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Indian Economy – 10 MCQ Practice Questions | Result Mitra

By Result Mitra •
Indian Economy – 10 MCQ Practice Questions | Result Mitra
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Indian Economy – 10 MCQ Practice Questions

भारतीय अर्थव्यवस्था | UPSC / PCS अभ्यास

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प्रश्न 1
आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार, ‘कु जनेट्स वक्र’ का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित में से किसके बीच के संबंध को स्पष्ट करना है?

उत्तर: (d)

व्याख्या:

साइमन कु जनेट्स ने 1950 के दशक में तर्क दिया था कि आर्थिक विकास के साथ असमानता का संबंध उल्टे ‘U’ जैसा होता है। विकास के प्रथम चरण में, कृ षि से उद्योगों की ओर श्रम का विस्थापन होता है, जहाँ मजदूरी में भारी अंतर होने के कारण आय असमानता तीव्र होती है। द्वितीय चरण में, जब अधिकांश जनसंख्या शहरी-औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा बन जाती है और लोकतांत्रिक सरकारें कल्याणकारी योजनाएं लागू करती हैं, तो यह असमानता घटने लगती है।

अन्य विकल्पों की व्याख्या:

विकल्प (a) : इसे ‘लैफ़र वक्र’ कहते हैं। इसका विस्तृत अर्थ यह है कि कर की एक इष्टतम (Optimal) दर होती है। यदि सरकार उस बिंदु से अधिक कर लगाती है, तो अर्थव्यवस्था में निवेश और उत्पादन का उत्साह कम हो जाता है, जिससे अंततः सरकार का खजाना बढ़ने के बजाय खाली होने लगता है।

विकल्प (c) : यह ‘माल्थस का जाल’ कहलाता है। थॉमस माल्थस ने चेतावनी दी थी कि जनसंख्या में होने वाली घातांकीय वृद्धि खाद्य उत्पादन की क्षमता से अधिक हो जाएगी, जिससे प्राकृ तिक आपदाओं या अकाल के माध्यम से जनसंख्या पुनः संतुलित होगी। आधुनिक तकनीक ने फिलहाल इस सिद्धांत को गलत सिद्ध किया है।

विकल्प (d) : इसे ‘मुद्रा का परिमाण सिद्धांत’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में जितनी अधिक मुद्रा प्रवाहित होगी, मुद्रा की क्रय शक्ति उतनी ही कम होगी और महंगाई (कीमतें) उतनी ही बढ़ेगी। यह ‘MV = PT’ समीकरण के माध्यम से अर्थशास्त्र में पढ़ाया जाता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण जानकारी:

फिलिप्स वक्र : यह मुद्रास्फीति (महंगाई) और बेरोजगारी के बीच के विपरीत संबंध को स्पष्ट करता है। इसके अनुसार, जब अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी कम होती है, तो लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से मांग बढ़ती है और मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है।

लॉरेंज वक्र : यह किसी देश की कु ल जनसंख्या और उनके पास मौजूद संचयी आय के वितरण को प्रदर्शित करता है। यह वक्र ‘पूर्ण समानता रेखा’ से जितना दूर होता है, समाज में उतनी ही अधिक आर्थिक असमानता मानी जाती है।

एंजेल का नियम : यह उपभोग के व्यवहार को दर्शाता है कि जैसे-जैसे परिवार की आय बढ़ती है, भोजन पर होने वाले खर्च का प्रतिशत हिस्सा कम होता जाता है। इसका अर्थ है कि अमीर लोग अपनी आय का बहुत छोटा हिस्सा खाने पर और बड़ा हिस्सा विलासिता पर खर्च करते हैं।

माल्थस का सिद्धांत : थॉमस माल्थस ने चेतावनी दी थी कि जनसंख्या ज्यामितीय दर (2, 4, 8…) से बढ़ती है जबकि खाद्य संसाधन के वल अंकगणितीय दर (1, 2, 3…) से। यदि जनसंख्या पर नियंत्रण न हो, तो अकाल और भुखमरी का संकट पैदा हो सकता है।

फिशर का सिद्धांत : यह मुद्रा की मात्रा और कीमतों के बीच सीधा संबंध बताता है। इसके अनुसार, यदि बाजार में मुद्रा की आपूर्ति दोगुनी कर दी जाए, तो वस्तुओं की कीमतें भी दोगुनी हो जाएंगी और मुद्रा की वैल्यू आधी रह जाएगी।

