Daily Practice MCQ – 13 October 2026
Daily Practice MCQ
13 October 2026
‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ (PM GatiShakti) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा नियोजन योजना की औपचारिक शुरुआत 13 अक्टूबर 2021 को की गई थी।
2. इसके विकास मॉडल के तहत कुल सात बुनियादी ढांचा इंजनों (सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स) को शामिल किया गया है।
3. इसका प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के डेटा को एक साझा GIS प्लेटफॉर्म पर लाकर एकीकृत योजना बनाना तथा लॉजिस्टिक्स लागत व समय की बचत करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है [योजना की शुरुआत]: भारत में बुनियादी ढांचे के परिदृश्य को बदलने के लिए 13 अक्टूबर 2021 को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की औपचारिक शुरुआत की गई थी। यह योजना देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागू की गई थी।
कथन 2 सही है [बुनियादी ढांचागत कोर स्तंभ]: इस मास्टर प्लान के प्रभावी संचालन और आर्थिक गति देने के लिए सात प्रमुख बुनियादी ढांचा इंजनों (Seven Infrastructure Engines) को इसका आधार बनाया गया है। इन सात क्षेत्रों में सड़कें, रेलवे, बंदरगाह (Ports), जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना शामिल हैं, जो आपस में जुड़कर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करते हैं।
कथन 3 सही है [प्रशासनिक उद्देश्य और तकनीकी एकीकरण]: पारंपरिक रूप से अलग-अलग (Silos में) काम करने वाले विभागों के कारण परियोजनाओं में होने वाली देरी और अतिरिक्त लागत को रोकना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह मंच भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर आधारित है, जहाँ विभिन्न मंत्रालयों, भारतमाला, सागरमाला और उड़ान जैसी योजनाओं के डेटा लेयर्स को एकीकृत किया गया है ताकि किसी भी परियोजना के निर्माण से पहले डेटा-आधारित सटीक निर्णय लिए जा सकें और समय की बचत हो सके।
अक्टूबर 2026 में जारी आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सितंबर 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो वर्षों के उच्चतम स्तर 5.5% पर पहुँच गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ऊपरी संतोषजनक सीमा को पार कर चुकी है।
2. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला के तहत, उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों की अवधि में सितंबर 2026 में दर्ज की गई 7.4% की खाद्य और पेय पदार्थ मुद्रास्फीति अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
3. ‘व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं व सेवाओं’ के खंड में दर्ज की गई 13.75% की मुद्रास्फीति उपलब्ध डेटा अवधि के दौरान इसका सबसे न्यूनतम स्तर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 गलत है: सितंबर 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर दो साल के उच्चतम स्तर 5.5% पर जरूर पहुँची है, लेकिन यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित 6% की ऊपरी संतोषजनक सीमा (Upper Comfort Limit) के भीतर ही है, उसे पार नहीं किया है।
कथन 2 सही है: खाद्य और पेय पदार्थ श्रेणी में मुद्रास्फीति पिछले महीने के 5.7% से बढ़कर 7.4% हो गई है। चूंकि CPI की नई श्रृंखला में जनवरी 2026 से पहले के श्रेणी-वार ऐतिहासिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उपलब्ध समय अवधि के अनुसार यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
कथन 3 सही है: ‘व्यक्तिगत देखभाल और विविध सेवाओं’ के खंड में मुद्रास्फीति 13.75% रही। यद्यपि यह संख्या दिखने में बहुत अधिक है (जिसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों का बढ़ना है), लेकिन उपलब्ध आंकड़ों की पूरी अवधि में यह इस श्रेणी का सबसे न्यूनतम स्तर दर्ज किया गया है।
