‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’: पूर्वोत्तर में नारको-हवाला पर बड़ा प्रहार (‘Operation Trident’: Major Strike on Northeast Narco-Hawala Network)
‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’: पूर्वोत्तर में नारको-हवाला पर बड़ा प्रहार
‘Operation Trident’: Major Strike on Northeast Narco-Hawala Network
Context
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य म्यांमार-मिजोरम-मणिपुर-असम-त्रिपुरा कॉरिडोर में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट को ध्वस्त करना था।
- इस बहु-राज्यीय कार्रवाई के दौरान आपराधिक नेटवर्क के 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया, ₹17.82 करोड़ की अवैध संपत्तियां कुर्क की गईं और ₹100 करोड़ से अधिक के हवाला लेनदेन का पर्दाफाश हुआ। कुल 18 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।
- घातक बरामदगी: नशीले पदार्थों के साथ 500 डेटोनेटर, भारी मात्रा में नकदी और अन्य सामग्री बरामद की गई, जो यह प्रमाणित करती है कि ड्रग्स का यह कारोबार सीधे तौर पर चरमपंथी और देशविरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित कर रहा है।
Learning for UPSC
- आंतरिक सुरक्षा (GS-III): संगठित अपराध और आतंकवाद/उग्रवाद के बीच संबंध, सीमा प्रबंधन, और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ के कारण उत्पन्न क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ।
- अर्थव्यवस्था एवं वित्त (GS-III): मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला नेटवर्क, म्यूल खातों (Mule accounts) की भूमिका और वित्तीय खुफिया प्रणालियों की महत्ता।
- शासन एवं कानून (GS-II/III): बहु-एजेंसी समन्वय (Multi-agency coordination), NDPS अधिनियम और PMLA, 2002 जैसे कानूनी ढांचे।
A Mains Question for UPSC
Q. पूर्ववर्ती उत्तर-पूर्वी भारत में पारराष्ट्रीय (Transnational) नशीले पदार्थों की तस्करी के सुरक्षा निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। नारको-सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क और विद्रोही तत्वों के बीच का त्रिपक्षीय तालमेल किस प्रकार आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है? इसके समाधान हेतु एक सुदृढ़ और बहु-आयामी रणनीति का सुझाव दीजिए।
Answer Format
भूमिका: ‘गोल्डन ट्रायंगल’ से निकटता के संदर्भ और हाल ही में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ का उल्लेख करें।
मुख्य भाग बिंदु
- भौगोलिक व रणनीतिक संवेदनशीलता: म्यांमार सीमा की विशेषताएं, हेरोइन, मेथामफेटामाइन तथा प्रिकॉसर रसायनों की तस्करी के मार्ग।
- नारको-हवाला-आतंक गठजोड़: हवाला चैनलों, म्यूल खातों और डेटोनेटर जैसी हिंसक सामग्रियों की बरामदगी के माध्यम से उग्रवाद का वित्तपोषण।
- आंतरिक सुरक्षा पर बहुआयामी प्रभाव: डेमोग्राफिक बदलाव, युवाओं में नशे की लत, और समानांतर अर्थव्यवस्था का विस्तार।
- सरकारी प्रयास व संस्थागत ढांचा: ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’, PMLA, NDPS एक्ट, NCORD पोर्टल और तकनीकी निगरानी।
- सुझाव एवं आगे की राह (Way Forward): स्मार्ट फेंसिंग, वित्तीय प्रहार, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सामुदायिक पुनर्वास।
निष्कर्ष: 2029 तक ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर आधारित दूरदर्शी निष्कर्ष।
Model Answer
भूमिका
दक्षिण-पूर्व एशिया का ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) विश्व में अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र म्यांमार के साथ एक लंबी (लगभग 1,643 किमी) और खुली सीमा साझा करता है, जिसके कारण यह ‘गोल्डन ट्रायंगल’ से निकलने वाले ड्रग्स के लिए मुख्य पारगमन (transit) और खपत का केंद्र बन गया है। हाल ही में शुरू किया गया ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ इस अवैध पारराष्ट्रीय नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार है, जो नारको-सिंडिकेट और हवाला प्रणालियों के गहरे गठजोड़ को उजागर करता है।
भौगोलिक संवेदनशीलता और तस्करी के मार्ग
- छिद्रित और दुर्गम सीमाएं: म्यांमार के साथ भारत की सीमा घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और नदियों से होकर गुजरती है, जहां कड़ी निगरानी रखना कठिन है। उदाहरण: मिजोरम का जोखाव्थर (टियाऊ नदी के किनारे) और मणिपुर का मोरेह तस्करों के प्रमुख प्रवेश बिंदु हैं।