गिनी गुणांक : यह असमानता को मापने का एक सांख्यिकीय तरीका है जो 0 से 1 के बीच होता है। यहाँ 0 का मतलब समाज में ‘पूर्ण समानता’ है और 1 का मतलब है कि सारी संपत्ति के वल एक ही व्यक्ति के पास है।

प्रश्न 2
सरकारी प्रतिभूतियों और बॉन्ड बाजार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. ‘मुद्रास्फीति अनुक्रमित बॉन्ड’ (Inflation-Indexed Bonds) निवेशकों को कू पन भुगतान और मूलधन दोनों पर मुद्रास्फीति से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

2. ‘शून्य-कू पन बॉन्ड’ अपने अंकित मूल्य पर भारी छू ट पर जारी किए जाते हैं और इनमें कोई नियमित ब्याज भुगतान नहीं होता है।

3. ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड’ पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर-मुक्त होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

उत्तर: (b)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। इन्फ्लेशन-इंडेक्स्ड बॉन्ड (IIB) का ढांचा इस तरह होता है कि बाजार में महंगाई बढ़ने पर बॉन्ड का मूलधन समायोजित हो जाता है। इससे निवेशकों को मिलने वाला वास्तविक रिटर्न सुरक्षित रहता है। यह बॉन्ड विशेष रूप से खुदरा निवेशकों को महंगाई की मार से बचाने के लिए प्रभावी उपकरण हैं।

कथन 2 सही है। शून्य-कू पन बॉन्ड (जैसे ट्रेजरी बिल) में अवधि के दौरान कोई ब्याज नहीं मिलता। इन्हें इनके असली मूल्य (जैसे ₹100) से कम दाम (जैसे ₹95) पर बेचा जाता है। परिपक्वता पर निवेशक को पूरा मूल्य मिलता है, और यही अंतर उसका लाभ कहलाता है।

कथन 3 गलत है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर मिलने वाला वार्षिक ब्याज कर-मुक्त नहीं होता है। हालांकि, यदि निवेशक बॉन्ड को परिपक्वता (8 साल) तक रखता है, तो सोने की कीमत बढ़ने से होने वाले मुनाफे (Capital Gains Tax) पर पूरी छू ट मिलती है। यह तकनीकी अंतर अक्सर परीक्षा में भ्रम पैदा करता है।

प्रश्न 3
‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा जारी किया जाता है?

उत्तर: (c)

व्याख्या:

दिए गए विकल्पों में ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ (GII) का प्रकाशन प्रतिवर्ष विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा किया जाता है। 2025 की रिपोर्ट में विश्व की 130 से अधिक अर्थव्यवस्थाओं के नवाचार प्रदर्शन का मापन लगभग 80 संके तकों (जैसे निवेश पैटर्न, तकनीकी प्रगति और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव) के आधार पर किया गया है। भारत इस वर्ष 38वें स्थान पर रहा है, जो 2015 की 81वीं रैंक से एक बड़ी छलांग है। यह सूचकांक संयुक्त राष्ट्र द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीतियों के मूल्यांकन हेतु एक आधिकारिक संदर्भ के रूप में मान्यता प्राप्त है।

अन्य विकल्पों की व्याख्या

(a) विश्व बैंक : विश्व बैंक मुख्य रूप से वैश्विक गरीबी उन्मूलन और विकासशील देशों को वित्तीय सहायता देने पर कें द्रित है। यह ‘वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट’ और ‘लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक’ (LPI) जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी करता है।

(b) यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स : यह संस्था प्रतिवर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (IP) सूचकांक’ जारी करती है। जहाँ GII नवाचार के “परिणामों” और “क्षमता” को मापता है, वहीं यू.एस. चैंबर का सूचकांक के वल इस बात पर कें द्रित होता है कि किसी देश का ‘पेटेंट और कॉपीराइट’ कानून कितना मजबूत है।

(d) विश्व आर्थिक मंच : विश्व आर्थिक मंच (WEF) मुख्य रूप से ‘वैश्विक जोखिम रिपोर्ट’ और ‘लैंगिक अंतराल रिपोर्ट’ (Gender Gap Report) जारी करने के लिए जाना जाता है।

प्रश्न 4
कीमत निर्धारण और सरकारी हस्तक्षेप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. ‘कीमत सीमा’ (Price Ceiling) का उपयोग आमतौर पर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक वस्तुओं पर किया जाता है।

