Environment Practice Question

1.निम्नलिखित में से कौन-सी संयुक्त राष्ट्र एजेंसी 21 सतत विकास लक्ष्य (SDG) संकेतकों के लिए ‘कस्टोडियन’ (संरक्षक) के रूप में कार्य करती है?

(a) विश्व बैंक                   

(b) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग

(c) विश्व स्वास्थ्य संगठन  

(d) खाद्य और कृषि संगठन

उत्तर: (d)

व्याख्या:

संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन (FAO) कुल 21 सतत विकास लक्ष्य संकेतकों के लिए कस्टोडियन एजेंसी है। यह मुख्य रूप से SDG 2 (शून्य भूख), SDG 5 (लैंगिक समानता), SDG 6 (स्वच्छ जल), SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग), SDG 14 (जलीय जीवन) और SDG 15 (भूमि पर जीवन) से संबंधित डेटा की निगरानी करता है। एक कस्टोडियन के रूप में, FAO अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डेटा एकत्र करता है, पद्धतियाँ विकसित करता है और देशों को उनकी सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने में मदद करता है ताकि वैश्विक प्रगति का सटीक आकलन किया जा सके।

अन्य विकल्पों की व्याख्या

(a) विश्व बैंक : यह मुख्य रूप से गरीबी (SDG 1) और असमानता (SDG 10) से जुड़े कुछ आर्थिक संकेतकों की निगरानी करता है, लेकिन इसके पास FAO जितने अधिक संकेतकों का प्रभार नहीं है।

(c) UN सांख्यिकी प्रभाग : यह समग्र SDG डेटाबेस का समन्वय करता है, लेकिन विशिष्ट विषयगत (जैसे कृषि या स्वास्थ्य) संकेतकों के लिए विशेषज्ञ कस्टोडियन एजेंसियां अलग होती हैं।

(c) विश्व स्वास्थ्य संगठन : विश्व स्वास्थ्य संगठन विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों (SDG 3) जैसे मातृ स्वास्थ्य, बाल मृत्यु दर और संक्रामक रोगों के डेटा का प्रबंधन और निगरानी करता है।

2. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

सूची-I (संधि/कन्वेंशन)सूची-II (विषय)
A. वियना कन्वेंशन (1985)1. प्रवासी पक्षी और वन्यजीव
B. बॉन कन्वेंशन (1979)2. ओजोन परत का संरक्षण
C. साइट्स/CITES (1973)3. खतरनाक रसायनों के व्यापार में पूर्व सूचित सहमति
D. रोटर्डम कन्वेंशन (1998)4. लुप्तप्राय प्रजातियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) A-1, B-2, C-3, D-4

(b) A-4, B-3, C-2, D-1

(c) A-1, B-4, C-3, D-2

(d) A-2, B-1, C-4, D-3

उत्तर: (d)

व्याख्या :

A. वियना कन्वेंशन (1985): यह ओजोन परत के संरक्षण के लिए दुनिया की पहली बड़ी संधि थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संधि खुद हानिकारक पदार्थों को प्रतिबंधित नहीं करती थी, बल्कि इसने भविष्य में आने वाले ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ (1987) के लिए एक कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार किया था। यह “ओजोन क्षरण” की समस्या को वैश्विक स्तर पर स्वीकार करने वाला पहला कदम था।

B. बॉन कन्वेंशन (1979): इसे औपचारिक रूप से ‘प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन’ (CMS) के रूप में जाना जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में एकमात्र ऐसी संधि है जो उन जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों के संरक्षण पर केंद्रित है जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं। भारत इसका सदस्य है और यहाँ होने वाला ‘COP-13’ (गांधीनगर, 2020) इसी संधि से संबंधित था।

C. CITES (1973): इसका पूरा नाम ‘वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ है। इसे वाशिंगटन कन्वेंशन भी कहते हैं। यह संधि यह सुनिश्चित करती है कि जंगली जानवरों और पौधों के नमूनों का व्यापार उनके अस्तित्व के लिए खतरा न बने। इसमें प्रजातियों को तीन अलग-अलग श्रेणियों (Appendix I, II और III) में बांटकर उन पर प्रतिबंध या नियंत्रण लगाया जाता है।

