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UPSC 2023 — Polity PYQ
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प्रश्न 1
संक्षेप में, ‘कानून की उचित प्रक्रिया का क्या अर्थ है?
व्याख्या:
‘कानून की उचित प्रक्रिया से आशय ऐसी प्रक्रिया से है जो निष्पक्ष, न्यायसंगत, उचित और गैर-मनमानी हो। इस में व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर, निष्पक्ष सुनवाई तथा निष्पक्ष निर्णय जैसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत शामिल होते हैं। भारतीय संदर्भ मेंसर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने वाली प्रक्रिया केवल कानून में निर्धारित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत भी होनी चाहिए।
‘कानून की उचित प्रक्रिया से आशय ऐसी प्रक्रिया से है जो निष्पक्ष, न्यायसंगत, उचित और गैर-मनमानी हो। इस में व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर, निष्पक्ष सुनवाई तथा निष्पक्ष निर्णय जैसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत शामिल होते हैं। भारतीय संदर्भ मेंसर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने वाली प्रक्रिया केवल कानून में निर्धारित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत भी होनी चाहिए।
प्रश्न 2
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-I: भारत में, जेलों का प्रबंधन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है, जिनके पास जेलों के दैनिक प्रशासन के लिए अपने नियम और विनियम होते हैं।
कथन-II: भारत में, कारागारों का संचालन कारागार अधिनियम, 1894 द्वारा किया जाता है, जिसमें स्पष्ट रूप सेकारागारों के विषय को प्रांतीय सरकारों के नियंत्रण में रखा गया है।
कथन-I: भारत में, जेलों का प्रबंधन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है, जिनके पास जेलों के दैनिक प्रशासन के लिए अपने नियम और विनियम होते हैं।
कथन-II: भारत में, कारागारों का संचालन कारागार अधिनियम, 1894 द्वारा किया जाता है, जिसमें स्पष्ट रूप सेकारागारों के विषय को प्रांतीय सरकारों के नियंत्रण में रखा गया है।
व्याख्या:
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 4 के अंतर्गत कारागार ए वं उनसे संबंधित संस्थाएँराज्य का विषय हैं। इसलिए जेलों का प्रशासन और दैनिक प्रबंधन मुख्यतः राज्य सरकारों के अधीन होता हैतथा प्रत्येक राज्य अपनेजेल नियम एवं प्रशासनिक विनियम बना सकता है। कारागार अधिनियम, 1894 एक औपनिवेशिक कानून है, जो कारागारों के प्रशासन सेसंबंधित प्रावधान करता है; लेकिन यह कहना सही नहीं है कि इसी अधिनियम नेसंवैधानिक रूप सेकारागारों को प्रांतीय सरकारों के नियंत्रण में रखा था। अतः कथन-I सही, जबकि कथन-II गलत है।
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 4 के अंतर्गत कारागार ए वं उनसे संबंधित संस्थाएँराज्य का विषय हैं। इसलिए जेलों का प्रशासन और दैनिक प्रबंधन मुख्यतः राज्य सरकारों के अधीन होता हैतथा प्रत्येक राज्य अपनेजेल नियम एवं प्रशासनिक विनियम बना सकता है। कारागार अधिनियम, 1894 एक औपनिवेशिक कानून है, जो कारागारों के प्रशासन सेसंबंधित प्रावधान करता है; लेकिन यह कहना सही नहीं है कि इसी अधिनियम नेसंवैधानिक रूप सेकारागारों को प्रांतीय सरकारों के नियंत्रण में रखा था। अतः कथन-I सही, जबकि कथन-II गलत है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में सेकौन-सा कथन किसी देश के संविधान के मुख्य उद्देश्य को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
व्याख्या:
संविधान का मूल उद्देश्य राज्य की शासन-व्यवस्था को निर्धारित करना तथा सरकार की शक्तियों और सीमाओं को स्पष्ट करना है। संविधान यह तय करता है कि सरकार की विभिन्न संस्थाओं के पास कौन-सी शक्तियाँ होंगी और उनका प्रयोग किन संवैधानिक सीमाओं के भीतर किया जाएगा। इस प्रकार संविधान सरकार की शक्ति को नियंत्रित करके नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करता है तथा शासन में मनमानी को रोकता है।
संविधान का मूल उद्देश्य राज्य की शासन-व्यवस्था को निर्धारित करना तथा सरकार की शक्तियों और सीमाओं को स्पष्ट करना है। संविधान यह तय करता है कि सरकार की विभिन्न संस्थाओं के पास कौन-सी शक्तियाँ होंगी और उनका प्रयोग किन संवैधानिक सीमाओं के भीतर किया जाएगा। इस प्रकार संविधान सरकार की शक्ति को नियंत्रित करके नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करता है तथा शासन में मनमानी को रोकता है।
प्रश्न 4
भारत में निम्नलिखित में सेकौन-सा संवैधानिक संशोधन व्यापक रूप से मौलिक अधिकारों की न्यायिक
व्याख्याओं को दूर करने के लिए अधिनियमित किया गया था, ऐसा माना जाता है?