2. ‘न्यूनतम कीमत’ हमेशा संतुलन कीमत से नीचे निर्धारित की जाती है ताकि बाजार में तरलता बनी रहे।

3. बफर स्टॉक का प्रबंधन सरकार द्वारा ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) के माध्यम से बाजार में कीमतों को स्थिर करने के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। ‘कीमत सीमा’ (Price Ceiling) का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं (जैसे जीवन रक्षक दवाएं, एलपीजी) को आम जनता के लिए किफायती बनाना है। यह सीमा बाजार द्वारा निर्धारित संतुलन कीमत से नीचे तय की जाती है। हालांकि, इसके कारण बाजार में अक्सर वस्तुओं की कमी (Shortage) और कालाबाजारी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

कथन 2 गलत है। ‘न्यूनतम कीमत’ (Price Floor) उत्पादकों (जैसे किसानों) के हितों की रक्षा के लिए होती है। यदि इसे संतुलन कीमत से नीचे रखा जाएगा, तो बाजार की ताकतें स्वतः ही कीमत को संतुलन पर ले आएंगी और सरकार का हस्तक्षेप निष्प्रभावी हो जाएगा। इसलिए, इसे संतुलन मूल्य से ऊपर अनिवार्य किया जाता है।

कथन 3 सही है। सरकार MSP के माध्यम से खाद्यान्न की खरीद करती है और ‘बफर स्टॉक’ बनाती है। जब बाजार में आपूर्ति कम होती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस स्टॉक से अनाज जारी कर कीमतों को नियंत्रित करती है। यह उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हितों में संतुलन बनाए रखने का एक उपकरण है।

प्रश्न 5
एक वाणिज्यिक बैंक के ‘तुलन पत्र’ (Balance Sheet) के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

1. नकद आरक्षित अनुपात (CRR) — परिसंपत्ति

2. जनता की जमा राशि — देनदारी

3. बैंक द्वारा दिए गए ऋण — परिसंपत्ति

4. बैंक की अचल संपत्ति (जैसे भवन) — देनदारी

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

उत्तर: (c)

व्याख्या:

बैंक के लिए ‘परिसंपत्ति’ (Asset) वह है जिससे उसे आय प्राप्त होती है या जो उसका अपना निवेश है, जैसे ग्राहकों को दिए गए ऋण और आरबीआई के पास रखा नकद भंडार। इसके विपरीत, ‘देनदारी’ (Liability) वह है जो बैंक को दूसरों को वापस लौटानी है, जैसे ग्राहकों द्वारा जमा किया गया पैसा।

1. नकद आरक्षित अनुपात (CRR) : हालांकि CRR का पैसा आरबीआई के पास रखा जाता है, लेकिन यह पैसा बैंक का अपना होता है। चूंकि यह बैंक का अपना फं ड है जिसे वह भविष्य में वापस प्राप्त कर सकता है, इसलिए इसे बैंक की ‘परिसंपत्ति’ माना जाता है। यह बैंक की तरलता को दर्शाता है।

2. जनता की जमा राशि : जब आप बैंक में पैसा जमा करते हैं, तो वह बैंक के लिए एक कर्ज की तरह होता है। बैंक को यह पैसा ग्राहक की मांग पर या एक समय बाद (FD/RD) ब्याज सहित वापस करना पड़ता है। इसलिए, सभी प्रकार की जमाएं बैंक की ‘देनदारी’ होती हैं।

3. बैंक द्वारा दिए गए ऋण : ग्राहकों को दिए गए लोन (जैसे होम लोन, कार लोन) बैंक की सबसे महत्वपूर्ण ‘परिसंपत्ति’ होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन ऋणों पर ग्राहक बैंक को ब्याज देता है, जिससे बैंक की कमाई होती है। जब तक लोन वापस नहीं आता, वह बैंक की संपत्ति बना रहता है।

4. बैंक की अचल संपत्ति (भवन आदि) : बैंक का कार्यालय, फर्नीचर, कं प्यूटर और बैंक के नाम पर मौजूद जमीन उसकी अपनी संपत्ति होती है। यह किसी को वापस नहीं करनी होती, बल्कि यह बैंक के मूल्य को बढ़ाती है। इसलिए, भवन बैंक की ‘परिसंपत्ति’ है, न कि ‘देनदारी’।

