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UPSC PYQ Economics (2026) | Result Mitra

By Result Mitra •
UPSC PYQ Economics (2026) | Result Mitra
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UPSC PYQ ECONOMICS (2026)

भारतीय अर्थव्यवस्था — महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न

5 प्रश्न | उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
प्रत्येक प्रश्न को हल करें। उत्तर और व्याख्या देखने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
प्रश्न 1
एक ई-कॉमर्स राजस्व मॉडल, जिसमें विक्रेता का मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण होता है, लेकिन वह उत्पादों का भंडारण नहीं करता है। इसके बजाय, वह ग्राहक के ऑर्डर और शिपिंग संबंधी विवरण तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ता को भेजता है, जो सीधे ग्राहक तक सामान पहुँचाता है। इसे क्या कहते हैं?
(a) ड्रॉपशिपिंग मॉडल
(b) संबद्ध राजस्व मॉडल
(c) लेनदेन शुल्क राजस्व मॉडल
(d) एजेंसी राजस्व मॉडल
उत्तर: (a) ड्रॉपशिपिंग मॉडल

व्याख्या:

ड्रॉपशिपिंग एक ई-कॉमर्स व्यवसाय मॉडल है, जिसमें विक्रेता स्वयं उत्पादों का भंडारण या माल-सूची प्रबंधन नहीं करता है। ग्राहक से ऑर्डर प्राप्त होने पर विक्रेता ऑर्डर और शिपिंग का विवरण तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ता को भेजता है, जो सीधे ग्राहक तक उत्पाद पहुँचाता है।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ:

  • माल-सूची जोखिम में कमी: विक्रेता को पहले से उत्पाद खरीदकर भंडारण करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • कम प्रारंभिक पूँजी: गोदाम और माल-सूची प्रबंधन पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।
  • लाभ का आधार: विक्रय मूल्य और आपूर्तिकर्ता की कीमत के बीच का अंतर विक्रेता का सकल लाभ होता है।
  • प्रमुख चुनौती: उत्पाद की गुणवत्ता, आपूर्ति और वितरण समय पर विक्रेता का प्रत्यक्ष नियंत्रण सीमित रहता है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index) के तीन प्रमुख उप-सूचकांकों को सही ढंग से दर्शाता है?
(a) ऋण तक पहुँच, बीमा की गहराई और पेंशन कवरेज
(b) बैंकिंग पहुँच, सकल घरेलू उत्पाद में योगदान और वित्तीय साक्षरता
(c) पहुँच, उपयोग और गुणवत्ता
(d) पहुँच, सामर्थ्य और पारदर्शिता
उत्तर: (c) पहुँच, उपयोग और गुणवत्ता

व्याख्या:

वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का अर्थ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर एवं निम्न आय वर्गों को सस्ती, सुलभ और उपयोगी वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इसमें बैंकिंग, ऋण, बीमा, पेंशन और भुगतान सेवाएँ शामिल हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के वित्तीय समावेशन सूचकांक के तीन प्रमुख आयाम हैं:

  • पहुँच (Access): वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और उन तक लोगों की पहुँच को मापता है। इसमें बैंक शाखाओं, एटीएम, बैंकिंग प्रतिनिधियों तथा डिजिटल वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता शामिल है।
  • उपयोग (Usage): उपलब्ध वित्तीय सेवाओं के वास्तविक उपयोग का आकलन करता है। इसमें बचत खाते, ऋण, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं का उपयोग शामिल है।
  • गुणवत्ता (Quality): वित्तीय सेवाओं की उपयुक्तता, प्रभावशीलता और गुणवत्ता को दर्शाता है। इसमें वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण, जागरूकता और वित्तीय सेवाओं की उपयोगिता शामिल है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के मुख्य उद्देश्य को सबसे अच्छे से बताता है?
(a) सभी डिजिटल वाणिज्य लेनदेन पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करना।
(b) निजी ई-कॉमर्स कंपनियों का स्थान लेना।
(c) नेटवर्क में अंतर-संचालनीयता को सक्षम करके बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के प्रभुत्व को कम करना।
(d) सभी ऑनलाइन लेनदेन के लिए यूपीआई आधारित भुगतान अनिवार्य करना।
उत्तर: (c)

व्याख्या:

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स भारत में डिजिटल वाणिज्य का लोकतंत्रीकरण करने तथा ई-कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की एक पहल है। यह एक खुले नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न खरीदार और विक्रेता मंचों को आपस में जोड़ने की व्यवस्था प्रदान करता है।

