Indian Economy – Daily MCQ
UPSC / PCS Practice Questions
1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-I: यदि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) अपने ऋण पर डिफॉल्ट करता है, तो यूएस ट्रेजरी बॉन्ड के धारक भुगतान प्राप्त करने के अपने दावों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।
कथन-II: अमेरिकी सरकार का ऋण किसी भी ठोस संपत्ति द्वारा समर्थित नहीं है, बल्कि केवल सरकार के विश्वास द्वारा समर्थित है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
कथन-I: यदि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) अपने ऋण पर डिफॉल्ट करता है, तो यूएस ट्रेजरी बॉन्ड के धारक भुगतान प्राप्त करने के अपने दावों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।
कथन-II: अमेरिकी सरकार का ऋण किसी भी ठोस संपत्ति द्वारा समर्थित नहीं है, बल्कि केवल सरकार के विश्वास द्वारा समर्थित है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।
(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
(d) कथन-I गलत है, जबकि कथन-II सही है।
उत्तर Show करें
उत्तर: (d) कथन-I गलत है, जबकि कथन-II सही है।
व्याख्या:
कथन-I गलत है। अमेरिकी सरकार द्वारा ऋण पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में ट्रेजरी बॉन्ड धारकों के कानूनी और संविदात्मक दावे समाप्त नहीं हो जाते। डिफॉल्ट का अर्थ यह हो सकता है कि सरकार ब्याज या मूलधन का भुगतान निर्धारित समय पर न कर पाए, लेकिन इससे बॉन्डधारकों का दावा स्वतः समाप्त नहीं होता।
कथन-II सही है। अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियाँ किसी विशेष भौतिक संपत्ति, जैसे सोना या भूमि, द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समर्थित नहीं होती हैं। इनका आधार मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार की साख और पूर्ण विश्वास (Full Faith and Credit) है। सरकार अपने कर राजस्व और अन्य सरकारी आय के माध्यम से ऋण दायित्वों को पूरा करती है।
अतः कथन-I गलत और कथन-II सही है।
कथन-I गलत है। अमेरिकी सरकार द्वारा ऋण पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में ट्रेजरी बॉन्ड धारकों के कानूनी और संविदात्मक दावे समाप्त नहीं हो जाते। डिफॉल्ट का अर्थ यह हो सकता है कि सरकार ब्याज या मूलधन का भुगतान निर्धारित समय पर न कर पाए, लेकिन इससे बॉन्डधारकों का दावा स्वतः समाप्त नहीं होता।
कथन-II सही है। अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियाँ किसी विशेष भौतिक संपत्ति, जैसे सोना या भूमि, द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समर्थित नहीं होती हैं। इनका आधार मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार की साख और पूर्ण विश्वास (Full Faith and Credit) है। सरकार अपने कर राजस्व और अन्य सरकारी आय के माध्यम से ऋण दायित्वों को पूरा करती है।
अतः कथन-I गलत और कथन-II सही है।
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-I: सिंडिकेटेड ऋण देने से उधारकर्ता के डिफॉल्ट का जोखिम कई उधारदाताओं में बंट जाता है।
कथन-II: सिंडिकेटेड ऋण एक निश्चित राशि/एकमुश्त धनराशि हो सकता है, लेकिन यह क्रेडिट लाइन नहीं हो सकता।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
कथन-I: सिंडिकेटेड ऋण देने से उधारकर्ता के डिफॉल्ट का जोखिम कई उधारदाताओं में बंट जाता है।
कथन-II: सिंडिकेटेड ऋण एक निश्चित राशि/एकमुश्त धनराशि हो सकता है, लेकिन यह क्रेडिट लाइन नहीं हो सकता।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-I, कथन-II की व्याख्या करता है।
(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
(d) कथन-I गलत है, जबकि कथन-II सही है।
उत्तर Show करें
उत्तर: (c) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
व्याख्या:
कथन-I सही है। सिंडिकेटेड ऋण में किसी बड़े ऋण को एक ही बैंक द्वारा देने के बजाय कई बैंक या वित्तीय संस्थाएँ मिलकर उपलब्ध कराती हैं। इस प्रकार उधारकर्ता के डिफॉल्ट से उत्पन्न संभावित जोखिम कई ऋणदाताओं में उनके हिस्से के अनुसार वितरित हो जाता है। उदाहरण: यदि किसी कंपनी को 10,000 करोड़ रुपये का ऋण चाहिए और पाँच बैंक मिलकर यह ऋण देते हैं, तो प्रत्येक बैंक ऋण का एक हिस्सा वहन करेगा। इससे किसी एक बैंक पर पूरा जोखिम नहीं रहता।
कथन-II गलत है। सिंडिकेटेड ऋण केवल एकमुश्त या निश्चित अवधि वाले ऋण तक सीमित नहीं होता। यह रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा (Revolving Credit Facility) के रूप में भी उपलब्ध हो सकता है। इसमें उधारकर्ता स्वीकृत सीमा के भीतर आवश्यकता के अनुसार धन निकाल सकता है, उसे चुका सकता है और निर्धारित शर्तों के अनुसार पुनः धन का उपयोग कर सकता है।