प्रश्न 6
तरलता समायोजन सुविधा (LAF) और मौद्रिक साधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. ‘मार्जिनल स्टैंडिंग फै सिलिटी’ (MSF) दर हमेशा रेपो दर से अधिक होती है, जबकि रिवर्स रेपो दर हमेशा रेपो दर से कम होती है।

2. जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रिवर्स रेपो दर में वृद्धि करता है, तो इससे बाजार में मुद्रा आपूर्ति बढ़ जाती है क्योंकि बैंकों को अधिक ब्याज मिलता है।

3. ‘स्टैंडिंग डिपॉजिट फै सिलिटी’ (SDF) एक ऐसा साधन है जिसके माध्यम से RBI बिना किसी कोलेटरल के बैंकों से अतिरिक्त तरलता सोख सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

उत्तर: (b)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। RBI की मौद्रिक नीति संरचना में रेपो दर मुख्य ‘पॉलिसी रेट’ होती है। MSF वह दर है जिस पर बैंक आपातकालीन स्थिति में RBI से कर्ज लेते हैं, इसलिए यह रेपो से महँगी (अधिक) होती है। इसके विपरीत, रिवर्स रेपो दर वह ब्याज है जो RBI बैंकों को उनके अतिरिक्त धन पर देता है, जो हमेशा रेपो से कम रखी जाती है ताकि बैंक अर्थव्यवस्था में ऋण देने को प्राथमिकता दें।

कथन 2 गलत है। रिवर्स रेपो दर में वृद्धि का उद्देश्य बाजार से अतिरिक्त नकदी को वापस खींचना होता है। जब यह दर बढ़ती है, तो व्यावसायिक बैंकों के लिए जोखिम-मुक्त लाभ बढ़ जाता है, जिससे वे जनता को ऋण देने के बजाय अपना पैसा सुरक्षित रूप से RBI के पास रखना शुरू कर देते हैं। परिणामतः, बाजार में मुद्रा की उपलब्धता घट जाती है और महंगाई पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है।

कथन 3 सही है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फै सिलिटी (SDF) को 2022 में पेश किया गया था। रिवर्स रेपो के विपरीत, इसमें RBI को बैंकों से पैसा लेते समय बदले में सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs) कोलेटरल के रूप में देने की आवश्यकता नहीं होती। यह RBI को बाजार से असीमित मात्रा में अतिरिक्त तरलता वापस लेने की शक्ति प्रदान करता है, खासकर तब जब उसके पास गिरवी रखने के लिए पर्याप्त प्रतिभूतियां न हों।

प्रश्न 7
भारत की राजकोषीय स्थिति और ‘वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद’ (FSDC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

I. ‘वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद’ (FSDC) एक वैधानिक निकाय है, जिसकी अध्यक्षता भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर द्वारा की जाती है।

II. भारत का अधिकांश सार्वजनिक ऋण बाह्य स्रोतों से लिया गया है, जिसमें अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

III. भारतीय रिज़र्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) 2025 के अनुसार, भारत का सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 80% से अधिक हो गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन I गलत है। वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की स्थापना 2010 में एक कार्यकारी आदेश द्वारा की गई थी, अतः यह वैधानिक निकाय नहीं है। इसकी अध्यक्षता कें द्रीय वित्त मंत्री द्वारा की जाती है, जबकि RBI गवर्नर इसके के वल एक सदस्य होते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विनियामक समन्वय को मजबूत करना और पूरी वित्तीय प्रणाली की स्थिरता की निगरानी करना है।

कथन II गलत है। भारत के सार्वजनिक ऋण की प्रकृ ति मुख्य रूप से ‘आंतरिक’ है। कें द्रीय बजट 2025-26 के अनुसार, कु ल ऋण का 96.59% घरेलू स्रोतों से लिया गया है। बाह्य ऋण के वल 3.41% है। हालांकि बाह्य ऋण के भीतर अमेरिकी डॉलर (54.2%) का प्रभुत्व सबसे अधिक है, लेकिन समग्र रूप से भारत विदेशी ऋण पर बहुत कम निर्भर है।

कथन III सही है। RBI की द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) 2025 यह चेतावनी देती है कि भारत का सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 80% को पार कर गया है। यह उच्च स्तर राजकोषीय गुंजाइश को कम करता है और भविष्य में ब्याज भुगतान के बोझ को बढ़ा सकता है। यह रिपोर्ट वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और विकास परिषद की उप-समिति द्वारा तैयार की जाती है।

प्रश्न 8
भारत में नगरीय क्षेत्रों के भीतर बी.पी.एल. (BPL) परिवारों की सटीक पहचान करने के लिए मानकीकृ त पद्धति विकसित करने हेतु निम्नलिखित में से किस समिति का गठन किया गया था?