सितंबर 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची-I (विशिष्ट आर्थिक/उपभोक्ता खंड) को सूची-II (उस खंड में दर्ज की गई मुद्रास्फीति दर) के साथ सुमेलित कीजिए:
| सूची-I (विशिष्ट उपभोक्ता खंड) | सूची-II (मुद्रास्फीति दर – सितंबर 2026) |
|---|---|
| (A) खाद्य और पेय पदार्थ श्रेणी | (I) 5.0% |
| (B) रेस्टोरेंट और आवास सेवाएँ | (II) 5.5% |
| (C) समग्र खुदरा मुद्रास्फीति स्तर | (III) 7.4% |
| (D) परिवहन खंड | (IV) 9.4% |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही कूट का चयन कीजिए:
उत्तर और व्याख्या देखें
खाद्य और पेय पदार्थ 7.4%: यह पिछले महीने के 5.7% से बढ़कर इस स्तर पर पहुँचा है।
रेस्टोरेंट और आवास सेवाएँ 9.4%: खाद्य और परिवहन की कीमतों में संयुक्त बढ़ोतरी के कारण इस क्षेत्र में पिछले 7 महीनों से लगातार तेजी जारी है।
समग्र खुदरा मुद्रास्फीति/CPI 5.5%: यह अगस्त के 4.8% से बढ़कर दो साल के उच्चतम स्तर पर आई है।
परिवहन खंड 5.0%: परिवहन लागत में पिछले लगातार पांच महीनों से क्रमिक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
‘द केरलम सीनियर सिटीजंस (केयर एंड प्रोटेक्शन) बिल, 2026’ के तहत स्थापित किए जाने वाले ‘जिला वरिष्ठ नागरिक संरक्षण मंच’ (District Senior Citizen Protection Forum) के विनियामक कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य इसके विधिक अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं है?
उत्तर और व्याख्या देखें
विधेयक के अनुसार, प्रत्येक जिले में एक ‘जिला वरिष्ठ नागरिक संरक्षण मंच’ का गठन होगा। इसे सहायता देने के लिए एक ‘जिला संरक्षण इकाई’ भी होगी। यह मंच केयर सेंटरों की निगरानी, स्थानीय संगठनों को एकजुट करने और बुजुर्गों की शिकायतों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Action) लेने के लिए विधिक रूप से अधिकृत है।
विधेयक में बुजुर्गों के संरक्षण, देखभाल और कल्याण के लिए एक ‘राज्य आरक्षित कोष’ (State Reserve Fund) बनाने का प्रस्ताव जरूर है, लेकिन इसका वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन राज्य स्तरीय सर्वोच्च विनियामक तंत्र के पास होगा, न कि किसी जिला-स्तरीय फोरम के पास।
केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ (ULLAS) कार्यक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अक्टूबर 2026 में आधिकारिक घोषणा के अनुसार, लक्षद्वीप ‘उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत शत-प्रतिशत (100%) साक्षरता का दर्जा प्राप्त करने वाला देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बना है।
2. ‘उल्लास’ (ULLAS) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मूल उद्देश्य वयस्क गैर-साक्षरों को केवल पारंपरिक साक्षरता प्रदान करने के बजाय वित्तीय और डिजिटल साक्षरता जैसी महत्वपूर्ण जीवन विधाओं से जोड़ना है।
3. इस कार्यक्रम के तहत किसी शिक्षार्थी को पूर्ण साक्षर घोषित करने का मुख्य विनियामक मानक ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा’ को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करना है, जो शिक्षार्थियों के बुनियादी पठन, लेखन और गणितीय कौशल का परीक्षण करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: 11 अक्टूबर 2026 को लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल द्वारा की गई आधिकारिक घोषणा के अनुसार, लक्षद्वीप ने केंद्र सरकार के कड़े मानकों के तहत 100% साक्षर केंद्र शासित प्रदेश होने का गौरव प्राप्त किया है। प्रारंभिक विनियामक सर्वेक्षण में पहचाने गए सभी 1,113 वयस्क गैर-साक्षरों को गहन शिक्षण अभियानों के माध्यम से साक्षर बनाया गया, जिससे लक्षद्वीप ‘उल्लास’ मॉडल के तहत पूर्ण साक्षरता का विधिक लक्ष्य पूरा करने वाला अग्रणी केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरा है।
कथन 2 सही है [‘उल्लास’ कार्यक्रम क्या है?]: ‘उल्लास’ (ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society) या नव भारत साक्षरता कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्कों के लिए शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। यह कार्यक्रम केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि इसके तहत निम्नलिखित व्यापक लक्ष्य शामिल हैं:
- बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता: बुनियादी स्तर पर पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता।
- महत्वपूर्ण जीवन कौशल: वित्तीय साक्षरता (Banking), डिजिटल साक्षरता (UPI/Mobile Usage), कानूनी साक्षरता और नागरिक अधिकार।
- सतत शिक्षा: व्यावसायिक कौशल (Vocational Skills) का विकास।
कथन 3 सही है [विनियामक मानक क्या हैं?]: इस कार्यक्रम के तहत साक्षरता को प्रमाणित करने का आधिकारिक और वैधानिक पैमाना ‘फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट’ (FLNAT) है। इस परीक्षा के मुख्य मानक शिक्षार्थी में तीन बुनियादी योग्यताओं को जांचते हैं:
- पठन (Reading): सार्वजनिक विज्ञापनों, सड़क के नक्शों या बुनियादी निर्देशों को स्वतंत्र रूप से पढ़ पाना।
- लेखन (Writing): अपना नाम, पता और बुनियादी विधिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर पाना।
- संख्यात्मकता (Numeracy): बुनियादी जोड़, घटाव, मुद्रा की गणना और बैंक/बाजार के वित्तीय लेन-देन को समझने का गणितीय कौशल।
लक्षद्वीप के शिक्षा विभाग ने परीक्षा केंद्रों पर न आ पाने वाले वृद्धों के लिए स्वयंसेवकों के माध्यम से घर-आधारित डोरस्टेप मूल्यांकन कराकर इन विनियामक मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया।
दवाओं की कीमतों के विनियामक ढांचे पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा की गई हालिया टिप्पणियों और केंद्र सरकार के मौजूदा वैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उच्चतम न्यायालय की विशेष पीठ ने कैंसर-रोधी दवाओं लागू 30 प्रतिशत की ‘व्यापार मार्जिन सीमा’ को सभी आवश्यक दवाओं पर विस्तारित करने का निर्देश देते हुए केंद्र सरकार को 27 अक्टूबर 2026 तक एक व्यापक मूल्य-नियंत्रण तंत्र तैयार करने को कहा है।
2. औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO), 2013 के तहत, अनुसूचित फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत की गणना करने के लिए योग्य ब्रांडों के खुदरा विक्रेताओं के औसत मूल्य में 16 प्रतिशत का मार्जिन जोड़ा जाता है।
3. जो दवाएं अनुसूचित सूची से बाहर हैं, उनके लिए राष्ट्रीय भेषज मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) यह सुनिश्चित करता है कि निर्माता पिछले 12 महीनों की तुलना में अपने अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 15 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि न करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा कैंसर-रोधी दवाओं पर लगाए गए 30% व्यापार मार्जिन कैप को अपर्याप्त माना। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा कि जब कैंसर की दवाओं पर यह सीमा लगाई जा सकती है, तो सभी दवाओं पर इसे क्यों नहीं लागू किया जा सकता? इसके लिए कोर्ट ने सरकार को 27 अक्टूबर (2026) तक अंतिम रूपरेखा तैयार करने का विधिक समय दिया है।
कथन 2 सही है: केंद्र सरकार द्वारा दायर 551 पन्नों के हलफनामे के अनुसार, आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) के तहत अनुसूचित फॉर्मूलेशनों की अधिकतम कीमत का निर्धारण औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO), 2013 के तहत किया जाता है। इसके विनिर्देशों के अनुसार, कुल बाजार कारोबार में कम से कम एक प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले ब्रांडों के औसत खुदरा मूल्य को आधार मानकर उसमें 16 प्रतिशत का वैधानिक मार्जिन (16% margin) जोड़कर सीलिंग प्राइस तय की जाती है। वर्तमान में ऐसी 935 फॉर्मूलेशनों की कीमत तय की जा चुकी है।
