Source: The Hindu
संदर्भ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद, नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर रेखांकित किया। डेटा से पता चलता है कि मेक इन इंडिया और चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP) जैसी पहलों के बावजूद, शीर्ष पांच श्रेणियों का संयुक्त आयात 2021 में 19 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 34.6 अरब डॉलर हो गया – जो चीन से कुल आयात का लगभग एक चौथाई है। चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़ा है जबकि निर्यात काफी हद तक स्थिर रहा है, जिससे 2025 में व्यापार घाटा बढ़कर 131.4 अरब डॉलर हो गया है।

Q.बढ़ते व्यापार घाटे और चीनी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गहरी संरचनात्मक निर्भरता के संदर्भ में भारत के विनिर्माण विस्तार के विरोधाभास का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
| उत्तर प्रारूप परिचय: वर्तमान व्यापार प्रक्षेपवक्र, व्यापार घाटे के आंकड़े और ‘असेंबली-नेतृत्व वाले विकास’ बनाम ‘घरेलू घटक पारिस्थितिकी तंत्र’ के विरोधाभास को परिभाषित करें। मुख्य भाग: भारत-चीन व्यापार असंतुलन के सांख्यिकीय साक्ष्यों (2021-2025 के बीच स्थिर निर्यात और बढ़ते आयात) का विश्लेषण करें। आयात बास्केट की संरचना (मध्यवर्ती वस्तुओं की लगभग 70% हिस्सेदारी, पूंजीगत वस्तुएं और मोबाइल फोन असेंबली में आयातित पुर्जों की बढ़ती हिस्सेदारी) पर चर्चा करें। ‘असेंबली ट्रैप’ और घरेलू फर्मों की सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत तकनीकों में बाधाओं जैसी संरचनात्मक चुनौतियों को उजागर करें। रणनीतिक समाधान जैसे कैलिब्रेटेड टैरिफ, नवाचार नेटवर्क और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) तक उन्नत पहुंच की रूपरेखा तैयार करें। निष्कर्ष: रणनीतिक कमज़ोरियों को दीर्घकालिक सुरक्षा जोखिमों में बदलने से रोकने के लिए संतुलित और टिकाऊ नीतिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत करें। |
परिचय
हालांकि भारत मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से अपनी विनिर्माण क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है, लेकिन यह विस्तार काफी हद तक चीन-केंद्रित और आयात-निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं में अंतर्निहित है। यह स्थिति एक गंभीर “असेंबली ट्रैप” को जन्म देती है, जहां अंतिम असेंबली तो बढ़ती है किंतु उच्च मूल्य वाले घटक आयात पर निर्भर रहते हैं।
व्यापार घाटे के कारण (Reasons for Trade Deficit)
- स्थिर निर्यात और तेजी से बढ़ता आयात: वर्ष 2021 से 2025 के दौरान चीन को भारत का निर्यात 23 अरब डॉलर से घटकर 18.1 अरब डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि आयात 87.5 अरब डॉलर से बढ़कर 149.5 अरब डॉलर हो गया।
- आयात बास्केट की उच्च सांद्रता: चीन से भारत के कुल आयात का लगभग 70% हिस्सा मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediate goods) का और 22% हिस्सा पूंजीगत वस्तुओं (capital goods) का है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता: भारत का आयात बास्केट लैपटॉप, दूरसंचार उपकरण, आईसी और ट्रांसमिशन सर्किट जैसी कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स-संबंधित श्रेणियों में अधिक संकेंद्रित हो गया है।
- शीर्ष श्रेणियों का विस्तार: मेक इन इंडिया और PMP जैसी पहलों के बावजूद, शीर्ष पांच आयात श्रेणियों का संयुक्त मूल्य 2021 में 19 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 34.6 अरब डॉलर हो गया।
भारत पर प्रभाव (Impact on India)
- ‘असेंबली ट्रैप’ का सृजन: यद्यपि भारत मोबाइल फोन असेंबली के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, लेकिन यह सफलता मुख्य रूप से गहरे घरेलू घटक पारिस्थितिकी तंत्र के बजाय डाउनस्ट्रीम असेंबली पर आधारित है।
- आयातित पुर्जों की बढ़ती हिस्सेदारी: मोबाइल फोन विनिर्माण के विस्तार के साथ ही आयातित पुर्जों और घटकों की हिस्सेदारी 2022 के 3.3% से बढ़कर 2025 में 10.1% हो गई है।
- सामरिक कमजोरियां: सेमीकंडक्टर और अन्य उन्नत सटीक घटकों में घरेलू फर्मों की असमर्थता के कारण महत्वपूर्ण तकनीकी निर्भरताएं देश की रणनीतिक कमजोरियों में बदल रही हैं।
- घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं का कमजोर होना: उच्च मूल्य संवर्धन (value addition) घरेलू स्तर पर होने के बजाय विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के पास केंद्रित रहता है।
हमारे प्रयास (Our Efforts)
- मेक इन इंडिया पहल: देश के भीतर विनिर्माण आधार को व्यापक बनाने और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इस योजना का क्रियान्वयन किया गया है।
- चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP): घरेलू मूल्यवर्धन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने और विशिष्ट घटकों के निर्माण को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
- उत्पादन-जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं: मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में असेंबली क्षमता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं।
- द्विपक्षीय मंचों पर संवाद: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे उच्च-स्तरीय मंचों पर संरचनात्मक व्यापार असंतुलन के मुद्दों को चीनी नेतृत्व के समक्ष उठाया गया है।
आगे की राह / वे फॉरवर्ड (Way Forward)
- कैलिब्रेटेड टैरिफ (Calibrated Tariffs): घरेलू विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं के कुछ हिस्सों को पोषित करने के लिए पुर्जों और घटकों पर विवेकपूर्ण और कैलिब्रेटेड टैरिफ लागू किए जाने चाहिए।
- R&D और नवाचार में निवेश: केवल असेंबली से ध्यान हटाकर स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं, अनुसंधान एवं विकास और नवाचार नेटवर्क के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVC) में उन्नत पहुंच: घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाते हुए GVC में इस प्रकार एकीकृत होना चाहिए कि रणनीतिक जोखिम न्यूनतम हों।
- घटक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: सेमीकंडक्टर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक घटकों के विनिर्माण के लिए एक मजबूत घरेलू बेस तैयार करना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
संरचनात्मक और तकनीकी चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण और मजबूत घरेलू घटक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है, ताकि महत्वपूर्ण तकनीकी निर्भरताएं देश की रणनीतिक कमजोरियों में न बदल सकें।
अभ्यास प्रश्न
Q.भारत-चीन व्यापार गतिशीलता और संरचनात्मक निर्भरता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वर्ष 2021 से 2025 के बीच चीन को भारत का निर्यात स्थिर रहा है, जबकि इसी अवधि में चीन से आयात में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
- चीन से भारत के कुल आयात में मध्यवर्ती वस्तुओं की हिस्सेदारी लगभग 70% है।
- मोबाइल फोन विनिर्माण के विस्तार के साथ ही आयातित पुर्जों और घटकों की हिस्सेदारी में कमी आई है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2

