HISTORY MCQ

प्रश्न 1. निम्नलिखित संस्थाओं को उनके स्थापना वर्ष के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची-I (संस्था) — सूची-II (स्थापना वर्ष)

सूची-Iसंस्थासूची-IIस्थापना वर्ष
A.एशियाटिक सोसाइटी (बंगाल)1.1823 ई.
B.एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बॉम्बे2.1784 ई.
C.रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन (लंदन)3.1804 ई.

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:

  • (a) A-1, B-2, C-3
  • (b) A-2, B-1, C-3
  • (c) A-3, B-1, C-2
  • (d) A-2, B-3, C-1

उत्तर: (d)

व्याख्या:

A. एशियाटिक सोसाइटी (बंगाल): इसकी स्थापना 15 जनवरी, 1784 को सर विलियम जोन्स द्वारा कलकत्ता में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य प्राच्य (Oriental) अध्ययन, भारतीय इतिहास, नागरिक शास्त्र और दक्षिण एशिया की कला व संस्कृति की खोज करना था। वारेन हेस्टिंग्स इसके संरक्षक थे। इस संस्था ने भारतीय ग्रंथों के अंग्रेजी अनुवाद और वैज्ञानिक शोध में क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी।

B. एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बॉम्बे: इसकी स्थापना 1804 ई. में सर जेम्स मैकिंतोश द्वारा की गई थी। यह संस्था मुंबई में साहित्यिक और वैज्ञानिक अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी। वर्तमान में यह संस्था अपनी विशाल लाइब्रेरी और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए प्रसिद्ध है।

C. रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन (लंदन): इसकी स्थापना 1823 ई. में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान हेनरी थॉमस कोलब्रुक द्वारा की गई थी। इसे 1824 में राजा जॉर्ज चतुर्थ द्वारा शाही चार्टर प्रदान किया गया था। इसका उद्देश्य एशियाई इतिहास, भाषाओं और संस्कृतियों का अकादमिक अध्ययन करना था।


प्रश्न 2. वर्ष 1929 में जारी किये गये ‘दीपावली घोषणा-पत्र’ का संबंध किससे था?

  • (a) साम्प्रदायिक समस्या के समाधान से
  • (b) डोमिनियन स्टेटस प्रदान करने से
  • (c) श्रमिक नेताओं की मांगों को मानने से
  • (d) अस्पृश्यता निवारण के कार्यक्रमों से

उत्तर: (b)

व्याख्या:

31 अक्टूबर 1929 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया, जिसे ‘दीपावली घोषणा-पत्र’ के नाम से जाना जाता है। इस घोषणा का प्राथमिक उद्देश्य साइमन कमीशन के बहिष्कार के बाद उपजे भारतीय असंतोष को शांत करना और संवैधानिक गतिरोध को दूर करना था।

लॉर्ड इरविन ने इसमें स्पष्ट रूप से घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार की नीतियों का स्वाभाविक लक्ष्य भारत को भविष्य में ‘डोमिनियन स्टेटस’ प्रदान करना है। इसका अर्थ यह था कि भारत ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहते हुए भी ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की तर्ज पर आंतरिक मामलों में पूर्ण स्व-शासन प्राप्त कर लेगा।

इसके साथ ही उन्होंने लंदन में एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा ताकि भारत के भविष्य के संविधान पर चर्चा की जा सके।


प्रश्न 3. क्रांतिकारी संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के ‘येलो पेपर’ संविधान में भारत के लिए ‘डोमिनियन स्टेटस’ को अंतिम संवैधानिक लक्ष्य घोषित किया गया था।

2. “द रिवोल्यूशनरी” घोषणा-पत्र में गांधीवादी अहिंसा के साथ समन्वय का प्रस्ताव दिया गया था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (d)

व्याख्या:

कथन 1 गलत है। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के संविधान ‘येलो पेपर’ का लक्ष्य ‘डोमिनियन स्टेटस’ नहीं, बल्कि ‘संयुक्त राज्य भारत के संघीय गणराज्य’ की स्थापना करना था। क्रांतिकारी पूर्ण स्वतंत्रता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के पक्षधर थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे किसी भी प्रकार की ब्रिटिश दासता या आधा-अधूरा शासन स्वीकार नहीं करेंगे।