व्याख्या:
संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 प्रारंभिक न्यायिक निर्णयों तथा विशेष रूप से मौलिक अधिकारों की न्यायिक व्याख्याओं से उत्पन्न कुछ विधायी कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य सेलाया गया था। इस के माध्यम सेअनुच्छेद 15 और 19 में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए तथा अनुच्छेद 31A, 31B और नौवीं अनुसूची जोड़ी गई। विशेष रूप से भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक चुनौती से संरक्षण देनेके लिए नौवीं अनुसूची का प्रयोग किया गया। इसलिए इसे मौलिक अधिकारों की न्यायिक व्याख्याओं के प्रभाव को सीमित करनेवालेप्रारंभिक संवैधानिक संशोधनों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 प्रारंभिक न्यायिक निर्णयों तथा विशेष रूप से मौलिक अधिकारों की न्यायिक व्याख्याओं से उत्पन्न कुछ विधायी कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य सेलाया गया था। इस के माध्यम सेअनुच्छेद 15 और 19 में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए तथा अनुच्छेद 31A, 31B और नौवीं अनुसूची जोड़ी गई। विशेष रूप से भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक चुनौती से संरक्षण देनेके लिए नौवीं अनुसूची का प्रयोग किया गया। इसलिए इसे मौलिक अधिकारों की न्यायिक व्याख्याओं के प्रभाव को सीमित करनेवालेप्रारंभिक संवैधानिक संशोधनों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 5
भारत में निम्नलिखित संगठनों/संस्थाओं पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
3. राष्ट्रीय विधि आयोग
4. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
उपरोक्त में से कितनेसंवैधानिक निकाय हैं?
1. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
3. राष्ट्रीय विधि आयोग
4. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
उपरोक्त में से कितनेसंवैधानिक निकाय हैं?
व्याख्या:
दिए गए चार निकायों में केवल राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) संवैधानिक निकाय है। इसे102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 338B जोड़कर संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग क्रमशः संबंधित वैधानिक अधिनियमों के तहत स्थापित निकाय हैं, जबकि राष्ट्रीय विधि आयोग सरकार द्वारा गठित गैर-संवैधानिक एवं गैर-वैधानिक सलाहकारी निकाय है। अतः चारों में केवल NCBC संवैधानिक निकाय है।
दिए गए चार निकायों में केवल राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) संवैधानिक निकाय है। इसे102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 338B जोड़कर संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग क्रमशः संबंधित वैधानिक अधिनियमों के तहत स्थापित निकाय हैं, जबकि राष्ट्रीय विधि आयोग सरकार द्वारा गठित गैर-संवैधानिक एवं गैर-वैधानिक सलाहकारी निकाय है। अतः चारों में केवल NCBC संवैधानिक निकाय है।
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