D. रोटर्डम कन्वेंशन (1998): यह संधि खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण ‘पूर्व सूचित सहमति’ (Prior Informed Consent – PIC) प्रक्रिया है। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई देश किसी दूसरे देश को कोई खतरनाक रसायन या कीटनाशक निर्यात कर रहा है, तो प्राप्तकर्ता देश को पहले उसकी जानकारी और सहमति देनी होगी, ताकि वे अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा कर सकें।

3 . निम्नलिखित पर्यावरण आंदोलनों और उनके उद्गम स्थलों के युग्मों पर विचार कीजिए:

पर्यावरण आंदोलनउद्गम स्थल
1. बालियापाल आंदोलनमध्य प्रदेश
2. अप्पिको आंदोलनकर्नाटक
3. चिपको आंदोलनउत्तराखंड

उपरोक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

व्याख्या:

युग्म 1 सुमेलित नहीं है। बालियापाल आंदोलन  का संबंध ओडिशा के बालासोर जिले से है, न कि मध्य प्रदेश से। यह आंदोलन 1980 के दशक के मध्य में सरकार द्वारा उपजाऊ कृषि भूमि पर ‘नेशनल टेस्ट रेंज’ (मिसाइल परीक्षण केंद्र) स्थापित करने के निर्णय के विरुद्ध किसानों और मछुआरों द्वारा शुरू किया गया था।

युग्म 2 सही सुमेलित है। अप्पिको आंदोलन की शुरुआत सितंबर 1983 में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के ‘सलकानी’ वन क्षेत्र में हुई थी। यह उत्तर भारत के चिपको आंदोलन से प्रेरित था और इसका उद्देश्य पश्चिमी घाट के वनों का संरक्षण करना था। कन्नड़ भाषा में ‘अप्पिको’ का अर्थ ‘गले लगाना’ होता है।

युग्म 3  सही सुमेलित है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन की शुरुआत 1973 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले (जो वर्तमान में उत्तराखंड में है) के रेणी गाँव में हुई थी। सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट इसके प्रमुख प्रणेता थे।

4. समाचारों में अक्सर चर्चा में रहने वाले ‘रियो+20’ (Rio+20) सम्मेलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह 2012 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित ‘धारणीय विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’  का लघु नाम है।
  2. इस सम्मेलन का मुख्य परिणाम ‘द फ्यूचर वी वांट’  नामक एक राजनीतिक घोषणापत्र था।
  3. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को औपचारिक रूप से इसी सम्मेलन में 2030 तक के लिए अपना लिया गया था।
  4. यह सम्मेलन ‘पृथ्वी शिखर सम्मेलन’ की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही कथन का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) 1, 2 और 3

(c) 2, 3 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। ‘रियो+20’ का आयोजन 1992 के ऐतिहासिक रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन के 20 साल बाद, वर्ष 2012 में किया गया था। इसका आधिकारिक नाम ‘संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन’ (UNCSD) है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक पर्यावरण नीतियों और सतत विकास की प्रतिबद्धताओं को पुनर्जीवित करना था।.

कथन 2 सही है। रियो+20 सम्मेलन के अंत में सदस्य देशों ने द फ्यूचर वी वांट’ नामक एक गैर-बाध्यकारी दस्तावेज को अपनाया। यह दस्तावेज ‘हरित अर्थव्यवस्था’ और गरीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित था और इसने भविष्य की वैश्विक नीतियों का आधार तैयार किया।.

कथन 3 गलत है। यहाँ ध्यान देना आवश्यक है कि रियो+20 (2012) में SDGs को बनाने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से अपनाया नहीं गया था। सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को औपचारिक रूप से सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में ‘एजेंडा 2030’ के तहत अपनाया गया था।.