कथन 2 गलत है। 1925 में जारी “द रिवोल्यूशनरी” घोषणा-पत्र में गांधीजी की अहिंसक नीतियों के साथ समन्वय का कोई प्रस्ताव नहीं था, बल्कि उनकी तीखी आलोचना की गई थी। इस दस्तावेज़ में युवाओं से ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति में शामिल होने का आग्रह किया गया था और अहिंसा को स्वतंत्रता प्राप्ति में बाधक बताया गया था।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण जानकारी:

काकोरी ट्रेन एक्शन
  • तिथि: 9 अगस्त, 1925
  • स्थान: काकोरी गाँव, लखनऊ के पास, उत्तर प्रदेश।
  • ट्रेन: 8-डाउन ट्रेन, शाहजहाँपुर से लखनऊ।
  • उद्देश्य: क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए ब्रिटिश सरकारी खजाने को जब्त करना।
  • संस्था: हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के 10 क्रांतिकारियों द्वारा अंजाम दिया गया।
  • परिणाम (फांसी): राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकुल्लाह खान, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को मृत्युदंड दिया गया।
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)
  • स्थापना: इसकी स्थापना 1924 में कानपुर में राम प्रसाद बिस्मिल, सचिंद्र नाथ सान्याल और जोगेश चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी।
  • संवैधानिक लक्ष्य: ‘येलो पेपर’ के नाम से प्रसिद्ध इनके संविधान का मुख्य लक्ष्य सार्वभौमिक मताधिकार पर आधारित ‘संयुक्त राज्य भारत का संघीय गणराज्य’ बनाना था।
  • घोषणा-पत्र: 1925 में इन्होंने “द रिवोल्यूशनरी” घोषणा-पत्र जारी किया, जिसमें गांधीवादी अहिंसा की आलोचना करते हुए सशस्त्र क्रांति का समर्थन किया गया था।
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)
  • रूपांतरण: 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में HRA का नाम बदलकर HSRA कर दिया गया।
  • वैचारिक परिवर्तन: चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह के नेतृत्व में इस संगठन ने ‘समाजवाद’ को अपना मुख्य आधार बनाया। इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि शोषण से मुक्त समाजवादी समाज की स्थापना था।
  • अंत तक संघर्ष: चंद्रशेखर आज़ाद ने संगठन को जीवित रखा और फरवरी 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपनी शहादत तक ब्रिटिश सत्ता से लोहा लेते रहे।

प्रश्न 4. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।

कथन (A): आजीविक दर्शन के अनुसार, मनुष्य अपने सत्कर्मों और कठोर तपस्या के माध्यम से अपनी ‘नियति’ (भाग्य) को बदल सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

कारण (R): आजीविक संप्रदाय के प्रवर्तक मक्खलि गोसाल का मानना था कि संसार की प्रत्येक घटना पूर्णतः पूर्वनिर्धारित है और मानवीय ‘स्वतंत्र इच्छा’ का कोई अस्तित्व नहीं है।

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:

  • (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  • (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  • (c) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  • (d) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (d)

व्याख्या:

कथन (A) गलत है। आजीविक दर्शन ‘कठोर तपस्या’ या ‘सत्कर्मों’ के माध्यम से भाग्य बदलने की अवधारणा को सिरे से खारिज करता है। इस दर्शन का मुख्य स्तंभ ‘पूर्णनियतिवाद’ (Fatalism) है, जो यह मानता है कि संसार में कुछ भी मनुष्य के नियंत्रण में नहीं है।

मक्खलि गोसाल के अनुसार, जिस प्रकार एक धागे का गोला फेंकने पर वह अपनी पूरी लंबाई तक खुले बिना नहीं रुकता, उसी प्रकार प्रत्येक जीव का सुख, दुख और जीवन-चक्र पहले से ही निश्चित है। अतः मानवीय प्रयासों, तप या नैतिक आचरण द्वारा मोक्ष प्राप्त करने या नियति को प्रभावित करने का कोई मार्ग इस दर्शन में संभव नहीं है।

कारण (R) सही है। आजीविक संप्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोसाल का मानना था कि ब्रह्मांड का संचालन एक अपरिवर्तनीय नियम ‘नियति’ द्वारा होता है। उन्होंने जैन और बौद्ध धर्म के ‘कर्मसिद्धांत’ को एक भ्रांति माना, क्योंकि कर्मसिद्धांत यह मानता है कि व्यक्ति अपने कार्यों से भविष्य बदल सकता है, जबकि आजीविकों के अनुसार ‘स्वतंत्र इच्छा’ मात्र एक दिखावा है। उनके अनुसार, सभी प्राणी और घटनाएं एक पूर्वनिर्धारित क्रम का हिस्सा हैं।