कथन 3 गलत है: गैर-अनुसूचित (Non-scheduled) दवाओं के लिए निर्माताओं को बाजार प्रतिस्पर्धा के आधार पर शुरुआती कीमत तय करने की छूट होती है, लेकिन राष्ट्रीय भेषज मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) उनकी कीमतों की सख्त निगरानी करता है। कानूनन, कोई भी निर्माता इन गैर-अनुसूचित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में पिछले 12 महीनों की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकता, न कि 15 प्रतिशत की।
जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली और उसकी आगामी रिपोर्टों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आईपीसीसी आगामी सातवें मूल्यांकन चक्र के तहत तीन मुख्य रिपोर्ट प्रकाशित करेगा, जिनमें जलवायु परिवर्तन के कारण, अनुकूलन (Adaptation) की रणनीतियाँ और तापमान वृद्धि को रोकने (Mitigation) के विधिक व तकनीकी विकल्प शामिल हैं।
2. वैज्ञानिकों और समूह के अध्यक्षों द्वारा प्रस्तावित मूल कार्य योजना के अनुसार, इन तीनों महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिपोर्टों को सितंबर 2028 तक पूरी तरह अनुमोदित और स्वीकृत कराने का लक्ष्य रखा गया है।
3. भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर यह विनियामक दबाव है कि वे अपनी औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को पूरी तरह समाप्त करके केवल आईपीसीसी के वैज्ञानिक सुझावों के आधार पर ही अपनी ऊर्जा नीतियां निर्धारित करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 का विश्लेषण: आईपीसीसी (IPCC) के विनियामक ढांचे के तहत तीन अलग-अलग वैज्ञानिक वर्किंग ग्रुप मिलकर तीन प्रमुख रिपोर्ट तैयार करते हैं। पहली रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन की सीमा और उसके भौतिक विज्ञान संबंधी कारणों पर आधारित होती है; दूसरी रिपोर्ट बदलती जलवायु के प्रति देशों की सुभेद्यता (Vulnerabilities) और उनके अनुकूलन (Adaptation) के तरीकों को रेखांकित करती है; तथा तीसरी रिपोर्ट वैश्विक तापन (Global Warming) को और अधिक गंभीर होने से रोकने या न्यूनीकरण (Mitigation) के व्यावहारिक व विधिक विकल्पों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।
कथन 2 का विश्लेषण: इन रिपोर्टों को तैयार कर रहे वैज्ञानिक समूहों के अध्यक्षों (Chairs) ने एक व्यापक कार्य योजना (Work Plan) का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, इन तीनों महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिपोर्टों को सितंबर 2028 तक सदस्य देशों द्वारा औपचारिक रूप से अनुमोदित और स्वीकृत (Approved) कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि इन्हें नवंबर 2028 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में नीतिगत निर्णयों के मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
कथन 3 का विश्लेषण: आईपीसीसी (IPCC) केवल एक वैज्ञानिक और नीति-तटस्थ (Policy-neutral) निकाय है। इसके पास सदस्य राष्ट्रों की संप्रभु औद्योगिक या ऊर्जा नीतियों पर कोई प्रतिबंध लगाने या उन्हें बाध्य करने का कोई विधिक अधिकार नहीं है। वास्तव में, उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस बात की आलोचना कर रही हैं कि कड़े जलवायु कानून उनकी औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुँचाते हैं और विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले सस्ते ईंधनों पर अनुचित प्रतिबंध लगाते हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) की ‘लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट’ (Living Planet Report) के हालिया निष्कर्षों और वन्यजीव आबादी के रुझानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1970 और 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर निगरानी की गई वन्यजीव आबादी में औसतन 73% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें सबसे गंभीर प्रभाव ताजे पानी (Freshwater) के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ा है।
2. भौगोलिक आधार पर वन्यजीवों की आबादी में सबसे तीव्र और सर्वाधिक गिरावट एशिया और प्रशांत क्षेत्र में देखी गई है, जबकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में यह गिरावट सबसे कम रही है।