कथन 4 गलत है।  ‘रियो+20’ नाम ही इसकी व्याख्या करता है—यह 1992 के सम्मेलन की 20वीं वर्षगांठ (1992+20=2012) के अवसर पर हुआ था। 10वीं वर्षगांठ वाला सम्मेलन (रियो+10) वर्ष 2002 में जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया था, जिसे ‘विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन’ (WSSD) कहा जाता है।

5.प्राथमिक पारिस्थितिक अनुक्रमण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.लाइकेन और मॉस को ‘अग्रणी प्रजाति’ माना जाता है क्योंकि ये बिना विकसित मृदा के नग्न चट्टानों पर उग सकते हैं।

2. फर्न और छत्रक (मशरूम) प्राथमिक अनुक्रमण के शुरुआती चरण में ही विकसित हो जाते हैं क्योंकि उन्हें मृदा की आवश्यकता नहीं होती।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। प्राथमिक अनुक्रमण उस स्थान पर होता है जहाँ पहले कभी कोई जीवन नहीं था (जैसे नग्न चट्टान)। लाइकेन और मॉस ‘अग्रणी प्रजाति’ कहलाते हैं क्योंकि उन्हें विकास के लिए केवल एक स्थिर सतह, समय और स्वच्छ वायु की आवश्यकता होती है। लाइकेन (शैवाल और कवक का सहजीवी रूप) चट्टानों पर उगकर उन्हें अपक्षयित  करते हैं, जिससे मिट्टी बनने की प्रक्रिया शुरू होती है।

कथन 2 गलत है।  क्योंकि फर्न एक संवहनी पादप है जिसे विकसित होने के लिए नमीयुक्त और उच्च जैविक पदार्थों वाली मृदा की आवश्यकता होती है। इसी तरह, छत्रक (मशरूम) भी मृतोपजीवी कवक है जिसे उगने के लिए मृदा के उप-संस्तर या जैविक भोजन स्रोत की जरूरत होती है। चूंकि प्राथमिक अनुक्रमण के शुरुआती चरण में मृदा का अभाव होता है, इसलिए ये पौधे वहां तुरंत नहीं उग सकते; ये मिट्टी बनने के बाद के चरणों में दिखाई देते हैं।

6.भारत में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. NGT एक सांविधिक निकाय है और इसका गठन 2010 में किया गया था।
  2. NGT को आवेदनों या अपीलों के दाखिल होने के 6 महीने के भीतर उनका अंतिम निपटान करने का प्रयास करना अनिवार्य है।
  3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 से संबंधित सभी मामलों पर निर्णय देने का अधिकार क्षेत्र NGT के पास सुरक्षित है।
  4. NGT के पास अपनी स्वयं की सर्किट प्रक्रिया का पालन करने और स्वयं को अधिक सुलभ बनाने की शक्ति है।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही कथन का चयन कीजिए:

(a) 1, 2, 3 और 4

(b) केवल 1 और 3

(c) 1, 2 और 4

(d) केवल 2 और 4

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को ‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010’ के तहत की गई थी। चूंकि इसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा हुई है, इसलिए यह एक सांविधिक निकाय है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के मामलों का प्रभावी और त्वरित निपटान करना है।

कथन 2 सही है। NGT की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्यक्षमता और गति है। अधिनियम में यह स्पष्ट प्रावधान है कि अधिकरण को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके पास आने वाले किसी भी आवेदन या अपील का निपटान वह उसे दाखिल करने के 6 महीने के भीतर कर दे।

कथन 3 गलत है। NGT सात प्रमुख पर्यावरणीय कानूनों (जैसे जल, वायु, पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता अधिनियम आदि) के तहत नागरिक मामलों की सुनवाई करता है। लेकिन, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 को जानबूझकर इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।

कथन 4 सही है। NGT की मुख्य पीठ नई दिल्ली में है और चार क्षेत्रीय पीठें (भोपाल, पुणे, कोलकाता, चेन्नई) हैं। इसके बावजूद, यह अधिक सुलभ होने के लिए ‘सर्किट प्रक्रिया’  का भी पालन करता है, जिसका अर्थ है कि अधिकरण के सदस्य अन्य शहरों में जाकर भी सुनवाई कर सकते हैं ताकि न्याय आम जनता के करीब पहुँच सके।

7. भारत में पाए जाने वाले स्तनधारी ‘ड्यूगोंग’ के सन्दर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

