1. भारत के संविधान के निर्माताओं का ‘सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय’ सुनिश्चित करने का उद्देश्य प्रस्तावना के अतिरिक्त प्रत्यक्ष रूप से किस अनुच्छेद में प्रतिबिंबित होता है?
(a) अनुच्छेद 14
(b) अनुच्छेद 32
(c) अनुच्छेद 38
(d) अनुच्छेद 44
उत्तर: (c) अनुच्छेद 38
व्याख्या:
संविधान के अनुच्छेद 38(1) में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि राज्य एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना और संरक्षण करके लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा, जिसमें राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय समाहित हो। यद्यपि यह आदर्श संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में भी घोषित है, लेकिन नीति निदेशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 38 राज्य को इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने का प्रत्यक्ष संवैधानिक निर्देश देता है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से उद्देश्य राज्य की नीति के मार्गदर्शन के लिए विनिर्दिष्ट किए गए हैं?
- पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो।
- समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे सामूहिक हित का सर्वोत्तम साधन हो।
- बालकों और अल्पवय व्यक्तियों की शोषण से तथा नैतिक और आर्थिक परित्याग से रक्षा की जाए।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर का चयन करें:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: यह अनुच्छेद 39(a) का मूल पाठ है, जो सभी नागरिकों के लिए बुनियादी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात करता है।
कथन 2 सही है: यह अनुच्छेद 39(b) के तहत आता है, जिसके आधार पर राज्य भूमि सुधार और राष्ट्रीयकरण जैसे कदम उठाता है ताकि समाज के संसाधनों का लाभ सबको मिले।
कथन 3 सही है: यह अनुच्छेद 39(f) का हिस्सा है, जिसे बच्चों के कल्याण के लिए राज्य के सकारात्मक कर्तव्य के रूप में संविधान में रखा गया है (इसे 42वें संशोधन द्वारा और अधिक सुदृढ़ किया गया था)।
3. राज्य की नीति के निदेशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में सूची-I (प्रावधान) को सूची-II (अनुच्छेद) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (प्रावधान)
(A) लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाना
(B) आर्थिक व्यवस्था से धन और उत्पादन के साधनों का अहितकारी संकेंद्रण रोकना
(C) उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों का भाग लेना सुनिश्चित करना
(D) राज्य की लोक सेवाओं में कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
सूची-II (अनुच्छेद)
I। अनुच्छेद 39(c)
II। अनुच्छेद 50
III। अनुच्छेद 43A
IV। अनुच्छेद 38(1)
कूट:
(a) A-I, B-IV, C-III, D-II
(b) A-IV, B-II, C-III, D-I
(c) A-IV, B-I, C-III, D-II
(d) A-III, B-I, C-IV, D-II
उत्तर: (c) A-IV, B-I, C-III, D-II
व्याख्या:
भारतीय संविधान के भाग IV के तहत दिए गए नीति निदेशक तत्वों का सही मिलान विकल्प (c) है क्योंकि अनुच्छेद 38(1) राज्य को लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से युक्त सामाजिक व्यवस्था बनाने का निर्देश देता है, अनुच्छेद 39(c) राज्य को अपनी नीति इस प्रकार संचालित करने को कहता है जिससे आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि धन और उत्पादन-साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो, अनुच्छेद 43A को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा जोड़ा गया था जो उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात करता है, और अनुच्छेद 50 राज्य को लोक सेवाओं में कार्यपालिका से न्यायपालिका को पूरी तरह पृथक करने का निर्देश देता है।
4. भारत के संविधान के अनुसार, ‘धन का संकेंद्रण’ निम्नलिखित में से किसका उल्लंघन करता है?
(a) समता का अधिकार
(b) राज्य के नीति निदेशक तत्व
(c) स्वतंत्रता का अधिकार
(d) कल्याण की अवधारणा
उत्तर: (b) राज्य के नीति निदेशक तत्व
व्याख्या:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(c) में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि राज्य अपनी नीति का इस प्रकार संचालन करेगा जिससे आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि धन और उत्पादन-साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो। यह कल्याणकारी राज्य और समाजवाद का एक मूल स्तंभ है।
5. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में उल्लिखित गांधीवादी सिद्धांत के अनुसार, राज्य ग्राम पंचायतों को किस रूप में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक शक्तियां और अधिकार प्रदान करेगा?