प्रश्न 5. प्राचीन भारत के विद्वानों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. प्रसिद्ध व्याकरणविद् पाणिनि, जिन्होंने ‘महाभाष्य’ पर प्रसिद्ध टीका लिखी थी, पुष्यमित्र शुंग के राजपुरोहित थे।

2. महान चिकित्सक चरक, जिन्हें ‘आयुर्वेद के जनक’ के रूप में जाना जाता है, कुषाण शासक कनिष्क के राजवैद्य थे।

3. महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार के प्रमुख विद्वानों में से एक थे।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  • (a) केवल एक
  • (b) केवल दो
  • (c) सभी तीन
  • (d) कोई भी नहीं

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन 1 गलत है। ‘महाभाष्य’ की रचना पाणिनि ने नहीं, बल्कि पतंजलि ने की थी। पतंजलि ही पुष्यमित्र शुंग के समकालीन और उनके राजपुरोहित थे, जिन्होंने पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ पर यह प्रसिद्ध टीका लिखी थी। पाणिनि स्वयं पुष्यमित्र शुंग से सदियों पहले, लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुए थे। अतः व्याकरण की इस परंपरा में पाणिनि मूल ग्रंथकार थे, जबकि पतंजलि उनके टीकाकार और शुंग काल के गौरव थे।

कथन 2 सही है। चरक प्राचीन भारत के सबसे प्रतिष्ठित आयुर्वेद विशेषज्ञ थे और उन्हें ‘भारतीय चिकित्सा पद्धति का जनक’ माना जाता है। वे कुषाण वंश के प्रतापी शासक कनिष्क प्रथम के राजवैद्य थे। उनकी कालजयी कृति ‘चरक संहिता’ आज भी आयुर्वेद का आधारभूत स्तंभ है।

कथन 3 गलत है। आर्यभट्ट का चंद्रगुप्त मौर्य से कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। आर्यभट्ट 5वीं शताब्दी ईस्वी गुप्त काल के महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने ‘आर्यभटीय’ की रचना की और शून्य व दशमलव प्रणाली को परिभाषित किया। दूसरी ओर, चंद्रगुप्त मौर्य के काल के सबसे प्रमुख विद्वान चाणक्य (कौटिल्य) थे।


प्रश्न 6. श्रीनारायण गुरु और उनके सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. उन्होंने ‘आत्म सम्मान आंदोलन’ के माध्यम से निचली जातियों के लिए मंदिर प्रवेश और पूजा के अधिकार की चुनौती दी तथा स्वयं एक शिवलिंग स्थापित किया।

2. श्री नारायण गुरु ने “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का प्रसिद्ध नारा दिया।

3. उन्होंने ‘श्री नारायण धर्म परिपालन (SNDP) योगम’ संगठन की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केरल में ब्राह्मणवादी वर्चस्व का समर्थन करना और पारंपरिक मूल्यों को बचाना था।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  • (a) केवल एक
  • (b) केवल दो
  • (c) सभी तीन
  • (d) कोई भी नहीं

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन 1 गलत है। ‘आत्म सम्मान आंदोलन’ तमिलनाडु में ई.वी. रामास्वामी ‘पेरियार’ द्वारा चलाया गया था, न कि श्री नारायण गुरु द्वारा। श्री नारायण गुरु का ऐतिहासिक हस्तक्षेप ‘अरुविप्पुरम आंदोलन’ (1888) के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन के तहत उन्होंने नेय्यार नदी से एक पत्थर निकाला और उसे शिवलिंग के रूप में स्थापित कर यह सिद्ध किया कि ईश्वर की भक्ति और प्रतिष्ठा पर किसी विशिष्ट जाति का एकाधिकार नहीं है। यह घटना केरल के सामाजिक इतिहास में ‘मूर्तिकला की क्रांति’ मानी जाती है।