(a) यह एक पूर्णतः शाकाहारी समुद्री स्तनधारी जीव है।
(b) यह भारत के पश्चिमी तट पर प्रमुखता से पाया जाता है।
(c) इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I में शामिल किया गया है।
(d) पाक खाड़ी में इसके पहले संरक्षण रिज़र्व की स्थापना की गई है।

उत्तर: (b) यह भारत के पश्चिमी तट पर प्रमुखता से पाया जाता है।

व्याख्या:

  • कथन (a) सही है: ड्यूगोंग एक स्तनधारी जीव है जो पूरी तरह से शाकाहारी है और मुख्य रूप से समुद्री घास (Seagrass) खाकर जीवित रहता है, इसलिए इसे ‘समुद्री गाय’ (Sea Cow) भी कहा जाता है।
  • कथन (b) गलत है: यह भारत के पश्चिमी तट पर प्रमुखता से नहीं पाया जाता है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी और प्रमुख आबादी भारत के पूर्वी तट पर मन्नार की खाड़ी, पाक की खाड़ी और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के समुद्री क्षेत्रों में पाई जाती है। गुजरात के कच्छ की खाड़ी (पश्चिमी तट) में भी यह पाया जाता है, लेकिन यह इसका प्रमुख संकेंद्रण क्षेत्र नहीं है।
  • कथन (c) सही है: इसकी लुप्तप्राय स्थिति को देखते हुए इसे भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • कथन (d) सही है: तमिलनाडु सरकार द्वारा पाक की खाड़ी (Palk Bay) के उत्तरी भाग में भारत के पहले ‘डुगोंग संरक्षण रिज़र्व’ की स्थापना की गई है, जिसे हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा भी वैश्विक मान्यता दी गई है।

8.जंतुओं के आहार संबंधी व्यवहार और उनके उदाहरणों के संदर्भ में, सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:

सूची-I (आहार का प्रकार) सूची-II (उदाहरण)

A. लार्वाभक्षी                     1. केंचुआ

B. अपरदहारी                   2. वॉल लिज़र्ड

C. कीटभक्षी                     3. वैम्पायर बैट

D. रुधीराहरी                    4. गंबूसिया

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) A-4, B-1, C-2, D-3

(b) A-1, B-4, C-3, D-2

(c) A-4, B-2, C-1, D-3

(d) A-3, B-1, C-2, D-4

उत्तर: (a)

व्याख्या:

A. लार्वाभक्षी (Larvivorous) : यह वे जीव हैं जो मुख्य रूप से अन्य जंतुओं (विशेषकर मच्छरों) के लार्वा को अपना आहार बनाते हैं। गंबूसिया, जिसे ‘मॉस्किटो फिश’ भी कहा जाता है, का उपयोग ठहरे हुए पानी में मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

B. अपरदहारी (Detritivore) : ये वे जीव हैं जो मिट्टी में मौजूद ह्यूमस और सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों को खाकर अपना पोषण प्राप्त करते हैं। केंचुआ मिट्टी के अंदर कार्बनिक तत्वों को पचाकर उसे उपजाऊ बनाता है, इसलिए इसे ‘प्रकृति का हलवाहा’ भी कहते हैं।

C. कीटभक्षी (Insectivorous) : जो जंतु मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़ों का शिकार करते हैं, उन्हें कीटभक्षी कहा जाता है। घरों में पाई जाने वाली वॉल लिज़र्ड (छिपकली) इसका सबसे सामान्य उदाहरण है। इसके अलावा मेंढक और कुछ पक्षी भी इसी श्रेणी में आते हैं।

D. रुधीराहरी (Sanguivorous) : ‘रुधीराहरी’ या सेंगुडवोरस उन जंतुों को कहा जाता है जो जीवित जंतुओं के रक्त को अपने आहार के रूप में ग्रहण करते हैं। वैम्पायर बैट  के अलावा जोंक और मादा मच्छर भी इसी श्रेणी का हिस्सा हैं।

9. मेघालय की गारो पहाड़ियों में स्थित कौन-सा नेशनल पार्क लाल पांडा के लिए प्रसिद्ध है?

