Source: The Hindu
समाचार का संदर्भ (Context of the News)
हालिया — घटना दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पाँच मंजिला इमारत के ढहने से छह लोगों की मृत्यु हो गई है, जिसने भवन सुरक्षा मानदंडों के क्रियान्वयन में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया’ (ADSI) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच देश भर में भवन ढहने की घटनाओं में कुल 7,874 लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटना केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह देश भर में शहरी नियोजन की कमियों और विनियामक विफलता का गंभीर संकेत है।
Q.
“भारत में शहरी क्षेत्रों में अनियोजित विकास, बहुआयामी प्रशासनिक विफलताओं और भवन सुरक्षा मानदंडों की उपेक्षा के कारण बढ़ती संरचनात्मक दुर्घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। इस संदर्भ में ‘सेफ सिटी मॉडल’ (SAFE CITY MODEL), राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय केस स्टडी तथा प्रासंगिक आँकड़ों के माध्यम से बहुआयामी कारणों का विश्लेषण करते हुए प्रभावी उपाय सुझाइए।”
उत्तर का प्रारूप (Answer Format)
प्रस्तावना
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे और NCRB/ADSI के आंकड़ों से शुरुआत करें, जो यह दर्शाते हैं कि शहरी भवन सुरक्षा नियमों की अनदेखी एक गंभीर प्रणालीगत समस्या है।
मुख्य भाग (कारण व आँकड़े)
- वैधानिक: बिल्डिंग बाय-लाॅज का उल्लंघन (यूपी में 223 और महाराष्ट्र में 220 मौतें, 2024)।
- आर्थिक: प्रवासन और सस्ते आवासों की कमी से असुरक्षित पीजी का बढ़ना (70+ मौतें, 2025)।
- तकनीकी: ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ का अभाव।
- प्रशासनिक: दुर्घटना के बाद केवल ‘प्रतिक्रियावादी’ सीलिंग करना।
केस स्टडी
- राष्ट्रीय: अहमदाबाद (AMC स्ट्रक्चरल ऑडिट) और केरल (GIS मैपिंग)।
- अंतर्राष्ट्रीय: टोक्यो (भूकंप-रोधी रेट्रोफिटिंग) और सिंगापुर (BCA मॉडल)।
प्रभावी कार्यनीति (‘सेफ सिटी मॉडल’)
- S: सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit)।
- A: जवाबदेही (Accountability)।
- F: अग्रगामी योजना (Forward Planning)।
- E: तकनीक आधारित प्रवर्तन (Enforcement through Technology)।
- अन्य: बिल्डिंग हेल्थ कार्ड, PMAY-Urban और आपदा तैयारी।
निष्कर्ष
दिखावटी कार्रवाइयों से ऊपर उठकर ‘सेफ सिटी मॉडल’ और पूर्व-रोकथाम दृष्टिकोण अपनाना ही ‘सुरक्षित शहरी भारत’ की कुंजी है।
प्रस्तावना (Introduction)
हालिया दुर्घटनाओं और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत के घनी आबादी वाले शहरी केंद्रों में भवन सुरक्षा नियमों की अनदेखी एक प्रणालीगत विफलता का रूप ले चुकी है।
यह संकट केवल तकनीकी या ढांचागत नहीं, बल्कि बहुआयामी प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक और विनियामक कमजोरियों का परिणाम है।
मुख्य भाग (Body)
भवन ढहने की घटनाओं के बहुआयामी कारण, आँकड़े एवं उदाहरण:
वैधानिक एवं विनियामक आयाम (Regulatory & Legal)
बिल्डिंग बाय-लाॅज और मास्टर प्लान के नियमों का खुला उल्लंघन तथा स्थानीय प्रशासनिक तंत्र व भू-माफियाओं की मिलीभगत।
आँकड़ा/उदाहरण: ADSI 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश (223 मौतें), महाराष्ट्र (220 मौतें) और मध्य प्रदेश (174 मौतें) में भवन ढहने से सबसे अधिक मौतें हुईं, जबकि दिल्ली में इसी अवधि में 42 मौतें दर्ज हुईं।
आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय आयाम (Economic & Demographic)
तीव्र नगरीकरण, ग्रामीण-शहरी प्रवासन और सस्ते व औपचारिक आवासों की भारी कमी के कारण अनौपचारिक/असुरक्षित बहुमंजिला निर्माणों (जैसे सत्य निकेतन में छात्रों के लिए पीजी आवास) की मांग बढ़ना।
आँकड़ा: जनवरी 2025 से अब तक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 20 घटनाओं में 70 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
तकनीकी एवं संस्थागत आयाम (Technical & Institutional)
नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों द्वारा पुराने और जोखिम भरे भवनों का नियमित ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ व निरीक्षण न होना तथा तकनीकी अमले की भारी कमी।
प्रशासनिक एवं राजनीतिक आयाम (Administrative & Political)
प्रशासन का दृष्टिकोण अमूमन ‘प्रतिक्रियावादी’ (Reactive) होता है, जिसमें दुर्घटना के बाद केवल अस्थायी सीलिंग या कागजी कार्रवाई की जाती है, जो दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
सर्वश्रेष्ठ अभ्यास और केस स्टडी (राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय):
अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) का संरचनात्मक ऑडिट मॉडल (राष्ट्रीय)
अहमदाबाद में पुराने और जोखिम भरे परिसरों के लिए अनिवार्य ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे मानसून या आपदा के समय होने वाली अनहोनी से पहले ही इमारतों को खाली कराकर लोगों की जान बचाई जाती है।
केरल का सुरक्षित आवास और भू-स्थानिक मानचित्रण (राष्ट्रीय)