अतः कथन-I सही है, जबकि कथन-II गलत है।
कथन-I सही है। सिंडिकेटेड ऋण में किसी बड़े ऋण को एक ही बैंक द्वारा देने के बजाय कई बैंक या वित्तीय संस्थाएँ मिलकर उपलब्ध कराती हैं। इस प्रकार उधारकर्ता के डिफॉल्ट से उत्पन्न संभावित जोखिम कई ऋणदाताओं में उनके हिस्से के अनुसार वितरित हो जाता है। उदाहरण: यदि किसी कंपनी को 10,000 करोड़ रुपये का ऋण चाहिए और पाँच बैंक मिलकर यह ऋण देते हैं, तो प्रत्येक बैंक ऋण का एक हिस्सा वहन करेगा। इससे किसी एक बैंक पर पूरा जोखिम नहीं रहता।
कथन-II गलत है। सिंडिकेटेड ऋण केवल एकमुश्त या निश्चित अवधि वाले ऋण तक सीमित नहीं होता। यह रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा (Revolving Credit Facility) के रूप में भी उपलब्ध हो सकता है। इसमें उधारकर्ता स्वीकृत सीमा के भीतर आवश्यकता के अनुसार धन निकाल सकता है, उसे चुका सकता है और निर्धारित शर्तों के अनुसार पुनः धन का उपयोग कर सकता है।
अतः कथन-I सही है, जबकि कथन-II गलत है।
3. डिजिटल रुपये के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उसकी मौद्रिक नीति के अनुरूप जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है।
2. यह आरबीआई की बैलेंस शीट में एक देनदारी के रूप में दिखाई देता है।
3. इसकी संरचना ही इसे मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखती है।
4. इसे वाणिज्यिक बैंक की मुद्रा और नकदी के बदले स्वतंत्र रूप से बदला जा सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
1. यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उसकी मौद्रिक नीति के अनुरूप जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है।
2. यह आरबीआई की बैलेंस शीट में एक देनदारी के रूप में दिखाई देता है।
3. इसकी संरचना ही इसे मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखती है।
4. इसे वाणिज्यिक बैंक की मुद्रा और नकदी के बदले स्वतंत्र रूप से बदला जा सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 4
(d) 1, 2 और 4
उत्तर Show करें
उत्तर: (d) 1, 2 और 4
व्याख्या:
कथन 1 सही है। डिजिटल रुपया या ई-रुपया (e₹) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) है। यह भारतीय रुपये का डिजिटल रूप है और संप्रभु मुद्रा के रूप में कार्य करता है।
कथन 2 सही है। चूँकि डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए यह आरबीआई की बैलेंस शीट में देनदारी (Liability) के रूप में दर्ज होता है। यही विशेषता इसे निजी क्रिप्टोकरेंसी से अलग करती है।
कथन 3 गलत है। डिजिटल रुपया अपने डिजिटल स्वरूप के कारण मुद्रास्फीति से स्वतः सुरक्षित नहीं होता। इसकी क्रय शक्ति मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, मांग-आपूर्ति तथा व्यापक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है।
कथन 4 सही है। डिजिटल रुपये को भारतीय रुपये के अन्य रूपों के साथ विनिमय किया जा सकता है। इसका मूल्य भारतीय रुपये के बराबर होता है और यह नकदी तथा बैंक जमा के साथ परिवर्तनीय है।
अतः सही कथन 1, 2 और 4 हैं।
कथन 1 सही है। डिजिटल रुपया या ई-रुपया (e₹) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) है। यह भारतीय रुपये का डिजिटल रूप है और संप्रभु मुद्रा के रूप में कार्य करता है।
कथन 2 सही है। चूँकि डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए यह आरबीआई की बैलेंस शीट में देनदारी (Liability) के रूप में दर्ज होता है। यही विशेषता इसे निजी क्रिप्टोकरेंसी से अलग करती है।
कथन 3 गलत है। डिजिटल रुपया अपने डिजिटल स्वरूप के कारण मुद्रास्फीति से स्वतः सुरक्षित नहीं होता। इसकी क्रय शक्ति मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, मांग-आपूर्ति तथा व्यापक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है।
कथन 4 सही है। डिजिटल रुपये को भारतीय रुपये के अन्य रूपों के साथ विनिमय किया जा सकता है। इसका मूल्य भारतीय रुपये के बराबर होता है और यह नकदी तथा बैंक जमा के साथ परिवर्तनीय है।
अतः सही कथन 1, 2 और 4 हैं।
4. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद का सदस्य है।
2. चावल और गेहूं का निर्यात या आयात करने के लिए किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद का सदस्य होना आवश्यक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. भारत अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद का सदस्य है।
