सरकार कल्याणकारी योजनाओं में आधार पर भरोसा(Government trusts Aadhaar on welfare)

Source: The Indian Express

विषय की पृष्ठभूमि

हाल ही में, भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। इसी संदर्भ में पूर्वनौकरशाह आर. एस. शर्मा ने अपने लेख में यह तर्क दिया है कि जिस प्रकार सरकार कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लिए आधार पर सफलतापूर्वक भरोसा करती है, उसी प्रकार मतदाता सूचियों को त्रुटिमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रारूप

परिचय: मतदाता सूचियों की शुद्धता और डिजिटल सत्यापन की आवश्यकता का 25 शब्दों का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग: पारंपरिक गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रणाली की सीमाएं और प्रशासनिक चुनौतियां।
o मतदाता सूची सुधार के लिए आधार और फेस ऑथेंटिकेशन के तकनीकी व आर्थिक लाभ।
o नागरिकता निर्धारण और संवैधानिक प्रावधानों सेजुड़ेवैधानिक आयाम।
निष्कर्ष: प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक समावेशिता के संतुलन पर आधारित संक्षिप्त निष्कर्ष।

उत्तर

मतदाता सूचियों की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, जिसे डिजिटल तकनीक और बायोमेट्रिक सत्यापन के समावेश सेअधिक पारदर्शी, समावेशी और किफायती बनाया जा सकता है। पारंपरिक घर-घर जाकर किए जाने वाले पुनरीक्षण (SIR) की अपनी गंभीर सीमाएं और प्रशासनिक चुनौतियां हैं:

 वित्तीय और मानवीय बोझ: इस पद्धति में लाखों सरकारी कर्मचारियों को तैनात करना पड़ता है, जिस पर प्रति चक्र हजारों करोड़ रुपये का भारी सार्वजनिक धन खर्च होता है।

 त्रुटियों की संभावना और उत्पीड़न: दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं और प्रवासी नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार उनके कल्याणकारी लाभों के छिनने का जोखिम उत्पन्न हो जाता है।

 नागरिकता बनाम पहचान: सर्वोच्च न् यायालय के स्पष्ट निर्देशानुसार, नागरिकता का अंतिम निर्धारण गृह मंत्रालय का कार्यहै, जबकि मतदाता सूचियों का उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं की सही पहचान करना है।

आधार-आधारित चेहरा प्रमाणीकरण के प्रमुख लाभ:

 दक्षता और मितव्ययिता: यह डिजिटल बुनियादी ढांचेका उपयोग करके बिना किसी कागजी झंझट के त्वरित, पारदर्शी और बेहद कम लागत पर सत्यापन सुनिश्चित करता है।

 डुप्लिकेट और फर्जी प्रविष्टियों की समाप्ति: [Aadhaar Redacted] विशिष्ट पहचान प्रदान करता है, जिससे मृत या फर्जी मतदाताओं को आसानी सेसूची सेबाहर किया जा सकता है।
 गोपनीयता सुरक्षा: यह प्रणाली केवल हाँ या ना में परिणाम देती है, जिससे मूल डेटा सुरक्षित रहता है। इसे डिगीयात्रा और जीवन प्रमाण जैसे डिजिटल माध्यमों पर पहले ही सफलतापूर्वक परखा जा चुका है।

आगे की राह:

 स्वैच्छिक और सुलभ विकल्प: आधार-आधारित लिंकिंग को अनिवार्यन बनातेहुए नागरिकों के लिए ए क स्वैच्छिक मोबाइल और वेब आधारित विकल्प के रूप मेंउपलब्ध कराया जाना चाहिए।

 डेटा सुरक्षा और गोपनीयता: नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करनेके लिए उच्चतम न्यायालय के ‘पुट्टास्वामी निर्णय’ के अनुरूप कड़े सुरक्षा मानक लागू किए जाने चाहिए।

 नागरिकता समन्वय: निर्वाचन आयोग और गृह मंत्रालय (MHA) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए ताकि डिजिटल सत्यापन के बाद कानूनी और नागरिकता संबंधी मामलों का सुचारू निस्तारण हो सके।

 डिजिटल साक्षरता: दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों मेंनागरिकों को इस तकनीक के उपयोग के प्रति जागरूक करनेके लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए।

डिजिटल इंडिया के इस आधुनिक दौर में, चुनाव आयोग को पारंपरिक और जटिल पद्धतियों के स्थान पर सुरक्षित आधार-आधारित प्रमाणीकरण को अपनाना चाहिए। यह न केवल चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि समय और धन की भारी बचत करते हुए लोकतांत्रिक भागीदारी को भी अधिक मजबूत करेगा।

Q.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत मेंनागरिकता का अंतिम निर्धारण भारतीय संविधान और नागरिकता अधिनियम के तहत गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है, न कि चुनाव आयोग द्वारा।
  2. आधार अधिनियम के अनुसार, आधार संख्या किसी व्यक्ति की पहचान और निवास का प्रमाण है, लेकिन यह नागरिकता का स्वतः प्रमाण नहीं है।
  3. चेहरा प्रमाणीकरण जैसी डिजिटल तकनीकेंगोपनीयता के सिद्धांत पर कार्यकरती हैंऔर प्रमाणीकरण के दौरान केवल हाँया ना मेंपरिणाम प्रदान करती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

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