केरल में अनधिकृत निर्माणों की निगरानी और तटीय/पहाड़ी क्षेत्रों में भवन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस-आधारित मैपिंग का सफल उपयोग किया जा रहा है।
टोक्यो, जापान का भूकंप-रोधी और सख्त निर्माण मॉडल (अंतर्राष्ट्रीय)
जापान की राजधानी टोक्यो में ‘एंटी-सिस्मिक बिल्डिंग कोड’ (Seismic Building Codes) का सख्ती से पालन किया जाता है तथा प्रत्येक पुरानी इमारत का समय-समय पर आधुनिकीकरण (Retrofitting) किया जाता है, जिससे उच्च तीव्रता के भूकंपों में भी संरचनात्मक क्षति न्यूनतम होती है।
सिंगापुर का भवन निर्माण एवं नियंत्रण प्राधिकरण (BCA) मॉडल (अंतर्राष्ट्रीय)
सिंगापुर में ‘बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन अथॉरिटी’ के माध्यम से डिजिटल सबमिशन, स्वतंत्र ऑडिट और सख्त निरीक्षण प्रणाली (Rigorous Inspection Regime) लागू है, जो अवैध निर्माण की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर देती है।
एकीकृत कार्यनीति : “सेफ सिटी मॉडल
भारत के लिए शहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित ‘सेफ सिटी मॉडल को अपनाया जा सकता है:
सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit)
उच्च जोखिम वाले पुराने भवनों के लिए नियमित संरचनात्मक, अग्नि, विद्युत और भूकंपीय सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया जाए।
जवाबदेही (Accountability)
अवैध निर्माण के मामलों में केवल भवन मालिक नहीं, बल्कि अधिकारी, बिल्डर, इंजीनियर एवं ठेकेदार की स्पष्ट जिम्मेदारी (जिम्मेदारी मैपिंग – Responsibility Mapping) तय की जाए।
अग्रगामी योजना (Forward Planning)
भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित खतरा मानचित्रण (Hazard Mapping) को अपनाते हुए भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन के जोखिमों को मास्टर प्लान में शामिल किया जाए तथा वैज्ञानिक भूमि-उपयोग ज़ोनिंग (Land-use Planning) हो।
तकनीक के माध्यम से प्रवर्तन (Enforcement through Technology)
नक्शा स्वीकृति से लेकर पूर्णता प्रमाण पत्र तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाए, जिसमें उपग्रह इमेजिंग (Satellite Imagery), ड्रोन निरीक्षण (Drone Inspection), जियो-टैगिंग (Geo-tagging) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनधिकृत निर्माण पहचान का उपयोग हो।
सुरक्षित आवास (Safe Housing)
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-Urban) को केवल आवास संख्या के बजाय “सुरक्षित और लचीले आवास” (Resilient Housing) के दृष्टिकोण से लागू किया जाए तथा अनौपचारिक बस्तियों के यथा-स्थान उन्नयन (In-situ Upgradation) को प्राथमिकता मिले।
भवन स्वास्थ्य कार्ड(Building Health Card)
प्रत्येक पुराने या जोखिम वाले भवन के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड (Digital Health Card) जारी किया जाए, जिसमें निर्माण वर्ष, संरचनात्मक स्थिति और अंतिम निरीक्षण का विवरण हो।
आपदा तैयारी एवं नागरिक भागीदारी (Disaster Preparedness & Citizen Participation)
बड़े शहरों में आपदा मोचन प्रणालियों (Urban Search & Rescue Teams, Mock Drills) को मजबूत किया जाए और मोबाइल ऐप व ऑनलाइन प्रणालियों के माध्यम से नागरिकों को जोड़कर सूचना तंत्र बेहतर बनाया जाए।
निष्कर्ष(Conclusion)
शहरी भारत में मानव जीवन की सुरक्षा को ताक पर रखकर होने वाले अनियोजित विकास और बहुआयामी प्रशासनिक विफलताओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तात्कालिक और दिखावटी कार्रवाइयों से ऊपर उठकर, अहमदाबाद, केरल के साथ-साथ टोक्यो और सिंगापुर जैसी सफल अंतर्राष्ट्रीय केस स्टडीज, पुख्ता आँकड़ों के विश्लेषण तथा ‘सेफ सिटी मॉडल (SAFE CITY MODEL)’ आधारित पूर्व-रोकथाम कार्यनीति को अपनाते हुए एक दूरदर्शी शहरी नियोजन और सख्त विनियामक ढांचा लागू करना अनिवार्य है, तभी ‘सुरक्षित शहरी भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
Q.
भारत में ‘शहरी बाढ़’ (Urban Flooding) और अनियोजित शहरीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- मास्टर प्लान में भू-उपयोग ज़ोनिंग (Land-use Zoning) की उपेक्षा करने से प्राकृतिक जल निकास मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं।
- भारतीय शहरों में हरित क्षेत्रों और आर्द्रभूमि (Wetlands) का संकुचन शहरी तापमान और जलभराव की समस्या को बढ़ाता है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहरी बाढ़ प्रबंधन का मुख्य उत्तरदायित्व पूरी तरह से केवल केंद्र सरकार का होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A)
Mains practice question
Q. “भारत के महानगरों में अनियोजित विकास, कमजोर विनियामक प्रवर्तन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण शहरी आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।” इस संदर्भ में संरचनात्मक दुर्घटनाओं के बहुआयामी कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा ‘सेफ सिटी मॉडल (SAFE CITY MODEL)’ के आलोक में इसके दीर्घकालिक समाधान सुझाइए। (250 शब्द)
Source: The Hindu — जैसा कि मूल दस्तावेज़ में दिया गया है।