2. चावल और गेहूं का निर्यात या आयात करने के लिए किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद का सदस्य होना आवश्यक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर Show करें
उत्तर: (a) केवल 1
व्याख्या:
कथन 1 सही है। भारत अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद (International Grains Council—IGC) का सदस्य है। IGC वैश्विक अनाज बाजार से संबंधित सहयोग, बाजार सूचना और अंतर्राष्ट्रीय अनाज व्यापार से जुड़े विषयों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच है।
कथन 2 गलत है। किसी देश को चावल या गेहूं का आयात अथवा निर्यात करने के लिए IGC का सदस्य होना अनिवार्य नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय अनाज व्यापार मुख्यतः संबंधित देश के राष्ट्रीय व्यापार कानूनों, आयात-निर्यात नियमों, सीमा शुल्क व्यवस्था तथा लागू अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुसार होता है।
इसलिए IGC की सदस्यता अनाज व्यापार के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है।
अतः केवल कथन 1 सही है।
कथन 1 सही है। भारत अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद (International Grains Council—IGC) का सदस्य है। IGC वैश्विक अनाज बाजार से संबंधित सहयोग, बाजार सूचना और अंतर्राष्ट्रीय अनाज व्यापार से जुड़े विषयों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच है।
कथन 2 गलत है। किसी देश को चावल या गेहूं का आयात अथवा निर्यात करने के लिए IGC का सदस्य होना अनिवार्य नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय अनाज व्यापार मुख्यतः संबंधित देश के राष्ट्रीय व्यापार कानूनों, आयात-निर्यात नियमों, सीमा शुल्क व्यवस्था तथा लागू अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुसार होता है।
इसलिए IGC की सदस्यता अनाज व्यापार के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है।
अतः केवल कथन 1 सही है।
5. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-I: भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से सेब आयात नहीं करता है।
कथन-II: भारत में, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों के आयात पर कानून द्वारा प्रतिबंध है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
कथन-I: भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से सेब आयात नहीं करता है।
कथन-II: भारत में, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों के आयात पर कानून द्वारा प्रतिबंध है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।
(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
(d) कथन-I गलत है, जबकि कथन-II सही है।
उत्तर Show करें
उत्तर: (d) कथन-I गलत है, जबकि कथन-II सही है।
व्याख्या:
कथन-I गलत है। भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से सेब का आयात करता है। इसलिए यह कहना कि भारत अमेरिका से सेब का आयात नहीं करता, सही नहीं है। भारत में सेब का प्रमुख घरेलू उत्पादन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में होता है, लेकिन घरेलू उत्पादन के अतिरिक्त भारत विभिन्न देशों से सेब का आयात भी करता है।
कथन-II सही है। भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) जीवों और उनसे संबंधित उत्पादों के लिए नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। GM खाद्य पदार्थों के आयात के संबंध में निर्धारित सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। भारत में GM जीवों और उनसे संबंधित गतिविधियों का नियमन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए नियमों और संबंधित नियामकीय तंत्र के माध्यम से किया जाता है।
अतः कथन-I गलत है और कथन-II सही है।
कथन-I गलत है। भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से सेब का आयात करता है। इसलिए यह कहना कि भारत अमेरिका से सेब का आयात नहीं करता, सही नहीं है। भारत में सेब का प्रमुख घरेलू उत्पादन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में होता है, लेकिन घरेलू उत्पादन के अतिरिक्त भारत विभिन्न देशों से सेब का आयात भी करता है।
कथन-II सही है। भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) जीवों और उनसे संबंधित उत्पादों के लिए नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। GM खाद्य पदार्थों के आयात के संबंध में निर्धारित सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। भारत में GM जीवों और उनसे संबंधित गतिविधियों का नियमन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए नियमों और संबंधित नियामकीय तंत्र के माध्यम से किया जाता है।
अतः कथन-I गलत है और कथन-II सही है।