प्रश्न 4
एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (डिजिटल रुपया) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) यूपीआई एक वास्तविक समय भुगतान प्रणाली है, जबकि डिजिटल रुपया संप्रभु कागजी मुद्रा के समान है।
(b) यूपीआई के मामले में अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए निपटान तुरंत हो जाता है, क्योंकि पैसा तुरंत डेबिट या क्रेडिट हो जाता है, लेकिन डिजिटल रुपये के मामले में कोई निपटान नहीं होता, क्योंकि बटुए की शेष राशि दूसरे बटुए में स्थानांतरित हो जाती है।
(c) यूपीआई लेनदेन बैंकों द्वारा दर्ज किए जाते हैं और बैंक विवरण में दिखाई देते हैं, लेकिन डिजिटल रुपये के मामले में बैंक विवरण में कोई आँकड़ा दर्ज नहीं होता, क्योंकि लेनदेन एक बटुए से दूसरे बटुए में होते हैं।
(d) दोनों मामलों में जिम्मेदारी उपयोगकर्ताओं और उनके संबंधित बैंकों की होती है।
उत्तर: (b) अपेक्षित उत्तर-कुंजी के अनुसार

व्याख्या:

यूपीआई और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा दोनों डिजिटल भुगतान व्यवस्था से संबंधित हैं, लेकिन इनकी प्रकृति अलग-अलग है। यूपीआई एक भुगतान प्रणाली है, जबकि डिजिटल रुपया स्वयं केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा है।

यूपीआई और डिजिटल रुपये में प्रमुख अंतर:

आधार यूपीआई डिजिटल रुपया
प्रकृति भुगतान प्रणाली डिजिटल मुद्रा
जारीकर्ता/संचालक एनपीसीआई द्वारा संचालित भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी
अंतर्निहित आधार बैंक जमा राशि केंद्रीय बैंक की मुद्रा
लेनदेन बैंक खातों के बीच डिजिटल बटुए के बीच
मुद्रा का स्वरूप डिजिटल भुगतान माध्यम संप्रभु डिजिटल मुद्रा
कानूनी स्थिति भुगतान प्रणाली वैध मुद्रा
प्रश्न 5
वास्तविक विश्व परिसंपत्तियों (RWA) के टोकनीकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
  1. टोकनीकरण, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलने की प्रक्रिया है।
  2. वास्तविक विश्व परिसंपत्तियों का टोकनीकरण 24×7 पहुँच देता है, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलता है।
  3. वास्तविक विश्व परिसंपत्तियों के टोकनीकरण से भारत में लोगों को उच्च विकास वाले निवेश के अवसर मिलेंगे।

नीचे दिए गए कूट का इस्तेमाल करके सही उत्तर चुनें:

(a) 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (a) तीनों कथन सही

व्याख्या:

वास्तविक विश्व परिसंपत्तियों का टोकनीकरण (RWA Tokenization) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियों के स्वामित्व या उनसे संबंधित अधिकारों को डिजिटल टोकन के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। इसके लिए मुख्यतः ब्लॉकचेन तथा वितरित खाता प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है।

कथनवार विश्लेषण:

  • कथन 1 सही है: टोकनीकरण के माध्यम से अचल संपत्ति, सोना, सरकारी प्रतिभूतियाँ, कॉर्पोरेट बॉन्ड, कला और अन्य वास्तविक परिसंपत्तियों से संबंधित स्वामित्व अधिकारों को डिजिटल टोकन में दर्शाया जा सकता है। ब्लॉकचेन तकनीक इन टोकनों के स्वामित्व और हस्तांतरण का रिकॉर्ड सुरक्षित एवं पारदर्शी तरीके से बनाए रखने में सहायता करती है।
  • कथन 2 सही है: टोकनीकरण के माध्यम से परिसंपत्तियों का डिजिटल हस्तांतरण चौबीसों घंटे संभव हो सकता है, बशर्ते संबंधित मंच और बाजार सक्रिय हों। इसके अतिरिक्त, किसी महँगी परिसंपत्ति को छोटे डिजिटल हिस्सों में विभाजित करके आंशिक स्वामित्व (Fractional Ownership) उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे कम पूँजी वाले निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है और वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • कथन 3 सही है: टोकनीकरण के माध्यम से निवेशकों को अचल संपत्ति, बॉन्ड और अन्य परिसंपत्तियों में छोटे निवेश के अवसर मिल सकते हैं। इससे पारंपरिक निवेश विकल्पों के अतिरिक्त नए निवेश अवसर विकसित हो सकते हैं। हालाँकि, इससे उच्च प्रतिफल की गारंटी नहीं मिलती है।
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Source: Upsc pyq economics (2026)
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