GEOGRAPHY MCQ

1. पृथ्वी की आंतरिक परतों की भौतिक और संरचनात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. क्रस्ट संपूर्ण पृथ्वी की सबसे बाहरी, ठोस तथा सबसे मोटी और भारी परत है।
  2. मेंटल का अधिकांश भाग ठोस अवस्था में है, जबकि इसका ऊपरी हिस्सा ‘एस्थेनोस्फीयर’ आंशिक रूप से पिघली अवस्था में पाया जाता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (b) केवल 2

व्याख्या :

कथन 1 गलत है: क्रस्ट (भूपर्पटी) पृथ्वी की सबसे बाहरी और ठोस परत तो है, लेकिन यह सबसे मोटी या भारी नहीं, बल्कि सबसे पतली और हल्की परत है। महासागरों के नीचे इसकी मोटाई मात्र 5 किमी (बेसाल्टिक) और महाद्वीपों के नीचे लगभग 30 से 70 किमी (ग्रेनाइटिक) होती है। पृथ्वी की कुल त्रिज्या (~6,371 किमी) की तुलना में यह एक छिलके जैसी नगण्य है और पृथ्वी के कुल आयतन का मात्र 1% और द्रव्यमान का केवल 0.5% हिस्सा बनाती है। इसके विपरीत, पृथ्वी की सबसे मोटी और विशाल परत मेंटल (Mantle) है, जो पृथ्वी के कुल आयतन का लगभग 84% और द्रव्यमान का 67% हिस्सा घेरती है।

कथन 2 सही है: अत्यधिक ऊंचे तापमान के बावजूद, चरम दबाव (Lithostatic Pressure) के कारण पूरा मेंटल ठोस (Solid Rocks) अवस्था में पाया जाता है। ऊपरी मेंटल में लगभग 100 से 400 किमी की गहराई के बीच के क्षेत्र को एस्थेनोस्फीयर (Asthenosphere या दुर्बलता मंडल) कहा जाता है। यहाँ रेडियोधर्मी पदार्थों की प्रचुरता के कारण चट्टानें अपने पिघलने के बिंदु (Melting Point) के करीब पहुँच जाती हैं, जिससे वे पूरी तरह तरल न होकर आंशिक रूप से पिघली या लचीली अर्ध-ठोस (Plastic/Semi-solid) अवस्था में आ जाती हैं। यही आंशिक रूप से पिघला हुआ क्षेत्र ज्वालामुखी विस्फोट के समय बाहर आने वाले मैग्मा का मुख्य स्रोत बनता है और इसी लचीली परत के ऊपर क्रस्टीय विवर्तनिक प्लेटें (Tectonic Plates) तैरती हैं। भूकंपीय S-तरंगें इस परत से आसानी से गुजर जाती हैं, जो इसके ठोस-समान या चिपचिपे व्यवहार को प्रमाणित करती हैं।


2. महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इस सिद्धांत का प्रतिपादन अल्फ्रेड वेगनर द्वारा 20वीं शताब्दी की शुरुआत में किया गया था।
  2. वेगनर के अनुसार, पेंजिया का विभाजन कार्बोनिफेरस काल में शुरू हुआ था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या:

कथन 1 सही है: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत का प्रतिपादन जर्मन मौसम विज्ञानी और भूभौतिकविद् अल्फ्रेड वेगनर द्वारा 1912 में किया गया था (जिसे 20वीं शताब्दी की शुरुआत माना जाता है)। उनका मुख्य उद्देश्य प्राचीन जलवायु परिवर्तनों और महाद्वीपों की स्थिति में बदलाव को समझाना था। वेगनर के अनुसार, पृथ्वी के सभी महाद्वीप प्रारंभ में जुड़े हुए एक विशाल महाद्वीप के रूप में थे जिसे ‘पेंजिया’ कहा गया, और इसके चारों ओर एक विशाल महासागर था जिसे ‘पैंथालसा’ कहा गया।

कथन 2 सही है: वेगनर के सिद्धांत के अनुसार, पेंजिया का विखंडन या टूटना कार्बोनिफेरस काल के दौरान शुरू हुआ था। इस प्रक्रिया में पेंजिया दो भागों में बंटा—उत्तरी भाग ‘लारेशिया’ या अंगारालैंड और दक्षिणी भाग ‘गोंडवानालैंड’ कहलाया, जिनके बीच ‘टेथिस सागर’ का विकास हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे ये महाद्वीप उत्तर और पश्चिम की ओर प्रवाहित होकर आज की स्थिति में पहुँचे।


3. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:

अभिकथन (A): महासागरीय पर्पटी का घनत्व महाद्वीपीय पर्पटी की तुलना में अधिक होता है।

कारण (R): महासागरीय पर्पटी मुख्य रूप से सिलिका और मैग्नीशियम से बनी होती है, जबकि महाद्वीपीय पर्पटी सिलिका और एल्युमीनियम से निर्मित होती है।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।

व्याख्या:

अभिकथन (A) सही है: महासागरीय क्रस्ट का औसत घनत्व लगभग 3.0 ग्राम/सेमी³ होता है, जबकि महाद्वीपीय क्रस्ट का औसत घनत्व लगभग 2.7 ग्राम/सेमी³ होता है। भारी खनिजों की उपस्थिति के कारण महासागरीय पर्पटी अधिक घनत्व वाली होती है।

कारण (R) सही है: महाद्वीपीय पर्पटी मुख्यतः हल्के सिलिकॉन और एल्युमीनियम (SIAL) से बनी होती है, जबकि महासागरीय पर्पटी भारी सिलिकॉन और मैग्नीशियम (SIMA) तथा फेरोमैग्नीशियम सिलिकेट्स से समृद्ध होती है। रासायनिक संरचना की यह भिन्नता ही महासागरीय पर्पटी के उच्च घनत्व का मुख्य कारण है। इस प्रकार, कारण (R) अभिकथन (A) की पूर्ण एवं सटीक व्याख्या करता है।


4. सूची-I (भूकंपीय तरंगें) को सूची-II (विशेषताएँ) से सुमेलित कीजिए:

सूची-I (भूकंपीय तरंगें)सूची-II (विशेषताएँ)
A. पी-तरंगें1. ये केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं।
B. एस-तरंगें2. ये ध्वनि तरंगों के समान अनुदैर्ध्य होती हैं।
C. धरातलीय तरंगें3. ये सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

कूट:

(a) A-2, B-3, C-1
(b) A-1, B-2, C-3
(c) A-3, B-1, C-2
(d) A-2, B-1, C-3

उत्तर: (d) A-2, B-1, C-3

व्याख्या

पी-तरंगें: प्राथमिक तरंगें ध्वनि तरंगों की भाँति अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और इनकी गति सबसे तीव्र होती है।

एस-तरंगें: द्वितीयक तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं और इनकी यह प्रमुख विशेषता है कि ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं, तरल या द्रव माध्यम में आते ही विलुप्त हो जाती हैं।

धरातलीय तरंगें: ये तरंगें भूकंप अधिकेंद्र से धरातल के सहारे चलती हैं। चूँकि ये दीर्घकालिक और मंद गति से चलती हैं, अतः भू-पटल पर सर्वाधिक व्यापक तबाही मचाती हैं और सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।


5. आग्नेय चट्टानों के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

(a) उनमें जीवाश्म बहुत कम होते हैं
(b) वे जल के लिए सरंध्र होती हैं
(c) वे क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय दोनों ही होती हैं
(d) इन चट्टानों में सिलिका नहीं होती है

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन (a) गलत है।: आग्नेय चट्टानों में जीवाश्म बिल्कुल नहीं पाए जाते हैं। चूंकि इनका निर्माण अत्यधिक गर्म मैग्मा या लावा से होता है, इसलिए किसी भी जैविक अवशेष का अस्तित्व में रहना असंभव है।

कथन (b) गलत है।: ये चट्टानें कठोर, सघन और अ-सरंध्र (Non-porous) होती हैं। इनमें अवसादी शैलों की तरह छिद्र नहीं होते, इसलिए इनके भीतर से जल आसानी से नहीं रिस सकता।

कथन (c) सत्य है।: आग्नेय चट्टानों की बनावट मैग्मा या लावा के ठंडा होने की गति पर निर्भर करती है। यदि मैग्मा पृथ्वी की गहराई में धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो बड़े क्रिस्टलीय दाने बनते हैं (जैसे- ग्रेनाइट)। वहीं, यदि लावा धरातल पर आकर तेजी से ठंडा होता है, तो वह अक्रिस्टलीय या सूक्ष्म कणों वाली संरचना लेता है। जैसे- बेसाल्ट या ओब्सीडियन।

कथन (d) गलत है।: आग्नेय चट्टानों का मुख्य रासायनिक घटक सिलिका (SiO2) ही होता है। अम्लीय आग्नेय चट्टानों (जैसे ग्रेनाइट) में सिलिका की मात्रा बहुत अधिक (65% से 85%) होती है।

अतः सही विकल्प (c) है।


6. विश्व की प्रमुख जलसंधियों (Straits), उनके द्वारा जोड़े जाने वाले जल निकायों और अवस्थिति वाले देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