कथन 2 सही है। श्री नारायण गुरु ने अद्वैत दर्शन को एक सामाजिक हथियार बनाया और अपना कालजयी संदेश “ओरु जाथि, ओरु मथम, ओरु दैवम मनुष्यानु” दिया। उनका तर्क था कि चूंकि सभी मनुष्यों का रक्त और शारीरिक संरचना एक समान है, इसलिए उनकी जाति या धर्म अलग नहीं हो सकते। उन्होंने धर्म को कट्टरता से मुक्त कर इसे ‘मानवता के कल्याण’ के रूप में परिभाषित किया। उनके इस नारे ने तत्कालीन केरल के जाति-विभाजित समाज को एकजुट करने और अस्पृश्यता की जड़ों को हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कथन 3 गलत है। SNDP योगम का उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व का समर्थन करना नहीं, बल्कि उसे चुनौती देना था। 1903 में स्थापित इस संगठन ने एझवा जैसे उत्पीड़ित समुदायों को यह सिखाया कि वे अपनी हीनता की भावना को त्यागें। इसका मुख्य ध्येय “शिक्षा के माध्यम से स्वतंत्रता” प्राप्त करना था। गुरु का मानना था कि जब तक निचले वर्ग शिक्षित और संगठित नहीं होंगे, वे ब्राह्मणवादी पदानुक्रम और पारंपरिक रूढ़ियों के शोषण से मुक्त नहीं हो पाएंगे। अतः यह आंदोलन वर्चस्व को बचाने के लिए नहीं, बल्कि समानता स्थापित करने के लिए था।


प्रश्न 7. मध्यकालीन भारत के विदेशी संपर्कों और आक्रमणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. बलबन के शासनकाल में, चंगेज खान के उत्तराधिकारी हलाकू खान ने दिल्ली के साथ एक कूटनीतिक समझौता किया था, जिससे मंगोल आक्रमणों का खतरा कुछ समय के लिए टल गया था।

2. फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल के दौरान, मोरक्को का यात्री इब्न बतूता भारत आया था और उसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया गया था।

3. विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय के शासनकाल के दौरान, पुर्तगाली गवर्नर अल्बुर्क ने गोवा पर विजय प्राप्त की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। बलबन ने मंगोलों के खतरे को भांपते हुए न केवल अपनी उत्तर-पश्चिमी सीमा को मजबूत किया, बल्कि चंगेज खान के पोते हलाकू खान के पास अपने दूत भेजे थे। हलाकू ने दिल्ली के दूतों का स्वागत किया और बलबन के साथ एक अलिखित समझौता किया कि मंगोल सेनाएं दिल्ली सल्तनत की सीमाओं का सम्मान करेंगी। इस कूटनीति की वजह से बलबन के शासन के शुरुआती वर्षों में दिल्ली एक बड़े मंगोल विनाश से सुरक्षित रही।

कथन 2 गलत है। इब्न बतूता 1333 ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) के शासनकाल में भारत आया था, न कि फिरोज शाह तुगलक के समय। मुहम्मद बिन तुगलक उसकी विद्वत्ता से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया और बाद में अपना राजदूत बनाकर चीन भेजा था।

कथन 3 सही है। अल्फोंसो डी अल्बुर्क ने 1510 ईस्वी में बीजापुर के सुल्तान से गोवा जीता था। उस समय विजयनगर साम्राज्य पर महान शासक कृष्णदेव राय (1509-1529) का शासन था। कृष्णदेव राय के पुर्तगालियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध थे क्योंकि वे पुर्तगालियों से घोड़ों की आपूर्ति प्राप्त करना चाहते थे।


प्रश्न 8. पूर्व-मध्यकालीन भारत के राजवंशों और उनके राजाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

क्रमराजाराजवंश
1.दन्तिदुर्गराष्ट्रकूट
2.वाक्पति मुंजचंदेल
3.विष्णुवर्धनहोयसल
4.मयूरशर्मनकदम्ब

उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

  • (a) केवल एक युग्म
  • (b) केवल दो युग्म
  • (c) केवल तीन युग्म
  • (d) सभी चारों युग्म

उत्तर: (c)

व्याख्या:

युग्म 1 सही सुमेलित है। दन्तिदुर्ग राष्ट्रकूट राजवंश के वास्तविक संस्थापक थे। उन्होंने 753 ईस्वी में बादामी के चालुक्यों के अंतिम शासक कीर्तिवर्मन द्वितीय को हराकर अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की थी। उन्होंने ‘महाराजाधिराज’ और ‘परमेश्वर’ जैसी उपाधियाँ धारण कीं और प्रसिद्ध एलोरा में ‘हिरण्यगर्भ’ यज्ञ का अनुष्ठान भी करवाया था।