- दोतरफा तस्करी (Two-Way Traffic): पूर्वोत्तर अब केवल पारगमन मार्ग नहीं रहा, बल्कि यहाँ हेरोइन, ‘याबा’ (मेथामफेटामाइन) और भारत से म्यांमार की ओर जाने वाले प्रिकॉसर रसायनों (जो ड्रग्स उत्पादन में काम आते हैं) की दोतरफा तस्करी होती है।
नारको-हवाला-आतंक संबंध
- हवाला और म्यूल खातों का जाल: नशीले पदार्थों की बिक्री से मिलने वाला काला धन औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से बचकर अनौपचारिक हवाला प्रणालियों और म्यूल खातों के ज़रिए घुमाया जाता है। उदाहरण: ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के दौरान 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का पर्दाफाश हुआ।
- आतंकवाद और उग्रवाद को वित्तपोषण: ड्रग्स के काले धन का सीधा संबंध पूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी संगठनों से है। उदाहरण: छापों के दौरान नशीले पदार्थों के साथ 500 डेटोनेटर और विस्फोटकों की बरामदगी यह सिद्ध करती है कि नारको-सिंडिकेट देश विरोधी ताकतों को वित्तीय व साजो-सामान सहायता मुहैया करा रहे हैं।
आंतरिक सुरक्षा पर बहुआयामी प्रभाव
- समानांतर अर्थव्यवस्था (Parallel Economy): काले धन के प्रवाह से क्षेत्र में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्तियों का निर्माण बढ़ा है, जिससे वैध अर्थव्यवस्था को क्षति पहुँच रही है।
- मानव पूंजी का क्षरण: सीमावर्ती जिलों (जैसे मिजोरम के चंफाई, आइजोल, ल्वांगत्लाई और मणिपुर के चुराचांदपुर) के युवाओं में सिंथेटिक ड्रग्स की लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे जनसांख्यिकी लाभांश खतरे में पड़ रहा है।
- सामाजिक-राजनीतिक अस्थिरता: नशा आधारित अपराधों और स्थानीय गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है।
सरकार के प्रमुख संस्थागत एवं कानूनी प्रयास
- समन्वित और लक्षित अभियान: NCB और ED द्वारा राज्य पुलिस के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर एक साथ छापे मारकर 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
- वित्तीय एवं कानूनी प्रहार:
- NDPS अधिनियम: नशीले पदार्थों के व्यापार पर कठोर दंडात्मक प्रावधान।
- PMLA, 2002: प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार देता है। इसके तहत ₹17.82 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई।
- संस्थागत ढांचा: वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने के लिए NCORD (नारको समन्वय केंद्र) का गठन।
आगे की राह
- स्मार्ट फेंसिंग और तकनीकी निगरानी: म्यांमार सीमा पर थर्मल इमेजिंग कैमरे, ड्रोन सर्विलांस और फेंसिंग कार्य को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।
- वित्तीय रीढ़ पर प्रहार (Financial Strangulation): बैंक खातों की एआई-आधारित निगरानी और हवाला नेटवर्क पर निरंतर वित्तीय सर्जिकल स्ट्राइक जारी रखनी चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय कूटनीति: म्यांमार के साथ खुफिया और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाकर सीमा पार बैठे ड्रग सरगनाओं (जैसे म्यांमार स्थित थangsintuang, उर्फ Chintuanga) पर कार्रवाई सुनिश्चित करना।
- सामुदायिक पुनर्वास: सीमावर्ती क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा करना और पुनर्वास केंद्र स्थापित करना।
निष्कर्ष
पूर्ववर्ती उत्तर-पूर्वी भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक पारराष्ट्रीय सुरक्षा संकट है जो आतंकवाद और हवाला अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ जैसी सख्त कार्रवाइयों के साथ-साथ वित्तीय, तकनीकी और कूटनीतिक उपायों का समन्वय ही भारत को वर्ष 2029 तक एक ‘नशा-मुक्त राष्ट्र’ बनाने के लक्ष्य तक पहुँचा सकता है।
Practice MCQ for UPSC Prelims
- यह अभियान मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में अंतरराष्ट्रीय नारको-हवाला नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया था।
- इसके तहत केवल नशीले पदार्थों की जब्ती की गई, जबकि किसी भी वित्तीय या बैंक खाते को फ्रीज करने की कार्रवाई नहीं की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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