3. यह 73% की गिरावट का आंकड़ा वैश्विक स्तर पर सभी व्यक्तिगत जानवरों या प्रजातियों के कुल विलोपन (Extinction) को नहीं दर्शाता, क्योंकि निगरानी की गई लगभग आधी आबादी वास्तव में स्थिर है या बढ़ रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 का विश्लेषण: ‘जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन’ (ZSL) के सहयोग से तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, 1970 और 2022 के बीच वैश्विक वन्यजीवों की आबादी में औसतन 73% की गिरावट आई है। पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर विश्लेषण करने पर पता चलता है कि ताजे पानी (Freshwater) का पारिस्थितिकी तंत्र सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, जहाँ औसतन 85% की भारी गिरावट देखी गई है। इसके बाद स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 69% और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में 59% की कमी आई है।
कथन 2 का विश्लेषण: वन्यजीव आबादी में सबसे तीव्र और गंभीर गिरावट लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र (Latin America and the Caribbean) में 95% दर्ज की गई है, इसके बाद अफ्रीका में 80% की गिरावट आई है। इसके विपरीत, एशिया और प्रशांत क्षेत्र (Asia and the Pacific) में यह गिरावट 49% रही है, जो इन तीनों क्षेत्रों में सबसे कम है।
कथन 3 का विश्लेषण: 73% का यह आंकड़ा सभी जीवों के पूर्ण रूप से विलुप्त होने या प्रजातियों के खात्मे को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह केवल आबादी के औसत रुझानों (Average of population trends) को मापता है। वास्तविक विनियामक स्थिति यह है कि निगरानी की गई लगभग आधी (Around half) वन्यजीव आबादी वर्तमान में पूरी तरह स्थिर है या उसमें वृद्धि हो रही है। किसी एक क्षेत्र में आबादी की अत्यधिक गिरावट वैश्विक औसत के आंकड़े को प्रभावित कर देती है। रिपोर्ट में भारत में बाघों (अनुमानित आबादी 3,682), एशियाई शेरों (891) और एक सींग वाले गैंडों (3,300 से अधिक) की आबादी में हो रहे सुधार को संरक्षण प्रयासों की सफलता के रूप में रेखांकित किया गया है।
अक्टूबर 2026 में घोषित नोबेल मेमोरियल पुरस्कार (Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट ई. हॉल (Robert E. Hall) और माइकल वुडफोर्ड (Michael Woodford) को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है।
2. इन अर्थशास्त्रियों को यह सम्मान समष्टि आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stabilization) के सूक्ष्म आर्थिक आधारों (Microeconomic Foundations) पर किए गए उनके अग्रणी शोध के लिए दिया गया है।
3. उनके शोध ने पारंपरिक कीन्ज़ियन (Keynesian) मॉडलों में सुधार किया और यह दर्शाया कि केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें तथा भविष्य की आय को लेकर उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास को कैसे आकार देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 और 2 का विश्लेषण: अक्टूबर 2026 में अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिए जाने वाले स्वेरिजेस रिक्सबैंक आर्थिक विज्ञान पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा की गई। इसके तहत स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉबर्ट ई. हॉल और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल वुडफोर्ड को संयुक्त रूप से इस सम्मान के लिए चुना गया। उन्हें यह पुरस्कार समष्टि आर्थिक स्थिरता के सूक्ष्म आर्थिक आधारों पर उनके दशकों लंबे मौलिक शोध के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार के तहत 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन डॉलर) की राशि दोनों विजेताओं में साझा की जाएगी।
कथन 3 का विश्लेषण: इन दोनों अर्थशास्त्रियों के विधिक-आर्थिक कार्यों ने पारंपरिक ‘टॉप-डाउन’ कीन्ज़ियन मॉडलों को पूरी तरह से आधुनिक बना दिया:
- रबर्ट ई. हॉल ने 1970 के दशक में यह स्थापित किया कि घरेलू उपभोग (Household Consumption) केवल वर्तमान डिस्पोजेबल आय पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि उपभोक्ता भविष्य की आय को लेकर क्या अपेक्षाएं रखते हैं।
- माइकल वुडफोर्ड ने अपनी 2003 की ऐतिहासिक पुस्तक इंटरेस्ट एंड प्राइसेस (Interest and Prices) में व्यापक मॉडल विकसित किए। उन्होंने दर्शाया कि केंद्रीय बैंकों की नीतिगत ब्याज दरें और उपभोक्ताओं की भविष्य की धारणाएं मिलकर मुद्रास्फीति (Inflation) और आर्थिक विकास को कैसे नियंत्रित करती हैं।
इनके संयुक्त सिद्धांतों ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (जैसे आरबीआई या फेडरल रिजर्व) और सरकारों को ऊर्जा संकट और मुद्रास्फीति जैसे गंभीर आर्थिक झटकों को संभालने के लिए अत्यधिक प्रभावी और व्यावहारिक उपकरण प्रदान किए हैं।
अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा छह राज्यों के राज्यपालों (Governors) में किए गए प्रशासनिक फेरबदल और इससे जुड़े संवैधानिक व विधिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, ओ.पी. माथुर को केरल का, डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का, और पूर्व राज्यसभा सदस्य दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
2. भारतीय संविधान के भाग 6 के तहत अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
3. संविधान के अनुसार राज्यपाल का कार्यकाल पूरी तरह से निश्चित और गैर-हस्तांतरणीय होता है, तथा मूल संविधान के विधिक नियमों के तहत एक ही व्यक्ति को एक समय में दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
कथन 1 सही है: 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, छह राज्यों के राज्यपालों की विनियामक नियुक्तियों में बड़े बदलाव किए गए हैं:
- राजेंद्र अर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया है।
- सिक्किम के राज्यपाल ओ.पी. माथुर को स्थानांतरित करके केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- भाजपा संसदीय बोर्ड की पूर्व सदस्य डॉ. सुधा यादव को थावरचंद गहलोत के स्थान पर कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- पूर्व सांसद डॉ. बृज मोहन राम को ओडिशा का, ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का और पूर्व भाजपा महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
कथन 2 सही है [नियुक्ति का संवैधानिक प्रावधान – अनुच्छेद 155]: भारतीय राजव्यवस्था के तहत राज्य की कार्यपालिका (State Executive) के प्रमुख के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति की एक विशिष्ट विधिक प्रक्रिया है। संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत यह स्पष्ट विनिर्देश है कि राज्यपाल का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं होता, बल्कि उसे सीधे भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और राजमुद्रा युक्त अधिपत्र (Warrant) के माध्यम से विधिक रूप से नियुक्त किया जाता है।
कथन 3 गलत है:
कार्यकाल की अनिश्चितता: संविधान के अनुच्छेद 156(1) के तहत राज्यपाल का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता; वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) ही पद पर बना रहता है। राष्ट्रपति उसे 5 वर्ष की सामान्य अवधि से पहले भी कभी भी पद से हटा या स्थानांतरित कर सकते हैं।
दोहरा प्रभार संभव है: मूल संविधान में भले ही प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल की व्यवस्था थी, लेकिन 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा इसमें संशोधन किया गया था। इस विनियामक संशोधन के तहत एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल (Dual Charge) नियुक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस फेरबदल से ठीक पहले तक राजेंद्र अर्लेकर तमिलनाडु और केरल दोनों राज्यों का संयुक्त प्रभार संभाल रहे थे।
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