(a) सामाजिक न्याय की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए
(b) विकेंद्रीकृत शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए
(c) स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए
(d) ग्रामीण विकास की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए
उत्तर: (c) स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए
व्याख्या:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 40 राज्य को ग्राम पंचायतों का संगठन करने और उन्हें स्वायत्त शासन (Self-Government) की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक शक्तियां, वित्त और प्राधिकार देने का निर्देश देता है, जो गांधीवादी दर्शन के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने और लोगों को अपने ऊपर शासन करने के योग्य बनाने पर आधारित है, जबकि सामाजिक न्याय (विकल्प a) का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान है, विकेंद्रीकृत शासन (विकल्प b) केवल शक्तियों के विभाजन को दर्शाता है, और ग्रामीण विकास (विकल्प d) बुनियादी ढांचे के सुधार से संबंधित है, परंतु अनुच्छेद 40 की मूल संवैधानिक शब्दावली पूरी तरह से ‘स्वायत्त शासन की इकाइयों’ के गठन पर केंद्रित है।
6. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- अनुच्छेद 42 समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित एक नीति निदेशक तत्व है।
- यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि कारखानों या कार्यालयों में श्रमिकों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक कामकाजी माहौल तैयार किया जाए।
- इस अनुच्छेद के तहत दिए गए निर्देश किसी भी निजी कंपनी या संस्थान पर तब तक स्वतः लागू नहीं होते जब तक कि संसद इस संबंध में कोई विशिष्ट कानून न बना दे।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (d) 1, 2 और 3 सभी
व्याख्या:
कथन 1 सही है: नीति निदेशक तत्वों के वर्गीकरण में अनुच्छेद 42 को समाजवादी सिद्धांतों के अंतर्गत रखा गया है। इसका मूल उद्देश्य श्रमिकों और समाज के कामकाजी वर्ग के सामाजिक-आर्थिक हितों की रक्षा करना और उन्हें शोषण से बचाना है।
कथन 2 सही है: इस अनुच्छेद की मूल भावना यह है कि किसी भी नागरिक से अमानवीय परिस्थितियों में काम न कराया जाए। राज्य को यह सकारात्मक निर्देश दिया गया है कि वह कार्यस्थलों पर उचित कार्यघंटे, आराम का समय, स्वच्छता और सुरक्षा की न्यायसंगत तथा मानवोचित दशाएं सुनिश्चित करे।
कथन 3 सही है: चूंकि भाग IV (DPSP) के प्रावधान अदालतों द्वारा सीधे प्रवर्तनीय नहीं होते हैं, इसलिए अनुच्छेद 42 के निर्देश निजी या सार्वजनिक संस्थानों पर स्वतः बाध्यकारी नहीं होते। इन्हें विधिक रूप से लागू करने के लिए संसद को विशिष्ट कानून (जैसे कारखाना अधिनियम, मातृत्व लाभ अधिनियम या श्रम संहिता) बनाने पड़ते हैं, जिसके बाद ही ये कानूनी रूप से लागू होते हैं।
7. भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत आने वाले ‘अनुच्छेद 43’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह अनुच्छेद राज्य को यह निर्देश देता है कि वह सभी कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी और एक शिष्ट जीवन स्तर सुनिश्चित करने का प्रयास करे।
- इसके तहत राज्य शहरी क्षेत्रों में भारी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से कदम उठाएगा।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) केवल 1
व्याख्या:
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 43 का प्राथमिक समाजवादी उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य कानून या आर्थिक नीतियों द्वारा कृषि और उद्योगों में लगे सभी श्रमिकों को काम, काम के घंटे, निर्वाह मजदूरी तथा एक सम्मानजनक व शिष्ट जीवन स्तर उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास करे।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 43 में शहरी क्षेत्रों या भारी उद्योगों को बढ़ावा देने का कोई संवैधानिक निर्देश नहीं दिया गया है। इसके विपरीत, यह एक प्रमुख गांधीवादी सिद्धांत को समाहित करता है, जिसके तहत राज्य को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को कुलीनता से संवर्धित करने का निर्देश प्राप्त है।
8. संविधान के अनुच्छेद 43B के तहत ‘सहकारी समितियों’ के स्वैच्छिक गठन और लोकतांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देने वाले नीति निदेशक तत्व को किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?
(a) 44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
(b) 86वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002
(c) 97वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011
(d) 103वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019
उत्तर: (c)
व्याख्या:
97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा भारतीय संविधान में एक नया अनुच्छेद 43B जोड़ा गया। इसके तहत यह व्यवस्था की गई कि राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। (नोट: इसी संशोधन द्वारा सहकारी समिति बनाने के अधिकार को अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत एक मौलिक अधिकार भी बनाया गया था)।
9. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- अनुच्छेद 44 राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
- यह संहिता मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों को विनियमित करती है।
- उत्तराखंड भारत का पहला ऐसा राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता लागू हुई है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को यह मार्गदर्शक निर्देश देता है कि वह देश के संपूर्ण राज्यक्षेत्र में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता स्थापित करने का सकारात्मक प्रयास करे।
कथन 2 सही है: समान नागरिक संहिता का मुख्य विधिक उद्देश्य विभिन्न धर्मों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चा गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए एक साझा धर्मनिरपेक्ष कानून तैयार करना है।
कथन 3 गलत है: भारत में गोवा पहला ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली औपनिवेशिक काल (1867) से ही एक समान नागरिक संहिता पहले से लागू है। उत्तराखंड, स्वतंत्रता के बाद प्रांतीय स्तर पर स्वयं कानून बनाकर समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है।
10. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 के विधिक और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1950 के मूल संविधान में अनुच्छेद 45 के तहत 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मार्गदर्शक सिद्धांत विनिर्दिष्ट था।
- 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा इसकी विषय-वस्तु को बदलकर ’14 वर्ष से कम आयु के बालकों की देख-रेख और शिक्षा’ कर दिया गया।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) केवल 1
व्याख्या:
कथन 1 सही है: वर्ष 1950 के मूल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 में यह स्पष्ट संकल्प लिया गया था कि राज्य इस संविधान के लागू होने के 10 वर्ष के भीतर 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेगा।
कथन 2 गलत है: वर्ष 2002 में पारित 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदलकर ’14 वर्ष से कम’ नहीं, बल्कि ‘छह वर्ष से कम आयु’ के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देख-रेख और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा (ECCE) कर दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा को इसी संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21A के तहत एक प्रवर्तनीय ‘मौलिक अधिकार’ बना दिया गया था।