(a) मुरलेन नेशनल पार्क

(b) बालफक्रम नेशनल पार्क

(c) इटांकी नेशनल पार्क

(d) नोकरेक नेशनल पार्क

उत्तर: (d)

व्याख्या

नोकरेक नेशनल पार्क, जो मेघालय की पश्चिम गारो हिल्स में स्थित है, यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त एक महत्वपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व है। यह पार्क विशेष रूप से लुप्तप्राय लाल पांडा के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, जो यहाँ की उच्च ऊँचाई वाली पहाड़ियों में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, नोकरेक को सिट्रस इंडिका (जंगली संतरा या मेमंग नारंग) की मातृभूमि माना जाता है, जो दुनिया भर में पाए जाने वाले सभी खट्टे फलों की जनक प्रजाति मानी जाती है।

अन्य विकल्पों की व्याख्या

(a) मुरलेन नेशनल पार्क : यह मिजोरम के चम्फाई जिले में स्थित है। यह पार्क अपनी घनी वनस्पतियों के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसे ‘अमेज़न ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। यहाँ हुलॉक गिब्बन और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, लेकिन यह लाल पांडा के लिए मुख्य स्थल नहीं है।

(b) बालफक्रम नेशनल पार्क : यह भी मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में स्थित है, लेकिन यह मुख्य रूप से एशियाई हाथियों, जल भैंसों और सुनहरी बिल्लियों के लिए प्रसिद्ध है। इसे गारो जनजाति के लोग ‘मृतकों की आत्माओं का निवास स्थान’ मानते हैं।

(c) इटांकी नेशनल पार्क : यह नागालैंड के पेरेन जिले में स्थित है। यह पार्क मुख्य रूप से ‘हुलॉक गिब्बन’ (भारत का एकमात्र वनमानुष) और हाथियों के संरक्षण के लिए जाना जाता है। यहाँ की जलवायु और पारिस्थितिकी नोकरेक से भिन्न है।

10.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन (A): एक पारिस्थितिक तंत्र में ‘ऊर्जा का पिरामिड’ हमेशा सीधा होता है और इसे कभी भी उल्टा नहीं किया जा सकता।

कारण (R): जब ऊर्जा एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर पर स्थानांतरित होती है, तो ‘10% नियम’ के अनुसार हर स्तर पर ऊर्जा की भारी हानि होती है।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

(a) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(b) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।

(c) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) सही नहीं है।

(d) कथन (A) सही नहीं है, किंतु कारण (R) सही है।

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन (A) सही है। पारिस्थितिकी में संख्या और जैव-भार के पिरामिड कुछ विशेष परिस्थितियों में उल्टे हो सकते हैं (जैसे एक बड़े पेड़ पर आश्रित कई छोटे कीट या समुद्र में अल्पजीवी फाइटोप्लांकटन और बड़ी मछलियाँ), लेकिन ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा ही रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि उत्पादक (पेड़-पौधे) सौर ऊर्जा का उपयोग करके सबसे अधिक ऊर्जा संचित करते हैं, और जैसे-जैसे हम ऊपरी पोषण स्तरों (शाकाहारी, मांसाहारी) की ओर बढ़ते हैं, उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है।

कारण (R) सही है। लिंडमैन के ’10 प्रतिशत नियम’ के अनुसार, प्रत्येक पोषण स्तर पर उपलब्ध कुल ऊर्जा का केवल 10% ही अगले स्तर को प्राप्त होता है। शेष 90% ऊर्जा श्वसन, पाचन और ऊष्मा  के रूप में वातावरण में नष्ट हो जाती है।

अंतर्संबंध : कारण (R) स्पष्ट रूप से वह वैज्ञानिक आधार बताता है कि क्यों ऊर्जा का पिरामिड कभी उल्टा नहीं हो सकता। चूंकि ऊष्मागतिकी के नियमों के अनुसार हर अगले स्तर पर ऊर्जा अनिवार्य रूप से कम ही होगी (कारण R), इसलिए पिरामिड का आधार हमेशा चौड़ा और शीर्ष हमेशा संकीर्ण (कथन A) रहेगा। अतः कारण (R), कथन (A) की एकदम सही व्याख्या करता है।

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