करता है, लेकिन विशिष्ट विषयगत (जैसे कृषि या स्वास्थ्य) संकेतकों के लिए विशेषज्ञ कस्टोडियन एजेंसियां अलग होती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन : विश्व स्वास्थ्य संगठन विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों (SDG 3) जैसे मातृ स्वास्थ्य, बाल मृत्युदर और संक्रामक रोगों के डेटा का प्रबंधन और निगरानी करता है।
A. ऑस्ट्रो-एशियाटिक — I. दक्षिण भारत
B. तिब्बती-बर्मन — II. उत्तर और मध्य भारत
C. द्रविड़ — III. मध्य भारत एवं मेघालय
D. इन्डो-यूरोपियन — IV. उत्तर-पूर्वी हिमालयी क्षेत्र
A. ऑस्ट्रो-एशियाटिक : यह भाषा परिवार भारत के सबसे प्राचीन भाषाई समूहों में से एक माना जाता है। इसका विस्तार मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जनजातीय क्षेत्रों में है, जहाँ संथाली, मुंडा और हो जैसी भाषाएँ बोली जाती हैं। विशेष बात यह है कि उत्तर-पूर्व में मेघालय की 'खासी' भाषा भी इसी परिवार का हिस्सा है, जो इसे भौगोलिक रूप से दो हिस्सों (मध्य भारत और मेघालय) में विभाजित करती है।
B. तिब्बती-बर्मन : जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस परिवार की भाषाएँ चीन (तिब्बत) और म्यांमार (बर्मा) की सीमाओं से लगे भारतीय राज्यों में बोली जाती हैं। इसमें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। यहाँ की प्रमुख भाषाओं में बोडो, मणिपुरी और गारो शामिल हैं। इनका उच्चारण और व्याकरण चीनी-तिब्बती मूल से प्रभावित होता है, जो इन्हें शेष भारतीय भाषाओं से अलग बनाता है।
C. द्रविड़ : यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा भाषा परिवार है, जिसकी जड़ें पूरी तरह से दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय पठार में हैं। इसमें चार प्रमुख शास्त्रीय भाषाएँ शामिल हैं: तमिल (तमिलनाडु), तेलुगु (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना), कन्नड़ (कर्नाटक) और मलयालम (केरल)। द्रविड़ भाषाएँ अपनी प्राचीनता और समृद्ध साहित्य के लिए जानी जाती हैं। इनका प्रसार विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण में स्थित राज्यों तक सीमित है, जो इसे एक स्पष्ट भौगोलिक पहचान देता है।
D. इन्डो-यूरोपियन : यह भारत का सबसे विशाल भाषा परिवार है, जिसे 'आर्यभाषा परिवार' भी कहा जाता है। भारत की लगभग 73% जनसंख्या इसी परिवार की भाषाएँ बोलती है। इसका विस्तार हिमालय से लेकर विंध्य पर्वत तक और पश्चिम में गुजरात से लेकर पूर्व में असम (असमिया) तक है। इसमें हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी, कश्मीरी और राजस्थानी जैसी प्रमुख भाषाएँ आती हैं। यह मध्य भारत के राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र) में भी प्रमुखता से बोली जाती है।
जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) वह घुलित ऑक्सीजन की मात्रा है, जो जल में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को वायवीय सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित करने हेतु आवश्यक होती है। एक स्वच्छ जल निकाय में सूक्ष्मजीवों, जैविक पदार्थों और घुलित ऑक्सीजन का एक प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। हालाँकि, जब जल में बाहरी स्रोतों जैसे घरेलू सीवेज या औद्योगिक अपशिष्ट के माध्यम से अतिरिक्त जैविक पदार्थ मिलते हैं, तो सूक्ष्मजीव उनकी संख्या बढ़ाकर उनका विघटन प्रारंभ कर देते हैं। इस प्रक्रिया में ये सूक्ष्मजीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का अत्यधिक उपभोग करने लगते हैं, जिससे घुलित ऑक्सीजन का स्तर तेजी से घटने लगता है। स्पष्टतः, जितना अधिक जल प्रदूषित होगा, कार्बनिक पदार्थों की मात्रा उतनी ही अधिक होगी, और उन पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों को उतनी ही अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी, जिससे BOD का मान बढ़ जाएगा। अतः, उच्च BOD का स्तर सीधे तौर पर जल के अत्यधिक प्रदूषित होने और उसमें मौजूद जलीय जीवन के लिए ऑक्सीजन की भारी कमी का स्पष्ट संकेत देता है।
गहिरमाथा (ओडिशा) विश्व का सबसे बड़ा 'ओलिव रिडले' समुद्री कछुओं का प्रजनन स्थल है। यहाँ हर साल लाखों कछुए अंडे देने आते हैं, जिसे 'अरिबाडा' कहा जाता है। यह भीतरकणिका नेशनल पार्क का हिस्सा है और ब्राह्मणी-वैतरणी नदियों के मुहाने पर स्थित मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के कारण जैव-विविधता से अत्यंत समृद्ध है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या
(b) चिलिका वन्यजीव अभ्यारण्य: यह एशिया की सबसे बड़ी खारेपानी की लैगून झील है। यह मुख्य रूप से संकटग्रस्त 'इरावदी डॉल्फिन' के संरक्षण और सर्दियों में आने वाले लाखों प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। इसे भारत की पहली रामसर साइट होने का गौरव प्राप्त है।
(c) कोरिंगा वन्यजीव अभ्यारण्य: यह आंध्र प्रदेश में गोदावरी के डेल्टा पर स्थित है और भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है। यह 'सफेद पीठ वाले गिद्धों' और समुद्री ऊदबिलाव के लिए जाना जाता है, जो समुद्री और स्थलीय पारिस्थितिकी का अनूठा संगम है।
(d) पुलिकट झील पक्षी अभ्यारण्य: यह आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारेपानी की झील है। यह मुख्य रूप से 'फ्लेमिंगो' (राजहंस) पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ श्रीहरिकोटा द्वीप इसे बंगाल की खाड़ी से अलग करता है।