उत्तर: (d)

व्याख्या:

दिए गए विकल्पों में हाशिम समिति का गठन 2010 में योजना आयोग द्वारा विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों की पहचान के लिए किया गया था। इस समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें गरीबी की पहचान हेतु ‘तीन-चरणीय पद्धति’ (स्वचालित बहिष्करण, स्वचालित समावेशन और वंचित स्कोरिंग) का सुझाव दिया गया था। जहाँ अन्य समितियाँ जैसे तेंदुलकर या लकड़वाला मुख्य रूप से गरीबी रेखा के निर्धारण और संख्या के ‘आंकड़ों’ से जुड़ी थीं, वहीं हाशिम समिति का प्राथमिक उद्देश्य लाभार्थियों की व्यक्तिगत ‘पहचान’ करना था।

अन्य विकल्पों की व्याख्या

(a) तेंदुलकर समिति : सुरेश तेंदुलकर की अध्यक्षता वाली इस समिति (2009) ने गरीबी मापने के लिए पुरानी ‘कै लोरी’ पद्धति को छोड़कर ‘शिक्षा और स्वास्थ्य’ पर होने वाले खर्च को शामिल किया। इसने अखिल भारतीय स्तर पर नई गरीबी रेखा तय की। हालांकि, इसका मुख्य कार्य देश में गरीबों की कु ल संख्या का सांख्यिकीय ‘आकलन’ करना था, न कि व्यक्तिगत परिवारों की लाभार्थी के रूप में ‘पहचान’ करना।

(b) अलघ समिति : वाई.के . अलघ समिति (1979) भारत में गरीबी आकलन के इतिहास में मील का पत्थर थी क्योंकि इसने पहली बार पोषण (कै लोरी) के आधार पर गरीबी रेखा का निर्धारण किया था। इसने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2400 कै लोरी और शहरी क्षेत्रों के लिए 2100 कै लोरी का मानक तय किया। यह समिति पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी की परिभाषा तय करने तक सीमित थी।

(c) लकड़वाला समिति : डी.टी. लकड़वाला समिति (1993) ने गरीबी के आकलन में क्षेत्रीय विविधता को महत्व दिया। इसने सिफारिश की कि प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग गरीबी रेखा होनी चाहिए, जो वहां के मूल्य स्तरों (CPI-IW और CPI-AL) पर आधारित हो। इस समिति का योगदान भी डेटा और गणना (Calculation) तक ही सीमित था, शहरी लाभार्थियों की वास्तविक पहचान प्रक्रिया से नहीं।

प्रश्न 9
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा’ की अवधारणा को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

उत्तर: (c)

व्याख्या:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा वह मुद्रा है जिसे उसके जारीकर्ता देश के क्षेत्राधिकार के बाहर वैश्विक स्तर पर विनिमय के माध्यम, लेखांकन की इकाई और मूल्य के संचय के रूप में व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त हो। इसका अर्थ है कि यह मुद्रा न के वल दो देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन को निपटाने में सक्षम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऋणों के नामांकन और कें द्रीय बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में रखे जाने के लिए भी भरोसेमंद मानी जाती है। डॉलर और यूरो इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए मुद्रा की पूंजी खाता परिवर्तनीयता और जारीकर्ता देश की स्थिर मैक्रो-इकोनॉमिक नीतियों का होना अनिवार्य है, ताकि विदेशी निवेशक और सरकारें इसे सुरक्षित संपत्ति के रूप में स्वीकार कर सकें ।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण जानकारी:

हॉट करेंसी : यह वह विदेशी मुद्रा है जिसमें बहुत कम समय में एक बाजार से दूसरे बाजार में तेजी से पलायन करने की प्रवृत्ति होती है। ऐसा आमतौर पर उच्च ब्याज दरों या अल्पकालिक लाभ की तलाश में होता है।