जलसंधि का नामजोड़े जाने वाले जल निकाय
1. बाब-अल-मंडेबलाल सागर एवं अदन की खाड़ी
2. मलक्का जलसंधिअंडमान सागर एवं दक्षिण चीन सागर
3. बोस्पोरस जलसंधिकाला सागर एवं मरमारा सागर
4. जिब्राल्टर जलसंधिभूमध्य सागर एवं कैरिबियन सागर

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) केवल तीन युग्म
(d) सभी चारों युग्म

उत्तर: (c)

व्याख्या:

युग्म 1 सही सुमेलित है। बाब-अल-मंडेब जलसंधि एशिया के यमन और अफ्रीका के जिबूती देश के मध्य अवस्थित है। यह रणनीतिक जलमार्ग लाल सागर को हिंद महासागर के हिस्से, यानी अदन की खाड़ी से जोड़ता है।

युग्म 2 सही सुमेलित है। मलक्का जलसंधि इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और मलय प्रायद्वीप (मलेशिया) के बीच स्थित विश्व का सबसे व्यस्त जलमार्ग है। यह मुख्य रूप से हिंद महासागर के अंडमान सागर को प्रशांत महासागर के हिस्से, यानी दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है।

युग्म 3 सही सुमेलित है। बोस्पोरस जलसंधि पूरी तरह से तुर्की देश के भीतर अवस्थित विश्व की सबसे संकरी अंतरराष्ट्रीय जलसंधियों में से एक है। यह जलमार्ग उत्तर में स्थित काला सागर को दक्षिण में स्थित मरमारा सागर से जोड़ता है।

युग्म 4 गलत सुमेलित है। जिब्राल्टर जलसंधि यूरोप के स्पेन और अफ्रीका के मोरक्को देश के बीच अवस्थित है। परंतु यह भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है, कैरिबियन सागर से नहीं। कैरिबियन सागर यहाँ से हजारों किलोमीटर दूर अटलांटिक महासागर के पश्चिमी भाग में अमेरिका के निकट स्थित है।


7. निम्नलिखित में से कौन-सी पर्वतमाला अन्य तीनों से भिन्न प्रकार की विवर्तनिक प्रक्रिया से निर्मित है?

(a) हिमालय पर्वतमाला
(b) आल्प्स पर्वतमाला
(c) रॉकी पर्वतमाला
(d) ग्रेट डिवाइडिंग रेंज

उत्तर: (d) ग्रेट डिवाइडिंग रेंज

व्याख्या:

हिमालय, आल्प्स और रॉकी: ये तीनों नवीन वलित पर्वत (Young Fold Mountains) हैं जिनका निर्माण टर्शरी काल में प्लेटों के अभिसरण (संपीडन) के फलस्वरूप हुआ है।

ग्रेट डिवाइडिंग रेंज: यह ऑस्ट्रेलिया की एक प्राचीन वलित पर्वतमाला है जिसका निर्माण पालिओजोइक महाकल्प के दौरान हुआ था, और वर्तमान में यह दीर्घकालिक अपरदन के कारण एक अवशिष्ट पर्वत के रूप में है।


8. महासागरीय नितल पर पाए जाने वाले ‘पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ये नोड्यूल्स मुख्य रूप से मैंगनीज, निकेल, तांबा और कोबाल्ट के भंडार होते हैं।
  2. इनका उपयोग बैटरी निर्माण और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में किया जाता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (c)

व्याख्या:

कथन 1 सही है। पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स (जिन्हें मैंगनीज नोड्यूल्स भी कहा जाता है) महासागरों के गहरे नितल पर बिखरे हुए आलू के आकार के भू-वैज्ञानिक पिंड होते हैं। ये नोड्यूल्स मुख्य रूप से मैंगनीज, निकेल, ताँबा और कोबाल्ट जैसी अत्यधिक मूल्यवान धातुओं के समृद्ध भंडार होते हैं। इनका निर्माण लाखों वर्षों की अत्यंत धीमी रासायनिक प्रक्रिया के दौरान समुद्री जल से इन खनिजों के अवक्षेपण और जमाव के कारण होता है।

कथन 2 सही है। आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से ये नोड्यूल्स रणनीतिक महत्व रखते हैं। इनमें पाए जाने वाले निकेल, कोबाल्ट और मैंगनीज का उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए उच्च क्षमता वाली बैटरी के निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण प्रणालियों, और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि ‘इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी’ (ISA) के नियमों के तहत गहरे समुद्र में इनके खनन और अनुसंधान के लिए भारत (जैसे मध्य हिंद महासागर बेसिन में) सहित कई देशों को विशिष्ट अन्वेषण क्षेत्र आवंटित किए गए हैं।