युग्म 2 सुमेलित नहीं है। वाक्पति मुंज परमार राजवंश (मालवा) के एक शक्तिशाली शासक थे। वे न केवल एक महान विजेता थे बल्कि कला और साहित्य के संरक्षक भी थे। चंदेल राजवंश की स्थापना ‘नान्नुक’ ने की थी। मुंज को उनके दरबारी विद्वानों जैसे पद्मगुप्त और धनंजय के संरक्षण के लिए जाना जाता है।

युग्म 3 सही सुमेलित है। विष्णुवर्धन होयसल वंश के सबसे महान शासकों में से एक थे। उन्होंने चोलों को हराकर ‘तलकाडु’ पर अधिकार किया और अपनी विजय के उपलक्ष्य में बेलूर में प्रसिद्ध ‘चिन्नकेशव मंदिर’ का निर्माण करवाया। उन्होंने होयसल साम्राज्य को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित किया था।

युग्म 4 सही सुमेलित है। मयूरशर्मन कर्नाटक के प्रथम कन्नड़ राजवंश ‘कदम्ब’ के संस्थापक थे। वे मूल रूप से एक ब्राह्मण थे जो बाद में क्षत्रिय बने। उन्होंने पल्लवों के विरुद्ध संघर्ष किया और ‘बनवासी’ को अपनी राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। उनके शासन को कन्नड़ गौरव के प्रारंभिक काल के रूप में देखा जाता है।


प्रश्न 9. निम्नलिखित में से किस समिति ने 1928 में अधिकारों के विधेयक (Bill of Rights) की मांग की थी?

  • (a) जवाहरलाल नेहरू समिति
  • (b) सरदार वल्लभ भाई पटेल समिति
  • (c) मोतीलाल नेहरू समिति
  • (d) महात्मा गांधी समिति

उत्तर: (c)

व्याख्या:

1928 में मोतीलाल नेहरू समिति ने ‘नेहरू रिपोर्ट’ के माध्यम से पहली बार ‘अधिकारों के विधेयक’ (Bill of Rights) की औपचारिक मांग की थी। यह रिपोर्ट ब्रिटिश सचिव लॉर्ड बर्केनहेड की उस चुनौती का जवाब थी, जिसमें उन्होंने भारतीयों को एक सर्वसम्मत संविधान बनाने के लिए ललकारा था।

इस ऐतिहासिक दस्तावेज ने वर्तमान भारतीय संविधान के ‘मौलिक अधिकारों’ (भाग III) की आधारशिला रखी, जिसमें वयस्क मताधिकार, भाषण की स्वतंत्रता और धार्मिक तटस्थता जैसे आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों को शामिल किया गया था।

समिति के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू थे और सचिव जवाहरलाल नेहरू थे, जिन्होंने ‘डोमिनियन स्टेटस’ और केंद्र-राज्य शक्तियों के स्पष्ट विभाजन की वकालत की थी।


प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

शब्दअर्थ
1. उरभूमि का प्रकार
2. नाडुकिसानों की बस्ती
3. मुवेन्दवेलनकिसान

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 3
  • (d) केवल 2 और 3

उत्तर: (d)

व्याख्या:

युग्म 1 सुमेलित नहीं है। चोल काल में ‘उर’ साधारण ग्राम सभा या किसानों की बस्तियों का परिषद था। यहाँ मुख्य रूप से गैर-ब्राह्मण किसान रहते थे। यह परिषद स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन, मंदिरों की देखभाल और न्याय जैसे कार्यों के लिए जिम्मेदार थी। इसे ‘भूमि का प्रकार’ कहना तकनीकी रूप से गलत है।

युग्म 2 सही सुमेलित है। नाडु प्रशासनिक इकाई की एक महत्वपूर्ण कड़ी थी। धनी ‘वेल्लाल’ जाति के किसान केंद्रीय सरकार की देखरेख में नाडु के कामकाज पर नियंत्रण रखते थे। यह कई बस्तियों (Settlements) का एक प्रशासनिक समूह था जो स्थानीय स्वशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता था।

युग्म 3 सही सुमेलित है। यह शब्द ‘मुवेन्द’ (तीन राजा – चोल, चेर, पांड्य) और ‘वेलन’ (किसान) से मिलकर बना है। यह उपाधि उन प्रभावशाली और धनी भूस्वामियों को दी जाती थी जो राज्य के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करते थे। उन्हें अक्सर राज्य के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद सौंपे जाते थे।

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