हार्ड करेंसी : यह वह मुद्रा है जिस पर वैश्विक बाजार में अत्यधिक विश्वास होता है और जिसकी विनिमय दर स्थिर रहती है। ये मुद्राएं आसानी से परिवर्तनीय होती हैं और इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है, जैसे अमेरिकी डॉलर।

सॉफ्ट करेंसी : यह उस देश की मुद्रा है जिसकी विनिमय दर में बार-बार उतार-चढ़ाव होता है और जिसे आसानी से अन्य मुद्राओं में बदला नहीं जा सकता। इसकी मांग कम और आपूर्ति अधिक होने के कारण इसे प्राप्त करना आसान होता है।

फिएट मनी : यह वह मुद्रा है जिसे सरकार द्वारा आधिकारिक घोषित किया गया है, लेकिन इसका कोई आंतरिक मूल्य (जैसे सोना) नहीं होता। इसका मूल्य के वल सरकारी आदेश और लोगों के विश्वास पर निर्भर करता है।

लीगल टेंडर : यह वह मुद्रा है जिसे कानूनन ऋण भुगतान के लिए स्वीकार करना अनिवार्य है। भारत में सिक्के और नोट लीगल टेंडर हैं, जिन्हें कोई भी लेन-देन के लिए मना नहीं कर सकता।

डिजिटल मुद्रा : यह मुद्रा का वह रूप है जो के वल इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध होता है। इसमें ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी’ (CBDC) शामिल है, जो भौतिक मुद्रा का डिजिटल विकल्प प्रदान करती है।

प्रश्न 10
भारत सरकार के ‘राजस्व बजट’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किन मदों को इसमें शामिल किया जाता है?

1. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से प्राप्त लाभ और लाभांश।

2. विदेशी संस्थाओं को दिए गए ऋणों पर प्राप्त होने वाला ब्याज।

3. मेट्रो रेल कोच की खरीद के लिए विदेशी कं पनियों को किया गया भुगतान।

4. रक्षा सेवाओं पर किया गया सामान्य परिचालन व्यय।

नीचे दिए गए कू ट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर: (c)

व्याख्या:

राजस्व बजट में सरकार की वे प्राप्तियां और व्यय शामिल होते हैं जो न तो परिसंपत्तियों (Assets) का निर्माण करते हैं और न ही देनदारियों (Liabilities) को कम करते हैं।

कथन 1 सही है। PSUs से प्राप्त लाभ और लाभांश ‘गैर-कर राजस्व प्राप्ति’ (Non-tax Revenue) के अंतर्गत आते हैं। यह सरकार की निवेशित पूंजी पर मिलने वाली नियमित कमाई है। चूँकि इस आय से सरकार की अपनी संपत्ति (जैसे कं पनी के शेयर) कम नहीं होती और न ही कोई नया कर्ज बढ़ता है, इसलिए इसे अनिवार्य रूप से राजस्व बजट का हिस्सा माना जाता है।

कथन 2 सही है। विदेशी ऋणों पर प्राप्त ‘ब्याज’ एक राजस्व प्राप्ति है। यहाँ ध्यान दें कि के वल ब्याज ही राजस्व है, जबकि मूल धन की वापसी पूंजीगत प्राप्ति होती है। ब्याज मिलने से सरकार की मूल परिसंपत्ति (दिया गया ऋण) वैसी ही बनी रहती है, इसलिए इसे सरकार की चालू आय के रूप में राजस्व बजट में दर्ज किया जाता है।

कथन 3 गलत है। मेट्रो रेल कोच या किसी भी मशीनरी की खरीद ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Expenditure) है। राजस्व व्यय के वल उस खर्च को कहते हैं जो परिसंपत्ति के रखरखाव (जैसे बिजली बिल या कर्मचारियों का वेतन) पर हो। चूँकि नया कोच खरीदने से देश की भौतिक परिसंपत्ति में वृद्धि होती है, इसलिए इसे राजस्व बजट में शामिल नहीं किया जा सकता।

कथन 4 सही है। रक्षा सेवाओं का ‘सामान्य परिचालन व्यय’ जैसे वेतन, राशन, वर्दी और पुराने उपकरणों की मरम्मत राजस्व व्यय है। यह खर्च सेना को वर्तमान स्थिति में बनाए रखने के लिए जरूरी है। जब तक सरकार नए हथियार या विमान नहीं खरीदती, तब तक रक्षा पर होने वाला सारा प्रशासनिक खर्च राजस्व बजट का ही हिस्सा बना रहता है।

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