9. निर्देश: नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं—एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। इन दोनों वक्तव्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

कथन (A): यूरोप की तटरेखा अत्यधिक कटी-फटी और अनियमित है, जिसके कारण यहाँ कई प्राकृतिक बंदरगाहों का विकास हुआ है।

कारण (R): यूरोप के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भागों में हिमनदों की क्रिया के कारण ‘फ्योर्ड’ तटों का निर्माण हुआ है, जिन्होंने तटरेखा को अधिक कटा-फटा बनाया है।

कूट:

(a) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(d) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।

उत्तर: (a)

व्याख्या:

कथन (A) सही है। यूरोप महाद्वीप का भौगोलिक मानचित्र देखने पर यह स्पष्ट होता है कि इसकी तटरेखा पूरे विश्व में सबसे अधिक कटी-फटी, घुमावदार और अनियमित (Indented Coastline) है। इस विशिष्ट आकृतियों के कारण समुद्री लहरों का वेग तटों तक आते-आते बहुत मंद हो जाता है। शांत जल क्षेत्र और गहरी प्राकृतिक संरचनाएँ उपलब्ध होने के कारण ही यूरोप के तटीय भागों में विश्व के सबसे बेहतरीन और सुरक्षित प्राकृतिक बंदरगाहों (Natural Harbors) व पोताश्रयों का विकास हुआ है, जिसने यहाँ के नौवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक बढ़ावा दिया है।

कारण (R) सही है और यह कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है। यूरोप की इस अत्यधिक कटी-फटी तटरेखा के निर्माण में भू-वैज्ञानिक शक्तियों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। विशेष रूप से नॉर्वे, स्वीडन और स्कॉटलैंड जैसे उत्तरी व उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय क्षेत्रों में हिमयुग के दौरान हिमनदों (Glaciers) के प्रचंड ऊर्ध्वाधर और पार्श्व अपरदन के कारण गहरी ‘U’ आकार की घाटियाँ बनी थीं। बाद में समुद्र का जलस्तर बढ़ने से ये हिमनद घाटियाँ पानी में डूब गईं, जिससे तीव्र ढाल वाले और अत्यधिक गहरे ‘फ्योर्ड’ (Fjord) तटों का निर्माण हुआ। इन फ्योर्ड तटों और अन्य समुद्री निमज्जन (Submergence) प्रक्रियाओं ने ही संयुक्त रूप से यूरोप की संपूर्ण तटरेखा को बहुत अधिक दंतुरित (कटा-फटा) बनाया है, जो कथन (A) में वर्णित प्राकृतिक बंदरगाहों के बनने का मुख्य वैज्ञानिक कारण है।


10. भूकंपीय गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. रिक्टर पैमाना वह उपकरण है जो भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करता है।
  2. सीस्मोग्राफ भूकंप के परिमाण को मापने वाला एक लघुगणकीय पैमाना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (d)

व्याख्या:

कथन 1 गलत है। रिक्टर पैमाना कोई भौतिक उपकरण नहीं है जो तरंगों को रिकॉर्ड करे। भूकंप के दौरान पृथ्वी के भीतर से निकलने वाली प्राथमिक (P), द्वितीयक (S) और धरातलीय (L) भूकंपीय तरंगों के कंपन को पकड़ने और उनका ग्राफिक रिकॉर्ड बनाने वाले भौतिक उपकरण को ‘सीस्मोग्राफ’ या भूकंपलेखी कहा जाता है। इसमें एक पेंडुलम या भारी भार होता है जो जमीन के हिलने पर कंपन को एक घूमते हुए ड्रम या डिजिटल स्क्रीन पर रेखांकित करता है।

कथन 2 गलत है। सीस्मोग्राफ कोई गणितीय पैमाना नहीं है। वास्तव में, भूकंप के दौरान विमुक्त होने वाली कुल ऊर्जा या परिमाण गणितीय रूप से मापने वाले पैमाने को ‘रिक्टर पैमाना’ कहा जाता है। यह एक शुद्ध लघुगणकीय पैमाना है, जिसका अर्थ यह है कि इस पैमाने पर प्रत्येक अगली संख्या (जैसे 5 से 6) भूकंपीय तरंगों के आयाम में 10 गुना वृद्धि और विमुक्त होने वाली वास्तविक ऊर्जा में लगभग 32 गुना की प्रचंड वृद्धि को प्रदर्शित करती है।

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